| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 76077 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
*मैं हूँ ना❤️❤️❤️*
*?गुरूदेव से जुड़े रहें, अभी Follow करें❤️”* |
|
2026-04-11 06:39:29 |
|
| 76078 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
*मैं हूँ ना❤️❤️❤️*
*?गुरूदेव से जुड़े रहें, अभी Follow करें❤️”* |
|
2026-04-11 06:39:29 |
|
| 76076 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
|
|
*कर्म का न्याय—जब लौटता है तो पीढ़ियाँ याद रखती हैं*
दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों को शायद उस समय यह एहसास नहीं होता कि वे सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार, उसकी आशाओं, उसके सपनों और उसकी आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित कर रहे हैं। स्वार्थ, अहंकार और क्षणिक लाभ के लिए जब कोई किसी के जीवन में अंधकार भरता है, तो वह यह भूल जाता है कि इस सृष्टि में कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता। हर कर्म का लेखा-जोखा होता है, और समय आने पर उसका फल अवश्य मिलता है।
जैन दर्शन स्पष्ट रूप से कहता है कि कर्म एक ऐसी सूक्ष्म शक्ति है, जो हमारे प्रत्येक विचार, वचन और कार्य से बंधती है। जब हम किसी के साथ अन्याय करते हैं, किसी का दिल दुखाते हैं या किसी के जीवन को जानबूझकर नुकसान पहुँचाते हैं, तब हम न केवल पाप कर्म का बंध करते हैं, बल्कि अपने भविष्य के दुखों का बीज भी बोते हैं। उस समय भले ही हमें सफलता, शक्ति या विजय का भ्रम हो, लेकिन यह भ्रम अधिक समय तक टिकता नहीं।
इतिहास और अनुभव दोनों गवाही देते हैं कि जब कर्म लौटता है, तो वह अकेले नहीं आता। वह अपने साथ ऐसी परिस्थितियाँ लेकर आता है, जो व्यक्ति को भीतर तक तोड़ देती हैं। जिस प्रकार किसी को रुलाकर मिली हुई खुशी कभी स्थायी नहीं हो सकती, उसी प्रकार दूसरों को गिराकर बनाई गई ऊँचाई भी अधिक समय तक टिक नहीं पाती। जब कर्म का चक्र घूमता है, तो वही व्यक्ति, वही परिवार, और कई बार उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उसके परिणामों को भोगती हैं।
यह कोई डराने वाली बात नहीं, बल्कि प्रकृति का अटल नियम है। जैसे बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है। यदि हम कांटे बोएंगे तो फूलों की उम्मीद करना मूर्खता है। इसलिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि किसी का जीवन बर्बाद करके कभी भी स्वयं का कल्याण नहीं किया जा सकता। जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, वे अक्सर स्वयं उसी में गिरते हैं—बस समय का अंतर होता है।
समाज में आज अनेक ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहाँ लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की खुशियाँ छीन लेते हैं, रिश्तों को तोड़ देते हैं और निर्दोष लोगों को पीड़ा पहुँचाते हैं। ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि कर्म का न्याय देर से जरूर होता है, लेकिन अंधा नहीं होता। जब वह न्याय करता है, तो इतना गहरा प्रभाव छोड़ता है कि व्यक्ति ही नहीं, उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उस दर्द को महसूस करती हैं।
इसलिए जीवन में हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे कारण किसी की आँखों में आँसू न आएं। यदि हम किसी का भला नहीं कर सकते, तो कम से कम उसका बुरा भी न करें। यही सच्चा धर्म है, यही सच्ची मानवता है। दूसरों के जीवन में सुख, शांति और सहयोग का कारण बनना ही वह मार्ग है, जो हमें अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है और हमारे भविष्य को सुरक्षित बनाता है।
अंत में बस इतना ही कहना उचित है—दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों, याद रखो कि जब कर्म लौटना शुरू होता है, तो उसकी आहट इतनी भयावह होती है कि सात पीढ़ियाँ बैठकर रोती हैं। इसलिए समय रहते संभल जाओ, क्योंकि कर्म का न्याय निश्चित है और उससे बचना किसी के बस में नहीं।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
|
2026-04-11 06:34:32 |
|
| 76075 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
|
|
*कर्म का न्याय—जब लौटता है तो पीढ़ियाँ याद रखती हैं*
दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों को शायद उस समय यह एहसास नहीं होता कि वे सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार, उसकी आशाओं, उसके सपनों और उसकी आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित कर रहे हैं। स्वार्थ, अहंकार और क्षणिक लाभ के लिए जब कोई किसी के जीवन में अंधकार भरता है, तो वह यह भूल जाता है कि इस सृष्टि में कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता। हर कर्म का लेखा-जोखा होता है, और समय आने पर उसका फल अवश्य मिलता है।
जैन दर्शन स्पष्ट रूप से कहता है कि कर्म एक ऐसी सूक्ष्म शक्ति है, जो हमारे प्रत्येक विचार, वचन और कार्य से बंधती है। जब हम किसी के साथ अन्याय करते हैं, किसी का दिल दुखाते हैं या किसी के जीवन को जानबूझकर नुकसान पहुँचाते हैं, तब हम न केवल पाप कर्म का बंध करते हैं, बल्कि अपने भविष्य के दुखों का बीज भी बोते हैं। उस समय भले ही हमें सफलता, शक्ति या विजय का भ्रम हो, लेकिन यह भ्रम अधिक समय तक टिकता नहीं।
इतिहास और अनुभव दोनों गवाही देते हैं कि जब कर्म लौटता है, तो वह अकेले नहीं आता। वह अपने साथ ऐसी परिस्थितियाँ लेकर आता है, जो व्यक्ति को भीतर तक तोड़ देती हैं। जिस प्रकार किसी को रुलाकर मिली हुई खुशी कभी स्थायी नहीं हो सकती, उसी प्रकार दूसरों को गिराकर बनाई गई ऊँचाई भी अधिक समय तक टिक नहीं पाती। जब कर्म का चक्र घूमता है, तो वही व्यक्ति, वही परिवार, और कई बार उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उसके परिणामों को भोगती हैं।
यह कोई डराने वाली बात नहीं, बल्कि प्रकृति का अटल नियम है। जैसे बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है। यदि हम कांटे बोएंगे तो फूलों की उम्मीद करना मूर्खता है। इसलिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि किसी का जीवन बर्बाद करके कभी भी स्वयं का कल्याण नहीं किया जा सकता। जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, वे अक्सर स्वयं उसी में गिरते हैं—बस समय का अंतर होता है।
समाज में आज अनेक ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहाँ लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की खुशियाँ छीन लेते हैं, रिश्तों को तोड़ देते हैं और निर्दोष लोगों को पीड़ा पहुँचाते हैं। ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि कर्म का न्याय देर से जरूर होता है, लेकिन अंधा नहीं होता। जब वह न्याय करता है, तो इतना गहरा प्रभाव छोड़ता है कि व्यक्ति ही नहीं, उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उस दर्द को महसूस करती हैं।
इसलिए जीवन में हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे कारण किसी की आँखों में आँसू न आएं। यदि हम किसी का भला नहीं कर सकते, तो कम से कम उसका बुरा भी न करें। यही सच्चा धर्म है, यही सच्ची मानवता है। दूसरों के जीवन में सुख, शांति और सहयोग का कारण बनना ही वह मार्ग है, जो हमें अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है और हमारे भविष्य को सुरक्षित बनाता है।
अंत में बस इतना ही कहना उचित है—दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों, याद रखो कि जब कर्म लौटना शुरू होता है, तो उसकी आहट इतनी भयावह होती है कि सात पीढ़ियाँ बैठकर रोती हैं। इसलिए समय रहते संभल जाओ, क्योंकि कर्म का न्याय निश्चित है और उससे बचना किसी के बस में नहीं।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
|
2026-04-11 06:34:31 |
|
| 76073 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
|
|
|
|
2026-04-11 06:33:45 |
|
| 76074 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
|
|
|
|
2026-04-11 06:33:45 |
|
| 76071 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
|
|
2026-04-11 06:30:22 |
|
| 76072 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
|
|
2026-04-11 06:30:22 |
|
| 76069 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*समय समीक्षा - संपूर्ण तिथि,पर्व,मुहूर्त दैनिक पंचाग*
*दिनांक 11/04/2026, शनिवार आज का पंचांग* ?
*आप का दिन मंगलमय हो*
*?सूर्योदय :- *06:00* बजे
*सूर्यास्त :- *18:44* बजे
?*चंद्रोदय*02:14बजे *चंद्रास्त* 12:31बजे
श्री विक्रमसंवत्- *2083* शाके- *1948*
*श्री वीरनिर्वाण संवत्- 2552*
*सूर्य*:- -सूर्य उत्तरायण, उत्तरगोल
*?️ऋतु* : - बसंत ऋतु
*सूर्योदय के समय तिथि,नक्षत्र,योग, करण आदि का समय* -
आज *वैशाख माह कृष्ण पक्ष नवमी तिथि* *24:37* बजे तक फिर दशमी तिथि चलेगी
? *नक्षत्र आज *उत्तराषण* नक्षत्र 13:39बजे तक फिर *श्रवण* नक्षत्र चलेगा।
*योग* :- आज *सिद्ध*
*करण* :-आज *तैतील*
*पंचक, भद्रादि* :- पंचक,भद्रा, गंडमूल नहीं हैं।
*?अग्निवास*: आज *पृथ्वी* पर है।
☄️ *दिशाशूल* : आज *पूर्व* दिशा में है।
*?राहूकाल* 09:11बजे से 10:46बजे तक
*पर्व त्यौहा* : -
*मुहूर्त* : शनि उदय रात्रि 24: 25 बजे
? *सूर्योदय समय ग्रह राशि विचार* :-
सूर्य-मीन, चन्द्र - मकर मंगल-मीन, बुध-मीन, गुरु-मिथुन, शुक्र-मेष, शनि-मीन, राहू- कुंभ,केतु-सिंह, प्लूटो-मकर ,नेप्च्यून-मीन
हर्षल-मेष में है।
*अब घर बैठे कही भी परामर्श प्राप्त करें: -* ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन मो .9425187186
*विगत 27 वर्षों से लगातार ज्योतिष के क्षेत्र में कार्यरत- *अनेक जटिल मुद्दों पर भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई। आप भी जन्म कुंडली,जन्म दिनांक,वास्तु द्वारा अपनेजीवन के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करे,* |
|
2026-04-11 06:29:19 |
|
| 76070 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*समय समीक्षा - संपूर्ण तिथि,पर्व,मुहूर्त दैनिक पंचाग*
*दिनांक 11/04/2026, शनिवार आज का पंचांग* ?
*आप का दिन मंगलमय हो*
*?सूर्योदय :- *06:00* बजे
*सूर्यास्त :- *18:44* बजे
?*चंद्रोदय*02:14बजे *चंद्रास्त* 12:31बजे
श्री विक्रमसंवत्- *2083* शाके- *1948*
*श्री वीरनिर्वाण संवत्- 2552*
*सूर्य*:- -सूर्य उत्तरायण, उत्तरगोल
*?️ऋतु* : - बसंत ऋतु
*सूर्योदय के समय तिथि,नक्षत्र,योग, करण आदि का समय* -
आज *वैशाख माह कृष्ण पक्ष नवमी तिथि* *24:37* बजे तक फिर दशमी तिथि चलेगी
? *नक्षत्र आज *उत्तराषण* नक्षत्र 13:39बजे तक फिर *श्रवण* नक्षत्र चलेगा।
*योग* :- आज *सिद्ध*
*करण* :-आज *तैतील*
*पंचक, भद्रादि* :- पंचक,भद्रा, गंडमूल नहीं हैं।
*?अग्निवास*: आज *पृथ्वी* पर है।
☄️ *दिशाशूल* : आज *पूर्व* दिशा में है।
*?राहूकाल* 09:11बजे से 10:46बजे तक
*पर्व त्यौहा* : -
*मुहूर्त* : शनि उदय रात्रि 24: 25 बजे
? *सूर्योदय समय ग्रह राशि विचार* :-
सूर्य-मीन, चन्द्र - मकर मंगल-मीन, बुध-मीन, गुरु-मिथुन, शुक्र-मेष, शनि-मीन, राहू- कुंभ,केतु-सिंह, प्लूटो-मकर ,नेप्च्यून-मीन
हर्षल-मेष में है।
*अब घर बैठे कही भी परामर्श प्राप्त करें: -* ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन मो .9425187186
*विगत 27 वर्षों से लगातार ज्योतिष के क्षेत्र में कार्यरत- *अनेक जटिल मुद्दों पर भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई। आप भी जन्म कुंडली,जन्म दिनांक,वास्तु द्वारा अपनेजीवन के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करे,* |
|
2026-04-11 06:29:19 |
|