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76649 40449712 72. वात्सल्य वारिधि 2026-04-11 09:12:35
76650 40449712 72. वात्सल्य वारिधि 2026-04-11 09:12:35
76647 40449712 72. वात्सल्य वारिधि 2026-04-11 09:12:32
76648 40449712 72. वात्सल्य वारिधि 2026-04-11 09:12:32
76645 40449712 72. वात्सल्य वारिधि एक ऐसे महामना, भव्य पुण्यात्मा—जिनका जन्म भी तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर संयोगवश हुआ। 1008 श्री धर्मनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक दिवस के पावन अवसर से यह अद्भुत संयोग जुड़ा रहा कि दीक्षा के पश्चात उनका नाम भी श्री धर्मसागर जी हुआ। अंतर्विलय समाधि वैशाख कृष्ण नवमी, विक्रम संवत 2044 (सन 1987) स्थान: सीकर, राजस्थान श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक के पावन दिन—ऐसे दिव्य पुण्यात्मा, जिनका जन्म तथा समाधि दोनों ही तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर हुए। तृतीय पट्टाचार्य, आचार्य श्री 108 धर्मसागर जी महाराज के 39वें समाधि अंतर्विलय वर्ष पर— कोटिशः नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु… ?????? 2026-04-11 09:12:30
76646 40449712 72. वात्सल्य वारिधि एक ऐसे महामना, भव्य पुण्यात्मा—जिनका जन्म भी तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर संयोगवश हुआ। 1008 श्री धर्मनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक दिवस के पावन अवसर से यह अद्भुत संयोग जुड़ा रहा कि दीक्षा के पश्चात उनका नाम भी श्री धर्मसागर जी हुआ। अंतर्विलय समाधि वैशाख कृष्ण नवमी, विक्रम संवत 2044 (सन 1987) स्थान: सीकर, राजस्थान श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक के पावन दिन—ऐसे दिव्य पुण्यात्मा, जिनका जन्म तथा समाधि दोनों ही तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर हुए। तृतीय पट्टाचार्य, आचार्य श्री 108 धर्मसागर जी महाराज के 39वें समाधि अंतर्विलय वर्ष पर— कोटिशः नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु… ?????? 2026-04-11 09:12:30
76644 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ?साप को संबोधित करते हुये मुनीश्री विशेषसागरजी गुरुदेव ?? 2026-04-11 09:12:20
76643 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ?साप को संबोधित करते हुये मुनीश्री विशेषसागरजी गुरुदेव ?? 2026-04-11 09:12:19
76641 48283815 Jain pramukh pathshala 1 2026-04-11 09:12:14
76642 48283815 Jain pramukh pathshala 1 2026-04-11 09:12:14