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144 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ *आर्यिका मां विज्ञानमति माताजी द्वारा रचित सम्यक्त्व मञ्जूषा एवं सच्चे देव का स्वरूप* *देवों में सम्यक्त्व उत्पत्ति के चार कारण कहे गए है -* _१- जिनमहिमा दर्शन २- धर्म श्रवण ३- जाति स्मरण और ४- देव ऋद्धि दर्शन_ *सम्यग्दर्शन की प्राप्ति कैसे होती है* _जब देशना लब्धि और काल लब्धि आदि बहिरंग कारण तथा करण लब्धि रूप अन्तरंग कारण सामग्री प्राप्त होती है, तभी यह भव्य प्राणी विशुद्ध सम्यग्दर्शन का धारक हो सकता है।_ *(मल्लिपुराण ९/११६)* _क्षयोपशम लब्धि, विशुद्ध लब्धि, देशना लब्धि तथा प्रायोग्य लब्धि ये चार लब्धियां तो अभव्य जीवों के भी हो सकती है लेकिन करण लब्धि को प्राप्त कर लेने पर नियम से सम्यग्दर्शन होता है।_ *(धवला जी ६/२०३-५)* _तीनों कारणों के अंतिम समय में सम्यक्त्व की उत्पत्ति होती है। इस सूत्र के द्वारा क्षयोपशम लब्धि,विशुद्धि लब्धि, देशना लब्धि और प्रायोग्य लब्धि इन चारों लब्धियों की प्ररुपणा की गई है।_ *(धवला जी ६/२०४)* _दर्शन मोह का उपशम करने वाला (करण लब्धि में प्रवेश करने के लिए) जीव उपद्रव व उपसर्ग आने पर भी उसका उपशम किए बिना नहीं रहता है।_ *(धवला ६)* _अर्थात् वह निश्चित रूप से सम्यक्त्व प्राप्त कर लेता है।_ *?️ अनादि मिथ्या दृष्टि भव्य के कर्मों के उदय से प्राप्त कलुषता के रहते हुए उपशम सम्यक्त्व कैसे होता हैं ⁉️* _?️ अनादिकाल से मिथ्यात्व में पड़ा हुआ जीव भी काल लब्धि आदि कारणों के मिलने पर सम्यक्त्व को प्राप्त कर लेता है। उसमें एक लब्धि यह है कि कर्मों से घिरे हुए भव्य जीव के संसार भ्रमण का काल अधिक से अधिक अर्धपुद्गल परावर्तन प्रमाण बाकी रहने पर वह प्रथमोपशम सम्यक्त्व को ग्रहण करने का पात्र होता है। यदि उसके परिभ्रमण का काल अर्द्धपुद्गल परावर्तन से अधिक शेष होता है तो प्रथम सम्यक्त्व को ग्रहण करने के योग्य नहीं होता है।_ *(कार्तिकेय अनुप्रेक्षा टीका ३०८)* जिस प्रकार स्वर्ण पाषाण शोधने की सामग्री के संयोग से शुद्ध स्वर्ण बन जाता है,उसी प्रकार काल आदि लब्धि की प्राप्ति से आत्मा परमात्मा बन जाता है। *(मोक्षपाहुड २४)* _मिथ्यात्व से पुष्ट तथा कर्ममल सहित आत्मा कभी कालादि लब्धि के प्राप्त होने पर क्रम से सम्यग्दर्शन, व्रत दक्षता,कषायों का विनाश और योगनिरोध के द्वारा मुक्ति प्राप्त कर लेता है।_ *(आत्मानुशासन २४१)* _अनादिकाल से चला आया कोई जीव काल आदि लब्धियों का निमित्त पाकर तीनों कारण रूप परिणामों के द्वारा मिथ्यात्वादि सात प्रकृतियों का उपशम करता है तथा संसार की परिपाटी का विच्छेद कर उपशम सम्यग्दर्शन प्राप्त करता है।_ *(मल्लिपुराण ६२/३१४-१५)* _आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी जी ने तत्त्वार्थसूत्र महाग्रंथ की सर्वप्रथम टीका श्री सर्वार्थसिद्धि ग्रंथ में काल लब्धि का वर्णन करते हुए लिखा है - अनादि मिथ्या दृष्टि के काल लब्धि आदि के निमित्त से इनका उपशम होता है अर्थात् प्रथमोपशम सम्यक्त्व प्राप्त होता है। यहां कार लब्धि को बताते हैं - कर्म युक्त कोई भी भव्य आत्मा अर्द्धपुद्गल परिवर्तन नाम के काल के शेष रहने पर प्रथम सम्यक्त्व को ग्रहण करने के योग्य होता है, इससे अधिक काल के शेष रहने पर नहीं होता है, यह एक काल लब्धि है। दूसरी काल लब्धि का संबंध कर्म स्थिति से हैं। उत्कृष्ट स्थिति वाले कर्मों के शेष रहने पर या जघन्य स्थिति वाले कर्मों के शेष रहने पर प्रथम सम्यक्त्व का लाभ नहीं होता है। जब बंधने वाले कर्मों की स्थिति अन्त:कोड़ाकोड़ी सागर पड़ती है और विशुद्ध परिणामों के वश से सत्ता में स्थित कर्मों की स्थिति संख्यात हजार सागर कम अन्त:कोड़ाकोड़ी सागर प्राप्त होती है,तब यह जीव प्रथम सम्यक्त्व के योग्य होता है। एक अर्थात् तीसरी काल लब्धि भव की अपेक्षा होती है - जो भव्य है,संज्ञी है,पर्याप्तक है और सर्व विशुद्ध है, वह प्रथम सम्यक्त्व को उत्पन्न करता है।_ *(सर्वार्थसिद्धि २/३)* ???????? 2026-02-12 07:10:16
143 40449756 अंतरिक्ष पार्श्वनाथचंडीगढ़ पंजाब हरियाणा 19 ?? 2026-02-12 07:10:12
142 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म ?? 2026-02-12 07:10:05
141 40449729 माँ विशुद्ध भक्त परिवार?7 मन की मेरी बात में तुमसे कहूं 2026-02-12 07:09:17
140 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-12 07:07:30
139 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-02-12 07:06:57
138 40449663 ? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? मन की मेरी बात में तुमसे कहूं 2026-02-12 07:06:33
137 40449695 www yug marble stone work.Com 2026-02-12 07:04:32
136 40449752 ?3 विद्यांजलि ब्रॉडकास्ट ? *विद्यांजलि अजना कुमकुम:* ​विद्यांजलि का अजना कुमकुम केवल एक सौंदर्य उत्पाद नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक शुद्धता का मिश्रण है। ​1. मुख्य सामग्री (Ingredients) ​यह कुमकुम पूरी तरह से प्राकृतिक और शाकाहारी (Vegan) है। इसमें निम्नलिखित सामग्रियों का उपयोग किया जाता है: ​(Maranta Arundinacea): इसे आधार के रूप में उपयोग किया जाता है, जो दक्षिण भारत में जैविक रूप से उगाया जाता है। ​प्राकृतिक एसेंशियल ऑयल्स: इसमें लोबान (Frankincense), नींबू (Lime), रोजमेरी, जूनिपर बेरी और चंदन के तेल का मिश्रण होता है। ​सुरक्षित रंग: इसमें FDA द्वारा अनुमोदित रंगों का उपयोग किया जाता है जो त्वचा के लिए सुरक्षित हैं। ​2. प्रमुख विशेषताएं ​रसायन मुक्त: यह सीसा (Lead), पारा (Mercury) और हानिकारक रसायनों से पूरी तरह मुक्त है। ​अहिंसक निर्माण: इस उत्पाद में किसी भी पशु चर्बी या अल्कोहल का उपयोग नहीं किया जाता। ​अजना चक्र सक्रियण: इसे माथे के बीच (आज्ञा चक्र) पर लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। माना जाता है कि इसमें मौजूद एसेंशियल ऑयल्स एकाग्रता बढ़ाने और मन को शांत रखने में मदद करते हैं। महिलाओं के द्वारा म 2026-02-12 07:04:25
135 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) ಕರ್ನಾಟಕ ದಿಗಂಬರ ಜೈನ ಸಮಾಜ ಇವರ ಆ್ಯಪ್ ಬಂದಿದೆ. ಎಲ್ಲಾ ಸದಸ್ಯರು ತಕ್ಷಣವೇ ಕೆಳಗೆ ನೀಡಿರುವ ಲಿಂಕ್ ಅನ್ನು ಕ್ಲಿಕ್ ಮಾಡುವ ಮೂಲಕ‌ ಗುಂಪನ್ನು‌ ಸೇರಿ, ಮತ್ತು ನಿಮ್ಮ ಸದಸ್ಯತ್ವ ಗುರುತಿನ ಚೀಟಿಯನ್ನು ಪಡೆಯಿರಿ - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/875244/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=ZHQAP&amp;utm_referrer_state=SUPERSTAR" target="_blank">https://primetrace.com/group/875244/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=ZHQAP&amp;utm_referrer_state=SUPERSTAR</a> 2026-02-12 07:04:17