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2938 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-02-14 07:10:38
2937 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://www.instagram.com/reel/C5IHNo5heSg/?igsh=YWtiN3hqd2U3enMx" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/C5IHNo5heSg/?igsh=YWtiN3hqd2U3enMx</a> 2026-02-14 07:08:29
2936 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *।। कषायजय भावना।।* *मूल लेखक - श्रमणरत्न श्री कनककीर्ति जी महाराज* *रचयिता - परम पूज्य शब्द शिल्पी आचार्य श्री सुविधि सागर जी महाराज* ___&amp;&amp;&amp;&amp;&amp;___&amp;&amp;&amp;&amp;&amp;&amp;&amp;__ *माया कषाय* _छल, कपट, प्रवंचना आदि माया के ही पर्यायवाची नाम है। अपने हृदय के विचारों को छिपाने के लिए जो चेष्टा की जाती है, उसे माया कहते हैं। माया कषाय देव द्रव्य की भांति नि:सार है।_ _भविष्य में होने वाली हानियों का विचार नहीं करने से, माया कषाय के उदय से बाह्य वस्तुओं की अत्यधिक आसक्ति से, धन कमाने की आकांक्षा से, कर्मफल या परलोक के प्रति मन में आज्ञन होने से, मान प्राप्त करने की इच्छा से,पूर्व संस्कारों से अथवा दूसरों को मार्गभ्रष्ट करने की भावना से मनुष्य माया कषाय को अपनाता है। यही कारण है कि माया चोरी, ठगी और दगा आदि असत् प्रवृत्तियों को उत्पन्न करती है।_ _भगवती आराधना में माया के निकृति,उपधि,सातिप्रयोग,प्रणिधि और प्रतिकुंचन ये पांच भेद किए गए हैं।_ *निकृति माया -* _धन अथवा किसी कार्य विषय में जिसको अभिलाषा उत्पन्न हुई है, ऐसे मनुष्य का जो फंसाने का चातुर्य उसे निकृति माया कहते हैं।_ *उपधि माया -* _अच्छे परिणाम को ढंक कर धर्मादि के निमित्त से चोरी आदि कार्य करने को उपधि माया कहते है।_ *सातिप्रयोग माया -* _किसी की धरोहर का कुछ भाग हरण कर लेना,धन के विषय में असत्य बोलना, किसी को दूषण लगाना अथवा झूठी प्रशंसा करना सातिप्रयोग माया है।_ *प्रणधिमाया -* _हीनाधिक मोल की वस्तुओं को आपस में मिलाना,तोल और माप के साधनों को कम-ज्यादा रख कर लेन-देन करना आदि कार्य प्रणधि माया कहलाते है।_ *प्रतिकुंचन माया -* _आचार्य अथवा गुरु के समक्ष दोषों की आलोचना करते समय अपने दोषों को छिपाने की प्रवृत्ति प्रतिकुंचन माया कहलाती है।_ _माया दुर्भाग्य की माता है, दुर्गति का मार्ग है और अविद्या की जन्मभूमि हैं। माया के पदार्पण करते ही बुद्धि विनष्ट हो जाती है। मनुष्य नि:संकोच होकर पाप कार्यों को करने लगता हैं। मोक्ष मार्ग शांति का मार्ग है। जहां कपट है, वहां शांति कहां ? माया विभाव परिणति है। माया कषाय के द्वारा स्वभाव आवृत्त हो जाता है। जिसका स्वभाव आवृत्त हो चुका है, वह जीव केवल दुःखों को ही प्राप्त कर सकता है, सुखों को नहीं।_ _जैसे मंदिर में चढ़ाया गया द्रव्य पुनः ग्रहण करने हेतु नि:सार है,उसी प्रकार मायाचार के द्वारा किया गया तप, धर्म और व्रतादिकों का अनुष्ठान निष्फल है। माया अनर्थों का बीज है।_ _माया रुपी पिशाचिनी से बचने के लिए साधक को सदैव ऐसा विचार करना चाहिए कि -_ _१- व्यवहार में दूसरों को ठगना, निश्चय से अपने-आप को ठगना है।_ _२- छिपकर किए जाने वाले पापों को सर्वज्ञ प्रभु देखते हैं। छिपकर किए गए पापों से तिर्यंचगति में जाना पड़ता है।_ _३- सरलता और सच्चाई ही जीवन का सार है।_ _प्रतिदिन रात्रि में सोने से पूर्व मनुष्य को अपनी दिनभर की प्रवृत्तियों का निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा दिनभर में हुए छल-कपट के कार्यों की निन्दा और गर्हा करके पुनः उस कार्यों को नहीं करने का संकल्प करना चाहिए, जिससे माया कषाय से छुटकारा मिल सके।_ ??????? 2026-02-14 07:04:46
2935 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? ☀️?☀️?☀️?☀️?☀️? *?सादर जयजिनेंद्र?* *जीवन की सच्ची ऊँचाई दूसरों को नीचे दिखाकर नहीं, स्वयं को भीतर से ऊँचा उठाकर मिलती है। विनम्रता ही महानता का सबसे सुंदर आभूषण है।* *? सादर सुप्रभात ?* ☀️?☀️?☀️?☀️?☀️? 2026-02-14 07:02:54
2934 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी VIDYA PURNA DHARAM PRABHAVANA GROUP K SABHI MEMBERS KO JAIJINENDRA JE ??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179314893?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179314893?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-02-14 07:01:06
2933 40449718 विनय गुरु ? 2026-02-14 07:01:01
2932 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-02-14 07:00:18
2931 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *आज देवाधिदेव 1008 श्री मुनिसुव्रत नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक है* ??? 2026-02-14 06:59:18
2930 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *हम वेलेंटाइन डे नहीं मोक्ष कल्याणक दिवस मनाएंगे श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान का 14 फरवरी को* <a href="https://youtube.com/shorts/9vJm38CL5B0?si=NoG240Arw8XDPQgk" target="_blank">https://youtube.com/shorts/9vJm38CL5B0?si=NoG240Arw8XDPQgk</a> 2026-02-14 06:56:52
2929 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-02-14 06:55:56