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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*?✍️सच्चा राही ✍️?*
*????✍️कहानी सभी के काम की*
*??? सच्चा व योग्य प्यार ✍️?*
*?????↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना?*
*??????? फाल्गुन शुक्ल तृतीया, 20 फरवरी शुक्रवार 2025 कलि काल के 18 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।(?नोट:-यह कल्याणक उत्तर पुराण के अनुसार नहीं है। उत्तर पुराण के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की तृतीया को सम्पन्न हो गया है।)*
*??????? फाल्गुन शुक्ल पंचमी, 22 फरवरी रविवार 2025 कलि काल के 19 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से सर्व सुख समृद्धि प्रदाता केतु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के,धनके सभी विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*? फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,10,13,14,16,22,23 व 24 फरवरी ( 22 को पंचमी/ षष्ठी तिथि और 23 को सप्तमी तिथि मान्य होगी )।तारीख को कल्याणक महोत्सव है। ?✅विशेष :- 5,8,14, 22 व 23 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*??????इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24 फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को है।*
*?? अष्टान्हिका महापर्व 24 फरवरी से प्रारंभ है।*
*?????? शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21 फरवरी माह में मुहूर्त है। ?? वाहन खरीद मुहूर्त 1,6,18, 26,27 फरवरी को है।?? प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅? गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*?✍️ पंचक 17 से 21 फरवरी तक है।*
*?यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*सच्चा व योग्य प्रेम*
कहानी पढ़कर शायद आपको लगे *—"क्या सचमुच ऐसा भी होता है?"* पर यही तो कहानी का सौंदर्य है। कहानीकार की कल्पना साधारण से हटकर होती है। उसके अनुसार प्रेम केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण का वह भाव है, जहाँ अपने सुख-दुःख को भूलकर हम प्रियजन की सहजता और शांति को सबसे ऊपर रखते हैं। यही प्रेम रिश्तों की आत्मा और जीवन का सबसे सुंदर अलंकार है। सच्चा प्यार वहां से शुरू होता है जहां से वासनाओं का अंत होता है। जहां वासना है वहां पर प्यार हो वह चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करवाता है। अतः इस कहानी को एक बार नहीं जब तक समझ में ना आए पढ़ते रहोगे तो कुछ सकारात्मक ऊर्जा अवश्य ही प्राप्त होगी।
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*?️?✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️????अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र रजिस्टर संस्था के ? W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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रात गहरा चुकी थी। थके कदमों से पति घर लौटा और बिस्तर पर गिरते ही धीमे स्वर में बोला—
*“पानी ला दो… नींद बहुत भारी है।”*
पत्नी तुरंत रसोई में गई, कुल्हड़ में ठंडा पानी भरकर जब तक लौटी, लेकिन तब तक पति गहरी नींद में सो चुका था। उसने ठिठककर उसका चेहरा देखा—थकान से भरा, पर शांति से नहाया हुआ। वह चाहती तो कुल्हड़ पास रखकर स्वयं भी आराम कर लेती, या धीरे से उसे जगा देती।
पर मन ने कहा—
*“अब तो नींद लग गई है… अगर जगा दूं तो सारी थकान व्यर्थ हो जाएगी। और अगर प्यास लगी होगी तो नींद खुलने पर और भी ज्यादा सताएगी।”*
यही सोचकर पत्नी ने निर्णय लिया—वह पूरी रात जागेगी, पर पति की नींद नहीं तोड़ेगी। हाथ में पानी लिए वह सिरहाने बैठी रही। घड़ी की सुइयाँ खिसकती रहीं, रात सरकती रही, हवा बहती रही—पर उसकी निगाहें पति पर टिकी रहीं। वह हर क्षण उसके श्वासों की लय सुनती रही, कहीं करवट तो नहीं बदली, कहीं प्यास से बेचैन तो नहीं हो रहा? लेकिन पति गहरी नींद में सोता रहा और पत्नी प्रेम में जागती रही।
सुबह की पहली किरणें आईं तो पति की आँख खुली। उसने देखा—पत्नी अब भी हाथ में पानी थामे बैठी है। चौंककर बोला—
*“तुम… पूरी रात नहीं सोई?”*
पत्नी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
*“तुमने पानी माँगा था। डर था कि रात में प्यास लगे और मैं सो जाऊँ। इसलिए जागती रही।”*
उस एक वाक्य ने पति के भीतर की कठोरता पिघला दी। उसने पानी पिया और भावुक होकर कहा—
*“तुम्हारे जैसा प्रेम… कोई नहीं कर सकता।”*
*विशेष :- सच्चा प्रेम मीठे शब्दों में नहीं, बल्कि निस्वार्थ कर्मों में झलकता है। प्रेम का असली सौंदर्य वही है, जहाँ अपने प्रिय की सुविधा के लिए स्वयं को भूल जाया जाए।*
*?✅?????▶️उपरोक्त कहानी में पति -पत्नी का उदाहरण देकर समझाया है कि आप सच्चे श्रावक है तो क्या आप सच्चे देव शास्त्र गुरु के मार्गदर्शन बिना जीवन कैसे व्यतित कर रहे हो। अगर आप अपनी आत्मा पर सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान ,सम्यक चारित्र रुपी रत्नत्रय का बीजारोपण करना चाहते है तो आज से ही अपने जीवन में शुरुआत अवश्य करें। यहां पर अब आपके सामने यह प्रश्न नहीं आना चाहिए कि इस अवस्था में मैं देवदर्शन, अभिषेक पूजन और गुरु की सेवा कैसे करुंगा? मुझे परिवार वाले, समाज वाले क्या बोलेंगे और सोचेंगे।इन सभी बातों को ध्यान में नहीं रखते हुए आप अपनी शक्ति अनुसार भक्ति करोगे तो नियम से मोक्ष रुपी रेलगाड़ी में आपकी सीट सुरक्षित रहेगी।इस रिजर्वेशन में और भी बहुत से आपके कई जन्मों के रिश्तेदार आपको मिल जाएंगे।यह चिंता मत करना कि मेरा क्या होगा। बस पंच परमेष्ठियों का स्मरण करते हुए जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो जाएगा।*
*????✍️➡️?️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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2026-02-19 19:05:13 |
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