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Chat ID
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Message
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| 81896 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*जागरण की सीमा और जैन समाज की वर्तमान विडंबना*
जगाया उन्हें जाता है जो सो रहे हों, होश में उन्हें लाया जाता है जो बेहोश हों, मगर जो मृत हो चुके हैं उन्हें न जगाया जा सकता है और न ही होश में लाया जा सकता है। यह पंक्तियाँ केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि आज के जैन समाज की कठोर वास्तविकता का दर्पण हैं। आज समाज का एक बड़ा वर्ग न तो सोया हुआ है और न ही केवल बेहोश है, बल्कि वह संवेदनहीनता की उस अवस्था में पहुँच चुका है जहाँ उसे सत्य दिखना बंद हो गया है। यही कारण है कि साधुओं का पाखंड, आडंबर, दिखावा और तथाकथित धार्मिक गतिविधियों के नाम पर चल रहा व्यापार उन्हें दिखाई नहीं देता, और यदि कोई दिखाने की कोशिश भी करे तो उसे ही विरोध का सामना करना पड़ता है।
आज के समय में यह देखना अत्यंत पीड़ादायक है कि जिन साधुओं से त्याग, संयम और सादगी की अपेक्षा की जाती है, वही साधु प्रचार, प्रसिद्धि और भीड़ जुटाने की होड़ में लगे हुए हैं। प्रवचन अब आत्मशुद्धि का माध्यम कम और मंचीय प्रदर्शन अधिक बन गए हैं। सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज़ की प्रतिस्पर्धा में धर्म की गंभीरता कहीं खोती जा रही है। शंका समाधान के नाम पर फर्जी प्रश्नोत्तरी, लाइव प्रवचन के नाम पर दिखावा और भक्तों को आकर्षित करने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। यह सब देखकर भी समाज मौन है, क्योंकि उसने अपनी विवेक शक्ति को कहीं न कहीं खो दिया है।
केवल साधु ही नहीं, समाज के कर्णधार और नेता भी इस गिरावट के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। जिन लोगों के कंधों पर समाज को दिशा देने की जिम्मेदारी थी, वे स्वयं स्वार्थ, राजनीति और व्यक्तिगत लाभ में उलझ गए हैं। दोहरे चरित्र और दोगलेपन का ऐसा जाल बिछा हुआ है कि सत्य बोलने वाला व्यक्ति अकेला पड़ जाता है और गलत को समर्थन देने वालों की भीड़ बढ़ती जाती है। समाज के बड़े-बड़े मंचों पर नैतिकता की बातें तो होती हैं, लेकिन व्यवहार में उनका कोई अस्तित्व नहीं दिखाई देता।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि आम जैन समाज भी अब इन सब बातों को सामान्य मानने लगा है। गलत को गलत कहने का साहस समाप्त हो गया है। धर्म के नाम पर जो कुछ भी परोसा जा रहा है, उसे आँख बंद करके स्वीकार किया जा रहा है। यह स्थिति किसी भी समाज के पतन का संकेत होती है। जब व्यक्ति अपनी सोचने-समझने की शक्ति खो देता है, तब वह केवल भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाता है और यही स्थिति आज देखने को मिल रही है।
हमें यह समझना होगा कि धर्म केवल वेशभूषा, प्रवचन या आयोजन का नाम नहीं है। धर्म आत्मा की शुद्धि, सत्य के प्रति निष्ठा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस देता है। यदि हम इन मूल्यों को छोड़ देंगे, तो चाहे कितने भी बड़े आयोजन कर लें, समाज का उत्थान संभव नहीं है। आज आवश्यकता है जागरण की, लेकिन उससे पहले यह आवश्यक है कि हम यह स्वीकार करें कि हम सोए हुए हैं या बेहोश हैं, क्योंकि यदि हम स्वयं को जागृत मानते रहेंगे, तो वास्तविक जागरण कभी संभव नहीं होगा।
यदि अब भी समाज नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी। इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता किया है, तब-तब उसका पतन निश्चित हुआ है। इसलिए समय रहते हमें अपने भीतर झांकना होगा, सही और गलत का भेद समझना होगा और साहस के साथ सत्य का साथ देना होगा।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-13 08:45:46 |
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| 81895 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*जागरण की सीमा और जैन समाज की वर्तमान विडंबना*
जगाया उन्हें जाता है जो सो रहे हों, होश में उन्हें लाया जाता है जो बेहोश हों, मगर जो मृत हो चुके हैं उन्हें न जगाया जा सकता है और न ही होश में लाया जा सकता है। यह पंक्तियाँ केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि आज के जैन समाज की कठोर वास्तविकता का दर्पण हैं। आज समाज का एक बड़ा वर्ग न तो सोया हुआ है और न ही केवल बेहोश है, बल्कि वह संवेदनहीनता की उस अवस्था में पहुँच चुका है जहाँ उसे सत्य दिखना बंद हो गया है। यही कारण है कि साधुओं का पाखंड, आडंबर, दिखावा और तथाकथित धार्मिक गतिविधियों के नाम पर चल रहा व्यापार उन्हें दिखाई नहीं देता, और यदि कोई दिखाने की कोशिश भी करे तो उसे ही विरोध का सामना करना पड़ता है।
आज के समय में यह देखना अत्यंत पीड़ादायक है कि जिन साधुओं से त्याग, संयम और सादगी की अपेक्षा की जाती है, वही साधु प्रचार, प्रसिद्धि और भीड़ जुटाने की होड़ में लगे हुए हैं। प्रवचन अब आत्मशुद्धि का माध्यम कम और मंचीय प्रदर्शन अधिक बन गए हैं। सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज़ की प्रतिस्पर्धा में धर्म की गंभीरता कहीं खोती जा रही है। शंका समाधान के नाम पर फर्जी प्रश्नोत्तरी, लाइव प्रवचन के नाम पर दिखावा और भक्तों को आकर्षित करने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। यह सब देखकर भी समाज मौन है, क्योंकि उसने अपनी विवेक शक्ति को कहीं न कहीं खो दिया है।
केवल साधु ही नहीं, समाज के कर्णधार और नेता भी इस गिरावट के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। जिन लोगों के कंधों पर समाज को दिशा देने की जिम्मेदारी थी, वे स्वयं स्वार्थ, राजनीति और व्यक्तिगत लाभ में उलझ गए हैं। दोहरे चरित्र और दोगलेपन का ऐसा जाल बिछा हुआ है कि सत्य बोलने वाला व्यक्ति अकेला पड़ जाता है और गलत को समर्थन देने वालों की भीड़ बढ़ती जाती है। समाज के बड़े-बड़े मंचों पर नैतिकता की बातें तो होती हैं, लेकिन व्यवहार में उनका कोई अस्तित्व नहीं दिखाई देता।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि आम जैन समाज भी अब इन सब बातों को सामान्य मानने लगा है। गलत को गलत कहने का साहस समाप्त हो गया है। धर्म के नाम पर जो कुछ भी परोसा जा रहा है, उसे आँख बंद करके स्वीकार किया जा रहा है। यह स्थिति किसी भी समाज के पतन का संकेत होती है। जब व्यक्ति अपनी सोचने-समझने की शक्ति खो देता है, तब वह केवल भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाता है और यही स्थिति आज देखने को मिल रही है।
हमें यह समझना होगा कि धर्म केवल वेशभूषा, प्रवचन या आयोजन का नाम नहीं है। धर्म आत्मा की शुद्धि, सत्य के प्रति निष्ठा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस देता है। यदि हम इन मूल्यों को छोड़ देंगे, तो चाहे कितने भी बड़े आयोजन कर लें, समाज का उत्थान संभव नहीं है। आज आवश्यकता है जागरण की, लेकिन उससे पहले यह आवश्यक है कि हम यह स्वीकार करें कि हम सोए हुए हैं या बेहोश हैं, क्योंकि यदि हम स्वयं को जागृत मानते रहेंगे, तो वास्तविक जागरण कभी संभव नहीं होगा।
यदि अब भी समाज नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी। इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता किया है, तब-तब उसका पतन निश्चित हुआ है। इसलिए समय रहते हमें अपने भीतर झांकना होगा, सही और गलत का भेद समझना होगा और साहस के साथ सत्य का साथ देना होगा।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-13 08:45:45 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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आचार्य श्री वासु नन्दी जी महाराज का संघ सहित प्रवेश आज श्री सम्मेद शिखर जी में हुआ 13.4.26 |
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2026-04-13 08:45:16 |
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| 81894 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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आचार्य श्री वासु नन्दी जी महाराज का संघ सहित प्रवेश आज श्री सम्मेद शिखर जी में हुआ 13.4.26 |
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2026-04-13 08:45:16 |
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| 81891 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-13 08:43:51 |
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| 81892 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-13 08:43:51 |
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| 81890 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-13 08:43:50 |
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| 81889 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-13 08:43:49 |
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| 81888 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-13 08:43:48 |
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| 81887 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-13 08:43:47 |
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