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73527 40449708 अंतरिक्ष पार्श्वनाथ पश्चिमबंगाल 2026-04-10 06:09:06
73528 40449708 अंतरिक्ष पार्श्वनाथ पश्चिमबंगाल 2026-04-10 06:09:06
73525 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-10 06:07:30
73526 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-10 06:07:30
73524 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर *?लघु प्रतिक्रमण?* *हे भगवान,हे जिनेंद्र देव,हे अरिहंत प्रभु,* ?मैं अपने पापों से मुक्त होने के लिए प्रतिक्रमण करता हूं।हे भगवान,मैं सर्व अवगुणों से संपन्न हूं।मैंने मन वचन काय की दुष्टता से ना जाने कितने अपराध किए हैं।हे भगवान आप तो केवलज्ञानी है मेरे सब पापों को आप जानते हैं,आपसे कुछ भी छिपा नहीं है,मैं सभी जीवो से क्षमा चाहता हूं, सभी जीव मुझे क्षमा प्रदान करें। मेरी किसी के साथ शत्रुता नहीं है, यदि मैंने राग द्वेष आदि परिणामों से पाप किया हो,कर्कश वचन कहे हो,यदि मैंने उठने-बैठने,खांसने- छींकने,बोलने से जीवो का घात किया हो,यदि मैंने त्रसकायिक या स्थावर जीवों की हिंसा की हो,पर स्त्री या पुरुष को बुरी निगाहों से देखा हो अपने व्रतों और नियमों में दोष लगाया हो,अष्ट मूलगुणों के पालन में एवं सप्त व्यसन त्याग में दोष लगाया हो,सच्चे देव, शास्त्र,गुरु और मुनि आर्यिका, श्रावक व श्राविका की निंदा,आलोचना की हो तो,हे भगवान,मेरे सारे दोष(दुष्कर्म) मिथ्या हो,मेरा समाधि मरण हो एवं अन्तिम समय तक सच्चे देव, शास्त्र,गुरु की भक्ति में मन लगा रहे ऐसी मेरी भावना है-३। (९ बार णमोकार मंत्र का जाप करें।)✒️?? 2026-04-10 06:04:30
73523 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर *?लघु प्रतिक्रमण?* *हे भगवान,हे जिनेंद्र देव,हे अरिहंत प्रभु,* ?मैं अपने पापों से मुक्त होने के लिए प्रतिक्रमण करता हूं।हे भगवान,मैं सर्व अवगुणों से संपन्न हूं।मैंने मन वचन काय की दुष्टता से ना जाने कितने अपराध किए हैं।हे भगवान आप तो केवलज्ञानी है मेरे सब पापों को आप जानते हैं,आपसे कुछ भी छिपा नहीं है,मैं सभी जीवो से क्षमा चाहता हूं, सभी जीव मुझे क्षमा प्रदान करें। मेरी किसी के साथ शत्रुता नहीं है, यदि मैंने राग द्वेष आदि परिणामों से पाप किया हो,कर्कश वचन कहे हो,यदि मैंने उठने-बैठने,खांसने- छींकने,बोलने से जीवो का घात किया हो,यदि मैंने त्रसकायिक या स्थावर जीवों की हिंसा की हो,पर स्त्री या पुरुष को बुरी निगाहों से देखा हो अपने व्रतों और नियमों में दोष लगाया हो,अष्ट मूलगुणों के पालन में एवं सप्त व्यसन त्याग में दोष लगाया हो,सच्चे देव, शास्त्र,गुरु और मुनि आर्यिका, श्रावक व श्राविका की निंदा,आलोचना की हो तो,हे भगवान,मेरे सारे दोष(दुष्कर्म) मिथ्या हो,मेरा समाधि मरण हो एवं अन्तिम समय तक सच्चे देव, शास्त्र,गुरु की भक्ति में मन लगा रहे ऐसी मेरी भावना है-३। (९ बार णमोकार मंत्र का जाप करें।)✒️?? 2026-04-10 06:04:29
73521 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर *प्रातः कालीन वन्दना* _➡️ सिद्ध शिला पर विराजमान अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी भगवन्तों तो को मेरा बारंबार नमस्कार है?_ _➡️ वषभादिक महावीर पर्यंत उंगलियों के 24 पोरो में विराजित 24 तीर्थंकरों को मेरा नमस्कार है?_ _➡️सीमंधर आदि विद्यमान 20 तीर्थंकरों को मेरा नमस्कार है ?_ _➡️ सम्मेद शिखर सिद्धक्षेत्र को मेरा नमस्कार है ?_ _➡️ चारों दिशा विदिशाओं में जितने अरहन्त, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय व सर्वसाधु, जिनधर्म,जिनागम व जितने भी कृत्रिम अकृत्रिम चैत्य चैत्यालय हैं उनको मेरा मन वचन और काय से बारम्बार नमस्कार है ?_ _➡️ पाॅंच भरत, पाॅंच ऐरावत,दश क्षेत्र सम्बन्धी तीस चौबीसी के 720 जिनालयों में स्थित जिनवरों को मेरा बारम्बार नमस्कार है। जितने भी अतिशय क्षेत्र, सिद्धक्षेत्र, जिनवाणी, शास्त्र, मुनिराज, माताजी, क्षुल्लक, क्षुल्लिका जी है उन सबके चरणों में मेरा मन-वचन और काय से बारम्बार नमस्कार है ?_ _➡️ हे भगवन्त तीन लोक सम्बन्धी 8 करोड़ 56 लाख 97 हजार 781 अकृत्रिम जिन चैत्यालयों को मैं नमस्कार करता/करती हूं। उन चैत्यालयों में स्थित 925 करोड़ 53 लाख 27 हजार 948 जिन प्रतिमाओं की वन्दना करता/करती हूं।_ _➡️ हे भगवन् मैं यह भावना भाता/भाती हूं कि मेरा यह आज का दिन खुब मंगलमय हो अगर मेरी मृत्यु भी आती हो तो तो भी मैं तनिक भी नहीं घबराऊॅं, मेरा अत्यंत सुखद समाधि पूर्वक मरण हो। जगत के जितने भी जीव है वे सभी सुखी रहें, उन्हें कोई भी प्रकार का कष्ट, दुःख, दरिद्र,रोग न सताये और सभी जीव मुझको क्षमा करें और सभी जीवों पर मेरा क्षमाभाव रहें ?_ _मेरे समस्त कर्मों का क्षय हो, समस्त दुःख दूर हो, रत्नत्रय धर्म की प्राप्ति हो,बोधि की प्राप्ति हो,मोक्ष की प्राप्ति हो आपके गुण रुपी रत्नों की प्राप्ति हो। जब तक मैं मोक्ष पद को प्राप्त न कर लूं,तब तक आपके चरण कमल, मेरे ह्रदय में विराजे और मेरा ह्रदय आपके चरणों में रहें?_ _सम्यक्त्व को धारण करूं, रत्नत्रय धर्म का पालन करूं,आर्यिका/मुनिव्रत धारण करूं,समाधि पूर्वक मरण करूं,यही मेरी भावना है?_ _हे भगवन् ! आज के लिए मैं यह नियम लेता/लेती हूं कि मेरे से जो भी खाने में, लेने में, देने में, चलने में, फिरने में आयेगा उन सबकी छूट है बाकी सबका त्याग है अगर कोई गलती हो तो मिथ्या होवे ?_ _जिस दिशा में रहूं, आऊं, जाऊं उस दिशा की मेरी छूट है बाकी सब दिशाओं में आवागमन का मुझे त्याग रहेगा अगर कोई गलती हो तो मिथ्या होवे ?_ ‌ _जिस दिशा में रहूं उस दिशा में कोई पाप हो तो उस पाप की मैं भागीदार न बन सकूं,अगर किसी प्रकार की अड़चनें,हारी-बीमारी आ जावे, दर्शन नहीं कर सकूं, पूजा नहीं कर सकूं उसके लिए मैं क्षमा चाहुंगा/चाहुंगी ?_ _मंदिर जी में रहूं, पूजा बोलूं,व्रत करूं, मेरे शरीर पर जो भी परिग्रह है, और जो भी मंदिर जी में मेरे द्वारा प्रयोग में आयेगा,उन सबको छोड़कर, बाकी अन्य समस्त परिग्रहों का मुझे त्याग रहेगा। अगर इस बीच मेरी मृत्यु हो जाए तो मेरे शरीर पर भी परिग्रह है उसका मुझे त्याग रहेगा ?_ *अंचेमि,पुज्जेमि, वन्दामि,णमंसामि,दुक्खक्खओ,कम्मक्खओ,बोहिलाओ,सगइगमणं,समाहिमरणं,जिनगुण सम्पत्ति होऊं मज्झं ?* *प्रेम से बोलिए पंच परमेष्ठी भगवान की जय ?* *36 बार णमोकार मंत्र बोलना फिर आपस में दोनों हथेलियों को रगड़कर पूरे शरीर में स्पर्श करें* ???????? 2026-04-10 06:04:28
73522 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर *प्रातः कालीन वन्दना* _➡️ सिद्ध शिला पर विराजमान अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी भगवन्तों तो को मेरा बारंबार नमस्कार है?_ _➡️ वषभादिक महावीर पर्यंत उंगलियों के 24 पोरो में विराजित 24 तीर्थंकरों को मेरा नमस्कार है?_ _➡️सीमंधर आदि विद्यमान 20 तीर्थंकरों को मेरा नमस्कार है ?_ _➡️ सम्मेद शिखर सिद्धक्षेत्र को मेरा नमस्कार है ?_ _➡️ चारों दिशा विदिशाओं में जितने अरहन्त, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय व सर्वसाधु, जिनधर्म,जिनागम व जितने भी कृत्रिम अकृत्रिम चैत्य चैत्यालय हैं उनको मेरा मन वचन और काय से बारम्बार नमस्कार है ?_ _➡️ पाॅंच भरत, पाॅंच ऐरावत,दश क्षेत्र सम्बन्धी तीस चौबीसी के 720 जिनालयों में स्थित जिनवरों को मेरा बारम्बार नमस्कार है। जितने भी अतिशय क्षेत्र, सिद्धक्षेत्र, जिनवाणी, शास्त्र, मुनिराज, माताजी, क्षुल्लक, क्षुल्लिका जी है उन सबके चरणों में मेरा मन-वचन और काय से बारम्बार नमस्कार है ?_ _➡️ हे भगवन्त तीन लोक सम्बन्धी 8 करोड़ 56 लाख 97 हजार 781 अकृत्रिम जिन चैत्यालयों को मैं नमस्कार करता/करती हूं। उन चैत्यालयों में स्थित 925 करोड़ 53 लाख 27 हजार 948 जिन प्रतिमाओं की वन्दना करता/करती हूं।_ _➡️ हे भगवन् मैं यह भावना भाता/भाती हूं कि मेरा यह आज का दिन खुब मंगलमय हो अगर मेरी मृत्यु भी आती हो तो तो भी मैं तनिक भी नहीं घबराऊॅं, मेरा अत्यंत सुखद समाधि पूर्वक मरण हो। जगत के जितने भी जीव है वे सभी सुखी रहें, उन्हें कोई भी प्रकार का कष्ट, दुःख, दरिद्र,रोग न सताये और सभी जीव मुझको क्षमा करें और सभी जीवों पर मेरा क्षमाभाव रहें ?_ _मेरे समस्त कर्मों का क्षय हो, समस्त दुःख दूर हो, रत्नत्रय धर्म की प्राप्ति हो,बोधि की प्राप्ति हो,मोक्ष की प्राप्ति हो आपके गुण रुपी रत्नों की प्राप्ति हो। जब तक मैं मोक्ष पद को प्राप्त न कर लूं,तब तक आपके चरण कमल, मेरे ह्रदय में विराजे और मेरा ह्रदय आपके चरणों में रहें?_ _सम्यक्त्व को धारण करूं, रत्नत्रय धर्म का पालन करूं,आर्यिका/मुनिव्रत धारण करूं,समाधि पूर्वक मरण करूं,यही मेरी भावना है?_ _हे भगवन् ! आज के लिए मैं यह नियम लेता/लेती हूं कि मेरे से जो भी खाने में, लेने में, देने में, चलने में, फिरने में आयेगा उन सबकी छूट है बाकी सबका त्याग है अगर कोई गलती हो तो मिथ्या होवे ?_ _जिस दिशा में रहूं, आऊं, जाऊं उस दिशा की मेरी छूट है बाकी सब दिशाओं में आवागमन का मुझे त्याग रहेगा अगर कोई गलती हो तो मिथ्या होवे ?_ ‌ _जिस दिशा में रहूं उस दिशा में कोई पाप हो तो उस पाप की मैं भागीदार न बन सकूं,अगर किसी प्रकार की अड़चनें,हारी-बीमारी आ जावे, दर्शन नहीं कर सकूं, पूजा नहीं कर सकूं उसके लिए मैं क्षमा चाहुंगा/चाहुंगी ?_ _मंदिर जी में रहूं, पूजा बोलूं,व्रत करूं, मेरे शरीर पर जो भी परिग्रह है, और जो भी मंदिर जी में मेरे द्वारा प्रयोग में आयेगा,उन सबको छोड़कर, बाकी अन्य समस्त परिग्रहों का मुझे त्याग रहेगा। अगर इस बीच मेरी मृत्यु हो जाए तो मेरे शरीर पर भी परिग्रह है उसका मुझे त्याग रहेगा ?_ *अंचेमि,पुज्जेमि, वन्दामि,णमंसामि,दुक्खक्खओ,कम्मक्खओ,बोहिलाओ,सगइगमणं,समाहिमरणं,जिनगुण सम्पत्ति होऊं मज्झं ?* *प्रेम से बोलिए पंच परमेष्ठी भगवान की जय ?* *36 बार णमोकार मंत्र बोलना फिर आपस में दोनों हथेलियों को रगड़कर पूरे शरीर में स्पर्श करें* ???????? 2026-04-10 06:04:28
73519 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Wandami matajii ???????? 2026-04-10 06:04:01
73520 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Wandami matajii ???????? 2026-04-10 06:04:01