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223882 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-12 08:40:27
223880 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-12 08:40:25
223879 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-12 08:40:24
223878 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-12 08:40:23
223877 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-12 08:40:22
223876 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56" target="_blank">https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56</a> विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। 2026-06-12 08:40:21
223875 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56" target="_blank">https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56</a> विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। 2026-06-12 08:40:20
223874 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ?प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरवे नमो नमः? ?आचार्य गुरवे विद्यासागराय नमः? ??जयजिनेंद्रजी? ? *आज का नियम* ? ? *ऊँ ह्रीं अर्हम श्री वासुपूज्य जिनेंद्राय नमो नमः इस मंत्र की १ माला करें और अंजीर ग्रहण करने का त्याग!*? ?सपरिवार नियम पालन करने वालों को विशेष धन्यवाद ? ?भूषण जैन? ?छोटे से नियम मुक्ति कीं आशा ? ?मोक्ष जाने कीं तीव्र अभिलाषा ? *?आज का नियम पालन करने वाले कृपया नियम हैं लिखकर ग्रृप में भेजे?* *तिथि-द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण बारस (१२)* *नोट:?एक नियम भी पालन कर सकते है* 2026-06-12 08:39:23
223873 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ?प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरवे नमो नमः? ?आचार्य गुरवे विद्यासागराय नमः? ??जयजिनेंद्रजी? ? *आज का नियम* ? ? *ऊँ ह्रीं अर्हम श्री वासुपूज्य जिनेंद्राय नमो नमः इस मंत्र की १ माला करें और अंजीर ग्रहण करने का त्याग!*? ?सपरिवार नियम पालन करने वालों को विशेष धन्यवाद ? ?भूषण जैन? ?छोटे से नियम मुक्ति कीं आशा ? ?मोक्ष जाने कीं तीव्र अभिलाषा ? *?आज का नियम पालन करने वाले कृपया नियम हैं लिखकर ग्रृप में भेजे?* *तिथि-द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण बारस (१२)* *नोट:?एक नियम भी पालन कर सकते है* 2026-06-12 08:39:22
223872 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन 2026-06-12 08:37:33