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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
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40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-15 11:45:24 |
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| 231990 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-15 11:45:24 |
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| 231991 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-15 11:45:24 |
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| 231987 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-15 11:45:22 |
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| 231988 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-15 11:45:22 |
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| 231985 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-15 11:45:20 |
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| 231986 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-15 11:45:20 |
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| 231983 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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_*आहार चर्या* (पड़गाहन), 16/6/26, इतवारी, नागपुर, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
???
'जिसके अवलोकन से
सुख का समुद्भव-सम्पादन हो
सही साहित्य वही है
अन्यथा,
सुरभि से विरहित पुष्प-सम
सुख का राहित्य है वह
सार-शून्य शब्द-झुण्ड...!
*शान्ति का श्वास लेता*
*सार्थक जीवन ही*
*सर्जक है शाश्वत साहित्य का।*
इस साहित्य को
आँखें भी पढ़ सकती हैं
कान भी सुन सकते हैं
इसकी सेवा हाथ भी कर सकते हैं
यह साहित्य जीवन्त है ना!"
- _मूकमाटी :: १११_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-06-15 11:45:18 |
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| 231984 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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_*आहार चर्या* (पड़गाहन), 16/6/26, इतवारी, नागपुर, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
???
'जिसके अवलोकन से
सुख का समुद्भव-सम्पादन हो
सही साहित्य वही है
अन्यथा,
सुरभि से विरहित पुष्प-सम
सुख का राहित्य है वह
सार-शून्य शब्द-झुण्ड...!
*शान्ति का श्वास लेता*
*सार्थक जीवन ही*
*सर्जक है शाश्वत साहित्य का।*
इस साहित्य को
आँखें भी पढ़ सकती हैं
कान भी सुन सकते हैं
इसकी सेवा हाथ भी कर सकते हैं
यह साहित्य जीवन्त है ना!"
- _मूकमाटी :: १११_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-06-15 11:45:18 |
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| 231981 |
49374214 |
JEEV Updates |
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This powerful insight is from a JEEV lecture on Time Cycle.
We often think the universe had a beginning and will one day come to an end.
But Jain philosophy reveals a timeless truth.
The universe was never created, and it can never be destroyed.
What continues endlessly is our own wandering through birth and death—until we choose the path of self-realization.
The question is not how long the journey has been.
The question is: *When will we decide to stop wandering?*
Watch the full lecture for deeper insights:
<a href="https://youtu.be/xffdG3HaVDs?si=L-__LtfJSv-X_TPo" target="_blank">https://youtu.be/xffdG3HaVDs?si=L-__LtfJSv-X_TPo</a> |
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2026-06-15 11:42:15 |
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