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77003 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ 2026-04-11 11:38:24
77004 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ 2026-04-11 11:38:24
77001 40449672 वीरसागर जी के भक्त 34 *जैनियों को बिज़नेस करना चाहिए या नौकरी जवाब चौंका देगा | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज* *YouTube पर देखें* ???? *<a href="https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*</a> *Instagram पर देखें* ? *<a href="https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*</a> *? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?* *<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> 2026-04-11 11:33:00
77002 40449672 वीरसागर जी के भक्त 34 *जैनियों को बिज़नेस करना चाहिए या नौकरी जवाब चौंका देगा | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज* *YouTube पर देखें* ???? *<a href="https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*</a> *Instagram पर देखें* ? *<a href="https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*</a> *? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?* *<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> 2026-04-11 11:33:00
77000 40449749 जिनोदय?JINODAYA *जब उपदेश मंच पर रह जाए और आचरण जीवन से गायब हो जाए — एक गंभीर प्रश्न जैन साधु समाज के लिए* “हमहिं सिखावन देत सब, पालन करत न आप। करो आचरण स्वयं तुम, काहे करत प्रलाप।।“ यह दोहा आज के समय में जितना सामान्य मनुष्य पर लागू होता है, उससे कहीं अधिक वर्तमान जैन साधु समाज के एक वर्ग पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। क्योंकि समाज साधु को केवल श्रोता नहीं, बल्कि आदर्श मानता है—एक ऐसा आदर्श, जिसका हर शब्द और हर कर्म प्रेरणा बनता है। आज मंचों पर, प्रवचनों में, धर्मसभाओं में—त्याग, संयम, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह की बड़ी-बड़ी बातें सुनने को मिलती हैं। साधु समाज लोगों को मोह-माया छोड़ने का संदेश देता है, विषयों से दूर रहने का उपदेश देता है, और सादगीपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। लेकिन प्रश्न तब खड़ा होता है, जब वही उपदेश देने वाले कुछ साधु अपने आचरण में उन सिद्धांतों से भटकते हुए दिखाई देते हैं। जब साधु स्वयं सुविधा, प्रतिष्ठा, भीड़, चकाचौंध और प्रभाव के मोह में उलझने लगें, जब आयोजन, चातुर्मास, प्रतिष्ठा महोत्सव तक “प्रबंधन” और “व्यवस्था” के नाम पर स्वार्थ और नियंत्रण के केंद्र बन जाएं—तब यह दोहा सजीव होकर सामने खड़ा हो जाता है: “पालन करत न आप…” जैन आगमों में साधु का स्वरूप अत्यंत स्पष्ट बताया गया है—वह जो राग-द्वेष से रहित हो, जो किसी प्रकार के संग्रह, मान-सम्मान या प्रभाव की इच्छा न रखे, जो केवल आत्मकल्याण और लोकहित के मार्ग पर चले। लेकिन जब व्यवहार में इसके विपरीत स्थितियाँ देखने को मिलती हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति की चूक नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज के विश्वास को हिला देती है। यह लेख किसी एक व्यक्ति या सम्पूर्ण साधु समाज की आलोचना नहीं है, बल्कि उस प्रवृत्ति पर प्रहार है, जो धीरे-धीरे धर्म के मूल स्वरूप को कमजोर कर रही है। आज आवश्यकता है आत्ममंथन की—विशेषकर उन साधुओं के लिए, जो उपदेश तो उच्च आदर्शों का देते हैं, लेकिन अपने आचरण में वही दृढ़ता नहीं दिखा पाते। समाज भी अब जागरूक हो चुका है। वह केवल शब्दों से नहीं, आचरण से प्रभावित होता है। यदि साधु का जीवन उसके उपदेश के अनुरूप नहीं है, तो उसके शब्दों का प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाता है। क्योंकि धर्म की सबसे बड़ी शक्ति “विश्वास” है, और विश्वास केवल आचरण से ही अर्जित होता है। अतः समय की मांग है कि जैन साधु समाज स्वयं इस दोहे को अपने जीवन का दर्पण बनाए। उपदेश देने से पहले अपने आचरण को उसी स्तर तक ले जाए, जहां शब्द और कर्म में कोई अंतर न रह जाए। क्योंकि जब साधु का जीवन ही उपदेश बन जाता है, तब उसे कुछ कहने की आवश्यकता नहीं रहती—उसकी प्रत्येक क्रिया ही धर्म का साक्षात स्वरूप बन जाती है। अंत में यही कहना उचित होगा—धर्म की रक्षा शब्दों से नहीं, आचरण से होती है। और जब साधु स्वयं अपने आचरण को शुद्ध और निष्कलंक बना लेते हैं, तब समाज स्वतः ही उनके पीछे चल पड़ता है। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-11 11:31:51
76999 40449749 जिनोदय?JINODAYA *जब उपदेश मंच पर रह जाए और आचरण जीवन से गायब हो जाए — एक गंभीर प्रश्न जैन साधु समाज के लिए* “हमहिं सिखावन देत सब, पालन करत न आप। करो आचरण स्वयं तुम, काहे करत प्रलाप।।“ यह दोहा आज के समय में जितना सामान्य मनुष्य पर लागू होता है, उससे कहीं अधिक वर्तमान जैन साधु समाज के एक वर्ग पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। क्योंकि समाज साधु को केवल श्रोता नहीं, बल्कि आदर्श मानता है—एक ऐसा आदर्श, जिसका हर शब्द और हर कर्म प्रेरणा बनता है। आज मंचों पर, प्रवचनों में, धर्मसभाओं में—त्याग, संयम, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह की बड़ी-बड़ी बातें सुनने को मिलती हैं। साधु समाज लोगों को मोह-माया छोड़ने का संदेश देता है, विषयों से दूर रहने का उपदेश देता है, और सादगीपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। लेकिन प्रश्न तब खड़ा होता है, जब वही उपदेश देने वाले कुछ साधु अपने आचरण में उन सिद्धांतों से भटकते हुए दिखाई देते हैं। जब साधु स्वयं सुविधा, प्रतिष्ठा, भीड़, चकाचौंध और प्रभाव के मोह में उलझने लगें, जब आयोजन, चातुर्मास, प्रतिष्ठा महोत्सव तक “प्रबंधन” और “व्यवस्था” के नाम पर स्वार्थ और नियंत्रण के केंद्र बन जाएं—तब यह दोहा सजीव होकर सामने खड़ा हो जाता है: “पालन करत न आप…” जैन आगमों में साधु का स्वरूप अत्यंत स्पष्ट बताया गया है—वह जो राग-द्वेष से रहित हो, जो किसी प्रकार के संग्रह, मान-सम्मान या प्रभाव की इच्छा न रखे, जो केवल आत्मकल्याण और लोकहित के मार्ग पर चले। लेकिन जब व्यवहार में इसके विपरीत स्थितियाँ देखने को मिलती हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति की चूक नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज के विश्वास को हिला देती है। यह लेख किसी एक व्यक्ति या सम्पूर्ण साधु समाज की आलोचना नहीं है, बल्कि उस प्रवृत्ति पर प्रहार है, जो धीरे-धीरे धर्म के मूल स्वरूप को कमजोर कर रही है। आज आवश्यकता है आत्ममंथन की—विशेषकर उन साधुओं के लिए, जो उपदेश तो उच्च आदर्शों का देते हैं, लेकिन अपने आचरण में वही दृढ़ता नहीं दिखा पाते। समाज भी अब जागरूक हो चुका है। वह केवल शब्दों से नहीं, आचरण से प्रभावित होता है। यदि साधु का जीवन उसके उपदेश के अनुरूप नहीं है, तो उसके शब्दों का प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाता है। क्योंकि धर्म की सबसे बड़ी शक्ति “विश्वास” है, और विश्वास केवल आचरण से ही अर्जित होता है। अतः समय की मांग है कि जैन साधु समाज स्वयं इस दोहे को अपने जीवन का दर्पण बनाए। उपदेश देने से पहले अपने आचरण को उसी स्तर तक ले जाए, जहां शब्द और कर्म में कोई अंतर न रह जाए। क्योंकि जब साधु का जीवन ही उपदेश बन जाता है, तब उसे कुछ कहने की आवश्यकता नहीं रहती—उसकी प्रत्येक क्रिया ही धर्म का साक्षात स्वरूप बन जाती है। अंत में यही कहना उचित होगा—धर्म की रक्षा शब्दों से नहीं, आचरण से होती है। और जब साधु स्वयं अपने आचरण को शुद्ध और निष्कलंक बना लेते हैं, तब समाज स्वतः ही उनके पीछे चल पड़ता है। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-11 11:31:50
76998 50892187 श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर जैन परिवार के सभी सदस्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना """"""""""""""""""""""'"""""""""""""""""""""""" सर्व प्रथम आप सभी को जय जिनेन्द्र। जैसा कि आप सभी को विदित होगा मध्यप्रदेश में दिनांक 14-4-2026 से जनगणना कार्य आरंभ होने जा रहा है। आप सभी को यह भी विदित होगा कि जैन समुदाय की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। यह गहन चिंतन का विषय है। इस समस्या से सुलझने का क्या उपाय है यह अलग विषय है परंतु जनगणना में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका है उसे आपके समक्ष रखता हूं। अनेक जैन परिवार अज्ञानता के कारण जनगणना फार्म में धर्म , जाति या संप्रदाय वाले कालम में जैन न लिखा कर हिन्दू लिखवा देते हैं, जिससे जैनों की संख्या कम हो जाती है। इस बार हम सभी जैन परिवार के प्रत्येक सदस्य को सजग रहकर जनगणना फार्म के संबंधित कालम में जहां धर्म, संप्रदाय, जाति या अन्य किसी भी तरह से धार्मिक मत लिखा जाना हो , उसमें आप सभी को जैन लिखना है। कृपया सावधान रहें और स्वयं देखें कि संबंधित जनगणना कार्य में संलग्न कर्मचारी ने जैन ही लिखा है। जैन के अतिरिक्त कोई उपनाम या गोत्र नहीं लिखें, केवल जैन लिखना है। आप स्वयं आनलाइन फार्म भरे, कृपया तब भी इस तथ्य का विशेष ध्यान रखें। नोट - कृपया इस संदेश को प्रत्येक जैन परिवार में व्हाट्सएप करके अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। धन्यवाद। जय जिनेन्द्र। 2026-04-11 11:31:44
76997 50892187 श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर जैन परिवार के सभी सदस्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना """"""""""""""""""""""'"""""""""""""""""""""""" सर्व प्रथम आप सभी को जय जिनेन्द्र। जैसा कि आप सभी को विदित होगा मध्यप्रदेश में दिनांक 14-4-2026 से जनगणना कार्य आरंभ होने जा रहा है। आप सभी को यह भी विदित होगा कि जैन समुदाय की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। यह गहन चिंतन का विषय है। इस समस्या से सुलझने का क्या उपाय है यह अलग विषय है परंतु जनगणना में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका है उसे आपके समक्ष रखता हूं। अनेक जैन परिवार अज्ञानता के कारण जनगणना फार्म में धर्म , जाति या संप्रदाय वाले कालम में जैन न लिखा कर हिन्दू लिखवा देते हैं, जिससे जैनों की संख्या कम हो जाती है। इस बार हम सभी जैन परिवार के प्रत्येक सदस्य को सजग रहकर जनगणना फार्म के संबंधित कालम में जहां धर्म, संप्रदाय, जाति या अन्य किसी भी तरह से धार्मिक मत लिखा जाना हो , उसमें आप सभी को जैन लिखना है। कृपया सावधान रहें और स्वयं देखें कि संबंधित जनगणना कार्य में संलग्न कर्मचारी ने जैन ही लिखा है। जैन के अतिरिक्त कोई उपनाम या गोत्र नहीं लिखें, केवल जैन लिखना है। आप स्वयं आनलाइन फार्म भरे, कृपया तब भी इस तथ्य का विशेष ध्यान रखें। नोट - कृपया इस संदेश को प्रत्येक जैन परिवार में व्हाट्सएप करके अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। धन्यवाद। जय जिनेन्द्र। 2026-04-11 11:31:43
76995 40449718 विनय गुरु ? ?? 2026-04-11 11:30:22
76996 40449718 विनय गुरु ? ?? 2026-04-11 11:30:22