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223342 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ 2026-06-12 05:27:52
223340 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-06-12 05:27:16
223339 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-06-12 05:27:15
223338 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-06-12 05:27:14
223337 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-06-12 05:27:13
223335 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-06-12 05:27:12
223336 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-06-12 05:27:12
223333 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी जय जिनेन्द्र सभी साधर्मी स्नेहीजनों से विनम्र निवेदन है की आप अपने *जन्म दिन, वैवाहिक वर्ष गांठ, गृह प्रवेश, पुण्य स्मृति एवम मांगलिक एवम विशिष्ट* अवसरों पर अति प्राचीनतम अतिशय कारी मधुवन के तेरह पंथी कोठी के जिनालय में विराजामन *मूल नायक श्री 1008 पुष्पदंत नाथ भगवान* की प्रतिमा पर जिनवाणी चैनल के माध्यम से ऑनलाइन शान्ति धारा करवा कर वृहद धर्म प्रभावना करते हुए अक्षय पुण्य कमाए ? ? 2026-06-12 05:26:53
223334 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी जय जिनेन्द्र सभी साधर्मी स्नेहीजनों से विनम्र निवेदन है की आप अपने *जन्म दिन, वैवाहिक वर्ष गांठ, गृह प्रवेश, पुण्य स्मृति एवम मांगलिक एवम विशिष्ट* अवसरों पर अति प्राचीनतम अतिशय कारी मधुवन के तेरह पंथी कोठी के जिनालय में विराजामन *मूल नायक श्री 1008 पुष्पदंत नाथ भगवान* की प्रतिमा पर जिनवाणी चैनल के माध्यम से ऑनलाइन शान्ति धारा करवा कर वृहद धर्म प्रभावना करते हुए अक्षय पुण्य कमाए ? ? 2026-06-12 05:26:53
223332 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? ? *सभी को जय जिनेन्द्* ? एवम् परम पूज्य गुरूदेव विभंजन सागर जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद * आपके परिवार में* *सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार और स्वास्थ्य की वृद्धि हो*. ....... आज का दिन मंगलमय हो ।। * शास्त्रों में लिखा है हमे रोज़ एक नियम/त्याग लेना ही चाहिये। * सभी धर्मो में त्याग /नियम को बहुत महत्व दिया गया है । * त्याग / नियम कितना भी छोटा क्यों न हो (सिर्फ 10 मिनिट का भी) बहुत अशुभ कर्म नष्ट होते हैं। * रोज़ कुछ त्याग करने से बुरे कर्मो की निर्ज़रा (क्षय होना) होती है * नरक आयु का बंध अगर हमारा हो चुका है तो हम किसी भी तरह के नियम जीवन में नहीं ले पाते है। 12 जून 2026 दिन: शुक्रवार "" आप चाहे तो सिर्फ के लिये त्याग/नियम भी ले सकते हैं या और कोई भी नियम अपने अनुसार ले सकते है। नियम- आज *...धनिया हरी पत्ती)* खाने का त्याग है और *श्री वासुपूज्य चालीसा* पढ़ने का नियम है...."’’ ?? शहर में विराजित साधू ‰संतो के दर्शन की और निरंतराय आहार की भावना रखे और हो सके तो दर्शन करके आहार भी दें। अगर आप आज 12-06-2026 एक दिन का संकल्प करना चाहते है तो आप "नियम है।! ******************************* *श्री विमलनाथ चालीसा* सिद्ध अनंतानंत नमन कर, सरस्वती को मन में ध्याय । विमल प्रभु की विमल भक्ति कर, चरण कमल को शीश नवाय ।। जय श्री विमलनाथ विमलेश, आठो कर्म किये निःशेष । कृत वर्मा के राज दुलारे, रानी जयश्यामा के प्यारे ।। मंगलिक शुभ सपने सारे, जगजननी ने देखे न्यारे । शुक्ल चतुर्थी माघ मास की, जन्म जयंती विमलनाथ की ।। जन्मोत्सव देवों ने मनाया, विमलप्रभु शुभ नाम धराया । मेरु पर अभिषेक कराया, गंधोदक श्रद्धा से लगाया ।। वस्त्राभूषण दिव्य पहनाकर, मात पिता को सौपा आकर । साठ लाख वर्षायु प्रभु की, अवगाहना थी साठ धनुष की ।। कंचन जैसी छवि प्रभु तन की, महिमा कैसे गाऊ में उनकी । बचपन बिता, यौवन आया, पिता ने राजतिलक करवाया ।। चयन करो सुन्दर वधुओ का, आयोजन किया शुभ विवाह का । एक दिन देखि ओस घास पर, हिमकण देखे नयन प्रितीभर ।। हुआ संसर्ग सूर्य रश्मि से, लुप्त हुए सब मोती जैसे । हो विश्वास प्रभु को कैसे, खड़े रहे वे चित्रलिखित से ।। क्षणभंगुर हैं ये संसार, एक धर्म ही हैं बस सार । वैराग्य ह्रदय में समाया, छोड़े क्रोध मान और माया ।। घर पहुचे अनमने से होकर, राजपाठ निज सूत को देकर । देवभई शिविका पर चढ़कर, गए सहेतुक वन में जिनवर ।। माघ मास चतुर्थी कारी, नमः सिद्ध कह दीक्षा धारी । रचना समोशरण हितकार, दिव्य देशना हुई हितकार ।। उपशम करके मिथ्यात्व का, अनुभव करलो निज आतम का । मिथ्यातम का होय निवारण, मिटे संसार भ्रमण का कारण ।। बिन सम्यक्त्व के जप तप पूजन, निष्फल हैं सारे फल अर्चन । विषफल हैं विषयभोग सब, इनको त्यागो हेय जान अब ।। द्रव्य भाव नो कमोदी से, भिन्न है आतम देव सभी से । निश्च्य करके निज आतम का, ध्यान करो तुम परमातम का ।। ऐसी प्यारी हित की वाणी, सुनकर सुखी हुए सब प्राणी । दूर दूर तक हुआ विहार, किया सभी ने आत्मोद्धार ।। मंदर आदि पचपन गणधर, अडसठ सहस दिगंबर मुनिवर । उम्र रही जब तीस दिनों की, जा पहुचे सम्मेदशिखर जी ।। हुआ बाह्य वैभव परिहार, शेप कर्म बंधन निखार । आवागमन का कर संहार, प्रभु ने पाया मोक्षागार ।। षष्ठी कृष्ण मास आषाढ़, देव करें जिन भक्ति प्रगाढ़ । सुवीर कूट पूजे मन लाय, निर्वाणोत्सव करें हर्षाय ।। जो भावी विमल प्रभु को ध्यावे, वे सब मनवांछित फल पावे । अरुणा करती विमल स्तवन, ढीले हो जावे भव बंधन ।। ******************************* 2026-06-12 05:25:58