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| 75047 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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*मंगल प्रभात लोढ़ा के जैन धर्म को हिन्दू धर्म में विलीन करने की मंशा पर हिन्दू और सनातन धर्म की हकीकत पर थोड़ी चर्चा जरूरी…..!*???
*जैन चैनल को जॉइन करें-*
<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Va9TdEcEquiTnAsleW2b" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Va9TdEcEquiTnAsleW2b</a>
हिन्दू न धर्म है न संस्कृति है न कोई दर्शन व संस्कार है.जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है वो तो वास्तव में वैदिक धर्म है,वैदिक दर्शन व वैदिक संस्कृति और ब्राह्मणवादी व्यवस्था है. उसी तरह हिन्द,हिन्दू और हिंदुस्तान भारत की भौगोलिक पहचान का पर्याय मात्र है.सिंधु नदी के उस पार के देश को याने भारत को इंगित करने वाला दिया गया पहचान का विदेशी नाम है.भाषा की बोली का शाब्दिक उच्चारण ही को सी बोलने के कारण इसे सिंधु की जगह हिन्दू कहा गया है.अरब व विशेषकर मुस्लिमों ने हिन्द,हिंदू और हिंदुस्तान जैसे शब्दों को खूब अधिक जोर से प्रचारित किया.वैसे हिन्दू शब्द हमारे देश के किसी भी धार्मिक ग्रंथ और किसी भी भारतीय डिक्सनेरी का नहीं बल्कि यह विदेश से आया,लाया और भारतीयों पर जबरिया थोपा गया शब्द है.दुनिया में यह हिन्दू शब्द तो पारसी भाषा के शब्दकोष के अलावा कहीं भी नहीं मिलेगा. पारसी भाषा में यह शब्द एक भद्दी गाली और अपमानित,हेय व हिकारती कृत्य के लिए उपयुक्त होता है.उसी तरह सनातन धर्म नहीं होता बल्कि सनातन शब्द सिर्फ प्राचीनता का द्योतक होता है.अपनी अपनी प्राचीनता के दावे के साथ वैदिक व श्रमण संस्कृति को मानने वाले जैन व बौद्ध धर्म भी सनातन शब्द को सदियों से अपने धर्म के साथ जोड़े हुए है.याने हिन्दू धर्म व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं है बल्कि इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ वैदिक धर्म के दायरे को विराट बनाकर उसे सीमित दायरे से बाहर लाकर विशाल बनाने हेतु भारत के सारे के सारे सभी ग़ैर मुस्लिम व ईसाई धर्मों को वैदिक धर्म की ही शाखा,हिस्सा व संप्रदाय बनाते उनका मालिक बनने और वैदिक धर्म की सत्ता सब पर स्थापित करने के एक गहरे षड्यंत्र के साथ वैदिक धर्म और वर्णवादी याने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था की पैशाचिक मान्यता के नाम पर हुए युगों के अति भयावह शोषण,भीषण दोहन व अत्याचार को छिपाते वैदिक धर्म को अब हिन्दू धर्म व सनातन धर्म के नाम पर प्रचारित कर भारत को दो भागों याने हिन्दू और मुस्लिम में बांटने का एक प्रायोजित धार्मिक वितृंडावाद,सत्ता को हड़पने का हँगामी हूस्टंड और सत्ता क़ब्ज़ाने का धारधार औजार है जो आज खूब सर चढ़कर बोल रहा है.जैन धर्म हो,बौद्ध धर्म हो या सिख धर्म या फिर दूसरी ओर अट्ठारह करोड़ सभी तरह के आदिवासी और पूर्वोत्तर राज्यों के वनवासी हो जो अपने को हिन्दू नहीं बल्कि अलग से अपने को सरन धर्मी कहते है,उसी तरह करोड़ों अंबेडकर वादी हिन्दू धर्म का विरोध करते है और करोड़ों दक्षिण के लिंगायत जो अपनी गणना अलग से करने पर जोर देते अपने को हिन्दू धर्मी नहीं मानते है,जो हिन्दू धर्म से अपनी अलग पहचान के लिए वे सैकड़ों वर्षों से खूब संघर्ष कर रहे.देश में सारी संस्कृतियों को खत्म कर वैदिक संस्कृति व मनुवादी संहिता को लादने के नाम पर समान नागरिक संहिता याने यू सी सी का विरोध सभी ग़ैर वैदिक धर्म कर रहे है मगर जैसे ही अट्ठारह करोड़ आदिवासियों व वनवासियों ने कहा कि अगर हमारी संस्कृति को मिटाने के लिए हम पर यू सी सी लादा गया तो न केवल हम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे बल्कि अलग से हम आदिवासी राष्ट्र की मांग करेंगे क्योंकि हम हिन्दू धर्मी नहीं बल्कि हमारा धर्म अलग से सरन धर्म है,उसकी अलग पहचान है,उनकी धमकी के बाद आदिवासियों को यू सी सी से अलग रखने पर मोदी सरकार ने घुटने टेक लिए है. *महाराष्ट्र के क़ाबिना मंत्री भाई मंगल प्रभात लोढ़ा ने जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व को मिटाते उसे हिन्दू धर्म में विलीन करने और जैनों के* *अल्पसंख्यक के मिले वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों के खात्मे की जो ख़तरनाक चाहत रखी है,उनके इस आत्मघाती चाहना पर चर्चा अगले लेख में…!*✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
*पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* |
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2026-04-10 16:25:12 |
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| 75048 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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*मंगल प्रभात लोढ़ा के जैन धर्म को हिन्दू धर्म में विलीन करने की मंशा पर हिन्दू और सनातन धर्म की हकीकत पर थोड़ी चर्चा जरूरी…..!*???
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हिन्दू न धर्म है न संस्कृति है न कोई दर्शन व संस्कार है.जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है वो तो वास्तव में वैदिक धर्म है,वैदिक दर्शन व वैदिक संस्कृति और ब्राह्मणवादी व्यवस्था है. उसी तरह हिन्द,हिन्दू और हिंदुस्तान भारत की भौगोलिक पहचान का पर्याय मात्र है.सिंधु नदी के उस पार के देश को याने भारत को इंगित करने वाला दिया गया पहचान का विदेशी नाम है.भाषा की बोली का शाब्दिक उच्चारण ही को सी बोलने के कारण इसे सिंधु की जगह हिन्दू कहा गया है.अरब व विशेषकर मुस्लिमों ने हिन्द,हिंदू और हिंदुस्तान जैसे शब्दों को खूब अधिक जोर से प्रचारित किया.वैसे हिन्दू शब्द हमारे देश के किसी भी धार्मिक ग्रंथ और किसी भी भारतीय डिक्सनेरी का नहीं बल्कि यह विदेश से आया,लाया और भारतीयों पर जबरिया थोपा गया शब्द है.दुनिया में यह हिन्दू शब्द तो पारसी भाषा के शब्दकोष के अलावा कहीं भी नहीं मिलेगा. पारसी भाषा में यह शब्द एक भद्दी गाली और अपमानित,हेय व हिकारती कृत्य के लिए उपयुक्त होता है.उसी तरह सनातन धर्म नहीं होता बल्कि सनातन शब्द सिर्फ प्राचीनता का द्योतक होता है.अपनी अपनी प्राचीनता के दावे के साथ वैदिक व श्रमण संस्कृति को मानने वाले जैन व बौद्ध धर्म भी सनातन शब्द को सदियों से अपने धर्म के साथ जोड़े हुए है.याने हिन्दू धर्म व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं है बल्कि इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ वैदिक धर्म के दायरे को विराट बनाकर उसे सीमित दायरे से बाहर लाकर विशाल बनाने हेतु भारत के सारे के सारे सभी ग़ैर मुस्लिम व ईसाई धर्मों को वैदिक धर्म की ही शाखा,हिस्सा व संप्रदाय बनाते उनका मालिक बनने और वैदिक धर्म की सत्ता सब पर स्थापित करने के एक गहरे षड्यंत्र के साथ वैदिक धर्म और वर्णवादी याने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था की पैशाचिक मान्यता के नाम पर हुए युगों के अति भयावह शोषण,भीषण दोहन व अत्याचार को छिपाते वैदिक धर्म को अब हिन्दू धर्म व सनातन धर्म के नाम पर प्रचारित कर भारत को दो भागों याने हिन्दू और मुस्लिम में बांटने का एक प्रायोजित धार्मिक वितृंडावाद,सत्ता को हड़पने का हँगामी हूस्टंड और सत्ता क़ब्ज़ाने का धारधार औजार है जो आज खूब सर चढ़कर बोल रहा है.जैन धर्म हो,बौद्ध धर्म हो या सिख धर्म या फिर दूसरी ओर अट्ठारह करोड़ सभी तरह के आदिवासी और पूर्वोत्तर राज्यों के वनवासी हो जो अपने को हिन्दू नहीं बल्कि अलग से अपने को सरन धर्मी कहते है,उसी तरह करोड़ों अंबेडकर वादी हिन्दू धर्म का विरोध करते है और करोड़ों दक्षिण के लिंगायत जो अपनी गणना अलग से करने पर जोर देते अपने को हिन्दू धर्मी नहीं मानते है,जो हिन्दू धर्म से अपनी अलग पहचान के लिए वे सैकड़ों वर्षों से खूब संघर्ष कर रहे.देश में सारी संस्कृतियों को खत्म कर वैदिक संस्कृति व मनुवादी संहिता को लादने के नाम पर समान नागरिक संहिता याने यू सी सी का विरोध सभी ग़ैर वैदिक धर्म कर रहे है मगर जैसे ही अट्ठारह करोड़ आदिवासियों व वनवासियों ने कहा कि अगर हमारी संस्कृति को मिटाने के लिए हम पर यू सी सी लादा गया तो न केवल हम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे बल्कि अलग से हम आदिवासी राष्ट्र की मांग करेंगे क्योंकि हम हिन्दू धर्मी नहीं बल्कि हमारा धर्म अलग से सरन धर्म है,उसकी अलग पहचान है,उनकी धमकी के बाद आदिवासियों को यू सी सी से अलग रखने पर मोदी सरकार ने घुटने टेक लिए है. *महाराष्ट्र के क़ाबिना मंत्री भाई मंगल प्रभात लोढ़ा ने जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व को मिटाते उसे हिन्दू धर्म में विलीन करने और जैनों के* *अल्पसंख्यक के मिले वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों के खात्मे की जो ख़तरनाक चाहत रखी है,उनके इस आत्मघाती चाहना पर चर्चा अगले लेख में…!*✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
*पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* |
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2026-04-10 16:25:12 |
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| 75045 |
40449659 |
सकल जैन महिला मंडळ फलटण |
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2026-04-10 16:25:10 |
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| 75046 |
40449659 |
सकल जैन महिला मंडळ फलटण |
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2026-04-10 16:25:10 |
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| 75044 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*मंगल प्रभात लोढ़ा के जैन धर्म को हिन्दू धर्म में विलीन करने की मंशा पर हिन्दू और सनातन धर्म की हकीकत पर थोड़ी चर्चा जरूरी…..!*???
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हिन्दू न धर्म है न संस्कृति है न कोई दर्शन व संस्कार है.जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है वो तो वास्तव में वैदिक धर्म है,वैदिक दर्शन व वैदिक संस्कृति और ब्राह्मणवादी व्यवस्था है. उसी तरह हिन्द,हिन्दू और हिंदुस्तान भारत की भौगोलिक पहचान का पर्याय मात्र है.सिंधु नदी के उस पार के देश को याने भारत को इंगित करने वाला दिया गया पहचान का विदेशी नाम है.भाषा की बोली का शाब्दिक उच्चारण ही को सी बोलने के कारण इसे सिंधु की जगह हिन्दू कहा गया है.अरब व विशेषकर मुस्लिमों ने हिन्द,हिंदू और हिंदुस्तान जैसे शब्दों को खूब अधिक जोर से प्रचारित किया.वैसे हिन्दू शब्द हमारे देश के किसी भी धार्मिक ग्रंथ और किसी भी भारतीय डिक्सनेरी का नहीं बल्कि यह विदेश से आया,लाया और भारतीयों पर जबरिया थोपा गया शब्द है.दुनिया में यह हिन्दू शब्द तो पारसी भाषा के शब्दकोष के अलावा कहीं भी नहीं मिलेगा. पारसी भाषा में यह शब्द एक भद्दी गाली और अपमानित,हेय व हिकारती कृत्य के लिए उपयुक्त होता है.उसी तरह सनातन धर्म नहीं होता बल्कि सनातन शब्द सिर्फ प्राचीनता का द्योतक होता है.अपनी अपनी प्राचीनता के दावे के साथ वैदिक व श्रमण संस्कृति को मानने वाले जैन व बौद्ध धर्म भी सनातन शब्द को सदियों से अपने धर्म के साथ जोड़े हुए है.याने हिन्दू धर्म व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं है बल्कि इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ वैदिक धर्म के दायरे को विराट बनाकर उसे सीमित दायरे से बाहर लाकर विशाल बनाने हेतु भारत के सारे के सारे सभी ग़ैर मुस्लिम व ईसाई धर्मों को वैदिक धर्म की ही शाखा,हिस्सा व संप्रदाय बनाते उनका मालिक बनने और वैदिक धर्म की सत्ता सब पर स्थापित करने के एक गहरे षड्यंत्र के साथ वैदिक धर्म और वर्णवादी याने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था की पैशाचिक मान्यता के नाम पर हुए युगों के अति भयावह शोषण,भीषण दोहन व अत्याचार को छिपाते वैदिक धर्म को अब हिन्दू धर्म व सनातन धर्म के नाम पर प्रचारित कर भारत को दो भागों याने हिन्दू और मुस्लिम में बांटने का एक प्रायोजित धार्मिक वितृंडावाद,सत्ता को हड़पने का हँगामी हूस्टंड और सत्ता क़ब्ज़ाने का धारधार औजार है जो आज खूब सर चढ़कर बोल रहा है.जैन धर्म हो,बौद्ध धर्म हो या सिख धर्म या फिर दूसरी ओर अट्ठारह करोड़ सभी तरह के आदिवासी और पूर्वोत्तर राज्यों के वनवासी हो जो अपने को हिन्दू नहीं बल्कि अलग से अपने को सरन धर्मी कहते है,उसी तरह करोड़ों अंबेडकर वादी हिन्दू धर्म का विरोध करते है और करोड़ों दक्षिण के लिंगायत जो अपनी गणना अलग से करने पर जोर देते अपने को हिन्दू धर्मी नहीं मानते है,जो हिन्दू धर्म से अपनी अलग पहचान के लिए वे सैकड़ों वर्षों से खूब संघर्ष कर रहे.देश में सारी संस्कृतियों को खत्म कर वैदिक संस्कृति व मनुवादी संहिता को लादने के नाम पर समान नागरिक संहिता याने यू सी सी का विरोध सभी ग़ैर वैदिक धर्म कर रहे है मगर जैसे ही अट्ठारह करोड़ आदिवासियों व वनवासियों ने कहा कि अगर हमारी संस्कृति को मिटाने के लिए हम पर यू सी सी लादा गया तो न केवल हम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे बल्कि अलग से हम आदिवासी राष्ट्र की मांग करेंगे क्योंकि हम हिन्दू धर्मी नहीं बल्कि हमारा धर्म अलग से सरन धर्म है,उसकी अलग पहचान है,उनकी धमकी के बाद आदिवासियों को यू सी सी से अलग रखने पर मोदी सरकार ने घुटने टेक लिए है. *महाराष्ट्र के क़ाबिना मंत्री भाई मंगल प्रभात लोढ़ा ने जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व को मिटाते उसे हिन्दू धर्म में विलीन करने और जैनों के* *अल्पसंख्यक के मिले वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों के खात्मे की जो ख़तरनाक चाहत रखी है,उनके इस आत्मघाती चाहना पर चर्चा अगले लेख में…!*✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
*पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* |
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2026-04-10 16:24:52 |
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| 75043 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*मंगल प्रभात लोढ़ा के जैन धर्म को हिन्दू धर्म में विलीन करने की मंशा पर हिन्दू और सनातन धर्म की हकीकत पर थोड़ी चर्चा जरूरी…..!*???
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हिन्दू न धर्म है न संस्कृति है न कोई दर्शन व संस्कार है.जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है वो तो वास्तव में वैदिक धर्म है,वैदिक दर्शन व वैदिक संस्कृति और ब्राह्मणवादी व्यवस्था है. उसी तरह हिन्द,हिन्दू और हिंदुस्तान भारत की भौगोलिक पहचान का पर्याय मात्र है.सिंधु नदी के उस पार के देश को याने भारत को इंगित करने वाला दिया गया पहचान का विदेशी नाम है.भाषा की बोली का शाब्दिक उच्चारण ही को सी बोलने के कारण इसे सिंधु की जगह हिन्दू कहा गया है.अरब व विशेषकर मुस्लिमों ने हिन्द,हिंदू और हिंदुस्तान जैसे शब्दों को खूब अधिक जोर से प्रचारित किया.वैसे हिन्दू शब्द हमारे देश के किसी भी धार्मिक ग्रंथ और किसी भी भारतीय डिक्सनेरी का नहीं बल्कि यह विदेश से आया,लाया और भारतीयों पर जबरिया थोपा गया शब्द है.दुनिया में यह हिन्दू शब्द तो पारसी भाषा के शब्दकोष के अलावा कहीं भी नहीं मिलेगा. पारसी भाषा में यह शब्द एक भद्दी गाली और अपमानित,हेय व हिकारती कृत्य के लिए उपयुक्त होता है.उसी तरह सनातन धर्म नहीं होता बल्कि सनातन शब्द सिर्फ प्राचीनता का द्योतक होता है.अपनी अपनी प्राचीनता के दावे के साथ वैदिक व श्रमण संस्कृति को मानने वाले जैन व बौद्ध धर्म भी सनातन शब्द को सदियों से अपने धर्म के साथ जोड़े हुए है.याने हिन्दू धर्म व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं है बल्कि इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ वैदिक धर्म के दायरे को विराट बनाकर उसे सीमित दायरे से बाहर लाकर विशाल बनाने हेतु भारत के सारे के सारे सभी ग़ैर मुस्लिम व ईसाई धर्मों को वैदिक धर्म की ही शाखा,हिस्सा व संप्रदाय बनाते उनका मालिक बनने और वैदिक धर्म की सत्ता सब पर स्थापित करने के एक गहरे षड्यंत्र के साथ वैदिक धर्म और वर्णवादी याने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था की पैशाचिक मान्यता के नाम पर हुए युगों के अति भयावह शोषण,भीषण दोहन व अत्याचार को छिपाते वैदिक धर्म को अब हिन्दू धर्म व सनातन धर्म के नाम पर प्रचारित कर भारत को दो भागों याने हिन्दू और मुस्लिम में बांटने का एक प्रायोजित धार्मिक वितृंडावाद,सत्ता को हड़पने का हँगामी हूस्टंड और सत्ता क़ब्ज़ाने का धारधार औजार है जो आज खूब सर चढ़कर बोल रहा है.जैन धर्म हो,बौद्ध धर्म हो या सिख धर्म या फिर दूसरी ओर अट्ठारह करोड़ सभी तरह के आदिवासी और पूर्वोत्तर राज्यों के वनवासी हो जो अपने को हिन्दू नहीं बल्कि अलग से अपने को सरन धर्मी कहते है,उसी तरह करोड़ों अंबेडकर वादी हिन्दू धर्म का विरोध करते है और करोड़ों दक्षिण के लिंगायत जो अपनी गणना अलग से करने पर जोर देते अपने को हिन्दू धर्मी नहीं मानते है,जो हिन्दू धर्म से अपनी अलग पहचान के लिए वे सैकड़ों वर्षों से खूब संघर्ष कर रहे.देश में सारी संस्कृतियों को खत्म कर वैदिक संस्कृति व मनुवादी संहिता को लादने के नाम पर समान नागरिक संहिता याने यू सी सी का विरोध सभी ग़ैर वैदिक धर्म कर रहे है मगर जैसे ही अट्ठारह करोड़ आदिवासियों व वनवासियों ने कहा कि अगर हमारी संस्कृति को मिटाने के लिए हम पर यू सी सी लादा गया तो न केवल हम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे बल्कि अलग से हम आदिवासी राष्ट्र की मांग करेंगे क्योंकि हम हिन्दू धर्मी नहीं बल्कि हमारा धर्म अलग से सरन धर्म है,उसकी अलग पहचान है,उनकी धमकी के बाद आदिवासियों को यू सी सी से अलग रखने पर मोदी सरकार ने घुटने टेक लिए है. *महाराष्ट्र के क़ाबिना मंत्री भाई मंगल प्रभात लोढ़ा ने जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व को मिटाते उसे हिन्दू धर्म में विलीन करने और जैनों के* *अल्पसंख्यक के मिले वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों के खात्मे की जो ख़तरनाक चाहत रखी है,उनके इस आत्मघाती चाहना पर चर्चा अगले लेख में…!*✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
*पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* |
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2026-04-10 16:24:51 |
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| 75042 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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??? |
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2026-04-10 16:24:45 |
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| 75041 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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??? |
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2026-04-10 16:24:44 |
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| 75040 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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*?भव्य सामुहिक?*
*?चक्रवर्ती विवाह सोहळा?*
??? ??????
*?अक्षय तृतिया रविवार दि. 19 एप्रिल 2026?*
*⛩️स्थान: - कल्याणोदय तीर्थ, सदलगा*
जय जिनेंद्र,
आजच्या काळात काटकसरीने, बचत करून, भव्य दिव्य एकत्रित जैन शास्त्रामध्ये वर्णन केल्याप्रमाणे *चक्रवर्ती विवाह* व्हावा या उदात्त हेतूने आम्ही विद्या समय संस्कार फौंडेशन, मुंबई व शांति विद्या ज्ञानसंवर्धन संस्था, जयसिंगपूर यांच्या संयुक्त विद्यमाने अत्यंत उत्कृष्ट आशा शुभमुहूर्तावर *अक्षयतृतिया दिवशी रविवार दि. 19 एप्रिल 2026 रोजी*
*?सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळा?*
चे आयोजन करित आहोत. यामध्ये सहभागी होऊन आपल्या जीवनाचि सुरुवात अक्षय तृतीयाच्या शुभमुहूर्तावर आनंदमय व निराकुल होऊन करु शकता.
?? या सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळ्यात दोन्ही पक्षांच्या आई वडिलांच्या सहमतीने ठरलेल्या जोडप्यांनाच प्रवेश दिला जाईल.
?विवाह ठरवविणेचि जबाबदारी संयोजकांचि नाही ठरवलेल्यांचेच लग्न प्राचीन आदिपुराणात वर्णन केलेनुसार शास्त्रोक्त पध्दतीने धार्मिक संस्कारांसह करुन देणेत येईल.
?? *या सामुहिक विवाह सोहळ्यात सहभागी होणाऱ्या नवदांपत्यास मणि मंगळसूत्र, ताट ६,नाष्टा प्लेट ६, चटणी प्लेट ६, वाटि ६, ग्लास ६, चमचे ६,जग २, तांब्या २, कढई झाकणासह २, पातेले झाकणासह ६ चा एक सेट, मोठे चमचे, झारि, परात २, पळपोट लाटणे, तवा, चिमटे, स्टिल डबे ६, हंडे २, घागर, पिप, नळ असलेले पिप, मसाला डबा, तूप व तेलासाठि डबे, चहा डबा, स्टिल कुकर, मिक्सर, पलंग गादि चादर आदि सह, कपाट, ड्रेसिंग टेबल, जूसर, रोटी डबा, खुर्ची २, चाळण, टेबल फैन, चप्पल सेट, चार जोडी कपडे, अष्टक पूजन सेट भांडी, आदि सर्व साहित्य मोफत दिले जाईल.*
? दोन्ही पक्षाकडून कितीही नातेवाईक आले तर त्यांना एक वेळ नाष्टा व दोन वेळच्या भोजनाची मोफत व्यवस्था दिले जाईल. नातेवाईकांच्या संख्येवर कोणतेही बंधन नाही.
✌️या सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळ्यात सहभागी होणेसाठी कोणतेही प्रवेश फी अथवा कसल्याही प्रकारचे शुल्क घेतले जाणार नाही.
? ज्यांना या सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळ्यात सहभागी होऊन आपले दांपत्य जीवन सुरु करू इच्छितात त्यांनी खालील नंबरवर त्वरित संपर्क करावे.
*?आयोजक?*
*विद्या समय संस्कार फौंडेशन, मुंबई*
*शांति विद्या ज्ञानसंवर्धन संस्था,जयसिंगपूर*
*?संपर्क?*
*??प्रमुख मार्गदर्शक:-* *किरिटभाई दोशी, मुंबई*
*मुख्यसंयोजक - संतोष पाटील हुपरी - 7588912308*
सहसंयोजक - राजकुमार पाटील - मजले - 9881875045
माणिक चंदगडे, सदलगा - 9980417101
भारती पाटील, जयसिंगपूर - 8975974451
सुरेखा पाटील, इ. धामणी - 9970131098 |
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2026-04-10 16:23:16 |
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| 75039 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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*?भव्य सामुहिक?*
*?चक्रवर्ती विवाह सोहळा?*
??? ??????
*?अक्षय तृतिया रविवार दि. 19 एप्रिल 2026?*
*⛩️स्थान: - कल्याणोदय तीर्थ, सदलगा*
जय जिनेंद्र,
आजच्या काळात काटकसरीने, बचत करून, भव्य दिव्य एकत्रित जैन शास्त्रामध्ये वर्णन केल्याप्रमाणे *चक्रवर्ती विवाह* व्हावा या उदात्त हेतूने आम्ही विद्या समय संस्कार फौंडेशन, मुंबई व शांति विद्या ज्ञानसंवर्धन संस्था, जयसिंगपूर यांच्या संयुक्त विद्यमाने अत्यंत उत्कृष्ट आशा शुभमुहूर्तावर *अक्षयतृतिया दिवशी रविवार दि. 19 एप्रिल 2026 रोजी*
*?सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळा?*
चे आयोजन करित आहोत. यामध्ये सहभागी होऊन आपल्या जीवनाचि सुरुवात अक्षय तृतीयाच्या शुभमुहूर्तावर आनंदमय व निराकुल होऊन करु शकता.
?? या सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळ्यात दोन्ही पक्षांच्या आई वडिलांच्या सहमतीने ठरलेल्या जोडप्यांनाच प्रवेश दिला जाईल.
?विवाह ठरवविणेचि जबाबदारी संयोजकांचि नाही ठरवलेल्यांचेच लग्न प्राचीन आदिपुराणात वर्णन केलेनुसार शास्त्रोक्त पध्दतीने धार्मिक संस्कारांसह करुन देणेत येईल.
?? *या सामुहिक विवाह सोहळ्यात सहभागी होणाऱ्या नवदांपत्यास मणि मंगळसूत्र, ताट ६,नाष्टा प्लेट ६, चटणी प्लेट ६, वाटि ६, ग्लास ६, चमचे ६,जग २, तांब्या २, कढई झाकणासह २, पातेले झाकणासह ६ चा एक सेट, मोठे चमचे, झारि, परात २, पळपोट लाटणे, तवा, चिमटे, स्टिल डबे ६, हंडे २, घागर, पिप, नळ असलेले पिप, मसाला डबा, तूप व तेलासाठि डबे, चहा डबा, स्टिल कुकर, मिक्सर, पलंग गादि चादर आदि सह, कपाट, ड्रेसिंग टेबल, जूसर, रोटी डबा, खुर्ची २, चाळण, टेबल फैन, चप्पल सेट, चार जोडी कपडे, अष्टक पूजन सेट भांडी, आदि सर्व साहित्य मोफत दिले जाईल.*
? दोन्ही पक्षाकडून कितीही नातेवाईक आले तर त्यांना एक वेळ नाष्टा व दोन वेळच्या भोजनाची मोफत व्यवस्था दिले जाईल. नातेवाईकांच्या संख्येवर कोणतेही बंधन नाही.
✌️या सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळ्यात सहभागी होणेसाठी कोणतेही प्रवेश फी अथवा कसल्याही प्रकारचे शुल्क घेतले जाणार नाही.
? ज्यांना या सामुहिक चक्रवर्ती विवाह सोहळ्यात सहभागी होऊन आपले दांपत्य जीवन सुरु करू इच्छितात त्यांनी खालील नंबरवर त्वरित संपर्क करावे.
*?आयोजक?*
*विद्या समय संस्कार फौंडेशन, मुंबई*
*शांति विद्या ज्ञानसंवर्धन संस्था,जयसिंगपूर*
*?संपर्क?*
*??प्रमुख मार्गदर्शक:-* *किरिटभाई दोशी, मुंबई*
*मुख्यसंयोजक - संतोष पाटील हुपरी - 7588912308*
सहसंयोजक - राजकुमार पाटील - मजले - 9881875045
माणिक चंदगडे, सदलगा - 9980417101
भारती पाटील, जयसिंगपूर - 8975974451
सुरेखा पाटील, इ. धामणी - 9970131098 |
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2026-04-10 16:23:15 |
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