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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 68394 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आत्मचिंतन - ( क्र.2577)*
****************************
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*207*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* हा जैन तत्त्वज्ञानाचे सुंदर विश्लेषण करणारा एक अत्यंत महत्वाचा ग्रंथ / आगम / शास्त्र आहे. याचे विवेचन क्रमशः समजावून घेतो आहोत -
*॥ व्दितीय अध्याय ॥*
*तैजसमपि ॥*
(अध्याय 2 / सूत्र 48 )
*तैजसम् अपि ॥ 2/48॥*
*विवेचन -*
~~~~~~~~
(1)
*तैजस शरीरही लब्धिप्रत्यय आहे. हे तैजस शरीर वैक्रियिक शरीराप्रमाणे तपश्चरणाने ( लब्धीने ) प्राप्त होते..*
*..अशा या तैजस शरीराचे दोन मुख्य भेद आणि त्या भेदा पैकी एका भेदाचे दोन उपभेद पुढील प्रमाणे दिसून येतात. त्यांच्याविषयी आता क्रमशः माहिती घेऊया..*
*1) अनिःसरणात्मक तैजस शरीर -*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
औदारिक, वैक्रियिक, आहारक या शरीरामध्ये जे एक प्रकारचे तेज किंवा कांती असते, ती ज्यामुळे असते, त्याला *अनिःसरणात्मक तैजस शरीर* असे म्हणतात.
आपण जो आहार घेतो, त्याचे पाचन झाल्यानंतर शरीराला आतून जे एक प्रकारचे तेज येत असते, ते म्हणजेच अनिःसरणात्मक तैजस शरीर होय !
*( क्रमशः ) ( दि.06/04/2026 )*
*--डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
(ए.9606/आ.3236) |
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2026-04-06 08:23:14 |
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| 68393 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आत्मचिंतन - ( क्र.2577)*
****************************
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*207*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* हा जैन तत्त्वज्ञानाचे सुंदर विश्लेषण करणारा एक अत्यंत महत्वाचा ग्रंथ / आगम / शास्त्र आहे. याचे विवेचन क्रमशः समजावून घेतो आहोत -
*॥ व्दितीय अध्याय ॥*
*तैजसमपि ॥*
(अध्याय 2 / सूत्र 48 )
*तैजसम् अपि ॥ 2/48॥*
*विवेचन -*
~~~~~~~~
(1)
*तैजस शरीरही लब्धिप्रत्यय आहे. हे तैजस शरीर वैक्रियिक शरीराप्रमाणे तपश्चरणाने ( लब्धीने ) प्राप्त होते..*
*..अशा या तैजस शरीराचे दोन मुख्य भेद आणि त्या भेदा पैकी एका भेदाचे दोन उपभेद पुढील प्रमाणे दिसून येतात. त्यांच्याविषयी आता क्रमशः माहिती घेऊया..*
*1) अनिःसरणात्मक तैजस शरीर -*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
औदारिक, वैक्रियिक, आहारक या शरीरामध्ये जे एक प्रकारचे तेज किंवा कांती असते, ती ज्यामुळे असते, त्याला *अनिःसरणात्मक तैजस शरीर* असे म्हणतात.
आपण जो आहार घेतो, त्याचे पाचन झाल्यानंतर शरीराला आतून जे एक प्रकारचे तेज येत असते, ते म्हणजेच अनिःसरणात्मक तैजस शरीर होय !
*( क्रमशः ) ( दि.06/04/2026 )*
*--डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
(ए.9606/आ.3236) |
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2026-04-06 08:23:13 |
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| 68391 |
40449682 |
तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप |
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2026-04-06 08:22:49 |
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| 68392 |
40449682 |
तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप |
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2026-04-06 08:22:49 |
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| 68389 |
40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ,
ನಮ್ಮ ಮಿಲನ್ ನ ನಿಕಟ ಪೂರ್ವ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ವೀರ್ ದಿನೇಶ್ ಕುಮಾರ್ ಆನಡ್ಕ ರವರು ದೀರ್ಘ ಕಾಲದಿಂದ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಡೆಯುತ್ತಿರುವ ವಿಷಯ ತಮಗೆಲ್ಲಾ ತಿಳಿದಿದೆ ಎಂದು ಭಾವಿಸುತ್ತೇವೆ. ಇಂದು ಬೆಳಗ್ಗಿನ ಜಾವದಲ್ಲಿ ಅವರ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಲಕಾರಿಯಾಗದೆ ಅವರು ಕೊನೆಯುಸಿರು ಎಳೆದರು ಎಂಬ ವಿಷಯವನ್ನು ತುಂಬಾ ವಿಷಾದದಿಂದ ತಿಳಿಸುತ್ತೇವೆ. ಮೃತರ ಪಾರ್ಥೀವ ಶರೀರ ಇನ್ನು ಕೆಲವೇ ಹೊತ್ತಿನಲ್ಲಿ ತಮ್ಮ ಮನೆ ಮೂಡುಬಿದಿರೆ ಸಮೀಪದ ಆನಡ್ಕ ತಲುಪಲಿದ್ದು. ಮೃತರ ಅಂತಿಮ ದರ್ಶನದ ಅವಕಾಶ ಇಂದು (06.03.26)ಇಂದು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ಗಂಟೆ 7.00 ರಿಂದ 10 ರ ತನಕ ಇರುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ಗಂಟೆ 10.30 ಕ್ಕೆ ಅಂತಿಮ ಸಂಸ್ಕಾರ ಆನಡ್ಕ ಮನೆಯಲ್ಲಿ ನಡೆಯಲಿದೆ ಎಂದು ಮೃತರ ಬಂಧುಗಳು ತಿಳಿಸಿರುತ್ತಾರೆ. ಮೃತರ ಆತ್ಮಕ್ಕೆ ಸದ್ಗತಿ ಸಿಗಲೆಂದು ಪ್ರಾರ್ಥಿಸುತ್ತೇವೆ.? |
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2026-04-06 08:22:06 |
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| 68390 |
40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ,
ನಮ್ಮ ಮಿಲನ್ ನ ನಿಕಟ ಪೂರ್ವ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ವೀರ್ ದಿನೇಶ್ ಕುಮಾರ್ ಆನಡ್ಕ ರವರು ದೀರ್ಘ ಕಾಲದಿಂದ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಡೆಯುತ್ತಿರುವ ವಿಷಯ ತಮಗೆಲ್ಲಾ ತಿಳಿದಿದೆ ಎಂದು ಭಾವಿಸುತ್ತೇವೆ. ಇಂದು ಬೆಳಗ್ಗಿನ ಜಾವದಲ್ಲಿ ಅವರ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಲಕಾರಿಯಾಗದೆ ಅವರು ಕೊನೆಯುಸಿರು ಎಳೆದರು ಎಂಬ ವಿಷಯವನ್ನು ತುಂಬಾ ವಿಷಾದದಿಂದ ತಿಳಿಸುತ್ತೇವೆ. ಮೃತರ ಪಾರ್ಥೀವ ಶರೀರ ಇನ್ನು ಕೆಲವೇ ಹೊತ್ತಿನಲ್ಲಿ ತಮ್ಮ ಮನೆ ಮೂಡುಬಿದಿರೆ ಸಮೀಪದ ಆನಡ್ಕ ತಲುಪಲಿದ್ದು. ಮೃತರ ಅಂತಿಮ ದರ್ಶನದ ಅವಕಾಶ ಇಂದು (06.03.26)ಇಂದು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ಗಂಟೆ 7.00 ರಿಂದ 10 ರ ತನಕ ಇರುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ಗಂಟೆ 10.30 ಕ್ಕೆ ಅಂತಿಮ ಸಂಸ್ಕಾರ ಆನಡ್ಕ ಮನೆಯಲ್ಲಿ ನಡೆಯಲಿದೆ ಎಂದು ಮೃತರ ಬಂಧುಗಳು ತಿಳಿಸಿರುತ್ತಾರೆ. ಮೃತರ ಆತ್ಮಕ್ಕೆ ಸದ್ಗತಿ ಸಿಗಲೆಂದು ಪ್ರಾರ್ಥಿಸುತ್ತೇವೆ.? |
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2026-04-06 08:22:06 |
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| 68388 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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1 *अनंत आनंद की खान है चेतन भगवान।*
2 *मार्ग सीधा है पर सीधे परिणाम वालों को मिलता है।*
3 *हतभाग्य वाले मेहनत नहीं करते हैं।*
4 *मोह के वश जीव को हवस होती है।*
5 *देह छूटेगी पर पहले ही यदि देहदृष्टि छूट जाए तो कष्ट नहीं होता।*
6 *जिसकी जैसी होनहार वैसे वो होगा पार।*
7 *अनमोल जीवन रुपए के मोल से नहीं खरीदा जा सकता है।*
8 *आत्मा जैसा कोई धन और उसके ज्ञाता जैसा धनी नहीं।*
9 *धैर्य खोने वाले बहुत ज्यादा चीजें खाते जाते हैं।*
10 *आनंद के लिए सामग्री नहीं शुद्धात्मा चाहिए।*
(श्रेणिक जैन जबलपुर 6-4-26) |
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2026-04-06 08:22:02 |
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| 68387 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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1 *अनंत आनंद की खान है चेतन भगवान।*
2 *मार्ग सीधा है पर सीधे परिणाम वालों को मिलता है।*
3 *हतभाग्य वाले मेहनत नहीं करते हैं।*
4 *मोह के वश जीव को हवस होती है।*
5 *देह छूटेगी पर पहले ही यदि देहदृष्टि छूट जाए तो कष्ट नहीं होता।*
6 *जिसकी जैसी होनहार वैसे वो होगा पार।*
7 *अनमोल जीवन रुपए के मोल से नहीं खरीदा जा सकता है।*
8 *आत्मा जैसा कोई धन और उसके ज्ञाता जैसा धनी नहीं।*
9 *धैर्य खोने वाले बहुत ज्यादा चीजें खाते जाते हैं।*
10 *आनंद के लिए सामग्री नहीं शुद्धात्मा चाहिए।*
(श्रेणिक जैन जबलपुर 6-4-26) |
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2026-04-06 08:22:01 |
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| 68385 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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नमोस्तु भगवन् |
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2026-04-06 08:21:59 |
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| 68386 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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नमोस्तु भगवन् |
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2026-04-06 08:21:59 |
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