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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 228325 |
40449740 |
अनेकांत सागर जी विहार |
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2026-06-13 23:14:49 |
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| 228323 |
40449671 |
1.पुणे चातुर्मास वर्षायोग 2023- वीर सागर जी महाराज |
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*हर तस्वीर के पीछे एक कहानी होती है, और हर कहानी की शुरुआत एक सही परिचय से होती है। ✨*
*एक मुलाकात, एक विश्वास, और फिर जीवनभर का साथ। ❤️*
जैन विवाह बंधन में हम सिर्फ रिश्ते नहीं जोड़ते, हम दो परिवारों को एक खूबसूरत बंधन में जोड़ते हैं।
? एक और सफल बंधन।
? संपर्क करें: 9529436547
? संचालक – आदरणीय सुकमाल कुमार जी जैन, पुणे
Office Address? Hinjewadi Phase 1, Pune Maharashtra
Whatsapp group link ??
<a href="https://chat.whatsapp.com/IGGUyBWqgyJBSSYXLGSvJO?s=cl&p=i&ilr=1" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/IGGUyBWqgyJBSSYXLGSvJO?s=cl&p=i&ilr=1</a> |
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2026-06-13 23:04:37 |
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| 228324 |
40449671 |
1.पुणे चातुर्मास वर्षायोग 2023- वीर सागर जी महाराज |
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*हर तस्वीर के पीछे एक कहानी होती है, और हर कहानी की शुरुआत एक सही परिचय से होती है। ✨*
*एक मुलाकात, एक विश्वास, और फिर जीवनभर का साथ। ❤️*
जैन विवाह बंधन में हम सिर्फ रिश्ते नहीं जोड़ते, हम दो परिवारों को एक खूबसूरत बंधन में जोड़ते हैं।
? एक और सफल बंधन।
? संपर्क करें: 9529436547
? संचालक – आदरणीय सुकमाल कुमार जी जैन, पुणे
Office Address? Hinjewadi Phase 1, Pune Maharashtra
Whatsapp group link ??
<a href="https://chat.whatsapp.com/IGGUyBWqgyJBSSYXLGSvJO?s=cl&p=i&ilr=1" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/IGGUyBWqgyJBSSYXLGSvJO?s=cl&p=i&ilr=1</a> |
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2026-06-13 23:04:37 |
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| 228321 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-13 22:50:43 |
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| 228322 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-13 22:50:43 |
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| 228320 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*? सिद्धम नमः ?*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*?✍️सच्चा राही ✍️?*
*????✍️कहानी सभी के काम की*
*??? प्रभु का बही खाता ✍️?*
*?????↔️ जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना?*
*?????✅ विशेष नोट :-1. ज्येष्ठ माह दो होने के कारण प्रथम ज्येष्ठ मास में तीर्थंकर भगवन्तों के कल्याणक महोत्सव नहीं मनायें जातें।ऐसी आचार्यों की मान्यता है।*
*?2.कुछ मान्यता के अनुसार प्रथम ज्येष्ठ के कृष्ण और द्वितीय ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष की मान्यता भी है।*
*✅3.कुछ स्थानों पर श्रावक दोनों ही ज्येष्ठ मास में कल्याणक मनाते है। श्रावकों का कहना है कि तीन वर्षों में 7 दिन पंच कल्याणक महोत्सव का मौका दुबारा मिला है तो इस अवसर पर धर्म लाभ क्यों नहीं करें।अतः श्रावक गण अपनी सुविधानुसार धर्म की आराधना करें।*
*??????? ज्येष्ठ कृष्ण 14 , रविवार 14 जून 2026 कलि काल के 16 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री शांतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन की चंचलता समाप्त हो जाती है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शांतिनाथ भगवान जी का जन्म ,तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*??????? ज्येष्ठ अमावस्या , सोमवार 15 जून 2026 कलि काल के द्वितीय तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन की चंचलता समाप्त हो जाती है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*? जून 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 06, ,10,12,14,15 ,18 व 26 जून को कल्याणक महोत्सव है। ?✅विशेष :- 14 व 18 जून को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने जून माह में दो बार निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*?????? शुद्ध विवाह मुहूर्त 21,22,23, 24 ,25,27 व 29 जून को मुहूर्त है। ?? वाहन खरीद मुहूर्त 17,22,24,25 जून को है।?? प्रापर्टी मुहूर्त 16,18,25,26 जून को है।✅? गृह प्रवेश मुहूर्त 24 व 25 जून को है।*
*?यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*✅प्रभु का बही खाता✅*
भक्ति केवल नाम जपने का विषय नहीं, बल्कि हृदय की गहराइयों में समर्पण का भाव है। शब्दों से की गई भक्ति भगवान तक पहुँचती है, परंतु निष्काम प्रेम और पूर्ण समर्पण भगवान के हृदय तक पहुँच जाता है। इसी सत्य को उजागर करती है *यह सुंदर कथा।*
एक बार वीणा बजाते हुए देवर्षि नारद "नारायण-नारायण" का जाप करते हुए भगवान श्रीराम के दरबार में पहुँचे। द्वार पर हनुमान जी पहरा दे रहे थे।
हनुमान जी ने विनम्रता से पूछा, "मुनिवर, आज किस उद्देश्य से पधारे हैं?"
नारद जी बोले, "मैं प्रभु श्रीराम के दर्शन करने आया हूँ।"
फिर उन्होंने उत्सुकतावश पूछा, "हनुमान, प्रभु इस समय क्या कर रहे हैं?"
⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*?️?✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। ✍️*
*✍️➡️????अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक अपने जीवन में परेशानियों को सभी (ज्योतिषी, मांत्रिक तांत्रिक व अन्य) साधनों से उपाय करने पर भी हताश हो चुकें हैं। केवल वें ही सशुल्क समाधान प्राप्त करने के इच्छुक SUKODAYA PRINCIPAL के ? W 9057311931 व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे। कृपया कोई भी काल ना करें।समयाभाव के कारण आपको व्हाट्सएप पर सूचित किया जाएगा।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️
हनुमान जी ने उत्तर दिया, "मुझे तो इतना ज्ञात है कि प्रभु किसी बही-खाते में कुछ लिख रहे हैं।"
नारद जी सीधे भगवान श्रीराम के पास पहुँचे। उन्होंने देखा कि प्रभु सचमुच एक बड़ा बही-खाता खोलकर उसमें कुछ लिख रहे हैं।
नारद जी ने मुस्कुराकर कहा, "प्रभु! यह हिसाब-किताब का कार्य तो किसी मुनीम को सौंप दीजिए।"
श्रीराम ने कहा, "नारद, यह ऐसा कार्य है जिसे मैं किसी और को नहीं दे सकता।"
"ऐसा कौन-सा महत्वपूर्ण कार्य है प्रभु?" नारद जी ने जिज्ञासा से पूछा।
भगवान बोले, "इस बही-खाते में मैं उन भक्तों के नाम लिखता हूँ जो हर पल मेरा स्मरण और भजन करते हैं।"
यह सुनकर नारद जी ने उत्साह से बही-खाता देखा। उसमें सबसे ऊपर अपना नाम देखकर उनका हृदय गर्व से भर गया। लेकिन तभी उनकी दृष्टि एक बात पर जाकर ठिठक गई—पूरे बही-खाते में कहीं भी हनुमान जी का नाम नहीं था।
वे आश्चर्यचकित रह गए। सोचने लगे, "जो हनुमान प्रभु के सबसे प्रिय भक्त हैं, उनका नाम यहाँ क्यों नहीं है?"
नारद जी बाहर आए और हनुमान जी से बोले, "हनुमान! प्रभु के भक्तों की सूची में तुम्हारा नाम तो कहीं नहीं है।"
हनुमान जी ने सहज भाव से उत्तर दिया, "मुनिवर, यदि मेरा नाम नहीं है तो अवश्य मैं उस योग्य नहीं हूँ। प्रभु जो करते हैं, उचित ही करते हैं।"
फिर उन्होंने कहा, "हाँ, प्रभु एक और दैनंदिनी भी रखते हैं।"
यह सुनकर नारद जी पुनः श्रीराम के पास पहुँचे और बोले, "प्रभु! सुना है आप एक दूसरी दैनंदिनी भी रखते हैं। उसमें क्या लिखते हैं?"
भगवान श्रीराम मुस्कुराए और बोले, "उसमें मैं उन लोगों के नाम लिखता हूँ, जिन्हें मैं स्वयं प्रतिदिन स्मरण करता हूँ।"
नारद जी ने उत्सुकता से वह दैनंदिनी खोली। जैसे ही पहला पृष्ठ पलटा, उनकी आँखें आश्चर्य से फैल गईं। सबसे ऊपर लिखा था—
'हनुमान'।
यह देखकर नारद जी का सारा अभिमान चूर-चूर हो गया। उन्हें समझ आ गया कि केवल जिह्वा से किया गया भजन और हृदय से किया गया समर्पण, दोनों में कितना अंतर है।
उन्होंने विनम्र होकर प्रभु के चरणों में सिर झुका दिया।
*????✍️✅?विशेष :- भगवान को केवल शब्दों का भजन नहीं, बल्कि हृदय का प्रेम और निष्काम समर्पण प्रिय होता है। जो भक्त अपने अहंकार को त्यागकर तन, मन और कर्म से सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पित हो जाता है, वह केवल रत्नत्रय का आराधक ही नहीं रहता, बल्कि मोक्ष मार्ग भी उसके प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं "भक्ति का मूल्य शब्दों से नहीं, समर्पण से आँका जाता है। जो भक्त सच्चे देव शास्त्र गुरु के अनुसार आचरण कर रत्नत्रय को हृदय में बसाता है, वह आचरण उसे एक दिन भगवान बनाता हैं।"*
*????✍️➡️?️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
????????
*जैनम जयतु शासनम*
???????? |
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2026-06-13 22:50:41 |
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| 228319 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*? सिद्धम नमः ?*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*?✍️सच्चा राही ✍️?*
*????✍️कहानी सभी के काम की*
*??? प्रभु का बही खाता ✍️?*
*?????↔️ जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना?*
*?????✅ विशेष नोट :-1. ज्येष्ठ माह दो होने के कारण प्रथम ज्येष्ठ मास में तीर्थंकर भगवन्तों के कल्याणक महोत्सव नहीं मनायें जातें।ऐसी आचार्यों की मान्यता है।*
*?2.कुछ मान्यता के अनुसार प्रथम ज्येष्ठ के कृष्ण और द्वितीय ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष की मान्यता भी है।*
*✅3.कुछ स्थानों पर श्रावक दोनों ही ज्येष्ठ मास में कल्याणक मनाते है। श्रावकों का कहना है कि तीन वर्षों में 7 दिन पंच कल्याणक महोत्सव का मौका दुबारा मिला है तो इस अवसर पर धर्म लाभ क्यों नहीं करें।अतः श्रावक गण अपनी सुविधानुसार धर्म की आराधना करें।*
*??????? ज्येष्ठ कृष्ण 14 , रविवार 14 जून 2026 कलि काल के 16 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री शांतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन की चंचलता समाप्त हो जाती है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शांतिनाथ भगवान जी का जन्म ,तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*??????? ज्येष्ठ अमावस्या , सोमवार 15 जून 2026 कलि काल के द्वितीय तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन की चंचलता समाप्त हो जाती है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*? जून 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 06, ,10,12,14,15 ,18 व 26 जून को कल्याणक महोत्सव है। ?✅विशेष :- 14 व 18 जून को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने जून माह में दो बार निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*?????? शुद्ध विवाह मुहूर्त 21,22,23, 24 ,25,27 व 29 जून को मुहूर्त है। ?? वाहन खरीद मुहूर्त 17,22,24,25 जून को है।?? प्रापर्टी मुहूर्त 16,18,25,26 जून को है।✅? गृह प्रवेश मुहूर्त 24 व 25 जून को है।*
*?यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*✅प्रभु का बही खाता✅*
भक्ति केवल नाम जपने का विषय नहीं, बल्कि हृदय की गहराइयों में समर्पण का भाव है। शब्दों से की गई भक्ति भगवान तक पहुँचती है, परंतु निष्काम प्रेम और पूर्ण समर्पण भगवान के हृदय तक पहुँच जाता है। इसी सत्य को उजागर करती है *यह सुंदर कथा।*
एक बार वीणा बजाते हुए देवर्षि नारद "नारायण-नारायण" का जाप करते हुए भगवान श्रीराम के दरबार में पहुँचे। द्वार पर हनुमान जी पहरा दे रहे थे।
हनुमान जी ने विनम्रता से पूछा, "मुनिवर, आज किस उद्देश्य से पधारे हैं?"
नारद जी बोले, "मैं प्रभु श्रीराम के दर्शन करने आया हूँ।"
फिर उन्होंने उत्सुकतावश पूछा, "हनुमान, प्रभु इस समय क्या कर रहे हैं?"
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*?️?✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। ✍️*
*✍️➡️????अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक अपने जीवन में परेशानियों को सभी (ज्योतिषी, मांत्रिक तांत्रिक व अन्य) साधनों से उपाय करने पर भी हताश हो चुकें हैं। केवल वें ही सशुल्क समाधान प्राप्त करने के इच्छुक SUKODAYA PRINCIPAL के ? W 9057311931 व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे। कृपया कोई भी काल ना करें।समयाभाव के कारण आपको व्हाट्सएप पर सूचित किया जाएगा।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️
हनुमान जी ने उत्तर दिया, "मुझे तो इतना ज्ञात है कि प्रभु किसी बही-खाते में कुछ लिख रहे हैं।"
नारद जी सीधे भगवान श्रीराम के पास पहुँचे। उन्होंने देखा कि प्रभु सचमुच एक बड़ा बही-खाता खोलकर उसमें कुछ लिख रहे हैं।
नारद जी ने मुस्कुराकर कहा, "प्रभु! यह हिसाब-किताब का कार्य तो किसी मुनीम को सौंप दीजिए।"
श्रीराम ने कहा, "नारद, यह ऐसा कार्य है जिसे मैं किसी और को नहीं दे सकता।"
"ऐसा कौन-सा महत्वपूर्ण कार्य है प्रभु?" नारद जी ने जिज्ञासा से पूछा।
भगवान बोले, "इस बही-खाते में मैं उन भक्तों के नाम लिखता हूँ जो हर पल मेरा स्मरण और भजन करते हैं।"
यह सुनकर नारद जी ने उत्साह से बही-खाता देखा। उसमें सबसे ऊपर अपना नाम देखकर उनका हृदय गर्व से भर गया। लेकिन तभी उनकी दृष्टि एक बात पर जाकर ठिठक गई—पूरे बही-खाते में कहीं भी हनुमान जी का नाम नहीं था।
वे आश्चर्यचकित रह गए। सोचने लगे, "जो हनुमान प्रभु के सबसे प्रिय भक्त हैं, उनका नाम यहाँ क्यों नहीं है?"
नारद जी बाहर आए और हनुमान जी से बोले, "हनुमान! प्रभु के भक्तों की सूची में तुम्हारा नाम तो कहीं नहीं है।"
हनुमान जी ने सहज भाव से उत्तर दिया, "मुनिवर, यदि मेरा नाम नहीं है तो अवश्य मैं उस योग्य नहीं हूँ। प्रभु जो करते हैं, उचित ही करते हैं।"
फिर उन्होंने कहा, "हाँ, प्रभु एक और दैनंदिनी भी रखते हैं।"
यह सुनकर नारद जी पुनः श्रीराम के पास पहुँचे और बोले, "प्रभु! सुना है आप एक दूसरी दैनंदिनी भी रखते हैं। उसमें क्या लिखते हैं?"
भगवान श्रीराम मुस्कुराए और बोले, "उसमें मैं उन लोगों के नाम लिखता हूँ, जिन्हें मैं स्वयं प्रतिदिन स्मरण करता हूँ।"
नारद जी ने उत्सुकता से वह दैनंदिनी खोली। जैसे ही पहला पृष्ठ पलटा, उनकी आँखें आश्चर्य से फैल गईं। सबसे ऊपर लिखा था—
'हनुमान'।
यह देखकर नारद जी का सारा अभिमान चूर-चूर हो गया। उन्हें समझ आ गया कि केवल जिह्वा से किया गया भजन और हृदय से किया गया समर्पण, दोनों में कितना अंतर है।
उन्होंने विनम्र होकर प्रभु के चरणों में सिर झुका दिया।
*????✍️✅?विशेष :- भगवान को केवल शब्दों का भजन नहीं, बल्कि हृदय का प्रेम और निष्काम समर्पण प्रिय होता है। जो भक्त अपने अहंकार को त्यागकर तन, मन और कर्म से सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पित हो जाता है, वह केवल रत्नत्रय का आराधक ही नहीं रहता, बल्कि मोक्ष मार्ग भी उसके प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं "भक्ति का मूल्य शब्दों से नहीं, समर्पण से आँका जाता है। जो भक्त सच्चे देव शास्त्र गुरु के अनुसार आचरण कर रत्नत्रय को हृदय में बसाता है, वह आचरण उसे एक दिन भगवान बनाता हैं।"*
*????✍️➡️?️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
????????
*जैनम जयतु शासनम*
???????? |
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2026-06-13 22:50:40 |
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| 228317 |
40449730 |
True Jainism |
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|
पूर्ण कर्नाटक समाज , गडग , बंगलौर , हैदराबाद, सिवाना के सिवांची समाज के पदाधिकारियों को खुला पत्र! |
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2026-06-13 22:49:31 |
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| 228318 |
40449730 |
True Jainism |
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पूर्ण कर्नाटक समाज , गडग , बंगलौर , हैदराबाद, सिवाना के सिवांची समाज के पदाधिकारियों को खुला पत्र! |
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2026-06-13 22:49:31 |
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| 228315 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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विहार हरिशंकरपुरम तक होगा |
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2026-06-13 22:47:09 |
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