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40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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*?दिगंम्बर जैन परवार मंदिर?*
*?नागपुर,महाराष्ट्र ?*
*आहार अपडेट*
ता. 06/04| 2026
*?संत शिरोमणी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज* के
*परम शिष्य*
*?विद्या कुल शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर जी महाराजजी*
*पडगाहन-दृष्य.*
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संकलन-
*?शांति विद्या धर्म प्रभावना संघ?* |
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2026-04-06 15:29:16 |
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| 69513 |
40449689 |
? विद्या शरणम ०१ ? |
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*नवाचार्य श्री 108 समयसागर जी यतिराज के द्वितीय आचार्य पदारोहण दिवस के उपलक्ष्य में संस्कारधानी जबलपुर की धरती पर आ रहा है -*
*✨ रत्नत्रय*
*✨ गाथा : छोटे बाबा के बड़े शिष्य की*
*☀️ जिसमें मुख्यवक्ता के रूप में आ रहे हैं - वॉइस ऑफ़ जिनशासन, यूथ आइकॉन, इंफ्लुएंसर एवं शब्दकार - Sky King Akash Jain*
? पूज्य मुनिश्री 108 निष्कंपसागर जी एवं पूज्य मुनिश्री 108 निष्कामसागर जी की प्रेरणा से जबलपुर की धरती पर आ रहा है सबसे बड़ा आध्यात्मिक शो - रत्नत्रय।
? तो याद रखिए - 16 अप्रेल 2026 रात्रि 08 बजे से
*? स्थान :* डी. एन. जैन कॉलेज ग्राउंड, जबलपुर (म.प्र.)
*☀️ आयोजक -* श्री दिगम्बर जैन संरक्षिणी सभा, जैन पंचायत सभा
*? निवेदक -* श्री पार्श्वनाथ दिग. जैन स्वर्ण मंदिर, लार्डगंज, जैन नवयुवक सभा
*? सहयोगी संस्था -* जाप मण्डल, अ.भा. दिग. जैन महिला परिषद् एवं सकल जैन समाज, जबलपुर
*? संपर्क सूत्र -* 9926361636 |
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2026-04-06 15:29:15 |
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| 69514 |
40449689 |
? विद्या शरणम ०१ ? |
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*नवाचार्य श्री 108 समयसागर जी यतिराज के द्वितीय आचार्य पदारोहण दिवस के उपलक्ष्य में संस्कारधानी जबलपुर की धरती पर आ रहा है -*
*✨ रत्नत्रय*
*✨ गाथा : छोटे बाबा के बड़े शिष्य की*
*☀️ जिसमें मुख्यवक्ता के रूप में आ रहे हैं - वॉइस ऑफ़ जिनशासन, यूथ आइकॉन, इंफ्लुएंसर एवं शब्दकार - Sky King Akash Jain*
? पूज्य मुनिश्री 108 निष्कंपसागर जी एवं पूज्य मुनिश्री 108 निष्कामसागर जी की प्रेरणा से जबलपुर की धरती पर आ रहा है सबसे बड़ा आध्यात्मिक शो - रत्नत्रय।
? तो याद रखिए - 16 अप्रेल 2026 रात्रि 08 बजे से
*? स्थान :* डी. एन. जैन कॉलेज ग्राउंड, जबलपुर (म.प्र.)
*☀️ आयोजक -* श्री दिगम्बर जैन संरक्षिणी सभा, जैन पंचायत सभा
*? निवेदक -* श्री पार्श्वनाथ दिग. जैन स्वर्ण मंदिर, लार्डगंज, जैन नवयुवक सभा
*? सहयोगी संस्था -* जाप मण्डल, अ.भा. दिग. जैन महिला परिषद् एवं सकल जैन समाज, जबलपुर
*? संपर्क सूत्र -* 9926361636 |
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2026-04-06 15:29:15 |
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| 69515 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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*?दिगंम्बर जैन परवार मंदिर?*
*?नागपुर,महाराष्ट्र ?*
*आहार अपडेट*
ता. 06/04| 2026
*?संत शिरोमणी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज* के
*परम शिष्य*
*?विद्या कुल शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर जी महाराजजी*
*पडगाहन-दृष्य.*
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संकलन-
*?शांति विद्या धर्म प्रभावना संघ?* |
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2026-04-06 15:29:15 |
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| 69512 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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2026-04-06 15:27:07 |
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| 69511 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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2026-04-06 15:27:06 |
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40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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जय जिनेन्द्र,,जैन धर्म और हिंदू धर्म भारत के संविधान के अनुसार स्पष्ट और बोहोत बोहोत स्पष्ट रूप से वर्णित है दोनो अलग अलग धर्म है हिंदू वैदिक संस्कृति को मानता है हम जैन श्रमण संस्कृति को ही मानता है और कभी भी एक नही थे ना भविष्य में हो सकते हैं लेकिन कुछ कुछ नेताओं को अहंकार हो गया है भारत मतलब हिंदू राष्ट्र वो सपना और सोच अपने तक ही रखे हम जैनों को इसकी कोई जरूरत नहीं है भारत सविधान से चलता है किसी अहंकारी नेता की सोच से नही और हमको आपकी सलाह की कोई जरूरत नहीं है भारत में जैन धर्म स्वतंत्र था है और जब तक विश्व का अस्तित्व है स्वतंत्र ही रहेगा पूरे विश्व में किसी की ताकत और हैसियत नहीं की जैन धर्म जिन शासन के ऊपर राज हिंदू राष्ट्र के नाम से राज करे जय जिनेन्द्र जय जिन शासन |
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2026-04-06 15:27:05 |
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| 69510 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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जय जिनेन्द्र,,जैन धर्म और हिंदू धर्म भारत के संविधान के अनुसार स्पष्ट और बोहोत बोहोत स्पष्ट रूप से वर्णित है दोनो अलग अलग धर्म है हिंदू वैदिक संस्कृति को मानता है हम जैन श्रमण संस्कृति को ही मानता है और कभी भी एक नही थे ना भविष्य में हो सकते हैं लेकिन कुछ कुछ नेताओं को अहंकार हो गया है भारत मतलब हिंदू राष्ट्र वो सपना और सोच अपने तक ही रखे हम जैनों को इसकी कोई जरूरत नहीं है भारत सविधान से चलता है किसी अहंकारी नेता की सोच से नही और हमको आपकी सलाह की कोई जरूरत नहीं है भारत में जैन धर्म स्वतंत्र था है और जब तक विश्व का अस्तित्व है स्वतंत्र ही रहेगा पूरे विश्व में किसी की ताकत और हैसियत नहीं की जैन धर्म जिन शासन के ऊपर राज हिंदू राष्ट्र के नाम से राज करे जय जिनेन्द्र जय जिन शासन |
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2026-04-06 15:27:05 |
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| 69507 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*हिन्दू कौन है? हिन्दू शब्द का प्रयोग राजनीति की आवश्यकतानुसार किया गया है* ....संजय जैन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘हिन्दू’ शब्द की व्याख्या अपने निर्णयों में की है।
हिन्दू शब्द के विषय में भ्रान्ति में न रहे! हिन्दू शब्द जब हिन्दू धर्म हेतु लिखा गया तब वैदिक धर्म हेतु उपयोग किया गया जब देश हेतु लिखा गया तो भारत के निवासियों हेतु प्रयोग किया गया।
जैनों को ही क्यों जबरन हिंदू धर्म का हिस्सा बताने का प्रयास क्यों किया जाता? सिख और बौद्धों को क्यों नहीं? समझो.....?
*यदि भारत के सभी निवासी हिंदू है तो जैन भी लेकिन यदि धर्म की बात करें और यदि हिन्दू धर्म है तो जैन धर्म इसका हिस्सा नहीं क्योंकि दोनों के सिद्धांत और पूजा पद्धति अलग है।*
राजनीति जैनों को अलग समझती है और जैन तीर्थों पर कब्जे का विरोध नहीं करती?
=> पंडित जवाहर लाल नेहरु ने “हिन्दू / हिंदुत्व” की व्याख्या करते हुए अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Discovery of India" में इस पोस्ट के साथ संलग्न पेज न. 74, 75 व 76 पर लिखा कि “हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु सिन्धु नदी के दूसरी तरफ के भारत के निवासियों हेतु हजार साल पहले से प्रयोग किया गया और सिन्धु नदी के कारण ही हिन्दू व हिन्दुस्तान शब्द प्रचलन में आयें!
“सनातन धर्म” का अर्थ भारत में प्राचीन समय से प्रचलित धर्मो से है! भारतीय विचारों का शत प्रतिशत उत्पाद और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा जैन धर्म व बौद्ध धर्म निश्चित रूप से वैदिक धर्म से अलग है!
भारतीयता का अर्थ हिन्द, हिंदी व हिंदुस्तान से है! हिंदी से धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! पश्चिम एशिया के देशो, ईरान, तुर्की, अफगानिस्तान द्वारा हिन्द शब्द आज भी भारत हेतु प्रयोग किया जाता है!
मुस्लिम व ईसाई भी भारत का एक नागरिक होने के कारण हिंदी है! अमेरिकन भी यदि भारत निवासी को हिंदी / हिन्दू कहे तो कुछ गलत नहीं!
=> श्री वीर विनायक राव दामोदर राव सावरकर जी ने वर्ष 1905 में अंडमान-निकोबार जेल में रहते हुआ लिखा था कि “Asindhu Sindhu Paryanta yashya Bharat Bhoomika, Pitribhu Punya Bhuschaiva Sa vai Hindu Riti Smritah”
“सिन्धु व हिन्द महासागर के बीच स्तिथ व्यापक क्षेत्र को भारत कहा गया और जो इस पवित्र तीर्थो की जमीन को अपने पुरखों की जमीन स्वीकार करें, वो सभी हिन्दू है!”
वर्ष 1923 में रत्नागिरी जेल में कैद सावरकर जी द्वारा लिखित एक हेंडबिल चोरी से जेल से बाहर लाकर देश में बांटा गया जिसमे उन्होंने “हिंदुत्व” शब्द को किसी धर्म विशेष से न जोडकर अपितु अखंड भारत हेतु प्रयोग किया था!
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि श्री प्रेम चंद गोयल जी ने रतलाम में कहा कि यह लोगो की गलत धारणा है कि हिन्दू एक धर्म है! हिंदुत्व एक जीवन शैली है!”
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि ठाकुर राम सिंह जी ने कहा कि हिन्दुस्तान के निवासियों को हिन्दू कहा गया लेकिन ब्रिटिश लोगो ने हिन्दू को एक संप्रदाय लिखा!
=> डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा था कि हिंदुत्व राष्ट्रीय एकता की पहचान का प्रतीक है!
=> श्री योगी आदित्यनाथ (पूर्व सांसद व वर्तमान मुख्यमंत्री) ने भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी को हिन्दू कहा!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 19.11.2006 को अम्बाला में “हिन्दू कौन” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुत्व भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी की आत्मा है! हिंदुत्व प्रतिएक भारतीय को बाँधने का एक मंत्र है!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 21.12.2006 को चंडीगढ़ में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु भारत की नागरिकता से सम्बंधित है! (कॉपी संलग्न)
=> I.C.H.R. के पूर्व अध्यक्ष प्रसिद्ध इतिहासकार श्री इरफ़ान ने हबीब इंडिया इंटरनेशनल में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में कहा कि इतिहास अपनेआप में गवाह है कि अरब से आने वालों ने भारत के निवासी प्रतिएक जाति, धर्म के लोगो को हिन्दुस्तानी कहा! हिन्द जो वर्तमान में हिंदुस्तान या हिन्दोस्तान कहा जाता है उसका धर्म व भाषा से कोई सम्बन्ध नहीं! भारत में रहने वाले सभी धर्मो व भाषा के लोग हिन्दुस्तानी है! (दिनांक 22.12.2006 के हिंदुस्तान समाचार पत्र कापी संलग्न)
=> सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों i) Shastri Yagna Purushadji Case {1966(3) SCR 242}, ii) Sridharan Case (1976 SCR 478) में कहा कि “इस संवैधनिक बेंच द्वारा विस्तृत सलाह के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि हिंदी, हिंदुत्व का ठीक प्रकार से उत्तरदायी अर्थ नही निकलता और भारतीय संस्कृति व धरोहर की सामग्री के बिना धर्म की संकीर्ण सीमा में भी कोई सार नहीं निकाला जा सकता!”
=> सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक 14 जनवरी, 1966 को Sastri Yagnapurushadji Vs Muldas Bhudas केस के निर्णय में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि “हिन्दू धर्म अन्य धर्मो के समान किसी धर्म विशेष से सम्बंधित नहीं, न किसी धर्म विशेष का पालन करता, किसी भगवान से सम्बंधित नहीं, किसी धर्म की मान्यताओं की पूर्ति नही करता अपितु जीवन जीने से ज्यादा कुछ नहीं है! भारत के संविधान निर्माताओं को पूर्ण संज्ञान था इसीलिए उन्होंने हिन्दू का अर्थ सिख, जैन व बौद्ध धर्म मानने वालो के सन्दर्भ सहित लिखा! |
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2026-04-06 15:27:03 |
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| 69508 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*हिन्दू कौन है? हिन्दू शब्द का प्रयोग राजनीति की आवश्यकतानुसार किया गया है* ....संजय जैन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘हिन्दू’ शब्द की व्याख्या अपने निर्णयों में की है।
हिन्दू शब्द के विषय में भ्रान्ति में न रहे! हिन्दू शब्द जब हिन्दू धर्म हेतु लिखा गया तब वैदिक धर्म हेतु उपयोग किया गया जब देश हेतु लिखा गया तो भारत के निवासियों हेतु प्रयोग किया गया।
जैनों को ही क्यों जबरन हिंदू धर्म का हिस्सा बताने का प्रयास क्यों किया जाता? सिख और बौद्धों को क्यों नहीं? समझो.....?
*यदि भारत के सभी निवासी हिंदू है तो जैन भी लेकिन यदि धर्म की बात करें और यदि हिन्दू धर्म है तो जैन धर्म इसका हिस्सा नहीं क्योंकि दोनों के सिद्धांत और पूजा पद्धति अलग है।*
राजनीति जैनों को अलग समझती है और जैन तीर्थों पर कब्जे का विरोध नहीं करती?
=> पंडित जवाहर लाल नेहरु ने “हिन्दू / हिंदुत्व” की व्याख्या करते हुए अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Discovery of India" में इस पोस्ट के साथ संलग्न पेज न. 74, 75 व 76 पर लिखा कि “हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु सिन्धु नदी के दूसरी तरफ के भारत के निवासियों हेतु हजार साल पहले से प्रयोग किया गया और सिन्धु नदी के कारण ही हिन्दू व हिन्दुस्तान शब्द प्रचलन में आयें!
“सनातन धर्म” का अर्थ भारत में प्राचीन समय से प्रचलित धर्मो से है! भारतीय विचारों का शत प्रतिशत उत्पाद और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा जैन धर्म व बौद्ध धर्म निश्चित रूप से वैदिक धर्म से अलग है!
भारतीयता का अर्थ हिन्द, हिंदी व हिंदुस्तान से है! हिंदी से धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! पश्चिम एशिया के देशो, ईरान, तुर्की, अफगानिस्तान द्वारा हिन्द शब्द आज भी भारत हेतु प्रयोग किया जाता है!
मुस्लिम व ईसाई भी भारत का एक नागरिक होने के कारण हिंदी है! अमेरिकन भी यदि भारत निवासी को हिंदी / हिन्दू कहे तो कुछ गलत नहीं!
=> श्री वीर विनायक राव दामोदर राव सावरकर जी ने वर्ष 1905 में अंडमान-निकोबार जेल में रहते हुआ लिखा था कि “Asindhu Sindhu Paryanta yashya Bharat Bhoomika, Pitribhu Punya Bhuschaiva Sa vai Hindu Riti Smritah”
“सिन्धु व हिन्द महासागर के बीच स्तिथ व्यापक क्षेत्र को भारत कहा गया और जो इस पवित्र तीर्थो की जमीन को अपने पुरखों की जमीन स्वीकार करें, वो सभी हिन्दू है!”
वर्ष 1923 में रत्नागिरी जेल में कैद सावरकर जी द्वारा लिखित एक हेंडबिल चोरी से जेल से बाहर लाकर देश में बांटा गया जिसमे उन्होंने “हिंदुत्व” शब्द को किसी धर्म विशेष से न जोडकर अपितु अखंड भारत हेतु प्रयोग किया था!
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि श्री प्रेम चंद गोयल जी ने रतलाम में कहा कि यह लोगो की गलत धारणा है कि हिन्दू एक धर्म है! हिंदुत्व एक जीवन शैली है!”
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि ठाकुर राम सिंह जी ने कहा कि हिन्दुस्तान के निवासियों को हिन्दू कहा गया लेकिन ब्रिटिश लोगो ने हिन्दू को एक संप्रदाय लिखा!
=> डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा था कि हिंदुत्व राष्ट्रीय एकता की पहचान का प्रतीक है!
=> श्री योगी आदित्यनाथ (पूर्व सांसद व वर्तमान मुख्यमंत्री) ने भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी को हिन्दू कहा!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 19.11.2006 को अम्बाला में “हिन्दू कौन” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुत्व भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी की आत्मा है! हिंदुत्व प्रतिएक भारतीय को बाँधने का एक मंत्र है!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 21.12.2006 को चंडीगढ़ में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु भारत की नागरिकता से सम्बंधित है! (कॉपी संलग्न)
=> I.C.H.R. के पूर्व अध्यक्ष प्रसिद्ध इतिहासकार श्री इरफ़ान ने हबीब इंडिया इंटरनेशनल में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में कहा कि इतिहास अपनेआप में गवाह है कि अरब से आने वालों ने भारत के निवासी प्रतिएक जाति, धर्म के लोगो को हिन्दुस्तानी कहा! हिन्द जो वर्तमान में हिंदुस्तान या हिन्दोस्तान कहा जाता है उसका धर्म व भाषा से कोई सम्बन्ध नहीं! भारत में रहने वाले सभी धर्मो व भाषा के लोग हिन्दुस्तानी है! (दिनांक 22.12.2006 के हिंदुस्तान समाचार पत्र कापी संलग्न)
=> सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों i) Shastri Yagna Purushadji Case {1966(3) SCR 242}, ii) Sridharan Case (1976 SCR 478) में कहा कि “इस संवैधनिक बेंच द्वारा विस्तृत सलाह के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि हिंदी, हिंदुत्व का ठीक प्रकार से उत्तरदायी अर्थ नही निकलता और भारतीय संस्कृति व धरोहर की सामग्री के बिना धर्म की संकीर्ण सीमा में भी कोई सार नहीं निकाला जा सकता!”
=> सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक 14 जनवरी, 1966 को Sastri Yagnapurushadji Vs Muldas Bhudas केस के निर्णय में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि “हिन्दू धर्म अन्य धर्मो के समान किसी धर्म विशेष से सम्बंधित नहीं, न किसी धर्म विशेष का पालन करता, किसी भगवान से सम्बंधित नहीं, किसी धर्म की मान्यताओं की पूर्ति नही करता अपितु जीवन जीने से ज्यादा कुछ नहीं है! भारत के संविधान निर्माताओं को पूर्ण संज्ञान था इसीलिए उन्होंने हिन्दू का अर्थ सिख, जैन व बौद्ध धर्म मानने वालो के सन्दर्भ सहित लिखा! |
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2026-04-06 15:27:03 |
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