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Chat Name
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Message
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40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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Vidya purn dharm parbhawna ke sabhi sedsio ko sader jai jaiender विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-11 08:31:25 |
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| 76492 |
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आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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Vidya purn dharm parbhawna ke sabhi sedsio ko sader jai jaiender विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-11 08:31:25 |
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| 76489 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*आगम में सत्य बोलने का प्रावधान नहीं है*_
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 10/4/26, नागपुर
???
*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a>
_(देखें 9.10 से 12.39 तक)_
????
अविकल्पी है वह
दृढ़-संकल्पी मानव
*अर्थहीन जल्पन*
*अत्यल्प भी जिसे*
*रुचता नहीं कभी !*
- _मूकमाटी :: २७_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-11 08:31:20 |
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| 76490 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*आगम में सत्य बोलने का प्रावधान नहीं है*_
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 10/4/26, नागपुर
???
*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a>
_(देखें 9.10 से 12.39 तक)_
????
अविकल्पी है वह
दृढ़-संकल्पी मानव
*अर्थहीन जल्पन*
*अत्यल्प भी जिसे*
*रुचता नहीं कभी !*
- _मूकमाटी :: २७_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-11 08:31:20 |
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| 76487 |
40449783 |
DJW All India Vihar Info |
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एक ऐसे महामना, भव्य पुण्यात्मा—जिनका जन्म भी तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर संयोगवश हुआ।
1008 श्री धर्मनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक दिवस के पावन अवसर से यह अद्भुत संयोग जुड़ा रहा कि दीक्षा के पश्चात उनका नाम भी श्री धर्मसागर जी हुआ।
अंतर्विलय समाधि
*वैशाख कृष्ण नवमी, विक्रम* *संवत 2044 (सन 1987)*
स्थान: *सीकर, राजस्थान*
श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक के पावन दिन—ऐसे दिव्य पुण्यात्मा, जिनका जन्म तथा समाधि दोनों ही तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर हुए।
*तृतीय पट्टाचार्य, आचार्य श्री 108 धर्मसागर जी महाराज के 39वें समाधि अंतर्विलय वर्ष पर*—
*कोटिशः नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु…*
?????? |
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2026-04-11 08:31:00 |
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| 76488 |
40449783 |
DJW All India Vihar Info |
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एक ऐसे महामना, भव्य पुण्यात्मा—जिनका जन्म भी तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर संयोगवश हुआ।
1008 श्री धर्मनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक दिवस के पावन अवसर से यह अद्भुत संयोग जुड़ा रहा कि दीक्षा के पश्चात उनका नाम भी श्री धर्मसागर जी हुआ।
अंतर्विलय समाधि
*वैशाख कृष्ण नवमी, विक्रम* *संवत 2044 (सन 1987)*
स्थान: *सीकर, राजस्थान*
श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक के पावन दिन—ऐसे दिव्य पुण्यात्मा, जिनका जन्म तथा समाधि दोनों ही तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर हुए।
*तृतीय पट्टाचार्य, आचार्य श्री 108 धर्मसागर जी महाराज के 39वें समाधि अंतर्विलय वर्ष पर*—
*कोटिशः नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु…*
?????? |
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2026-04-11 08:31:00 |
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| 76485 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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_*आगम में सत्य बोलने का प्रावधान नहीं है*_
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 10/4/26, नागपुर
???
*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a>
_(देखें 9.10 से 12.39 तक)_
????
अविकल्पी है वह
दृढ़-संकल्पी मानव
*अर्थहीन जल्पन*
*अत्यल्प भी जिसे*
*रुचता नहीं कभी !*
- _मूकमाटी :: २७_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-11 08:30:55 |
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| 76486 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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_*आगम में सत्य बोलने का प्रावधान नहीं है*_
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 10/4/26, नागपुर
???
*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a>
_(देखें 9.10 से 12.39 तक)_
????
अविकल्पी है वह
दृढ़-संकल्पी मानव
*अर्थहीन जल्पन*
*अत्यल्प भी जिसे*
*रुचता नहीं कभी !*
- _मूकमाटी :: २७_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-11 08:30:55 |
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| 76484 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*? सिद्धम नमः ?*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*?✍️सच्चा राही ✍️?*
*????✍️कहानी सभी के काम की*
*??? कर्म का दर्पण ✍️?*
*?????↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना?*
*??????? वैशाख कृष्ण 9, 11 अप्रैल शनिवार 2026 कलि काल के 20 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शनि की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार के शुभ आचरण से सम्पन्न हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*??????? वैशाख कृष्ण 10, 12 अप्रैल रविवार 2026 कलि काल के 20 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शनि की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार के शुभ आचरण से सम्पन्न हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*? अप्रैल 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,04,11,12,16,18,22 ,24 व 26 अप्रैल को कल्याणक महोत्सव है। ?✅विशेष :- 16,18,22 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने अप्रैल माह में तीन बार निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*?????? शुद्ध विवाह मुहूर्त 15,20,21,27,28,29 अप्रैल को मुहूर्त है। ?? वाहन खरीद मुहूर्त 1,2,3,6,12,13,24,29 को है।?? प्रापर्टी मुहूर्त 09,10,16,17,23 फरवरी को है।✅? गृह प्रवेश मुहूर्त 2,3,4,10,12,15,23,24,29 अप्रैल को है।*
*?✍️ पंचक 12 से 17 अप्रैल को है।*
*?यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*कर्म का दर्पण*
संसार विशाल है। मनुष्य के अतिरिक्त असंख्य प्रकार के प्राणी—पशु, पक्षी, कीट, वृक्ष, जलचर और वनस्पतियाँ—इस सृष्टि का हिस्सा हैं। जब कोई व्यक्ति गहराई से इस विविधता को देखता है, तो उसके मन में एक प्रश्न उठता है—
*आख़िर यह भिन्नता क्यों?*
कोई बुद्धिमान मनुष्य के रूप में जन्म लेता है, तो कोई सीमित चेतना वाले शरीर में। चिंतन करने पर समझ आता है कि यह सब कर्मफल की व्यवस्था है
⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*?️?✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️????अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र रजिस्टर संस्था के ? W 9057115335 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️
*—जैसा कर्म, वैसा फल।*
एक छोटे से नगर में आरव नाम का युवक रहता था। वह अक्सर जीवन की असमानताओं को देखकर उलझन में पड़ जाता। एक दिन उसने अपने दादा जी से पूछा, “दादा जी, कोई सुखी क्यों है और कोई दुखी क्यों? क्या यह केवल भाग्य है?”
दादा जी मुस्कुराए और बोले, “बेटा, यह भाग्य नहीं, कर्मों का लेखा-जोखा है। मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ इसलिए है क्योंकि इसमें बुद्धि, वाणी और कर्म करने की स्वतंत्रता है। यही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है।”
उन्होंने समझाया, “जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है—सत्य बोलता है, दूसरों की सहायता करता है, धर्म और सदाचार का पालन करता है—उसे श्रेष्ठ जन्म, अच्छा परिवार, स्वस्थ शरीर और सुविधाएँ मिलती हैं। पर जो बुरे कर्म करता है, उसे निम्न योनियों में जन्म लेकर सीमित सुख और अधिक कष्ट भोगने पड़ते हैं।”
आरव ध्यान से सुनता रहा। दादा जी ने आगे कहा, “मनुष्य जीवन अवसर है—उन्नति का, आत्मविकास का, और अंततः मोक्ष की ओर बढ़ने का। अन्य प्राणियों के पास वह विशेष बुद्धि और स्वतंत्रता नहीं, जो मनुष्य को मिली है। इसलिए हमें अपने हर कर्म के प्रति सजग रहना चाहिए।”
आरव ने पूछा, “पर दादा जी, लोग बुरे काम क्यों कर लेते हैं?”
दादा जी गंभीर हो गए। बोले, “क्योंकि वे कर्मों की न्याय व्यवस्था को भूल जाते हैं। कर्म निष्पक्ष और पूर्ण न्यायकारी है। वह सज्जनों को सुख देता है और दुष्टों को दंड। इस संसार का नियम है—दंड के बिना कोई सुधरता नहीं। इसलिए बुद्धिमान वही है, जो दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने अंत:करण की शुद्धता से अच्छे कर्म करे।”
उस दिन आरव के मन में एक परिवर्तन आया। उसने निश्चय किया कि वह हर कार्य ईश्वर को साक्षी मानकर करेगा। उसने छोटे-छोटे अच्छे कार्यों से शुरुआत की—माता-पिता का सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता, सत्य का पालन, और अपने व्यवहार में विनम्रता।
धीरे-धीरे उसके जीवन में शांति और संतोष बढ़ने लगा। उसे समझ में आ गया कि सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों की नींव पर खड़े जीवन में है। मनुष्य जीवन केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि योग और उन्नति के लिए है।
इस कहानी का सार यही है
*मनुष्य जन्म दुर्लभ और अमूल्य है। इसे व्यर्थ मत गंवाइए। हर कर्म सोच-समझकर कीजिए। यदि हम ईश्वर को साक्षी मानकर न्याय और सदाचार का पालन करेंगे, तो न केवल इस जीवन में सुख पाएंगे, बल्कि आत्मिक उन्नति की राह पर भी आगे बढ़ेंगे।*
जैसा कि स्वामी विवेकानन्द ने कहा था—
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।” हमारा लक्ष्य केवल सांसारिक सुख नहीं, बल्कि श्रेष्ठ कर्मों द्वारा आत्मोन्नति और परम शांति की प्राप्ति होना चाहिए।
*????✍️➡️?️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
????????
*जैनम जयतु शासनम*
???????? |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*? सिद्धम नमः ?*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*?✍️सच्चा राही ✍️?*
*????✍️कहानी सभी के काम की*
*??? कर्म का दर्पण ✍️?*
*?????↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना?*
*??????? वैशाख कृष्ण 9, 11 अप्रैल शनिवार 2026 कलि काल के 20 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शनि की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार के शुभ आचरण से सम्पन्न हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*??????? वैशाख कृष्ण 10, 12 अप्रैल रविवार 2026 कलि काल के 20 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शनि की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार के शुभ आचरण से सम्पन्न हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*? अप्रैल 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,04,11,12,16,18,22 ,24 व 26 अप्रैल को कल्याणक महोत्सव है। ?✅विशेष :- 16,18,22 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने अप्रैल माह में तीन बार निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*?????? शुद्ध विवाह मुहूर्त 15,20,21,27,28,29 अप्रैल को मुहूर्त है। ?? वाहन खरीद मुहूर्त 1,2,3,6,12,13,24,29 को है।?? प्रापर्टी मुहूर्त 09,10,16,17,23 फरवरी को है।✅? गृह प्रवेश मुहूर्त 2,3,4,10,12,15,23,24,29 अप्रैल को है।*
*?✍️ पंचक 12 से 17 अप्रैल को है।*
*?यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*कर्म का दर्पण*
संसार विशाल है। मनुष्य के अतिरिक्त असंख्य प्रकार के प्राणी—पशु, पक्षी, कीट, वृक्ष, जलचर और वनस्पतियाँ—इस सृष्टि का हिस्सा हैं। जब कोई व्यक्ति गहराई से इस विविधता को देखता है, तो उसके मन में एक प्रश्न उठता है—
*आख़िर यह भिन्नता क्यों?*
कोई बुद्धिमान मनुष्य के रूप में जन्म लेता है, तो कोई सीमित चेतना वाले शरीर में। चिंतन करने पर समझ आता है कि यह सब कर्मफल की व्यवस्था है
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*?️?✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️????अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र रजिस्टर संस्था के ? W 9057115335 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*—जैसा कर्म, वैसा फल।*
एक छोटे से नगर में आरव नाम का युवक रहता था। वह अक्सर जीवन की असमानताओं को देखकर उलझन में पड़ जाता। एक दिन उसने अपने दादा जी से पूछा, “दादा जी, कोई सुखी क्यों है और कोई दुखी क्यों? क्या यह केवल भाग्य है?”
दादा जी मुस्कुराए और बोले, “बेटा, यह भाग्य नहीं, कर्मों का लेखा-जोखा है। मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ इसलिए है क्योंकि इसमें बुद्धि, वाणी और कर्म करने की स्वतंत्रता है। यही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है।”
उन्होंने समझाया, “जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है—सत्य बोलता है, दूसरों की सहायता करता है, धर्म और सदाचार का पालन करता है—उसे श्रेष्ठ जन्म, अच्छा परिवार, स्वस्थ शरीर और सुविधाएँ मिलती हैं। पर जो बुरे कर्म करता है, उसे निम्न योनियों में जन्म लेकर सीमित सुख और अधिक कष्ट भोगने पड़ते हैं।”
आरव ध्यान से सुनता रहा। दादा जी ने आगे कहा, “मनुष्य जीवन अवसर है—उन्नति का, आत्मविकास का, और अंततः मोक्ष की ओर बढ़ने का। अन्य प्राणियों के पास वह विशेष बुद्धि और स्वतंत्रता नहीं, जो मनुष्य को मिली है। इसलिए हमें अपने हर कर्म के प्रति सजग रहना चाहिए।”
आरव ने पूछा, “पर दादा जी, लोग बुरे काम क्यों कर लेते हैं?”
दादा जी गंभीर हो गए। बोले, “क्योंकि वे कर्मों की न्याय व्यवस्था को भूल जाते हैं। कर्म निष्पक्ष और पूर्ण न्यायकारी है। वह सज्जनों को सुख देता है और दुष्टों को दंड। इस संसार का नियम है—दंड के बिना कोई सुधरता नहीं। इसलिए बुद्धिमान वही है, जो दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने अंत:करण की शुद्धता से अच्छे कर्म करे।”
उस दिन आरव के मन में एक परिवर्तन आया। उसने निश्चय किया कि वह हर कार्य ईश्वर को साक्षी मानकर करेगा। उसने छोटे-छोटे अच्छे कार्यों से शुरुआत की—माता-पिता का सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता, सत्य का पालन, और अपने व्यवहार में विनम्रता।
धीरे-धीरे उसके जीवन में शांति और संतोष बढ़ने लगा। उसे समझ में आ गया कि सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों की नींव पर खड़े जीवन में है। मनुष्य जीवन केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि योग और उन्नति के लिए है।
इस कहानी का सार यही है
*मनुष्य जन्म दुर्लभ और अमूल्य है। इसे व्यर्थ मत गंवाइए। हर कर्म सोच-समझकर कीजिए। यदि हम ईश्वर को साक्षी मानकर न्याय और सदाचार का पालन करेंगे, तो न केवल इस जीवन में सुख पाएंगे, बल्कि आत्मिक उन्नति की राह पर भी आगे बढ़ेंगे।*
जैसा कि स्वामी विवेकानन्द ने कहा था—
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।” हमारा लक्ष्य केवल सांसारिक सुख नहीं, बल्कि श्रेष्ठ कर्मों द्वारा आत्मोन्नति और परम शांति की प्राप्ति होना चाहिए।
*????✍️➡️?️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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2026-04-11 08:30:49 |
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