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3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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_*आहार चर्या* (पड़गाहन), 14/6/26, इतवारी, नागपुर, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
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*“वेतन वाले वतन की ओर*
*कम ध्यान दे पाते हैं*
*और*
*चेतन वाले तन की ओर*
*कब ध्यान दे पाते हैं!*
*इसलिए तो...*
*राजा का मरण वह*
*रण में हुआ करता है*
*प्रजा का रक्षण करते हुए*
*और*
*महाराज का मरण वह*
*वन में हुआ करता है*
*ध्वजा का रक्षण करते हुए*
*जिस ध्वजा की छाँव में*
*सारी धरती जीवित है*
*सानन्द सुखमय श्वास स्वीकारती हुई!”*
_मूकमाटी, पृष्ठ १२३_
_आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_
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2026-06-14 11:25:26 |
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