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40449692 |
7 धर्म का मर्म |
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आने वाली १९ तारीख को *श्रुत पंचमी पर्व* के पावन अवसर पर सभी साधर्मी भाई बहनों को स्वाध्याय से / जिनवाणी से जोड़ने के लिए हम *आध्यात्मिक प्रतियोगिता* आयोजित कर रहे हैं
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी "धर्म का मर्म समूह" द्वारा श्रुत पंचमी पर्व के अवसर पर सभी को जिनेंद्र भगवान की देशना का रसपान कराने का प्रयत्न कर रहे है, इस साल का विषय आचार्य नेमीचन्द्र सिद्धांतदेव द्वारा रचित एक महान जैन सिद्धांत ग्रन्थ है,
*द्रव्यसंग्रह*
*जिसमें आपको इस ग्रन्थ की गाथा और इसके संबंध में वीडियो क्लास दी जाएगी और शाम को ठीक 8:30 बजे प्रश्न उत्तर पूछे जाएंगे, अगले दिन उसके परिणाम ग्रुप पर भेज दिये जाएंगे*
इस ग्रन्थ का शुरू से लेकर अंत तक पूरा सिलेबस पूर्ण होगा, और आपका इस ग्रन्थ का स्वाध्याय भी होगा।
इस ग्रन्थ में जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल द्रव्यका विस्तृत विवेचन है, इसके अंतर्गत जीव, अजीव, आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा और मोक्ष के साथ-साथ पुण्य और पाप सात तत्व, ९ पदार्थ का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है, इसमें सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र (रत्नत्रय) मोक्षमार्ग का वर्णन है, अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु (पंचपरमेष्ठी) के स्वरूप और ध्यान की विधि का वर्णन है
तो सभी तैयार हो जाइए इस प्रतियोगिता के लिए *अपने मित्र, परिवार, साधर्मी भाई बहनों को, बच्चों, युवाओं और ज्येष्टो को सूचित करें उन्हें इस ग्रुप से जोड़े* और प्रतियोगिता के लिए प्रेरित करें
इस प्रतियोगिता के माध्यम से हम जिनवाणी के आध्यात्मिक सिद्धांतों को सरलता से समझने का प्रयास करेंगे, *स्वाध्याय भी होगा, धर्म प्रभावना भी होगी, जिनवाणी की प्रभावना भी होगी*
आप सभी से निवेदन के आप *"धर्म का मर्म"* ग्रुप में जुड़िए अपने प्रियजनों को जोड़े और, परीक्षा देने के लिए प्रेरित करें
यह आपके प्रिय जनों के लिए सबसे अनमोल उपहार होगा और यह ही जिनधर्म की प्रभावना का मंगल कार्य होगा
इसमें आप बच्चों को युवाओं को और बड़ों को भी जोड़ सकते हैं, बच्चों को और युवाओं को संस्कारित करने का यह सुनहरा अवसर है, इसी मंगल भावना के साथ सादर जय जिनेंद्र
अगर आप पहले से धर्म का मर्म ग्रुप से जुड़े है तो आप को प्रतियोगिता अपने ग्रुप पर आ जाएगी,
जो अभी नए से जुड़ना चाहते है उन्हें ग्रुप से जोड़ने के लिए नीचे दी हुई लिंक आप अपने साथियों को भेजें,
<a href="https://chat.whatsapp.com/GOenXNAcaK29ziTmhZ1Gt2" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/GOenXNAcaK29ziTmhZ1Gt2</a>
*धर्म का मर्म* |
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2026-06-14 11:15:02 |
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| 229389 |
55046411 |
सुबल प्रभावना मंच ❣️SUBAL |
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<a href="https://youtu.be/tVwN-KR_-a4?si=iXEAUhV4Zjr_0yrR" target="_blank">https://youtu.be/tVwN-KR_-a4?si=iXEAUhV4Zjr_0yrR</a> |
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2026-06-14 11:11:24 |
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55046411 |
सुबल प्रभावना मंच ❣️SUBAL |
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<a href="https://youtu.be/tVwN-KR_-a4?si=iXEAUhV4Zjr_0yrR" target="_blank">https://youtu.be/tVwN-KR_-a4?si=iXEAUhV4Zjr_0yrR</a> |
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2026-06-14 11:11:24 |
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| 229387 |
47534159 |
Maharstra (kartick) |
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*प्रथमाचार्य शांतिसागरजी*
*************************
*( एपिसोड - 329*)
"""""""""""""""""""""""""""""""""""""
प्रथमाचार्य 108 श्री शांतिसागरजी महामुनिराज एक अलौकिक व्यक्तित्त्व थे। हम उनके बारे में कुछ खास जानकारी ले रहे हैं..
*54*) प्रथमाचार्य आ. श्री.108 शांतिसागरजी महामुनिराज ने अपना 80 वां साल पूरा करके 81वें साल में प्रवेश कर चुके थे, यह *हीरक जयंती महोत्सव* 12, 13, 14 जून 1952 को फलटण (सतारा - महाराष्ट्र) में पूरे भारत से आए महात्माओं, श्रावकों और श्राविकाओं के जमावड़े के साथ बहुत ही भक्तिमय माहौल में हुआ था।
इस बीच, आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा,
*"हमें घर छोड़े लगभग चालीस साल हो गए हैं आज। इन चालीस सालों में हमने अपनी पूरी काबिलियत से जिनमत का प्रचार किया है। हम केवली नहीं हैं, हम श्रुत केवली नहीं हैं। आज हमारे पास सिर्फ़ जिनवाणी है। हमें उस जिनवाणी के आधार पर चलना है। हमें उसके हर अक्षर को सच मानना है। हमें जिनवाणी की रक्षा करनी है। हमें उस के हिसाब से काम करना है। अगर दुनिया जिनवाणी के हिसाब से चलने लगे, तो इंसानियत की ऐसी कौन सी समस्या होगी जिसका शांति से हल न हो सके? दिन-ब-दिन दुनिया हिंसा और पाँच पापों की खाई में धँसती जा रही है। आज इंसान ही इंसान को खाने लगा है। बचपन में लोगों में जो ईमानदारी दिखती थी, वह आज के गंदे माहौल में गायब हो गई है। हमें पवित्र बनना चाहिए। हमें पाप नहीं करना चाहिए। तभी सारे दुख दूर होंगे।*
*" इंसान और दुनिया का भला पाप और बुद्धि के त्याग में है। इच्छा का त्याग ही दुनिया के कल्याण का एकमात्र रास्ता है। किसी और तरीके से दुनिया के संकट और दुख दूर नहीं होंगे।"*
*जैन धर्म में सही नज़रिए की बहुत बड़ी महिमा है। यह पापी बुद्धि के त्याग के बिना नहीं मिल सकती। जीवन के सार के बारे में शुद्ध विश्वास ही सही विश्वास की जड़ है। भौतिक रूप और जड़ के बारे में लालसा और भ्रम को छोड़े बिना वह विश्वास कैसे असरदार हो सकता है? उस भ्रम से छुटकारा पाने के लिए आत्मा के वचन का लगातार ध्यान करना चाहिए। इस समय में, हमारे पास वही एकमात्र रोशनी बची है। वही हमें जीवन के अंधेरे रास्ते से सही रास्ता दिखाता है। आत्मा के वचन पर विश्वास रखें, उसके अनुसार काम करने की कोशिश करें। जैन धर्म के खत्म होने का डर बेबुनियाद है। सच्चे धर्म के खत्म होने का डर कहाँ से आता है? जब तक ऋषियों की परंपरा बची रहेगी, जैन धर्म बचा रहेगा। इसमें कोई शक नहीं है। आत्मा के वचन की रक्षा करो, उसके अनुसार चलो, और ऋषियों की परंपरा को बनाए रखो।"*
..और इसीलिए प्रथमाचार्य 108 श्री शांतिसागरजी महामुनिराज अलौकिक, असामान्य, असाधारण आत्मवैभवशाली थे!
[ *प्रथमाचार्य श्री 108 शांतिसागरजी महामुनिराज (दक्षिण) आचार्य पदारोहण शताब्दी के अवसर पर..* ]
*साप्ताहिक लेख क्रमशः..*
*रविवार, 14/06/2026*
*--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9883/आ.3306) |
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2026-06-14 11:10:59 |
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47534159 |
Maharstra (kartick) |
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*प्रथमाचार्य शांतिसागरजी*
*************************
*( एपिसोड - 329*)
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प्रथमाचार्य 108 श्री शांतिसागरजी महामुनिराज एक अलौकिक व्यक्तित्त्व थे। हम उनके बारे में कुछ खास जानकारी ले रहे हैं..
*54*) प्रथमाचार्य आ. श्री.108 शांतिसागरजी महामुनिराज ने अपना 80 वां साल पूरा करके 81वें साल में प्रवेश कर चुके थे, यह *हीरक जयंती महोत्सव* 12, 13, 14 जून 1952 को फलटण (सतारा - महाराष्ट्र) में पूरे भारत से आए महात्माओं, श्रावकों और श्राविकाओं के जमावड़े के साथ बहुत ही भक्तिमय माहौल में हुआ था।
इस बीच, आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा,
*"हमें घर छोड़े लगभग चालीस साल हो गए हैं आज। इन चालीस सालों में हमने अपनी पूरी काबिलियत से जिनमत का प्रचार किया है। हम केवली नहीं हैं, हम श्रुत केवली नहीं हैं। आज हमारे पास सिर्फ़ जिनवाणी है। हमें उस जिनवाणी के आधार पर चलना है। हमें उसके हर अक्षर को सच मानना है। हमें जिनवाणी की रक्षा करनी है। हमें उस के हिसाब से काम करना है। अगर दुनिया जिनवाणी के हिसाब से चलने लगे, तो इंसानियत की ऐसी कौन सी समस्या होगी जिसका शांति से हल न हो सके? दिन-ब-दिन दुनिया हिंसा और पाँच पापों की खाई में धँसती जा रही है। आज इंसान ही इंसान को खाने लगा है। बचपन में लोगों में जो ईमानदारी दिखती थी, वह आज के गंदे माहौल में गायब हो गई है। हमें पवित्र बनना चाहिए। हमें पाप नहीं करना चाहिए। तभी सारे दुख दूर होंगे।*
*" इंसान और दुनिया का भला पाप और बुद्धि के त्याग में है। इच्छा का त्याग ही दुनिया के कल्याण का एकमात्र रास्ता है। किसी और तरीके से दुनिया के संकट और दुख दूर नहीं होंगे।"*
*जैन धर्म में सही नज़रिए की बहुत बड़ी महिमा है। यह पापी बुद्धि के त्याग के बिना नहीं मिल सकती। जीवन के सार के बारे में शुद्ध विश्वास ही सही विश्वास की जड़ है। भौतिक रूप और जड़ के बारे में लालसा और भ्रम को छोड़े बिना वह विश्वास कैसे असरदार हो सकता है? उस भ्रम से छुटकारा पाने के लिए आत्मा के वचन का लगातार ध्यान करना चाहिए। इस समय में, हमारे पास वही एकमात्र रोशनी बची है। वही हमें जीवन के अंधेरे रास्ते से सही रास्ता दिखाता है। आत्मा के वचन पर विश्वास रखें, उसके अनुसार काम करने की कोशिश करें। जैन धर्म के खत्म होने का डर बेबुनियाद है। सच्चे धर्म के खत्म होने का डर कहाँ से आता है? जब तक ऋषियों की परंपरा बची रहेगी, जैन धर्म बचा रहेगा। इसमें कोई शक नहीं है। आत्मा के वचन की रक्षा करो, उसके अनुसार चलो, और ऋषियों की परंपरा को बनाए रखो।"*
..और इसीलिए प्रथमाचार्य 108 श्री शांतिसागरजी महामुनिराज अलौकिक, असामान्य, असाधारण आत्मवैभवशाली थे!
[ *प्रथमाचार्य श्री 108 शांतिसागरजी महामुनिराज (दक्षिण) आचार्य पदारोहण शताब्दी के अवसर पर..* ]
*साप्ताहिक लेख क्रमशः..*
*रविवार, 14/06/2026*
*--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9883/आ.3306) |
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2026-06-14 11:10:59 |
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| 229386 |
40449680 |
श्री हुमड़ जैन समाज, पुणे |
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Happy birthday Milind ji |
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2026-06-14 11:08:47 |
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| 229385 |
40449680 |
श्री हुमड़ जैन समाज, पुणे |
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Happy birthday Milind ji |
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2026-06-14 11:08:46 |
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| 229383 |
40449697 |
हथकरघा शांतिधारा पूर्णायु 1 |
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*अहिंसक हस्त निर्मित सुंदर व आकर्षक सिले हुए धोती दुप्पटा भी उपलब्ध है अब आने वाले चातुर्मास मे जिनको रेडीमेड पहनना है उनके लिए सभी साइज उपलब्ध है, शीघ्र सम्पर्क करे अलग अलग रंगो की डिज़ाइन मे, सम्पर्क सूत्र:9893112665* |
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2026-06-14 11:07:33 |
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40449697 |
हथकरघा शांतिधारा पूर्णायु 1 |
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*अहिंसक हस्त निर्मित सुंदर व आकर्षक सिले हुए धोती दुप्पटा भी उपलब्ध है अब आने वाले चातुर्मास मे जिनको रेडीमेड पहनना है उनके लिए सभी साइज उपलब्ध है, शीघ्र सम्पर्क करे अलग अलग रंगो की डिज़ाइन मे, सम्पर्क सूत्र:9893112665* |
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2026-06-14 11:07:33 |
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50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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*हद उसके लिए पार करो*,
*जिसके लिए आप*....
*बे हद हों*...... ?
जय जिनेंद्र??
*अनुपमा जैन सुरत्न* |
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2026-06-14 11:02:44 |
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