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Message
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| 76069 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*समय समीक्षा - संपूर्ण तिथि,पर्व,मुहूर्त दैनिक पंचाग*
*दिनांक 11/04/2026, शनिवार आज का पंचांग* ?
*आप का दिन मंगलमय हो*
*?सूर्योदय :- *06:00* बजे
*सूर्यास्त :- *18:44* बजे
?*चंद्रोदय*02:14बजे *चंद्रास्त* 12:31बजे
श्री विक्रमसंवत्- *2083* शाके- *1948*
*श्री वीरनिर्वाण संवत्- 2552*
*सूर्य*:- -सूर्य उत्तरायण, उत्तरगोल
*?️ऋतु* : - बसंत ऋतु
*सूर्योदय के समय तिथि,नक्षत्र,योग, करण आदि का समय* -
आज *वैशाख माह कृष्ण पक्ष नवमी तिथि* *24:37* बजे तक फिर दशमी तिथि चलेगी
? *नक्षत्र आज *उत्तराषण* नक्षत्र 13:39बजे तक फिर *श्रवण* नक्षत्र चलेगा।
*योग* :- आज *सिद्ध*
*करण* :-आज *तैतील*
*पंचक, भद्रादि* :- पंचक,भद्रा, गंडमूल नहीं हैं।
*?अग्निवास*: आज *पृथ्वी* पर है।
☄️ *दिशाशूल* : आज *पूर्व* दिशा में है।
*?राहूकाल* 09:11बजे से 10:46बजे तक
*पर्व त्यौहा* : -
*मुहूर्त* : शनि उदय रात्रि 24: 25 बजे
? *सूर्योदय समय ग्रह राशि विचार* :-
सूर्य-मीन, चन्द्र - मकर मंगल-मीन, बुध-मीन, गुरु-मिथुन, शुक्र-मेष, शनि-मीन, राहू- कुंभ,केतु-सिंह, प्लूटो-मकर ,नेप्च्यून-मीन
हर्षल-मेष में है।
*अब घर बैठे कही भी परामर्श प्राप्त करें: -* ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन मो .9425187186
*विगत 27 वर्षों से लगातार ज्योतिष के क्षेत्र में कार्यरत- *अनेक जटिल मुद्दों पर भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई। आप भी जन्म कुंडली,जन्म दिनांक,वास्तु द्वारा अपनेजीवन के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करे,* |
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2026-04-11 06:29:19 |
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| 76070 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*समय समीक्षा - संपूर्ण तिथि,पर्व,मुहूर्त दैनिक पंचाग*
*दिनांक 11/04/2026, शनिवार आज का पंचांग* ?
*आप का दिन मंगलमय हो*
*?सूर्योदय :- *06:00* बजे
*सूर्यास्त :- *18:44* बजे
?*चंद्रोदय*02:14बजे *चंद्रास्त* 12:31बजे
श्री विक्रमसंवत्- *2083* शाके- *1948*
*श्री वीरनिर्वाण संवत्- 2552*
*सूर्य*:- -सूर्य उत्तरायण, उत्तरगोल
*?️ऋतु* : - बसंत ऋतु
*सूर्योदय के समय तिथि,नक्षत्र,योग, करण आदि का समय* -
आज *वैशाख माह कृष्ण पक्ष नवमी तिथि* *24:37* बजे तक फिर दशमी तिथि चलेगी
? *नक्षत्र आज *उत्तराषण* नक्षत्र 13:39बजे तक फिर *श्रवण* नक्षत्र चलेगा।
*योग* :- आज *सिद्ध*
*करण* :-आज *तैतील*
*पंचक, भद्रादि* :- पंचक,भद्रा, गंडमूल नहीं हैं।
*?अग्निवास*: आज *पृथ्वी* पर है।
☄️ *दिशाशूल* : आज *पूर्व* दिशा में है।
*?राहूकाल* 09:11बजे से 10:46बजे तक
*पर्व त्यौहा* : -
*मुहूर्त* : शनि उदय रात्रि 24: 25 बजे
? *सूर्योदय समय ग्रह राशि विचार* :-
सूर्य-मीन, चन्द्र - मकर मंगल-मीन, बुध-मीन, गुरु-मिथुन, शुक्र-मेष, शनि-मीन, राहू- कुंभ,केतु-सिंह, प्लूटो-मकर ,नेप्च्यून-मीन
हर्षल-मेष में है।
*अब घर बैठे कही भी परामर्श प्राप्त करें: -* ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन मो .9425187186
*विगत 27 वर्षों से लगातार ज्योतिष के क्षेत्र में कार्यरत- *अनेक जटिल मुद्दों पर भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई। आप भी जन्म कुंडली,जन्म दिनांक,वास्तु द्वारा अपनेजीवन के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करे,* |
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2026-04-11 06:29:19 |
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| 76067 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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2026-04-11 06:22:00 |
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| 76068 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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2026-04-11 06:22:00 |
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| 76065 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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2026-04-11 06:21:55 |
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| 76066 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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2026-04-11 06:21:55 |
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| 76063 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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2026-04-11 06:21:50 |
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| 76064 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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2026-04-11 06:21:50 |
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| 76062 |
47534159 |
Maharstra (kartick) |
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*आत्मचिंतन - (नं. 2582)*
**************************
*आज भगवान आदिनाथ का जन्म और दीक्षा दिवस है..*
*शनिवार, 11/04/2026*
वर्तमानकालीन चौबीस तीर्थंकरों की श्रृंखला में पहले तीर्थंकर, राजा नाभिराज और रानी मरुदेवी के पुत्र, *भगवान वृषभनाथ तथा आदिनाथ* के जन्म और दीक्षा का यह शुभ दिन है!
आदिनाथजी का जन्म कल्याणिक कौशल देश के अयोध्या नगर में इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। उन्होंने अपनी एक बेटी ब्राह्मी को गणित और अपनी दूसरी बेटी सुंदरी को व्याकरण, छंद आदि सिखाई। उन्होंने अपने बेटे भरत को अर्थशास्त्र, नाटक सिखाया; उन्होंने अपने बेटे बाहुबली को आयुर्वेद, धनुर्विद्या सिखाई। श्रावक - श्राविकाओं को असि, मसि, कृषि आदि छह कलाएं दी।
एक दिन, जब वृषभदेव राज्यसभा में सोने के सिंहासन पर बैठे थे, तब इंद्र ने अल्पायु अप्सरा नीलांजना को राज्यसभा में नृत्य करने के लिए कहा। नृत्य करते-करते उसकी मृत्यु हो गई क्योंकि उसका जीवन-चक्र समाप्त हो गया था। लेकिन इंद्र ने तुरंत उसके जैसी दूसरी अप्सरा उत्पन्न की और नृत्य को निर्बाध जारी रखा। लेकिन यह बात अवधिज्ञानी वृषभदेव की बुद्धिमान नजर से नहीं बची। नीलांजना की मृत्यु देखकर उनका मन संसार से विरक्त हो गया। सब कुछ त्याग कर उन्होंने दिगंबर दीक्षा ले ली।
युवराज श्रेयांसकुमार ने सबसे पहले उन्हें हस्तिनापुर में अक्षय तृतीया के शुभ दिन इक्षुरस का आहार दिया।
.1000 वर्षों तक ध्यान करने के बाद, महाराज वृषभदेव को केवलज्ञान प्राप्त हुआ। उनका लांछन बैल है।
14 दिन पहले योग निरोध करके, उन्होंने शुक्ल ध्यान के ज़रिए *शाश्वत मोक्ष मार्गक्रमण* किया। क्योंकि भ. वृषभदेव चतुर्थ काल के 24 तीर्थंकरों की सीरीज़ में पहले तीर्थंकर हैं, इसलिए उन्हें *भगवान आदिनाथ* भी कहा जाता है।
*॥ श्री आदिनाथ भगवान की जय ॥*
???
*( क्रमशः ) ( ता. 11/04/2026)*
*--डॉ. अजीत जे. पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9628/आ.3241) |
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2026-04-11 06:21:19 |
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| 76061 |
47534159 |
Maharstra (kartick) |
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*आत्मचिंतन - (नं. 2582)*
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*आज भगवान आदिनाथ का जन्म और दीक्षा दिवस है..*
*शनिवार, 11/04/2026*
वर्तमानकालीन चौबीस तीर्थंकरों की श्रृंखला में पहले तीर्थंकर, राजा नाभिराज और रानी मरुदेवी के पुत्र, *भगवान वृषभनाथ तथा आदिनाथ* के जन्म और दीक्षा का यह शुभ दिन है!
आदिनाथजी का जन्म कल्याणिक कौशल देश के अयोध्या नगर में इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। उन्होंने अपनी एक बेटी ब्राह्मी को गणित और अपनी दूसरी बेटी सुंदरी को व्याकरण, छंद आदि सिखाई। उन्होंने अपने बेटे भरत को अर्थशास्त्र, नाटक सिखाया; उन्होंने अपने बेटे बाहुबली को आयुर्वेद, धनुर्विद्या सिखाई। श्रावक - श्राविकाओं को असि, मसि, कृषि आदि छह कलाएं दी।
एक दिन, जब वृषभदेव राज्यसभा में सोने के सिंहासन पर बैठे थे, तब इंद्र ने अल्पायु अप्सरा नीलांजना को राज्यसभा में नृत्य करने के लिए कहा। नृत्य करते-करते उसकी मृत्यु हो गई क्योंकि उसका जीवन-चक्र समाप्त हो गया था। लेकिन इंद्र ने तुरंत उसके जैसी दूसरी अप्सरा उत्पन्न की और नृत्य को निर्बाध जारी रखा। लेकिन यह बात अवधिज्ञानी वृषभदेव की बुद्धिमान नजर से नहीं बची। नीलांजना की मृत्यु देखकर उनका मन संसार से विरक्त हो गया। सब कुछ त्याग कर उन्होंने दिगंबर दीक्षा ले ली।
युवराज श्रेयांसकुमार ने सबसे पहले उन्हें हस्तिनापुर में अक्षय तृतीया के शुभ दिन इक्षुरस का आहार दिया।
.1000 वर्षों तक ध्यान करने के बाद, महाराज वृषभदेव को केवलज्ञान प्राप्त हुआ। उनका लांछन बैल है।
14 दिन पहले योग निरोध करके, उन्होंने शुक्ल ध्यान के ज़रिए *शाश्वत मोक्ष मार्गक्रमण* किया। क्योंकि भ. वृषभदेव चतुर्थ काल के 24 तीर्थंकरों की सीरीज़ में पहले तीर्थंकर हैं, इसलिए उन्हें *भगवान आदिनाथ* भी कहा जाता है।
*॥ श्री आदिनाथ भगवान की जय ॥*
???
*( क्रमशः ) ( ता. 11/04/2026)*
*--डॉ. अजीत जे. पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9628/आ.3241) |
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2026-04-11 06:21:18 |
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