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224396 40449661 SALAWA JI ✿༺ *मंगल विहार सूचना* ༻✿ *वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (37 पिच्छिका) का संभावित मंगल विहार एवं अल्प प्रवास सूचना* दिनांक *12 जून 2026* को आज *श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बेगस*, जिला जयपुर मैं विराजमान है। ? <a href="https://maps.app.goo.gl/YZNfi7Vumy6mbWn1A?g_st=ac" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/YZNfi7Vumy6mbWn1A?g_st=ac</a> ??????????? दिनांक *13 जून 2026* को प्रातः विहार 5.15 बजे से *5.6 किलोमीटर* बेगस से गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, *चक बैगास* ? <a href="https://maps.app.goo.gl/oxLs4Hs6p9ybA7eVA?g_st=ac" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/oxLs4Hs6p9ybA7eVA?g_st=ac</a> नोट:- ससंघ का 13 जून का रात्रि विश्राम यहीं होगा। ➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪ ➡️ विहार दिशा *जोबनेर की ओर* *════════════* *सूचना प्रदाता* वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार ➖➖➖➖♾➖➖➖➖ 2026-06-12 12:16:50
224393 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त जय जिनेंद्र ? ? 12ः06ः2026 ↕ ◘◘ ○ ◘◘ ○ ◘◘ *उबलते हुए पानी में अपनी परछाई तक नजर नहीं आती, उसी प्रकार यदि मन व्यथित हो, परेशान हो तो समाधान भी दिखाई नहीं देता। किन्तु एकाग्र चित्त, अपक्षपात पूर्वक, विवेक शान्ति से विचार करने पर समाधान भी शनैः शनैः निकलता जाता है।* """ *धैर्य चिंतन सद्भावना एवं व्यापक दृष्टिकोण के साथ विवेकी व्यक्ति जाग्रत विचारों को पुरुषार्थ से जोड़कर जीवन में सुख शांति व संतुष्टि को प्राप्त भी कर लेता है।* """ *चलिये लक्ष्य बढा लेते हैं, क्षमताओं को वृहद् बनाते हैं, उलझ... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188624936?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188624936?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 12:15:52
224394 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त जय जिनेंद्र ? ? 12ः06ः2026 ↕ ◘◘ ○ ◘◘ ○ ◘◘ *उबलते हुए पानी में अपनी परछाई तक नजर नहीं आती, उसी प्रकार यदि मन व्यथित हो, परेशान हो तो समाधान भी दिखाई नहीं देता। किन्तु एकाग्र चित्त, अपक्षपात पूर्वक, विवेक शान्ति से विचार करने पर समाधान भी शनैः शनैः निकलता जाता है।* """ *धैर्य चिंतन सद्भावना एवं व्यापक दृष्टिकोण के साथ विवेकी व्यक्ति जाग्रत विचारों को पुरुषार्थ से जोड़कर जीवन में सुख शांति व संतुष्टि को प्राप्त भी कर लेता है।* """ *चलिये लक्ष्य बढा लेते हैं, क्षमताओं को वृहद् बनाते हैं, उलझ... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188624936?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188624936?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 12:15:52
224391 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन 2026-06-12 12:15:47
224392 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन 2026-06-12 12:15:47
224389 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त vishal jain vishal jain begumganj जी ने कल (11th Jun) को सबसे ज्यादा सदस्यों को जोड़ा, इनके अच्छे काम के लिए इन्हें यह सम्मान पत्र दिया जा रहा है| आप भी अधिक से अधिक सदस्यों को जोड़कर सम्मान पत्र प्राप्त करें ।। vishal jain vishal jain begumganj जी की प्रोफ़ाइल - <a href="https://primetrace.com/group/7374/user/796e1ca2668f" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/user/796e1ca2668f</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188593115?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188593115?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 12:15:06
224390 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त vishal jain vishal jain begumganj जी ने कल (11th Jun) को सबसे ज्यादा सदस्यों को जोड़ा, इनके अच्छे काम के लिए इन्हें यह सम्मान पत्र दिया जा रहा है| आप भी अधिक से अधिक सदस्यों को जोड़कर सम्मान पत्र प्राप्त करें ।। vishal jain vishal jain begumganj जी की प्रोफ़ाइल - <a href="https://primetrace.com/group/7374/user/796e1ca2668f" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/user/796e1ca2668f</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188593115?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188593115?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 12:15:06
224387 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ??️ *सहज प्रेरणा* ?️? ---? *शुद्ध आत्मा का दिव्य अनुभव* जिन योगियों का मन, वचन और काया शुभ-अशुभ विकल्पों से रहित होकर परम आनन्दमयी आत्मा में स्थित हो जाता है, *वे अपने निज शुद्ध आत्मस्वरूप का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।* ✨ यह *आत्मा ब्रह्मपद अथवा निज-शुद्धात्मस्वरूप के नाम* से जानी जाती है। जो योगी राग-द्वेष से मुक्त होकर गहन समाधि के बल से इस आत्मा का ध्यान करते हैं, उन महायोगियों के प्रति मेरा हृदय बार-बार श्रद्धा और वंदना से नतमस्तक हो जाता है। ?? उन परम योगीश्वरों में *स्वसंवेदन ज्ञान (आत्मानुभूति) सहित जो महान समरसिभाव उत्पन्न होता है*, वही उनकी सर्वोच्च आध्यात्मिक अवस्था है। ??️ --- ? *समरसिभाव का लक्षण* ? ? "जिनके लिए इन्द्र और कीट दोनों समान हों, चिन्तामणि रत्न और कंकड़ दोनों समान हों, वही समरसिभाव है।" ✨ इसका तात्पर्य ? *सम्मान और अपमान में समानता।* ? *धन और निर्धनता में समानता।* ? *चिन्तामणि रत्न और कंकड़ में आसक्ति का अभाव।* ? *सुख-दुःख, लाभ-हानि, प्रिय-अप्रिय में समदृष्टि।* ? *मित्र और शत्रु के प्रति समान भाव।* ? ऐसा साधक बाहरी भेदों और परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होता। उसका चित्त सदैव आत्मा में स्थिर रहता है। --- ? *समरसिभाव का दार्शनिक स्वरूप* ? "ज्ञानादि गुण और गुणी शुद्धात्मद्रव्य – इन दोनों का एकीभावरूप परिणमन समरसिभाव है।" ? यहाँ ? *गुण = ज्ञान, दर्शन, सुख, वीर्य आदि आत्मा के स्वाभाविक गुण।* ? *गुणी = वह शुद्ध आत्मा जिसमें ये सभी गुण विद्यमान हैं।* जब साधक अनुभव करता है कि गुण और गुणी अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही शुद्ध आत्मतत्त्व की अभिव्यक्तियाँ हैं, तब जो अखण्ड आत्मानुभूति प्रकट होती है, वही समरसिभाव कहलाती है। ✨?️ --- ? *महत्वपूर्ण निष्कर्ष* ✅ *पुण्य और पाप आत्मा का वास्तविक स्वरूप नहीं हैं।* ✅ *शुद्ध चेतनस्वरूप आत्मा इन दोनों से सर्वथा भिन्न है।* ✅ *जो मुनि पुण्य-पाप से परे शुद्ध आत्मा को ध्यान का विषय बनाते हैं, वे परम ध्यान के अधिकारी होते हैं।* ✅ *ऐसे महापुरुषों की बार-बार स्तुति, वंदना और अभिनंदन किया जाता है।* ?? --- ? *सार संदेश* ? &gt; "राग-द्वेष से रहित होकर, पुण्य-पाप दोनों से परे शुद्ध आत्मा का अनुभव करना और सभी परिस्थितियों में समता बनाए रखना ही समरसिभाव है।" ✨ ? यही जैन दर्शन में उच्चतम ध्यान, समाधि और आत्मानुभूति की दिव्य अवस्था मानी गई है। ? *समता ही शांति है, समता ही साधना है, और समता ही आत्मकल्याण का मार्ग है।* ?️ ? *जय जिनेन्द्र* ? ✍️ *राजेश जैन, मैनपुरी* ?? 2026-06-12 12:14:57
224388 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ??️ *सहज प्रेरणा* ?️? ---? *शुद्ध आत्मा का दिव्य अनुभव* जिन योगियों का मन, वचन और काया शुभ-अशुभ विकल्पों से रहित होकर परम आनन्दमयी आत्मा में स्थित हो जाता है, *वे अपने निज शुद्ध आत्मस्वरूप का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।* ✨ यह *आत्मा ब्रह्मपद अथवा निज-शुद्धात्मस्वरूप के नाम* से जानी जाती है। जो योगी राग-द्वेष से मुक्त होकर गहन समाधि के बल से इस आत्मा का ध्यान करते हैं, उन महायोगियों के प्रति मेरा हृदय बार-बार श्रद्धा और वंदना से नतमस्तक हो जाता है। ?? उन परम योगीश्वरों में *स्वसंवेदन ज्ञान (आत्मानुभूति) सहित जो महान समरसिभाव उत्पन्न होता है*, वही उनकी सर्वोच्च आध्यात्मिक अवस्था है। ??️ --- ? *समरसिभाव का लक्षण* ? ? "जिनके लिए इन्द्र और कीट दोनों समान हों, चिन्तामणि रत्न और कंकड़ दोनों समान हों, वही समरसिभाव है।" ✨ इसका तात्पर्य ? *सम्मान और अपमान में समानता।* ? *धन और निर्धनता में समानता।* ? *चिन्तामणि रत्न और कंकड़ में आसक्ति का अभाव।* ? *सुख-दुःख, लाभ-हानि, प्रिय-अप्रिय में समदृष्टि।* ? *मित्र और शत्रु के प्रति समान भाव।* ? ऐसा साधक बाहरी भेदों और परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होता। उसका चित्त सदैव आत्मा में स्थिर रहता है। --- ? *समरसिभाव का दार्शनिक स्वरूप* ? "ज्ञानादि गुण और गुणी शुद्धात्मद्रव्य – इन दोनों का एकीभावरूप परिणमन समरसिभाव है।" ? यहाँ ? *गुण = ज्ञान, दर्शन, सुख, वीर्य आदि आत्मा के स्वाभाविक गुण।* ? *गुणी = वह शुद्ध आत्मा जिसमें ये सभी गुण विद्यमान हैं।* जब साधक अनुभव करता है कि गुण और गुणी अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही शुद्ध आत्मतत्त्व की अभिव्यक्तियाँ हैं, तब जो अखण्ड आत्मानुभूति प्रकट होती है, वही समरसिभाव कहलाती है। ✨?️ --- ? *महत्वपूर्ण निष्कर्ष* ✅ *पुण्य और पाप आत्मा का वास्तविक स्वरूप नहीं हैं।* ✅ *शुद्ध चेतनस्वरूप आत्मा इन दोनों से सर्वथा भिन्न है।* ✅ *जो मुनि पुण्य-पाप से परे शुद्ध आत्मा को ध्यान का विषय बनाते हैं, वे परम ध्यान के अधिकारी होते हैं।* ✅ *ऐसे महापुरुषों की बार-बार स्तुति, वंदना और अभिनंदन किया जाता है।* ?? --- ? *सार संदेश* ? &gt; "राग-द्वेष से रहित होकर, पुण्य-पाप दोनों से परे शुद्ध आत्मा का अनुभव करना और सभी परिस्थितियों में समता बनाए रखना ही समरसिभाव है।" ✨ ? यही जैन दर्शन में उच्चतम ध्यान, समाधि और आत्मानुभूति की दिव्य अवस्था मानी गई है। ? *समता ही शांति है, समता ही साधना है, और समता ही आत्मकल्याण का मार्ग है।* ?️ ? *जय जिनेन्द्र* ? ✍️ *राजेश जैन, मैनपुरी* ?? 2026-06-12 12:14:57
224386 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? <a href="https://youtube.com/shorts/CcScOf_OFog?si=GMx0jdxa2urb4qzj" target="_blank">https://youtube.com/shorts/CcScOf_OFog?si=GMx0jdxa2urb4qzj</a> 2026-06-12 12:14:34