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223280 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *कहानी बड़ी सुहानी* (1) *कहानी* *"अधर्म का दुष्परिणाम कब"* एक गांव में एक परचून की दुकान करता था, उसके सामने ही एक हलवाई की दुकान भी थी दोनों की दुकान आमने-सामने थी इन दोनों में परचुनी तो ईमानदारी से धर्म पूर्वक सौदा बेचता था और हलवाई दूध में पानी मिलाकर बेईमानी और अधर्म पूर्वक व्यवहार करता था। थोड़े ही दिनों में हलवाई मालदार हो गया और परचुनी गरीब ही बना रहा, परचुनी इस विषय में पंडितों से प्रश्न किया करता कि धन कैसे होता है, इसका यह उत्तर कि धर्म से ही धन होता है उसके समझ में नहीं आता था क्योंकि उसका पड़ोसी हलवाई तो अधर्म करके ही मालदार हुवा था। एक दिन एक विरक्त महात्मा आए। उनसे भी परचुनी ने यही प्रश्न किया महात्मा चुप हो गए और वहीं रहने लगे कुछ दिन बाद महात्मा बोले तुम गंगा स्नान को चलो, वहां पहुंचकर महात्मा ने गंगा किनारे एक गड्ढा आदमी की ऊंचाई से गहरा तैयार कराया और परचुनी से उसके भीतर खड़े होने को कहा उसके खड़े हो जाने पर वह दूसरे आदमियों द्वारा उस गड्ढे में जल डलवाने लगे सौ दो सौ घड़ा जल डालने पर परचूनी की गर्दन तक जल आगया। इस परचुनी बोला कि अब यदि दो-चार घडे और डलवाए तो मैं डूब कर मर जाऊंगा महात्मा बोले यदि सौ घड़ा पानी डालने पर तू नहीं मारा तो दो चार घडे डलवाने से कैसे मर जाएगा। फिर उपदेश किया देखो इस जल की ही तरह जब तक पाप मनुष्य के कंठ तक रहता है तब तक पता नहीं चलता, जब आगे बढ़ता है और दम घुटने लगता है तभी उसका दुष्परिणाम जान पड़ता है, इसी प्रकार जब अधर्म उपार्जित संपत्ति को चोर चुरा लेते हैं अग्नि भस्म कर देती है अथवा रोग या मुकदमा बाजी उसे समाप्त कर देती है तभी उसका दुष्परिणाम मालूम होता है वास्तव में तो धर्म से ही धन की रक्षा होती है। **************************************** (2) *कहानी* एक बुढ़िया बड़ी सी गठरी लिए चली जा रही थी। चलते-चलते वह थक गई थी। तभी उसने देखा कि एक घुड़सवार चला आ रहा है। उसे देख बुढ़िया ने आवाज दी, ‘अरे बेटा, एक बात तो सुन।’ घुड़सवार रुक गया। उसने पूछा, ‘क्या बात है माई?’ बुढ़िया ने कहा, ‘बेटा, मुझे उस सामने वाले गांव में जाना है। बहुत थक गई हूं। यह गठरी उठाई नहीं जाती। तू भी शायद उधर ही जा रहा है।यह गठरी घोड़े पर रख ले। मुझे चलने में आसानी हो जाएगी।’ उस व्यक्ति ने कहा, ‘माई तू पैदल है। मैं घोड़े पर हूं। गांव अभी बहुत दूर है। पता नहीं तू कब तक वहां पहुंचेगी। मैं तो थोड़ी ही देर में पहुंच जाऊंगा। वहां पहुंचकर क्या तेरी प्रतीक्षा करता रहूंगा?’ यह कहकर वह चल पड़ा। कुछ ही दूर जाने के बाद उसने अपने आप से कहा, ‘तू भी कितना मूर्ख है। वह वृद्धा है, ठीक से चल भी नहीं सकती। क्या पता उसे ठीक से दिखाई भी देता हो या नहीं। तुझे गठरी दे रही थी। संभव है उस गठरी में कोई कीमती सामान हो। तू उसे लेकर भाग जाता तो कौन पूछता। चल वापस, गठरी ले ले। ‘ वह घूमकर वापस आ गया और बुढ़िया से बोला, ‘माई, ला अपनी गठरी। मैं ले चलता हूं। गांव में रुककर तेरी राह देखूंगा।’ बुढ़िया ने कहा, ‘न बेटा, अब तू जा, मुझे गठरी नहीं देनी।’ घुड़सवार ने कहा, ‘अभी तो तू कह रही थी कि ले चल। अब ले चलने को तैयार हुआ तो गठरी दे नहीं रही। ऐसा क्यों? यह उलटी बात तुझे किसने समझाई है?’ बुढ़िया मुस्कराकर बोली, ‘उसी ने समझाई है जिसने तुझे यह समझाया कि माई की गठरी ले ले। जो तेरे भीतर बैठा है वही मेरे भीतर भी बैठा है। तुझे उसने कहा कि गठरी ले और भाग जा। मुझे उसने समझाया कि गठरी न दे, नहीं तो वह भाग जाएगा। तूने भी अपने मन की आवाज सुनी और मैंने भी सुनी।’ **************************************** (3) *कहानी* *एक राजा के पास कई हाथी थे,* *लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली आज्ञाकारी,समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था।* युद्धों में वह राजा को विजय दिलाकर ही वापस लौटता था*.... *इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था।* *समय गुजरता गया ..* *और वह वृद्ध दिखने लगा।* *एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया।* *उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया।* हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा।* *राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास ईकट्ठे हो गए और विभिन्न प्रकार के प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे।* *लेकिन बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नहीं निकला..* *तभी गौतम बुद्ध मार्गभ्रमण कर रहे थे। राजा और सारा मंत्रीमंडल तथागत गौतम बुद्ध के पास गये और अनुरोध किया कि आप हमें इस विकट परिस्थिति में मार्गदर्शन करें गौतम बुद्ध ने सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ।* *सुनने वालों को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा। जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा।* *पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया।* *गौतम बुद्ध ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी।* *जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक चिंतन बनाए रखें और निराशा को हावी न होने दें...* *कभी – कभी निरंतर मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति यह मान लेता है कि अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर सकता, लेकिन यह पूर्ण सच नहीं है.....* *"सकारात्मक सोच ही आदमी को "अपनी मंजिल तक ले जाती है...।।* *आप हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण , स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें* **************************************** (4) *कहानी* *उत्तम आचरण का मूल्य अधिक है, धन संपत्ति का कम।* दो मित्र थे, मोहन और महेश। अनेक विषयों में उनके विचार मिलते थे, और किसी-किसी बात में नहीं भी मिलते थे। *(क्योंकि संसार में ऐसा देखा जाता है कि किन्हीं भी दो व्यक्तियों के विचार 100 % एक समान नहीं होते। कहीं न कहीं, कुछ-न-कुछ अंतर तो होता ही है।)* फिर भी अनेक विषयों में मोहन और महेश के विचार मिलते थे, इस कारण उनकी मित्रता बन गई। दोनों पढ़े लिखे और बुद्धिमान थे। परोपकारी स्वभाव के भी थे । दोनों में अंतर यह था कि मोहन की रुचि धन संपत्ति इकट्ठी करने में अधिक थी। परंतु महेश की रुचि उत्तम आचरण में अधिक थी। अपनी रुचि के अनुसार मोहन ने व्यापार करके धन संपत्ति जमा की, और महेश ने उत्तम आचरण करके पुण्य जमा किया। संसार के बुद्धिमान लोगों ने उन दोनों का परीक्षण किया और अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार दोनों को नंबर दिए। मोहन के नंबर कम रहे। महेश के नंबर अधिक रहे। क्या आप सोच पाएंगे, कि ऐसा क्यों हुआ? इसलिए *कि धन संपत्ति का मूल्य कम है, और उत्तम आचरण का मूल्य अधिक है। क्योंकि धन संपत्ति से सुविधाएं तो मिलती हैं, परंतु शांति नहीं मिलती। जबकि उत्तम आचरण करने से स्वयं को और दूसरों को भी शांति मिलती है।* इसलिये सुविधाओं की अपेक्षा शांति का मूल्य अधिक होने से, मोहन की अपेक्षा महेश को नंबर अधिक मिले। अब मृत्यु के बाद अगले जन्म में, ईश्वर भी उन दोनों को नंबर देगा। तो आप समझ ही गए होंगे, कि ईश्वर भी किसको नंबर कम और किसको अधिक देगा? *ईश्वर भी अगले जन्म में मोहन को नंबर और सुविधाएं कम देगा। तथा महेश को नंबर और सुविधाएं अधिक देगा। यही न्याय है।* अब आप यदि स्वयं को बुद्धिमान समझते हैं, तो विचार करें, कि *मोहन का अनुकरण किया जाए, या महेश का?* **************************************** (5) *कहानी* एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद हजारों लाखों मछलियाँ किनारे पर रेत पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं ! इस भयानक स्थिति को देखकर पास में रहने वाले एक 6 वर्ष के बच्चे से रहा नहीं गया, और वह एक एक मछली उठा कर समुद्र में वापस फेकनें लगा ! यह देख कर उसकी माँ बोली, बेटा लाखों की संख्या में है , तू कितनों की जान बचाएगा ,यह सुनकर बच्चे ने अपनी गति और बढ़ा दी, माँ फिर बोली बेटा रहनें दे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! बच्चा जोर जोर से रोने लगा और एक मछली को समुद्र में फेकतें हुए जोर से बोला- माँ ,इसको तो फ़र्क पड़ता है. दूसरी मछली को उठाता और फिर बोलता- माँ, इसको तो फ़र्क पड़ता हैं ! माँ ने बच्चे को सीने से लगा लिया ! हो सके तो लोगों को हमेशा होंसला और उम्मीद देनें की कोशिश करो, न जानें कब आपकी वजह से किसी की जिन्दगी बदल जाए! क्योंकि आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता पर 'उसको तो फ़र्क पड़ता है' ..... इस महामारी में अगर हम किसी एक को भी बचा सके तो हमारा सौभाग्य होगा। ************************************** 2026-06-12 04:55:01
223277 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी Gurudev bhkt parivar का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/948885/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=TXCOC&amp;utm_referrer_state=ADMIN" target="_blank">https://primetrace.com/group/948885/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=TXCOC&amp;utm_referrer_state=ADMIN</a> 2026-06-12 04:53:32
223278 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी Gurudev bhkt parivar का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/948885/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=TXCOC&amp;utm_referrer_state=ADMIN" target="_blank">https://primetrace.com/group/948885/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=TXCOC&amp;utm_referrer_state=ADMIN</a> 2026-06-12 04:53:32
223275 40449705 ☸️ अच्छीबातेअमृतवाणी ग्रुप *मनुष्य की सम्पत्ति ना दौलत हैं,ना धन हैं उसकी सम्पत्ति तो उसका हँसता हुआ परिवार अच्छा स्वास्थ्य शुभचिंतक मित्र और स्वयं का संतुष्ट मन हैं* *सुप्रभात* 2026-06-12 04:53:25
223276 40449705 ☸️ अच्छीबातेअमृतवाणी ग्रुप *मनुष्य की सम्पत्ति ना दौलत हैं,ना धन हैं उसकी सम्पत्ति तो उसका हँसता हुआ परिवार अच्छा स्वास्थ्य शुभचिंतक मित्र और स्वयं का संतुष्ट मन हैं* *सुप्रभात* 2026-06-12 04:53:25
223273 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ??Vandami Mataji ??? 2026-06-12 04:50:33
223274 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ??Vandami Mataji ??? 2026-06-12 04:50:33
223271 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-12 04:47:53
223272 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-12 04:47:53
223269 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-06-12 04:46:15