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230956 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ??????? ?????जयपुर? 2026-06-15 05:42:32
230953 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म ??????? ?????जयपुर? 2026-06-15 05:42:21
230954 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म ??????? ?????जयपुर? 2026-06-15 05:42:21
230952 50889696 श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी 2026-06-15 05:41:31
230951 50889696 श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी 2026-06-15 05:41:30
230950 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) Jai Jinendra ?? 2026-06-15 05:39:09
230949 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) Jai Jinendra ?? 2026-06-15 05:39:08
230947 47534159 Maharstra (kartick) *आत्मचिंतन - (नं. 2639)* ******************************* *श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (*249*) *श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* जैन दर्शन का सुंदर विश्लेषण वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ / आगम / शास्त्र है। हम इसे स्टेप बाय स्टेप समझ रहे हैं - *|| अध्याय तीसरा II* *चतुर्दशनदीसहस्त्रपरिवृता गंगासिन्ध्वादयो नद्य:॥* ( अध्याय 3 / सूत्र 24 ) *चतुर्दश नदीसहस्त्रपरिवृता गंगा सिंधू आदय: नद्य: ॥2/24॥* *मतलब -* ~~~~~~ बताई गई 14 नदियों, जैसे गंगा, सिंधु, वगैरह, के कई सहायक परिवारों के साथ बड़े बेसिन हैं। आचार्यश्री ने इस सूत्र में इनके बारे में बताया है.. *भाषा -* ~~~~~~~~ *=> चतुर्दश = चौदह,* *=> नदी = नदियाँ,* *=> सहस्र = हज़ार,* *=> परिवृता = परिवार* *मतलब -* ~~~~~~~ गंगा, सिंधु जैसी 14 नदियाँ 14000 सहायक नदियों के परिवार हैं। उसके बाद, एक के बाद एक आने वाली सभी नदियाँ दोगुनी संख्या में नदियों के परिवार बन जाती हैं, ऐसा आचार्यश्री कहते हैं.. *( क्रमसे ) ( ता. 15/06/2026 )* *--डॉ. अजीत जे. पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र* ??? (कु.9887/आ.3307) 2026-06-15 05:38:54
230948 47534159 Maharstra (kartick) *आत्मचिंतन - (नं. 2639)* ******************************* *श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (*249*) *श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* जैन दर्शन का सुंदर विश्लेषण वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ / आगम / शास्त्र है। हम इसे स्टेप बाय स्टेप समझ रहे हैं - *|| अध्याय तीसरा II* *चतुर्दशनदीसहस्त्रपरिवृता गंगासिन्ध्वादयो नद्य:॥* ( अध्याय 3 / सूत्र 24 ) *चतुर्दश नदीसहस्त्रपरिवृता गंगा सिंधू आदय: नद्य: ॥2/24॥* *मतलब -* ~~~~~~ बताई गई 14 नदियों, जैसे गंगा, सिंधु, वगैरह, के कई सहायक परिवारों के साथ बड़े बेसिन हैं। आचार्यश्री ने इस सूत्र में इनके बारे में बताया है.. *भाषा -* ~~~~~~~~ *=> चतुर्दश = चौदह,* *=> नदी = नदियाँ,* *=> सहस्र = हज़ार,* *=> परिवृता = परिवार* *मतलब -* ~~~~~~~ गंगा, सिंधु जैसी 14 नदियाँ 14000 सहायक नदियों के परिवार हैं। उसके बाद, एक के बाद एक आने वाली सभी नदियाँ दोगुनी संख्या में नदियों के परिवार बन जाती हैं, ऐसा आचार्यश्री कहते हैं.. *( क्रमसे ) ( ता. 15/06/2026 )* *--डॉ. अजीत जे. पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र* ??? (कु.9887/आ.3307) 2026-06-15 05:38:54
230946 40449705 ☸️ अच्छीबातेअमृतवाणी ग्रुप *लोग कहते ज़रूर है की खुश रहो …* *पर मजाल है कि कोई रहने दे।* सुप्रभात 2026-06-15 05:35:27