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227051 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त दही की काळमर्यादा दहीं के लिए आधुनिक विज्ञान का कहना है कि दूध के साथ जामन (दही ) मिलाने के साथ ही उसमें जीवाणु (बेकटेरीया )पेदा होने शुरू हो जाते हैं।जैनदर्शन इस प्रकार की मान्यता से सहमत नहीं है।अगर दूध में दही का जामन मिलाते ही जीवाणु (बेकटेरीया )पेदा हो जाते हो तो बेईन्द्रिय जीवो की हिंसा से निर्मित होने वाला दही कोई भी जैन उपयोग नहीं कर पाता।जब दही का उपयोग तो भगवान के आनंद-कामदेव आदि श्रावकों के समय में भी होता आया है और आज भी हो रहा है।विज्ञान जिसे जीवाणु (बेकटेर... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188698483?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188698483?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 12:08:05
227050 40449668 आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है *आत्मा तो अनंत शक्तियोंका पिण्ड है।* *आत्मामें दृष्टि स्थापित करने पर अंतरसे ही बहुत विभूति प्रगट होती है।* *उपयोगको सूक्ष्म करके अंतरमें जानेसे बहुत-सी स्वभावभूत ऋद्धि-सिद्धियाँ प्रगट होती हैं।* *अंतरमें तो आनन्दका सागर है।* *ज्ञानसागर, सुख-सागर यह सब भीतर आत्मामें ही हैं।* *जैसे सागरमें चाहे जितनी जोरदार लहरें उठती रहें* *तथापि उसमें न्यूनता-अधिकता नहीं होती,* *उसी प्रकार अनंत-अनंत काल तक केवलज्ञान बहता रहे* *तब भी द्रव्य तो ज्योंका त्यों ही रहता है ।।*? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188699121?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188699121?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 12:07:34
227049 40449668 आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है *आत्मा तो अनंत शक्तियोंका पिण्ड है।* *आत्मामें दृष्टि स्थापित करने पर अंतरसे ही बहुत विभूति प्रगट होती है।* *उपयोगको सूक्ष्म करके अंतरमें जानेसे बहुत-सी स्वभावभूत ऋद्धि-सिद्धियाँ प्रगट होती हैं।* *अंतरमें तो आनन्दका सागर है।* *ज्ञानसागर, सुख-सागर यह सब भीतर आत्मामें ही हैं।* *जैसे सागरमें चाहे जितनी जोरदार लहरें उठती रहें* *तथापि उसमें न्यूनता-अधिकता नहीं होती,* *उसी प्रकार अनंत-अनंत काल तक केवलज्ञान बहता रहे* *तब भी द्रव्य तो ज्योंका त्यों ही रहता है ।।*? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188699121?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188699121?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 12:07:33
227048 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-13 12:07:02
227047 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-13 12:07:01
227045 40449734 3 अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज उदासीन आश्रम में विराजमान है। 2026-06-13 12:04:32
227046 40449734 3 अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज उदासीन आश्रम में विराजमान है। 2026-06-13 12:04:32
227043 40449660 Acharya PulakSagarji 07 *परम् पूज्य भारत गौरव प्रातः स्मरणीय राष्ट्रसंत, शान्तिदूत आचार्यश्री पुलक सागरजी गुरुदेव के चरणों में शत शत नमन* नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु ??? 2026-06-13 12:01:02
227044 40449660 Acharya PulakSagarji 07 *परम् पूज्य भारत गौरव प्रातः स्मरणीय राष्ट्रसंत, शान्तिदूत आचार्यश्री पुलक सागरजी गुरुदेव के चरणों में शत शत नमन* नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु ??? 2026-06-13 12:01:02
227042 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? <a href="https://www.facebook.com/share/v/18oZ2dK7K7/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/v/18oZ2dK7K7/</a> 2026-06-13 12:00:14