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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 4898 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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2026-02-15 16:06:04 |
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| 4897 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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?आज के उत्तर ?क्र. १०२४
सभी प्रश्नों के उत्तर २४ घंटों में देने हे
?सभी उत्तर अ शब्द से ?
————————————
(१) सरल का दूसरा नाम
उत्तर- आसान
????????
(२) एक सिद्धक्षेत्र का नाम
उत्तर- आहार जी
????????
(३) नंदीश्वर का एक चेत्यालय
उत्तर- अंजनगिरी
????????
(४) पाँच मेरु में एक मेरु
उत्तर- अचल मेरु
????????
(५) सात तत्वों में एक
उत्तर- अजीव तत्व
????????
(६) समयसार ग्रंथ की ठीका लिखने बाले एक आचार्य
उत्तर- आ अमृतचन्द्र स्वामी
????????
(७) राजवार्तिक ग्रंथ के रचयिता
उत्तर- आ अकलंक देव
????????
(८) सिद्ध शिला में कितने सिद्ध विराजित हे
उत्तर- अनंत सिद्ध
????????
(९) साधु परमेष्ठी खड़े होकर हाथो से क्या लेते हे
उत्तर- आहार
????????
ब्र.सुनील भैया अनंतपुरा इंदौर
☎️9425963722☎️ |
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2026-02-15 16:04:35 |
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| 4896 |
40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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?आज के उत्तर ?क्र. १०२४
सभी प्रश्नों के उत्तर २४ घंटों में देने हे
?सभी उत्तर अ शब्द से ?
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(१) सरल का दूसरा नाम
उत्तर- आसान
????????
(२) एक सिद्धक्षेत्र का नाम
उत्तर- आहार जी
????????
(३) नंदीश्वर का एक चेत्यालय
उत्तर- अंजनगिरी
????????
(४) पाँच मेरु में एक मेरु
उत्तर- अचल मेरु
????????
(५) सात तत्वों में एक
उत्तर- अजीव तत्व
????????
(६) समयसार ग्रंथ की ठीका लिखने बाले एक आचार्य
उत्तर- आ अमृतचन्द्र स्वामी
????????
(७) राजवार्तिक ग्रंथ के रचयिता
उत्तर- आ अकलंक देव
????????
(८) सिद्ध शिला में कितने सिद्ध विराजित हे
उत्तर- अनंत सिद्ध
????????
(९) साधु परमेष्ठी खड़े होकर हाथो से क्या लेते हे
उत्तर- आहार
????????
ब्र.सुनील भैया अनंतपुरा इंदौर
☎️9425963722☎️ |
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2026-02-15 16:04:11 |
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| 4895 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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?आज के उत्तर ?क्र. १०२४
सभी प्रश्नों के उत्तर २४ घंटों में देने हे
?सभी उत्तर अ शब्द से ?
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(१) सरल का दूसरा नाम
उत्तर- आसान
????????
(२) एक सिद्धक्षेत्र का नाम
उत्तर- आहार जी
????????
(३) नंदीश्वर का एक चेत्यालय
उत्तर- अंजनगिरी
????????
(४) पाँच मेरु में एक मेरु
उत्तर- अचल मेरु
????????
(५) सात तत्वों में एक
उत्तर- अजीव तत्व
????????
(६) समयसार ग्रंथ की ठीका लिखने बाले एक आचार्य
उत्तर- आ अमृतचन्द्र स्वामी
????????
(७) राजवार्तिक ग्रंथ के रचयिता
उत्तर- आ अकलंक देव
????????
(८) सिद्ध शिला में कितने सिद्ध विराजित हे
उत्तर- अनंत सिद्ध
????????
(९) साधु परमेष्ठी खड़े होकर हाथो से क्या लेते हे
उत्तर- आहार
????????
ब्र.सुनील भैया अनंतपुरा इंदौर
☎️9425963722☎️ |
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2026-02-15 16:03:20 |
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40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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??वंदामी माताजी??
?????? |
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2026-02-15 16:03:12 |
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| 4892 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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<a href="https://www.facebook.com/share/r/1C8NkgvKqC/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/r/1C8NkgvKqC/</a> Sadar jai jinendra ji ki jai Ho Ho ??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-02-15 15:59:23 |
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| 4893 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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2026-02-15 15:59:23 |
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| 4891 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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लोकेशन : भिंड
श्रीफल साथी : सोनल जैन
स्लग: गौशाला सेवा जैन मिलन महिला
<a href="https://youtu.be/ucZUpi_UOTA?si=LFv0XthsnBQ3BYkb" target="_blank">https://youtu.be/ucZUpi_UOTA?si=LFv0XthsnBQ3BYkb</a> |
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2026-02-15 15:57:00 |
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| 4890 |
49335157 |
+919508494677 |
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दिगंबर जैन विकी , 'दिगजैनविकि' पर जानिए २४००+ दिगंबर जैन मुनि संघ की जानकारी और डाउनलोड कीजिये ४०००+ ग्रन्थ, जैन साहित्य , बुक्स |
हमारा दिगंबर समाज सैकड़ो साल पुराना हैं और इसने अबतक बोहोत उच्चतम कोटि के जैन संतो को निर्माण किया हैं| लेकिन इन सब की जानकारी आज किसी एक ऑनलाइन पोर्टल पे उपलब्ध नहीं हैं|
ऑनलाइन के इस युग में दिगंबर जैन विकी , 'दिगजैनविकि' ये पुणे , महाराष्ट्र से पोर्टल बनाया गया हैं.
www.digjainwiki.org
इस पोर्टल के माध्यम से अखंड दिगबंर जैन धर्म के आचार्य /मुनि /आर्यिका माताजी की जानकारी एक जगह पे लाने का प्रयास किया जा रहा है |
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दिगजैनविकी ये एक नॉन प्रॉफिट आर्गेनाइजेशन हैं और इस पोर्टल पे कोई एडवरटाइजिंग भी नहीं होती है|
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९८३४१७४९८० /9834174980
digjainwiki@gmail.com |
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2026-02-15 15:56:27 |
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| 4889 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*भव्य मंगल प्रवेश — संयम का उत्सव या प्रदर्शन की होड़?*
आजकल जैन समाज में एक नया चलन तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है—“भव्य मंगल प्रवेश”। जब किसी साधु-साध्वी का किसी नगर में आगमन होता है तो उसे अत्यंत भव्य रूप देने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। बैंड-बाजे, सजे हुए रथ, पुष्पवर्षा, बड़े-बड़े मंच, स्वागत द्वार, पोस्टर, होर्डिंग और सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण—सब कुछ ऐसा कि मानो कोई राजकीय शोभायात्रा निकल रही हो। प्रश्न यह नहीं है कि स्वागत क्यों किया जाए। स्वागत तो श्रद्धा की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। प्रश्न यह है कि क्या संयम और वैराग्य के मार्ग पर चलने वाले साधु के जीवन के साथ “भव्यता” शब्द सहज बैठता है? जैन धर्म की परंपरा हमें स्मरण कराती है कि तीर्थंकरों के वंशज माने जाने वाले मुनि तो त्याग, सादगी और अपरिग्रह के प्रतीक होते हैं। भगवान महावीर ने जब दीक्षा ली थी, तब उन्होंने राजवैभव को त्यागकर नग्नता और निर्वासन का मार्ग अपनाया था। उनका जीवन संदेश देता है कि जितनी सादगी, उतना आध्यात्मिक तेज। ऐसे में यदि किसी साधु का प्रवेश किसी नगर में राजसी ठाठ-बाट के साथ होता है तो सामान्य मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या हम साधु की महिमा बढ़ा रहे हैं या अनजाने में उन्हें भीड़ और प्रदर्शन का केंद्र बना रहे हैं? कई बार यह भी देखने में आता है कि “किसका प्रवेश अधिक भव्य रहा” यह एक प्रकार की प्रतिस्पर्धा बन जाती है। समाज के लोग महीनों तैयारी करते हैं, धन का अपार व्यय होता है, और फिर चर्चा इस बात की होती है कि कितनी गाड़ियाँ लगीं, कितना स्वागत हुआ, कितनी बड़ी शोभायात्रा निकली। क्या यह वही मार्ग है जिसकी ओर जैन साधु हमें ले जाना चाहते हैं? साधु का कर्तव्य आत्मकल्याण और लोककल्याण के लिए उपदेश देना है, न कि स्वयं को केंद्र में रखकर उत्सव का विषय बनना। सच्चे साधु तो स्वयं ऐसे आयोजनों से संकोच करते हैं और सादगी की प्रेरणा देते हैं। यदि कहीं भव्यता की होड़ दिख रही है तो हमें आत्ममंथन करना चाहिए—क्या यह समाज की श्रद्धा है या सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रदर्शन? भव्य मंगल प्रवेश यदि सीमित, मर्यादित और संयमित रूप में हो तो वह श्रद्धा का उत्सव बन सकता है, पर यदि उसमें दिखावा और प्रतिस्पर्धा प्रवेश कर जाए तो वह साधु जीवन की मूल भावना से दूर ले जाता है। हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि जैन धर्म का मूल आधार त्याग, तप और सादगी है। साधु का आगमन हमारे लिए आत्मचिंतन का अवसर होना चाहिए, न कि प्रदर्शन का मंच। यदि हम सच में साधु का सम्मान करना चाहते हैं तो उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करें, अपने जीवन में अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह को स्थान दें। वही सच्चा “मंगल प्रवेश” होगा—जब साधु हमारे नगर में नहीं, हमारे हृदय में प्रवेश करें।
नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 |
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2026-02-15 15:54:52 |
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