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9568 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर ????????????? 2026-02-19 04:47:46
9567 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर ??namostu namostu namostu Bhagavan namostu namostu girudevji vadami mataji .Jai jinendraji .???? 2026-02-19 04:47:07
9566 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म ?? 2026-02-19 04:46:00
9565 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर 2026-02-19 04:45:41
9564 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ *✨ आज की ✨* *?? कहानी ??* *??कर्म और भाग्य ??* *एक फल वाला था । जब भी उसके पास फल लेने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर उसको बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी फल दे दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती ।* *एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई।* *तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया ।* *मेरा सवाल उस फल वाले से था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से ?* *और उसने जो जवाब दिया उसका जबाब को सुन कर मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए।* *वो फल वाला मेरे से कहने लगा आपका किसी बैंक में लॉकर तो होगा.?* *मैन कहा हाँ तो उस फल वाले ने मेरे से कहा की उस लाकर की चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लॉकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास।* *आप के पास जो चाबी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य।* *जब तक दोनों चाबीयाँ नहीं लगतीं लाकर का ताला नहीं खुल सकता।* *आप कर्मयोगी पुरुष हैं और मैनेजर भगवान।* *आप को अपनी चाबी भी लगाते रहना चाहिये । कहीं ऐसा तो नहीं कि आप मात्र अपनी भाग्यवाली चाभी लगा रहा हो और परिश्रम वाली  चाबी न लगा पायें तो ताला खुलने से रह जाये ।* *_?? संकलन कर्ता ??_* > _*✍?........... हम सबको भी सद्भाग्य से उत्तम मनुष्य पर्याय अर्थात पहली चाबी प्राप्त हो गई है परंतु अब अगर हम इसे आत्म कल्याण के अपूर्व कार्य में लगाकर सार्थक नहीं करेंगे तो यह भव भी चूक जाएंगे जो अत्यंत दुर्लभता से प्राप्त हुआ है इसका सदुपयोग मात्र आत्म कल्याण के कार्य में ही लगकर सार्थक करना श्रेष्ठ है तो अब हम सब भी सच्चे देव शास्त्र गुरुओं के द्वारा बताएं मुक्ति मार्ग पर आगे बढ़कर दूसरी चाबी लगाकर सच्चे सुखी होने के मार्ग पर आगे बढ़ें और परंपरा से निर्वाण को प्राप्त कर सच्चे सुखी हों।*_ *_ 2026-02-19 04:26:56
9563 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-19 04:16:49
9562 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ 2026-02-19 04:16:29
9561 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-02-19 04:14:53
9560 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-02-19 04:14:34
9559 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-02-19 04:14:32