| 79027 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
|
|
*रविवार की दिव्य प्रभात — जब भक्ति स्वयं प्रकट हुई*
रविवार की पावन बेला में जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) मानो स्वयं देव लोक का आभास करा रहा था। भूगर्भ से अवतरित चैतन्य चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ भगवान के चरणों में जब अभिषेक एवं शांतिधारा अर्पित की गई, तब प्रत्येक बूंद केवल जल नहीं थी, बल्कि श्रद्धालुओं की आत्मा से निकली निष्कलंक भक्ति का सजीव स्वरूप थी।
जैसे ही प्रभु पर पवित्र जलधारा प्रवाहित हुई, वातावरण “नमो अरिहंताणं” की मंगल ध्वनि से गूंज उठा। हर हृदय में एक अद्भुत शांति, एक दिव्य स्पंदन अनुभव हो रहा था—मानो आत्मा स्वयं प्रभु के चरणों में समर्पित हो रही हो। उस क्षण ऐसा प्रतीत हुआ कि संसार की समस्त व्याकुलताएँ शांत होकर केवल भक्ति का अमृत ही शेष रह गया हो।
चैतन्य चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ भगवान की यह आराधना केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का दिव्य अवसर है। यह हमें स्मरण कराती है कि जब भाव सच्चे हों, तो प्रभु तक पहुँचने के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं होती—केवल निर्मल श्रद्धा ही पर्याप्त है।
इस पावन अवसर पर की गई शांतिधारा मानो समस्त जगत के लिए शांति, करुणा और कल्याण की मंगल कामना बन गई। प्रभु के चरणों में समर्पित हर भावना ने जीवन को एक नई दिशा, एक नई ऊर्जा और एक नई चेतना प्रदान की।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
|
2026-04-12 08:01:36 |
|
| 79028 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
|
|
*रविवार की दिव्य प्रभात — जब भक्ति स्वयं प्रकट हुई*
रविवार की पावन बेला में जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) मानो स्वयं देव लोक का आभास करा रहा था। भूगर्भ से अवतरित चैतन्य चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ भगवान के चरणों में जब अभिषेक एवं शांतिधारा अर्पित की गई, तब प्रत्येक बूंद केवल जल नहीं थी, बल्कि श्रद्धालुओं की आत्मा से निकली निष्कलंक भक्ति का सजीव स्वरूप थी।
जैसे ही प्रभु पर पवित्र जलधारा प्रवाहित हुई, वातावरण “नमो अरिहंताणं” की मंगल ध्वनि से गूंज उठा। हर हृदय में एक अद्भुत शांति, एक दिव्य स्पंदन अनुभव हो रहा था—मानो आत्मा स्वयं प्रभु के चरणों में समर्पित हो रही हो। उस क्षण ऐसा प्रतीत हुआ कि संसार की समस्त व्याकुलताएँ शांत होकर केवल भक्ति का अमृत ही शेष रह गया हो।
चैतन्य चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ भगवान की यह आराधना केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का दिव्य अवसर है। यह हमें स्मरण कराती है कि जब भाव सच्चे हों, तो प्रभु तक पहुँचने के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं होती—केवल निर्मल श्रद्धा ही पर्याप्त है।
इस पावन अवसर पर की गई शांतिधारा मानो समस्त जगत के लिए शांति, करुणा और कल्याण की मंगल कामना बन गई। प्रभु के चरणों में समर्पित हर भावना ने जीवन को एक नई दिशा, एक नई ऊर्जा और एक नई चेतना प्रदान की।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
|
2026-04-12 08:01:36 |
|