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2716 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा ??पार्श्व प्रभु तव दर्शन से✨ पार्श्व प्रभो तव दर्शन से, मम मिथ्यादृष्टि पलाई। मेरा पार्श्व प्रभो अन्तर में, देता मुझे दिखाई ।।टेक।। तेरे जीवन की समता, आदर्श रहे नित मेरी। तेरे सम निज में दृढ़ता ही, मेंटे भव-भव फेरी।। संकट त्राता आनन्द दाता, ज्ञायकदृष्टि सु पाई ।।1।। बैर-क्षोभ वश होय कमठ, उपसर्ग किया भयकारी। नहिं अन्तर तक पहुँच सका, प्रभु अन्तर गुप्ति धारी।। ज्ञेयमात्र ही रहा कमठ, किंचित् न शत्रुता आई ।2।। आ उपसर्ग धरणेन्द्र निवारा, पद्मा मंगल गाये। धन्य-धन्य समवृत्तिधारी, किंचित् नहिं हरषाये।। वीतराग प्रभु घातिकर्म तज, केवल-लक्ष्मी पाई ।।3।। आत्मसाधना देख कमठ भी, प्रभु चरणों में नत था। आत्मबोध पाकर वह भी तो, निज में हुआ विनत था।। दूर हुए दुर्भाव विकारी, सम्यक्-निधि उपजाई ।।4।। निज में ही एकत्व सत्य, शिव सुन्दर संकटहारी। दिव्यतत्त्व दर्शाती प्रभुवर, मुद्रा दिव्य तुम्हारी।। दर्पण से मुख त्यों तुमसे, निज निधि मैंने लख पाई ।।5।। ज्ञानमात्र निज आत्मभाव, में शक्ति अनन्त उछलती। रागादिक मल बाहर भागें, शान्ति किलोलें करती।। शान्ति सिंधु में मगन होय मैं, नमन करूँ सुखदाई ।।6।। • श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी 'आत्मन्' 2026-02-14 05:06:52
2715 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? ??? 2026-02-14 05:06:49
2714 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर ??namostu namostu namostu Bhagavan namostu namostu girudevji vadami mataji .Jai jinendraji .???? 2026-02-14 05:04:52
2713 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर ???? NAMOSTU NAMOSTU NAMOSTU GURUDEVAJI ?????? 2026-02-14 04:56:58
2712 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) Jai Jinendra ?? 2026-02-14 04:55:08
2711 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-02-14 04:54:50
2710 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर ? *श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का मोक्षकल्याणक*? धर्मस्नेही बन्धुओं, *फाल्गुन कृष्ण द्वादशी* *20 वें तीर्थंकर श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के मोक्षकल्याणक की तिथि है । दूसरी शताब्दि के महान *आचार्य श्री समन्तभद्र जी* द्वारा विरचित *स्वयम्भू स्तोत्र* में 24 तीर्थंकरों की स्तुति की गयी है । उसी में से यह *श्री मुनिसुवरतजिनस्तुतिः* यहाँ उद्धृत की गयी है । शुद्ध उच्चारण हेतु पूज्य मुनिश्री के मधुर स्वर में स्तुति की Audio आप तक प्रेषित की जा रही है, इसीप्रकार स्वाध्याय हेतु स्तुति का अन्वयार्थ और भावार्थ भी प्रेषित किया जा रहा है । आप सभी श्री *मुनिसुव्रतनाथ जिनेन्द्र* के मोक्षकल्याणक के सुअवसर पर यह स्तुति 9 बार या 27 बार अथवा 108 बार बोलकर भगवान के मोक्षकल्याणक की आराधना अवश्य करें । ? *॥ अथ मुनिसुव्रतजिनस्तुतिः॥* ? *अधिगतमुनिसुव्रतस्थितिर्-* *मुनिवृषभो मुनिसुव्रतोsनघः ।* *मुनिपरिषदि निर्बभौ भवा-* *नुडुपरिषत्-परिवीतसोमवत् ॥१॥* *परिणतशिखिकण्ठरागया,* *कृतमदनिग्रहविग्रहाभया ।* *तव जिन तपसः प्रसूतया,* *ग्रहपरिवेषरुचेव शोभितम् ॥२॥* *शशिरुचिशुचिशुक्ललोहितं,* *सुरभितरं विरजो निजं वपुः ।* *तव शिवमतिविस्मयं यते !,* *यदपि च वाङ्-मनसीयमीहितम् ॥३॥* *स्थितिजनननिरोधलक्षणं,* *चरमचरं च जगत्-प्रतिक्षणं ।* *इति जिन ! सकलज्ञलांछनं,* *वचनमिदं वदतां वरस्य ते ॥४॥* *दुरितमलकलंकमष्टकं,* *निरूपमयोगबलेन निर्दहन् ।* *अभवदभवसौख्यवान् भवान् ,* *भवतु ममापि भवोपशान्तये ॥५॥* 2026-02-14 04:50:20
2709 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर 2026-02-14 04:50:17
2708 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर 2026-02-14 04:50:16
2707 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म जय जिनेन्द्र सुप्रभात 2026-02-14 04:49:33