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जिनोदय?JINODAYA |
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*समय ही सबसे बड़ा बलवान है*
“मनुज बली नहिं होत है, समय होत बलवान।
भिल्लन लूटीं गोपिका, वही अर्जुन वहीं वान।। ”
यह दोहा जीवन के उस अटल सत्य को प्रकट करता है जिसे हम सब जानते तो हैं, पर स्वीकार कम ही करते हैं। मनुष्य अपने बल, बुद्धि, धन, पद और प्रतिष्ठा पर गर्व करता है, परंतु समय के परिवर्तन के साथ यह सब क्षणभर में बदल सकता है। इसलिए कहा गया है कि मनुष्य बलवान नहीं होता, समय बलवान होता है।
महाभारत के अर्जुन केवल एक योद्धा नहीं थे, वे पराक्रम और दक्षता के प्रतीक थे। गांडीव धनुष और दिव्य बाणों के साथ उन्होंने असंभव को संभव किया। देवताओं तक ने उनकी वीरता को स्वीकार किया। लेकिन जब समय ने करवट ली, वही अर्जुन साधारण भिल्लों के सामने असहाय हो गए। न उनका गांडीव काम आया, न उनकी पूर्व की कीर्ति। यह घटना हमें झकझोरती है कि सामर्थ्य भी समय की छाया में ही फलता है।
यह प्रसंग हमें अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा देता है। जब समय अनुकूल होता है तो व्यक्ति को लगता है कि सब कुछ उसके परिश्रम और योग्यता से ही संभव हुआ है। वह भूल जाता है कि परिस्थितियाँ भी उसके पक्ष में थीं। और जब समय प्रतिकूल होता है, तो वही व्यक्ति निराश होकर स्वयं को दोष देने लगता है। वास्तव में समय का चक्र ही जीवन का सबसे बड़ा नियंता है।
समय हमें सिखाता है कि सफलता स्थायी नहीं और असफलता अंतिम नहीं। जिस प्रकार दिन के बाद रात और रात के बाद फिर दिन आता है, उसी प्रकार सुख और दुःख भी जीवन का हिस्सा हैं। यदि हम अच्छे समय में विनम्र रहें और कठिन समय में धैर्य रखें, तो हम हर परिस्थिति को संतुलन के साथ जी सकते हैं।
इस दोहे का एक और गहरा संदेश है—मनुष्य को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, फल पर नहीं। क्योंकि फल तो समय के अनुसार ही मिलता है। अर्जुन का पराक्रम समाप्त नहीं हुआ था, लेकिन समय ने उनका साथ छोड़ दिया था। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि हमारी योग्यता तभी तक प्रभावी है जब तक समय साथ दे रहा है।
जीवन में कई बार हम दूसरों की वर्तमान स्थिति देखकर उनका मूल्यांकन कर लेते हैं। किसी को कमजोर, किसी को असफल और किसी को तुच्छ समझ लेते हैं। पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि समय बदलते देर नहीं लगती। आज जो शिखर पर है, वह कल नीचे भी आ सकता है और जो आज संघर्ष कर रहा है, वह कल ऊँचाइयों को छू सकता है।
अतः यह दोहा केवल एक कथा का उल्लेख नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। यह हमें विनम्रता, धैर्य, संयम और समय के प्रति सम्मान की शिक्षा देता है। यदि मनुष्य समय की महत्ता समझ ले और अपने आचरण में संतुलन बनाए रखे, तो वह हर परिस्थिति में स्थिर रह सकता है।
समय के सामने किसी का बल नहीं चलता, इसलिए अपने बल का नहीं, अपने चरित्र और कर्म का निर्माण कीजिए। वही अंततः आपके साथ रहेगा।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-02-19 13:12:13 |
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