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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*?✍️सच्चा राही ✍️?*
*????✍️कहानी सभी के काम की*
*??? प्रेरणास्त्रोत ✍️?*
*?????↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना?*
*??????? फाल्गुन शाश्वत तिथि चतुर्दशी, 16 फरवरी सोमवार 2025 कलि काल के 12 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री वासुपूज्य भगवान जी जिनकी आराधना से मंगल की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार के मंगल से सम्पन्न हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री वासुपूज्य श भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*? फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,10,13,14,16,17,22,23 व 24 फरवरी (10 व11 को नवमी तिथि और 23 को षष्ठी तिथि का क्षय सप्तमी तिथि मान्य होगी )तारीख को कल्याणक महोत्सव है। ?✅विशेष :- 5,8,14, 22,23 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*??????इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24 फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को है।*
*?? अष्टान्हिका महापर्व 24 फरवरी से प्रारंभ है।*
*?????? शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21 फरवरी माह में मुहूर्त है। ?? वाहन खरीद मुहूर्त 1,6,18, 26,27 फरवरी को है।?? प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅? गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*?✍️ पंचक 23 से 26 जनवरी को है।*
*?यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*प्रेरणास्त्रोत*
आज हम सभी के जीवन कोई ना कोई प्रेरणास्त्रोत होता ही है। जिनकी प्रेरणा से हम बहुत कुछ सीख कर इंसानियत को समझकर जीवन सार्थक कर सकते है।
*एक प्रेरक अनुभव, एक गहरी सीख*
सुख की खोज में मनुष्य सदियों से भटकता आया है। कुछ को लगता है कि धन में सुख है, कुछ को मान-सम्मान में, और कुछ को पद-प्रतिष्ठा में। लेकिन सच्चा सुख वहां नहीं होता जहां हम उसे ढूंढते हैं — वह तो भीतर की स्थिति है। संतोष ही वह कुंजी है जो मनुष्य को स्थायी प्रसन्नता प्रदान करती है।
असंतोषी व्यक्ति के पास चाहे जितनी भी सुविधाएं हों, वह कभी संतुष्ट नहीं रह सकता। सुख इस पर निर्भर नहीं करता कि हमारे पास क्या है, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि हम उसमें कितना संतोष अनुभव करते हैं। सोने के महल में भी मनुष्य दुःखी हो सकता है यदि इच्छाओं की भूख कभी शांत न हो, और एक साधारण झोपड़ी में भी व्यक्ति परम आनंद पा सकता है यदि वह "जो है, वही पर्याप्त है" की भावना रखता हो।
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*?️?✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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आप लोग यदि *"कौन बनेगा करोढपति"* सीरियल देखते थे तो आपने एक एपिसोड में यह जरूर देखा होगा ।
"फास्टेस्ट फिंगर" राउंड में सबसे तेज़ जवाब देकर डॉ. नीरज सक्सेना, एक वैज्ञानिक व कुलपति, हॉट सीट पर पहुंचे। शांत, गंभीर और सौम्य स्वभाव वाले नीरज जी का परिचय ही इतना प्रभावशाली था — उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्व के साथ कार्य किया था।
नीरज जी ने खेल शुरू किया। आत्मविश्वास के साथ उन्होंने कुछ प्रश्नों का उत्तर दिया, और ₹3,20,000 की राशि जीत ली। खेल में उनकी तीन लाइफलाइन भी शेष थीं, और उनके ज्ञान को देखते हुये आगे बढ़कर करोड़पति बनने की पूरी संभावना थी।
लेकिन जब ब्रेक के बाद अमिताभ बच्चन ने अगला सवाल पेश करने के लिए कहा, तो नीरज जी ने एक चौंकाने वाला निर्णय लिया — *"मैं क्विट करना चाहूंगा, सर।"*
अमिताभ जी और दर्शक स्तब्ध रह गए। इतने अच्छे खेल और साधनों के बावजूद, वे क्यों रुकना चाहते थे? उनका उत्तर अत्यंत सरल, पर गहन था — "अन्य खिलाड़ी प्रतीक्षा कर रहे हैं, वे मुझसे छोटे हैं, उन्हें भी एक मौका मिलना चाहिए। मैंने पर्याप्त जीत लिया है। _*मुझे और की आवश्यकता नहीं है।"*_
यह केवल त्याग नहीं था, यह सच्चा संतोष था। यह समझना कि दूसरों को अवसर देना भी एक महान कार्य है। नीरज जी के निर्णय ने मंच पर मौन भर दिया, फिर तालियों की गड़गड़ाहट में बदल गया।
उनके हटने के बाद जो लड़की हॉट सीट पर पहुंची, उसकी कहानी और भी भावुक थी — “मेरे पिता ने मेरी मां और हमें इसलिए घर से निकाल दिया क्योंकि हम तीन बेटियां हैं। अब हम अनाथालय में रहते हैं...” उस दिन नीरज जी ने सिर्फ खेल नहीं छोड़ा, बल्कि किसी जरूरतमंद को जीवन बदलने का अवसर दे दिया।
*सीख* : यह घटना केवल एक खेल शो की कहानी नहीं, बल्कि जीवन का आईना है। आज जब लोग विरासत के लिए अपनों से झगड़ते हैं, जब पैसा रिश्तों से बड़ा बन गया है, तब डॉ. नीरज सक्सेना जैसे लोग समाज को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं।
संतोष का भाव न केवल आत्मा को शांति देता है, बल्कि समाज को भी सुंदर बनाता है। जब हमारी आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं, तब रुक जाना चाहिए। अपनी इच्छाओं की सीमा तय कर, दूसरों के लिए स्थान छोड़ना ही मानवता का असली रूप है। डॉ नीरज ने बताया कि मैं डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्व के साथ कार्य कर चुका उन्होंने जो भी किया भारत वासियों के विकास के लिए किया। उन्होंने बड़े पद पर कार्यरत होने के बावजूद जैन धर्म का एक सूत्र अपने जीवन में उतारा *जियो और जीने दो* राष्ट के सर्वोच्च पद पर बैठने के बाद भी उन्होंने स्वयं के लिए किसी प्रकार का परिग्रह नहीं जोड़ा।बस वें सभी भारतवासीयो के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बनकर इंसानियत को जिंदा रखा।
डॉ. नीरज का यह उदाहरण हमें सिखाता है कि धन की नहीं, मन की संपन्नता सुख का आधार है। अगर समाज में अधिक लोग “मुझे और नहीं चाहिए” कहने लगें, तो यह दुनिया और भी सुंदर बन सकती है।
*विशेष: हमारे जीवन में भी कोई एक प्रेरणास्त्रोत होना चाहिए जिसकी प्रेरणा से हम इंसानियत को समझकर जीवन सार्थक करें। अंततः संतोष ही सुख की सबसे सच्ची परिभाषा है। संतोषी बनें, और जीवन को सुखमय बनाएं।*
*????✍️➡️?️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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2026-02-15 22:10:21 |
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