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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 73015 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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कृपया यह है डॉक्यूमेंट्री जरूर देखें ? |
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2026-04-09 20:16:12 |
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| 73016 |
40449734 |
3 अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर |
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<a href="https://youtube.com/shorts/N4LDBuC_B1Y?si=I3UTbGguZru6CE3r" target="_blank">https://youtube.com/shorts/N4LDBuC_B1Y?si=I3UTbGguZru6CE3r</a>
*धर्म और अधर्म क्या है* |
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2026-04-09 20:16:12 |
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| 73017 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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कृपया यह है डॉक्यूमेंट्री जरूर देखें ? |
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2026-04-09 20:16:12 |
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| 73018 |
40449734 |
3 अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर |
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<a href="https://youtube.com/shorts/N4LDBuC_B1Y?si=I3UTbGguZru6CE3r" target="_blank">https://youtube.com/shorts/N4LDBuC_B1Y?si=I3UTbGguZru6CE3r</a>
*धर्म और अधर्म क्या है* |
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2026-04-09 20:16:12 |
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| 73011 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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वंदामी माताजी ????? |
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2026-04-09 20:13:25 |
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| 73012 |
48283815 |
Jain pramukh pathshala 1 |
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प्रश्न का सही जवाब है:
*4000* |
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2026-04-09 20:13:25 |
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| 73013 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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वंदामी माताजी ????? |
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2026-04-09 20:13:25 |
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| 73014 |
48283815 |
Jain pramukh pathshala 1 |
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प्रश्न का सही जवाब है:
*4000* |
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2026-04-09 20:13:25 |
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| 73009 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*सत्य का साहस: संवेदनशीलता और आत्मविश्वास की असली पहचान*
संवेदनशील और आत्मविश्वास से परिपूर्ण इंसान में ही सत्य को उजागर करने की क्षमता होती है, परिणाम का भय उसका मार्ग नहीं रोक सकता। यह पंक्ति केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन का गहरा दर्शन है। आज के समय में जहां अधिकांश लोग सत्य को जानते हुए भी उसे कहने से डरते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर परिस्थिति में सच्चाई का साथ देने का साहस रखते हैं। ऐसे लोग ही वास्तव में समाज के पथप्रदर्शक बनते हैं।
संवेदनशीलता का अर्थ केवल भावुक होना नहीं है, बल्कि सही और गलत के प्रति सजग रहना है। जब व्यक्ति दूसरों के दर्द को समझता है, समाज की विसंगतियों को महसूस करता है, तब उसके भीतर सत्य को उजागर करने की आग उत्पन्न होती है। लेकिन केवल संवेदनशीलता पर्याप्त नहीं होती, इसके साथ आत्मविश्वास का होना भी अनिवार्य है। आत्मविश्वास ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग बनाए रखती है।
सत्य का मार्ग कभी आसान नहीं होता। इस मार्ग पर चलने वाले को आलोचनाएं, विरोध, और कई बार अपमान तक सहना पड़ता है। लोग उसे गलत साबित करने की कोशिश करते हैं, उसे डराने का प्रयास करते हैं, लेकिन जो व्यक्ति भीतर से मजबूत होता है, वह इन सब बाधाओं को पार कर जाता है। परिणाम का भय उसे रोक नहीं पाता, क्योंकि उसे विश्वास होता है कि अंततः सत्य की ही विजय होगी।
आज समाज में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो केवल दिखावे और आडंबर में उलझा हुआ है। वहां सत्य बोलना अपराध जैसा प्रतीत होता है। ऐसे वातावरण में यदि कोई व्यक्ति सत्य की बात करता है, तो उसे अलग-थलग करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने सत्य का साथ नहीं छोड़ा, वही अंत में सम्मानित हुए हैं।
सत्य को उजागर करना केवल व्यक्तिगत साहस नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि हम गलत को गलत कहने का साहस नहीं जुटा पाएंगे, तो अन्याय और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए हर व्यक्ति को अपने भीतर की संवेदनशीलता को जागृत करना होगा और आत्मविश्वास को मजबूत बनाना होगा।
सच्चा इंसान वही है जो परिस्थितियों के दबाव में आकर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। वह जानता है कि सत्य का मार्ग कठिन है, लेकिन यही मार्ग उसे आत्मसंतोष और वास्तविक सम्मान दिलाता है। परिणाम चाहे जो भी हो, सत्य का साथ देने वाला व्यक्ति कभी हारता नहीं है, क्योंकि उसकी जीत उसके आत्मबल में छिपी होती है।
नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-09 20:12:53 |
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| 73010 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*सत्य का साहस: संवेदनशीलता और आत्मविश्वास की असली पहचान*
संवेदनशील और आत्मविश्वास से परिपूर्ण इंसान में ही सत्य को उजागर करने की क्षमता होती है, परिणाम का भय उसका मार्ग नहीं रोक सकता। यह पंक्ति केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन का गहरा दर्शन है। आज के समय में जहां अधिकांश लोग सत्य को जानते हुए भी उसे कहने से डरते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर परिस्थिति में सच्चाई का साथ देने का साहस रखते हैं। ऐसे लोग ही वास्तव में समाज के पथप्रदर्शक बनते हैं।
संवेदनशीलता का अर्थ केवल भावुक होना नहीं है, बल्कि सही और गलत के प्रति सजग रहना है। जब व्यक्ति दूसरों के दर्द को समझता है, समाज की विसंगतियों को महसूस करता है, तब उसके भीतर सत्य को उजागर करने की आग उत्पन्न होती है। लेकिन केवल संवेदनशीलता पर्याप्त नहीं होती, इसके साथ आत्मविश्वास का होना भी अनिवार्य है। आत्मविश्वास ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग बनाए रखती है।
सत्य का मार्ग कभी आसान नहीं होता। इस मार्ग पर चलने वाले को आलोचनाएं, विरोध, और कई बार अपमान तक सहना पड़ता है। लोग उसे गलत साबित करने की कोशिश करते हैं, उसे डराने का प्रयास करते हैं, लेकिन जो व्यक्ति भीतर से मजबूत होता है, वह इन सब बाधाओं को पार कर जाता है। परिणाम का भय उसे रोक नहीं पाता, क्योंकि उसे विश्वास होता है कि अंततः सत्य की ही विजय होगी।
आज समाज में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो केवल दिखावे और आडंबर में उलझा हुआ है। वहां सत्य बोलना अपराध जैसा प्रतीत होता है। ऐसे वातावरण में यदि कोई व्यक्ति सत्य की बात करता है, तो उसे अलग-थलग करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने सत्य का साथ नहीं छोड़ा, वही अंत में सम्मानित हुए हैं।
सत्य को उजागर करना केवल व्यक्तिगत साहस नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि हम गलत को गलत कहने का साहस नहीं जुटा पाएंगे, तो अन्याय और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए हर व्यक्ति को अपने भीतर की संवेदनशीलता को जागृत करना होगा और आत्मविश्वास को मजबूत बनाना होगा।
सच्चा इंसान वही है जो परिस्थितियों के दबाव में आकर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। वह जानता है कि सत्य का मार्ग कठिन है, लेकिन यही मार्ग उसे आत्मसंतोष और वास्तविक सम्मान दिलाता है। परिणाम चाहे जो भी हो, सत्य का साथ देने वाला व्यक्ति कभी हारता नहीं है, क्योंकि उसकी जीत उसके आत्मबल में छिपी होती है।
नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-09 20:12:53 |
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