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4610 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ??? 2026-02-15 11:10:25
4609 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? 2026-02-15 11:09:13
4608 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-02-15 11:07:05
4607 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-15 11:05:36
4606 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-02-15 11:03:54
4605 40449682 तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप <a href="https://www.instagram.com/reel/DUxBuAFEqVv/?igsh=MXA2bm1qcjViY2hwaQ==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DUxBuAFEqVv/?igsh=MXA2bm1qcjViY2hwaQ==</a> 2026-02-15 11:03:08
4604 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://youtube.com/shorts/s-F0XvIqDIo?si=7UgR-7xjQWkkv4US" target="_blank">https://youtube.com/shorts/s-F0XvIqDIo?si=7UgR-7xjQWkkv4US</a> 2026-02-15 11:03:03
4603 40449749 जिनोदय?JINODAYA *जड़े उखाड़ देता है वो तूफान जिसकी शांति का मज़ाक बनाया जाता है* कई बार समाज में कुछ लोग शांत स्वभाव के होते हैं। वे हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देते, हर उकसावे का उत्तर नहीं देते और हर अन्याय पर तुरंत शोर नहीं मचाते। लोग उनकी इस शांति को कमजोरी समझ लेते हैं। मज़ाक उड़ाते हैं, तंज कसते हैं और यह मान बैठते हैं कि यह व्यक्ति कभी कुछ कर ही नहीं पाएगा। लेकिन इतिहास और अनुभव दोनों बताते हैं कि जब वही शांत व्यक्ति या समूह भीतर से ठान लेता है, तब उसकी प्रतिक्रिया तूफान बन जाती है। शांति का अर्थ कायरता नहीं होता, बल्कि वह संयम, धैर्य और आत्मविश्वास की निशानी होती है। जो व्यक्ति हर बात पर गरजता है, वह अक्सर भीतर से खाली होता है; पर जो चुप रहता है, वह भीतर ही भीतर अपनी शक्ति को संजोता रहता है। जब अन्याय अपनी सीमा पार कर देता है, जब अपमान आदत बना दिया जाता है और जब सत्य का लगातार उपहास होता है, तब वही शांत धारा प्रचंड वेग में बदल जाती है। तूफान अचानक नहीं आता, वह लंबे समय तक जमा हुई पीड़ा, अपमान और उपेक्षा का परिणाम होता है। इसलिए किसी की सहनशीलता को उसकी सीमा मत समझिए। सहनशील व्यक्ति जब तक सहता है, तब तक व्यवस्था सुरक्षित रहती है; जिस दिन वह उठ खड़ा होता है, उस दिन जड़ें हिल जाती हैं। समाज, संगठन और व्यक्ति—तीनों को यह समझना चाहिए कि शांति का सम्मान करना ही बुद्धिमानी है। किसी भी सज्जन, संतुलित या धैर्यवान व्यक्ति का बार-बार मज़ाक बनाना अंततः स्वयं के लिए हानिकारक सिद्ध होता है। समय हमेशा गवाह है कि अत्याचार और अहंकार की उम्र लंबी हो सकती है, पर स्थायी नहीं होती। अंततः सत्य और संयम की शक्ति ही विजयी होती है। इसलिए हमें दूसरों की शांति का सम्मान करना चाहिए, संवाद को स्थान देना चाहिए और किसी की चुप्पी को उसकी हार समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जड़े उखाड़ देता है वो तूफान जिसकी शांति का मज़ाक बनाया जाता है। नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 2026-02-15 11:02:01
4602 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-02-15 11:00:47
4601 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *श्री ओम जी बिरला* *माननीय अध्यक्ष लोकसभा* जैन मंदिर स्टेशन पर विराजमान *परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योग सागर जी महाराज ससंघ* के दर्शनार्थ पधारेंगे । *रविवार :- 15 फरवरी 2026* *प्रात:- 09:45 बजे* *प्रवचन स्थल:- बालमंदिर स्कूल के सामने वाला प्रांगण (जैन बुक डिपो वालो के घर के सामने)* ?️‍? ? सादर सहित राकेश जैन (मड़िया ) जिलाध्यक्ष , भाजपा कोटा 2026-02-15 11:00:43