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40449681 |
JAINAM JAYATI SHASANAM |
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*हिन्दू कौन है? हिन्दू शब्द का प्रयोग राजनीति की आवश्यकतानुसार किया गया है* ....संजय जैन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘हिन्दू’ शब्द की व्याख्या अपने निर्णयों में की है।
हिन्दू शब्द के विषय में भ्रान्ति में न रहे! हिन्दू शब्द जब हिन्दू धर्म हेतु लिखा गया तब वैदिक धर्म हेतु उपयोग किया गया जब देश हेतु लिखा गया तो भारत के निवासियों हेतु प्रयोग किया गया।
जैनों को ही क्यों जबरन हिंदू धर्म का हिस्सा बताने का प्रयास क्यों किया जाता? सिख और बौद्धों को क्यों नहीं? समझो.....?
*यदि भारत के सभी निवासी हिंदू है तो जैन भी लेकिन यदि धर्म की बात करें और यदि हिन्दू धर्म है तो जैन धर्म इसका हिस्सा नहीं क्योंकि दोनों के सिद्धांत और पूजा पद्धति अलग है।*
राजनीति जैनों को अलग समझती है और जैन तीर्थों पर कब्जे का विरोध नहीं करती?
=> पंडित जवाहर लाल नेहरु ने “हिन्दू / हिंदुत्व” की व्याख्या करते हुए अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Discovery of India" में इस पोस्ट के साथ संलग्न पेज न. 74, 75 व 76 पर लिखा कि “हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु सिन्धु नदी के दूसरी तरफ के भारत के निवासियों हेतु हजार साल पहले से प्रयोग किया गया और सिन्धु नदी के कारण ही हिन्दू व हिन्दुस्तान शब्द प्रचलन में आयें!
“सनातन धर्म” का अर्थ भारत में प्राचीन समय से प्रचलित धर्मो से है! भारतीय विचारों का शत प्रतिशत उत्पाद और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा जैन धर्म व बौद्ध धर्म निश्चित रूप से वैदिक धर्म से अलग है!
भारतीयता का अर्थ हिन्द, हिंदी व हिंदुस्तान से है! हिंदी से धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! पश्चिम एशिया के देशो, ईरान, तुर्की, अफगानिस्तान द्वारा हिन्द शब्द आज भी भारत हेतु प्रयोग किया जाता है!
मुस्लिम व ईसाई भी भारत का एक नागरिक होने के कारण हिंदी है! अमेरिकन भी यदि भारत निवासी को हिंदी / हिन्दू कहे तो कुछ गलत नहीं!
=> श्री वीर विनायक राव दामोदर राव सावरकर जी ने वर्ष 1905 में अंडमान-निकोबार जेल में रहते हुआ लिखा था कि “Asindhu Sindhu Paryanta yashya Bharat Bhoomika, Pitribhu Punya Bhuschaiva Sa vai Hindu Riti Smritah”
“सिन्धु व हिन्द महासागर के बीच स्तिथ व्यापक क्षेत्र को भारत कहा गया और जो इस पवित्र तीर्थो की जमीन को अपने पुरखों की जमीन स्वीकार करें, वो सभी हिन्दू है!”
वर्ष 1923 में रत्नागिरी जेल में कैद सावरकर जी द्वारा लिखित एक हेंडबिल चोरी से जेल से बाहर लाकर देश में बांटा गया जिसमे उन्होंने “हिंदुत्व” शब्द को किसी धर्म विशेष से न जोडकर अपितु अखंड भारत हेतु प्रयोग किया था!
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि श्री प्रेम चंद गोयल जी ने रतलाम में कहा कि यह लोगो की गलत धारणा है कि हिन्दू एक धर्म है! हिंदुत्व एक जीवन शैली है!”
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि ठाकुर राम सिंह जी ने कहा कि हिन्दुस्तान के निवासियों को हिन्दू कहा गया लेकिन ब्रिटिश लोगो ने हिन्दू को एक संप्रदाय लिखा!
=> डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा था कि हिंदुत्व राष्ट्रीय एकता की पहचान का प्रतीक है!
=> श्री योगी आदित्यनाथ (पूर्व सांसद व वर्तमान मुख्यमंत्री) ने भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी को हिन्दू कहा!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 19.11.2006 को अम्बाला में “हिन्दू कौन” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुत्व भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी की आत्मा है! हिंदुत्व प्रतिएक भारतीय को बाँधने का एक मंत्र है!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 21.12.2006 को चंडीगढ़ में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु भारत की नागरिकता से सम्बंधित है! (कॉपी संलग्न)
=> I.C.H.R. के पूर्व अध्यक्ष प्रसिद्ध इतिहासकार श्री इरफ़ान ने हबीब इंडिया इंटरनेशनल में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में कहा कि इतिहास अपनेआप में गवाह है कि अरब से आने वालों ने भारत के निवासी प्रतिएक जाति, धर्म के लोगो को हिन्दुस्तानी कहा! हिन्द जो वर्तमान में हिंदुस्तान या हिन्दोस्तान कहा जाता है उसका धर्म व भाषा से कोई सम्बन्ध नहीं! भारत में रहने वाले सभी धर्मो व भाषा के लोग हिन्दुस्तानी है! (दिनांक 22.12.2006 के हिंदुस्तान समाचार पत्र कापी संलग्न)
=> सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों i) Shastri Yagna Purushadji Case {1966(3) SCR 242}, ii) Sridharan Case (1976 SCR 478) में कहा कि “इस संवैधनिक बेंच द्वारा विस्तृत सलाह के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि हिंदी, हिंदुत्व का ठीक प्रकार से उत्तरदायी अर्थ नही निकलता और भारतीय संस्कृति व धरोहर की सामग्री के बिना धर्म की संकीर्ण सीमा में भी कोई सार नहीं निकाला जा सकता!”
=> सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक 14 जनवरी, 1966 को Sastri Yagnapurushadji Vs Muldas Bhudas केस के निर्णय में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि “हिन्दू धर्म अन्य धर्मो के समान किसी धर्म विशेष से सम्बंधित नहीं, न किसी धर्म विशेष का पालन करता, किसी भगवान से सम्बंधित नहीं, किसी धर्म की मान्यताओं की पूर्ति नही करता अपितु जीवन जीने से ज्यादा कुछ नहीं है! भारत के संविधान निर्माताओं को पूर्ण संज्ञान था इसीलिए उन्होंने हिन्दू का अर्थ सिख, जैन व बौद्ध धर्म मानने वालो के सन्दर्भ सहित लिखा! |
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2026-04-06 09:05:47 |
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| 68523 |
40449681 |
JAINAM JAYATI SHASANAM |
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*हिन्दू कौन है? हिन्दू शब्द का प्रयोग राजनीति की आवश्यकतानुसार किया गया है* ....संजय जैन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘हिन्दू’ शब्द की व्याख्या अपने निर्णयों में की है।
हिन्दू शब्द के विषय में भ्रान्ति में न रहे! हिन्दू शब्द जब हिन्दू धर्म हेतु लिखा गया तब वैदिक धर्म हेतु उपयोग किया गया जब देश हेतु लिखा गया तो भारत के निवासियों हेतु प्रयोग किया गया।
जैनों को ही क्यों जबरन हिंदू धर्म का हिस्सा बताने का प्रयास क्यों किया जाता? सिख और बौद्धों को क्यों नहीं? समझो.....?
*यदि भारत के सभी निवासी हिंदू है तो जैन भी लेकिन यदि धर्म की बात करें और यदि हिन्दू धर्म है तो जैन धर्म इसका हिस्सा नहीं क्योंकि दोनों के सिद्धांत और पूजा पद्धति अलग है।*
राजनीति जैनों को अलग समझती है और जैन तीर्थों पर कब्जे का विरोध नहीं करती?
=> पंडित जवाहर लाल नेहरु ने “हिन्दू / हिंदुत्व” की व्याख्या करते हुए अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Discovery of India" में इस पोस्ट के साथ संलग्न पेज न. 74, 75 व 76 पर लिखा कि “हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु सिन्धु नदी के दूसरी तरफ के भारत के निवासियों हेतु हजार साल पहले से प्रयोग किया गया और सिन्धु नदी के कारण ही हिन्दू व हिन्दुस्तान शब्द प्रचलन में आयें!
“सनातन धर्म” का अर्थ भारत में प्राचीन समय से प्रचलित धर्मो से है! भारतीय विचारों का शत प्रतिशत उत्पाद और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा जैन धर्म व बौद्ध धर्म निश्चित रूप से वैदिक धर्म से अलग है!
भारतीयता का अर्थ हिन्द, हिंदी व हिंदुस्तान से है! हिंदी से धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! पश्चिम एशिया के देशो, ईरान, तुर्की, अफगानिस्तान द्वारा हिन्द शब्द आज भी भारत हेतु प्रयोग किया जाता है!
मुस्लिम व ईसाई भी भारत का एक नागरिक होने के कारण हिंदी है! अमेरिकन भी यदि भारत निवासी को हिंदी / हिन्दू कहे तो कुछ गलत नहीं!
=> श्री वीर विनायक राव दामोदर राव सावरकर जी ने वर्ष 1905 में अंडमान-निकोबार जेल में रहते हुआ लिखा था कि “Asindhu Sindhu Paryanta yashya Bharat Bhoomika, Pitribhu Punya Bhuschaiva Sa vai Hindu Riti Smritah”
“सिन्धु व हिन्द महासागर के बीच स्तिथ व्यापक क्षेत्र को भारत कहा गया और जो इस पवित्र तीर्थो की जमीन को अपने पुरखों की जमीन स्वीकार करें, वो सभी हिन्दू है!”
वर्ष 1923 में रत्नागिरी जेल में कैद सावरकर जी द्वारा लिखित एक हेंडबिल चोरी से जेल से बाहर लाकर देश में बांटा गया जिसमे उन्होंने “हिंदुत्व” शब्द को किसी धर्म विशेष से न जोडकर अपितु अखंड भारत हेतु प्रयोग किया था!
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि श्री प्रेम चंद गोयल जी ने रतलाम में कहा कि यह लोगो की गलत धारणा है कि हिन्दू एक धर्म है! हिंदुत्व एक जीवन शैली है!”
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि ठाकुर राम सिंह जी ने कहा कि हिन्दुस्तान के निवासियों को हिन्दू कहा गया लेकिन ब्रिटिश लोगो ने हिन्दू को एक संप्रदाय लिखा!
=> डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा था कि हिंदुत्व राष्ट्रीय एकता की पहचान का प्रतीक है!
=> श्री योगी आदित्यनाथ (पूर्व सांसद व वर्तमान मुख्यमंत्री) ने भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी को हिन्दू कहा!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 19.11.2006 को अम्बाला में “हिन्दू कौन” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुत्व भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी की आत्मा है! हिंदुत्व प्रतिएक भारतीय को बाँधने का एक मंत्र है!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 21.12.2006 को चंडीगढ़ में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु भारत की नागरिकता से सम्बंधित है! (कॉपी संलग्न)
=> I.C.H.R. के पूर्व अध्यक्ष प्रसिद्ध इतिहासकार श्री इरफ़ान ने हबीब इंडिया इंटरनेशनल में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में कहा कि इतिहास अपनेआप में गवाह है कि अरब से आने वालों ने भारत के निवासी प्रतिएक जाति, धर्म के लोगो को हिन्दुस्तानी कहा! हिन्द जो वर्तमान में हिंदुस्तान या हिन्दोस्तान कहा जाता है उसका धर्म व भाषा से कोई सम्बन्ध नहीं! भारत में रहने वाले सभी धर्मो व भाषा के लोग हिन्दुस्तानी है! (दिनांक 22.12.2006 के हिंदुस्तान समाचार पत्र कापी संलग्न)
=> सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों i) Shastri Yagna Purushadji Case {1966(3) SCR 242}, ii) Sridharan Case (1976 SCR 478) में कहा कि “इस संवैधनिक बेंच द्वारा विस्तृत सलाह के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि हिंदी, हिंदुत्व का ठीक प्रकार से उत्तरदायी अर्थ नही निकलता और भारतीय संस्कृति व धरोहर की सामग्री के बिना धर्म की संकीर्ण सीमा में भी कोई सार नहीं निकाला जा सकता!”
=> सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक 14 जनवरी, 1966 को Sastri Yagnapurushadji Vs Muldas Bhudas केस के निर्णय में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि “हिन्दू धर्म अन्य धर्मो के समान किसी धर्म विशेष से सम्बंधित नहीं, न किसी धर्म विशेष का पालन करता, किसी भगवान से सम्बंधित नहीं, किसी धर्म की मान्यताओं की पूर्ति नही करता अपितु जीवन जीने से ज्यादा कुछ नहीं है! भारत के संविधान निर्माताओं को पूर्ण संज्ञान था इसीलिए उन्होंने हिन्दू का अर्थ सिख, जैन व बौद्ध धर्म मानने वालो के सन्दर्भ सहित लिखा! |
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2026-04-06 09:05:46 |
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| 68521 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-06 09:05:32 |
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| 68522 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-06 09:05:32 |
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| 68520 |
40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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2026-04-06 09:04:49 |
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| 68519 |
40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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2026-04-06 09:04:48 |
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| 68518 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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|
सोमवार की सुबह सुबह कुछ पंक्षियों के घरोदो की उम्मीद से कुछ इस तरह से अपनी जैन बोडिंग स्कूल से शुरुवात करी
आप लोग भी कुछ करेंगें इसी उम्मीद के साथ
आप सबके
चौधरी मयंक रूबी जैन
स्टूडेंट बुक परिवार कटनी
8319901010,9039877209 |
|
2026-04-06 09:02:44 |
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| 68517 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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सोमवार की सुबह सुबह कुछ पंक्षियों के घरोदो की उम्मीद से कुछ इस तरह से अपनी जैन बोडिंग स्कूल से शुरुवात करी
आप लोग भी कुछ करेंगें इसी उम्मीद के साथ
आप सबके
चौधरी मयंक रूबी जैन
स्टूडेंट बुक परिवार कटनी
8319901010,9039877209 |
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2026-04-06 09:02:43 |
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| 68515 |
40449658 |
?शांतिधारा-पुणे? |
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*शांतिधारा बिलौना घी*
प्राचीन *बिलोना पद्धति* विधि के द्वारा घी का निर्माण किया जा रहा है, यह घी आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्यवर्धक भी है। इस योजना के प्रारम्भ होते ही जन सामान्य में *खुशी की लहर* दौड़ गई है।
आचार्यश्री जी के करुणामयी आशीर्वाद से एक ओर *किसान भाइयों* की उन्नति हो रही है और दूसरी ओर जन सामान्य को *भारतीय नस्ल की देशी गाय एवं देशी भैंस* के दूध से निर्मित *शुद्ध बिलौना घी* प्राप्त हो रहा है।
*शुद्ध बिलौना घी के फायदे:-*
*?लंबे घने बाल और त्वचा को चमकदार बनाए।*
*? ह्रदय, लीवर और मानसिक रोगों में लाभकारी।*
*? एंटीऑक्सीडेंट्स के भरपूर होने से इम्यूनिटी को बढ़ाएं।*
*?आंखो की रोशनी बढ़ाएं।*
*? शरीर में पोषक तत्वों को प्रदान करें।*
*आज ही अपने परिवार के उत्तम स्वस्थ्य के लिए स्वादिष्ट*
*बिलोना घी ऑर्डर करें।*
<a href="https://shantidhara.in/products/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%98%e0%a5%80" target="_blank">https://shantidhara.in/products/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%98%e0%a5%80</a>
*मात्रा 1ली, मूल्य- 1320₹*
*1 ली.- कांच पैकिंग 1390₹*
*5 ली=6500₹*
*15 ली.=19,200₹*
*हमसे जुड़ें*
<a href="https://linktr.ee/shantidhara" target="_blank">https://linktr.ee/shantidhara</a>
*संपर्क* - *8770637723,*6266486223*
*www.shantidhara.in* |
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2026-04-06 09:02:18 |
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40449658 |
?शांतिधारा-पुणे? |
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*शांतिधारा बिलौना घी*
प्राचीन *बिलोना पद्धति* विधि के द्वारा घी का निर्माण किया जा रहा है, यह घी आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्यवर्धक भी है। इस योजना के प्रारम्भ होते ही जन सामान्य में *खुशी की लहर* दौड़ गई है।
आचार्यश्री जी के करुणामयी आशीर्वाद से एक ओर *किसान भाइयों* की उन्नति हो रही है और दूसरी ओर जन सामान्य को *भारतीय नस्ल की देशी गाय एवं देशी भैंस* के दूध से निर्मित *शुद्ध बिलौना घी* प्राप्त हो रहा है।
*शुद्ध बिलौना घी के फायदे:-*
*?लंबे घने बाल और त्वचा को चमकदार बनाए।*
*? ह्रदय, लीवर और मानसिक रोगों में लाभकारी।*
*? एंटीऑक्सीडेंट्स के भरपूर होने से इम्यूनिटी को बढ़ाएं।*
*?आंखो की रोशनी बढ़ाएं।*
*? शरीर में पोषक तत्वों को प्रदान करें।*
*आज ही अपने परिवार के उत्तम स्वस्थ्य के लिए स्वादिष्ट*
*बिलोना घी ऑर्डर करें।*
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*मात्रा 1ली, मूल्य- 1320₹*
*1 ली.- कांच पैकिंग 1390₹*
*5 ली=6500₹*
*15 ली.=19,200₹*
*हमसे जुड़ें*
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*संपर्क* - *8770637723,*6266486223*
*www.shantidhara.in* |
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