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232994 49374214 JEEV Updates Event: Live Lecture on Real and Conventional Points of View (Lecture by Anubhav Jain ji) – Jun 17, 2026 at 08:30 PM – 09:15 PM 2026-06-15 20:36:16
232991 40449749 जिनोदय?JINODAYA बहुत बहुत बहुत जरूरी सूचना *सावधान-सावधान-सावधान* ये पेन जैसे दिखने वाले को कहीं भी अगर देखते हैं तो नहीं उठाना है। रोड में हो या कहीं पर भी हो इसको उठाने सीधा ब्लास्ट हो रहा है। ये रायपुर की घटना है। कुछ लोग इस तरह का पेन लेकर घूम रहे हैं। जहां पब्लिक स्कूल सर्व जनिक जगह हो पेख दे रहे हैं। इसको उठाते ही ब्लास्ट हो रहा है। सभी ग्रुप में शेयर करें। और सबको सूचित करें। सबको ही सतर्क रहें। ? 2026-06-15 20:34:10
232992 40449749 जिनोदय?JINODAYA बहुत बहुत बहुत जरूरी सूचना *सावधान-सावधान-सावधान* ये पेन जैसे दिखने वाले को कहीं भी अगर देखते हैं तो नहीं उठाना है। रोड में हो या कहीं पर भी हो इसको उठाने सीधा ब्लास्ट हो रहा है। ये रायपुर की घटना है। कुछ लोग इस तरह का पेन लेकर घूम रहे हैं। जहां पब्लिक स्कूल सर्व जनिक जगह हो पेख दे रहे हैं। इसको उठाते ही ब्लास्ट हो रहा है। सभी ग्रुप में शेयर करें। और सबको सूचित करें। सबको ही सतर्क रहें। ? 2026-06-15 20:34:10
232990 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-15 20:31:57
232989 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-15 20:31:56
232988 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-15 20:31:55
232987 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-15 20:31:54
232985 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म जय जिनेन्द्र ,यह है फर्जी हिंदुत्व के ठेकेदार जिन्होंने पूरे महाराष्ट्र और भारत मे जैन धर्म और हिंदू धर्म के बीच में दरार डाल दी किस तरह का घटिया इंसान बोलता है जैन संत और महा सती जी जो सफेद रेखा में चलेंगे उनका मुंह काला करेंगे शर्म करो हिंदू धर्म के फर्जी टेकेदार और शासन प्रशासन से भी एक सवाल क्यों अभी तक इस घटिया फर्जी धूर्त पापी इंसान को गिरफ्तार नही करा पूरा भारत जानता है यह कभी कभी गिरफ्तार नही होगा क्योंकि सरकार शासन प्रशासन सब जैन धर्म जिन शासन से भारत में दूसरे दर्जे का इंसान समझते हैं सभी को बोहोत अच्छे से मालूम है जय जिनेन्द्र जय जिन शासन 2026-06-15 20:31:52
232986 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म जय जिनेन्द्र ,यह है फर्जी हिंदुत्व के ठेकेदार जिन्होंने पूरे महाराष्ट्र और भारत मे जैन धर्म और हिंदू धर्म के बीच में दरार डाल दी किस तरह का घटिया इंसान बोलता है जैन संत और महा सती जी जो सफेद रेखा में चलेंगे उनका मुंह काला करेंगे शर्म करो हिंदू धर्म के फर्जी टेकेदार और शासन प्रशासन से भी एक सवाल क्यों अभी तक इस घटिया फर्जी धूर्त पापी इंसान को गिरफ्तार नही करा पूरा भारत जानता है यह कभी कभी गिरफ्तार नही होगा क्योंकि सरकार शासन प्रशासन सब जैन धर्म जिन शासन से भारत में दूसरे दर्जे का इंसान समझते हैं सभी को बोहोत अच्छे से मालूम है जय जिनेन्द्र जय जिन शासन 2026-06-15 20:31:52
232984 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म सफेद पट्टी भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर है क्या? आज सोशल मीडिया के इस दौर में व्यूज़ की भूख और वायरल होने की सनक ने एक नई जमात को जन्म दिया है—कथित 'इन्फ्लुएंसर्स' की जमात। इस जमात में कुछ लोग यकीनन काबिल-ए-तारीफ काम कर रहे हैं, लेकिन एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जिसका समाज, सच, या सांप्रदायिक सौहार्द से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। उनका एकमात्र धर्म, ईमान और मकसद सिर्फ एक है, किसी भी तरह विवाद खड़ा करना और वायरल हो जाना। मुंबई के घाटकोपर की एक सोसायटी में हाल ही में जो हुआ, वह इसी बीमार मानसिकता का जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण है। जैन मुनियों के आगमन के लिए सोसायटी के परिसर में एक साधारण सी सफेद पट्टी बनाई गई थी। इसके पीछे की वजह पूरी तरह मानवीय और वैज्ञानिक थी ताकि चिलचिलाती धूप में ज़मीन कम तपे, बरसात के मौसम में नंगे पैर चलने वाले साधु-संतों का पैर न फिसले, उन्हें कंकड़-पत्थर न चुभें और रास्ते के सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो सके। लेकिन अफ़सोस! रील के भूखे कुछ गिद्धों ने इस सामान्य, मानवीय और सेवा भाव से किए गए कार्य को धर्म और क्षेत्रवाद का रंग दे दिया। मैं सीधा और तीखा सवाल पूछता हूँ, क्या उस सफेद पट्टी से किसी का रत्ती भर भी नुकसान हुआ? क्या किसी को उस पर चलने से रोका गया? क्या किसी की ज़मीन हड़प ली गई? क्या सोसायटी के अन्य निवासियों को उससे कोई तकलीफ थी? अगर इन सभी सवालों का जवाब "नहीं" है, तो फिर यह ज़हरीला विवाद किस बात का? भारत वो देश है जहाँ सदियों से राहगीरों के लिए प्याऊ लगाना, मंदिरों के बाहर छांव की व्यवस्था करना, गुरुद्वारों में बिना भेदभाव के चौबीसों घंटे लंगर चलाना और छतों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना हमारी रगों में बसा है। यह हमारी साझी संस्कृति है। जैन मुनि तो वो हैं जो किसी जीव को तकलीफ न पहुंचे, इसके लिए अपना पूरा जीवन नंगे पैर चलकर और अहिंसा के मार्ग पर बिता देते हैं। अगर किसी श्रद्धालु ने उनके पैरों की सहूलियत के लिए एक चूने या पेंट की पट्टी बना दी, तो इसमें पहाड़ टूट पड़ने जैसी क्या बात थी? अगर आज हम इस सफेद पट्टी पर विवाद स्वीकार कर लेते हैं, तो कल ये लोग पूछेंगे कि पक्षियों के लिए पानी क्यों रखा? परसों सवाल उठाएंगे कि गरीबों को मुफ्त भोजन क्यों कराया? फिर किसी बीमार की मदद करने पर भी ये धर्म का चश्मा लगा देंगे! अगर समाज के हर अच्छे और सेवा कार्य में हम नफरत और विवाद का कीड़ा ढूंढने लगेंगे, तो एक इंसानी समाज के रूप में हम आगे बढ़ेंगे या आदिम युग में लौट जाएंगे? कड़वा सच तो यह है कि इन नफरत के सौदागरों को बहुत अच्छे से पता है कि प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की बातों से रील्स पर 'लाइक' और 'व्यूज' की बरसात नहीं होती। सुर्खियां बटोरने के लिए विवाद का तड़का लगाना पड़ता है। इसलिए ये लोग तिल का ताड़ बनाते हैं और भाई को भाई से लड़ाने की स्क्रिप्ट लिखते हैं। इन्हें समाज के बिखरने का कोई गम नहीं है, इन्हें बस अपने फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने की खुशी होती है। ये घटनाएं स्क्रीन पर छोटी दिखती हैं, लेकिन समाज के भीतर अविश्वास और दूरी का ऐसा धीमा ज़हर घोलती हैं जिसे मिटाना नामुमकिन हो जाता है। हमें जागना होगा। किसी भी रील या पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देने या उसे शेयर करने से पहले खुद से पूछिए "कहीं मैं किसी की सस्ती लोकप्रियता और टीआरपी का मोहरा तो नहीं बन रहा?" याद रखिए, किसी शीशे या समाज को तोड़ना बेहद आसान है, लेकिन उसके टुकड़ों को जोड़कर पहले जैसा बनाना सबसे मुश्किल काम है। नफरत फैलाने वाले आपको हर मोड़ पर हज़ारों मिल जाएंगे, लेकिन इस देश के ताने-बाने को, इसके प्रेम और सद्भाव को बचाकर रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है। साफ़ लफ़्ज़ों में समझ लीजिए, वह सफेद पट्टी कोई भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर नहीं थी, जिसे देखकर छाती पीटी जाए या हंगामा खड़ा किया जाए। वह सिर्फ सेवा, सम्मान और सुविधा के लिए की गई एक अस्थाई व्यवस्था थी। खतरा उस निर्जीव सफेद पट्टी से कभी था ही नहीं; असली खतरा उस बीमार और संकीर्ण सोच से है जो हर पवित्र और मानवीय कार्य में भी नफरत का एजेंडा खोज लेती है। समाज को जोड़ने का जरिया बनिए, उसे तोड़ने का औजार मत बनिए। क्योंकि याद रखिए, ज़हर की एक छोटी सी बूंद भी पूरे घड़े के अमृत जैसे पानी को बर्बाद करने के लिए काफी होती है। 2026-06-15 20:31:50