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79620 40449710 11. वात्सल्य वारिधि 2026-04-12 11:23:53
79619 40449710 11. वात्सल्य वारिधि 2026-04-12 11:23:52
79617 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? ?? 2026-04-12 11:22:58
79618 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? ?? 2026-04-12 11:22:58
79616 40449718 विनय गुरु ? ??? 2026-04-12 11:22:42
79615 40449718 विनय गुरु ? ??? 2026-04-12 11:22:41
79614 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? *सावधान* कल विश्व नवकार दिवस मनाया गया, विश्व में जैन धर्म को प्रसिद्ध करने के लिए यह उपक्रम सराहनीय है परंतु इसमें हमसे *बहुत गंभीर भूल हो रही है* इसे ध्यान से समझे - णमोकार महामंत्र प्राकृत भाषा में बोला जाता है, इसी भाषा में लिखा गया है, इसमें सभी छंद "ण" से प्रारंभ होते है, - प्राचीन जैन आगमों और ग्रंथों में इसका मूल नाम “णमोकार मंत्र” लिखा है - इसमें बारंबार "णमो" शब्द का उच्चारण आया है इसलिए इसे णमोकार मंत्र कहते हैं, बारंबार एक ही शब्द दोहराने को "कार" कहते है जैसे जयजयकार हाहाकार - हमारे श्वेतांबर भाई "न" से णमोकार मंत्र कहते हैं न से भी कहे तो यह मंत्र नमोकार होना चाहिए था नवकार नहीं, - "णमोकार" प्राकृत शब्द है परंतु प्राकृत भाषा के (अपभ्रंश) विकृत उच्चारण से, अशुद्ध उच्चारण से, या संस्कृत के प्रभाव से नमस्कार शब्द बना है - अगर संस्कृत भाषा में भी कहे तो इसे नमस्कार मंत्र कहना चाहिए परंतु इसे नवकार क्यों कहा गया? क्यों किया गया? यह समझ नहीं आता - अतः इसे णमोकार कहना ही उचित है, आगम प्रमाण है, नवकार कहना उचित नहीं है - यह भाषा की चूक है और इसी गलत परंपरा से हम मूल शब्द और भाषा से दूर होते चले जाएंगे - अगर हम ही गलत बोलेंगे तो अगली पीढ़ी इसे क्या समझ पाएगी कि यह णमोकार मंत्र है नवकार नहीं, वह तो इसे नवकार ही बोलेगी और इसे नवकार ही समझेगी - यह विवाद करने के लिए नहीं और ना ही कार्यक्रम को असफल करने के लिए लिखा है, - यह जानबूझकर आज ही लिखा है ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा ना आए, ना विवाद हो - यह इसीलिए लिखा है क्योंकि आज तक हुई गलती हम आगे ना दोहराएं और हम भी इसे समझे और सभी को समझाएं - सही समझ से सकल जैन समाज की एकता और अखंडता बनी रहे *धर्म का मर्म* शब्दार्थ णमो = नमस्कार, प्रणाम, वंदन कार = पुनः पुनः सही उच्चारण णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच णमोयारो सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिं पढमं होहि मंगलं 2026-04-12 11:22:40
79613 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? *सावधान* कल विश्व नवकार दिवस मनाया गया, विश्व में जैन धर्म को प्रसिद्ध करने के लिए यह उपक्रम सराहनीय है परंतु इसमें हमसे *बहुत गंभीर भूल हो रही है* इसे ध्यान से समझे - णमोकार महामंत्र प्राकृत भाषा में बोला जाता है, इसी भाषा में लिखा गया है, इसमें सभी छंद "ण" से प्रारंभ होते है, - प्राचीन जैन आगमों और ग्रंथों में इसका मूल नाम “णमोकार मंत्र” लिखा है - इसमें बारंबार "णमो" शब्द का उच्चारण आया है इसलिए इसे णमोकार मंत्र कहते हैं, बारंबार एक ही शब्द दोहराने को "कार" कहते है जैसे जयजयकार हाहाकार - हमारे श्वेतांबर भाई "न" से णमोकार मंत्र कहते हैं न से भी कहे तो यह मंत्र नमोकार होना चाहिए था नवकार नहीं, - "णमोकार" प्राकृत शब्द है परंतु प्राकृत भाषा के (अपभ्रंश) विकृत उच्चारण से, अशुद्ध उच्चारण से, या संस्कृत के प्रभाव से नमस्कार शब्द बना है - अगर संस्कृत भाषा में भी कहे तो इसे नमस्कार मंत्र कहना चाहिए परंतु इसे नवकार क्यों कहा गया? क्यों किया गया? यह समझ नहीं आता - अतः इसे णमोकार कहना ही उचित है, आगम प्रमाण है, नवकार कहना उचित नहीं है - यह भाषा की चूक है और इसी गलत परंपरा से हम मूल शब्द और भाषा से दूर होते चले जाएंगे - अगर हम ही गलत बोलेंगे तो अगली पीढ़ी इसे क्या समझ पाएगी कि यह णमोकार मंत्र है नवकार नहीं, वह तो इसे नवकार ही बोलेगी और इसे नवकार ही समझेगी - यह विवाद करने के लिए नहीं और ना ही कार्यक्रम को असफल करने के लिए लिखा है, - यह जानबूझकर आज ही लिखा है ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा ना आए, ना विवाद हो - यह इसीलिए लिखा है क्योंकि आज तक हुई गलती हम आगे ना दोहराएं और हम भी इसे समझे और सभी को समझाएं - सही समझ से सकल जैन समाज की एकता और अखंडता बनी रहे *धर्म का मर्म* शब्दार्थ णमो = नमस्कार, प्रणाम, वंदन कार = पुनः पुनः सही उच्चारण णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच णमोयारो सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिं पढमं होहि मंगलं 2026-04-12 11:22:39
79612 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? जयजिनेन्द्र, आपले लिखाण धर्म संस्कृती जैनी यांना अतिशय पोषक व.समर्पक असा संदेश आहे.प्रत्येक जैनी या मुद्यांचा सखोल माहिती पूर्ण अभ्यास करून जैन धर्मावर इतरांची वाईट नजर व कुत्सित वृत्ती प्रवृत्ती आहे त्याला हाणून पाडण्याची उर्जा आपल्यात निर्माण होईल.विशेष आग्रह व अनुरोध जैन युवा पिढीला आहे यांनी मनावर घेण्याची वेळ आलेली आहे.मला खात्री आहे आमचे धर्म स्नेही हाडांचे कार्यकर्ते श्री संजयजी देशमाने यांनी जैन धर्माबाबत केलेल्या आवाहनाला आपणाकडून सकारात्मक प्रतिसाद दिला जावा.??️ सुदर्शन के.टोपरे अंजनगाव सुर्जी ९४२१७३६३७८ 2026-04-12 11:21:47
79611 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? जयजिनेन्द्र, आपले लिखाण धर्म संस्कृती जैनी यांना अतिशय पोषक व.समर्पक असा संदेश आहे.प्रत्येक जैनी या मुद्यांचा सखोल माहिती पूर्ण अभ्यास करून जैन धर्मावर इतरांची वाईट नजर व कुत्सित वृत्ती प्रवृत्ती आहे त्याला हाणून पाडण्याची उर्जा आपल्यात निर्माण होईल.विशेष आग्रह व अनुरोध जैन युवा पिढीला आहे यांनी मनावर घेण्याची वेळ आलेली आहे.मला खात्री आहे आमचे धर्म स्नेही हाडांचे कार्यकर्ते श्री संजयजी देशमाने यांनी जैन धर्माबाबत केलेल्या आवाहनाला आपणाकडून सकारात्मक प्रतिसाद दिला जावा.??️ सुदर्शन के.टोपरे अंजनगाव सुर्जी ९४२१७३६३७८ 2026-04-12 11:21:46