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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 76983 |
40449710 |
11. वात्सल्य वारिधि |
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2026-04-11 11:27:42 |
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| 76984 |
40449710 |
11. वात्सल्य वारिधि |
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2026-04-11 11:27:42 |
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| 76981 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*जैनियों को बिज़नेस करना चाहिए या नौकरी जवाब चौंका देगा | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
*YouTube पर देखें*
????
*<a href="https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*</a>
*Instagram पर देखें*
?
*<a href="https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
*<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> |
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2026-04-11 11:27:04 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*जैनियों को बिज़नेस करना चाहिए या नौकरी जवाब चौंका देगा | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
*YouTube पर देखें*
????
*<a href="https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/bPC1AN6Fa_k*</a>
*Instagram पर देखें*
?
*<a href="https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DW-XhW4EyRZ/*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
*<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> |
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2026-04-11 11:27:04 |
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| 76979 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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*यदि मैने जैन धर्म को बचाने के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया...*
*तब तो मेरा जीवन, जीवन है अन्यथा ऐसे जीवन तो कितनी बार मिले, कितनी बार नष्ट हो जायेंगे...*
*हम किसी का कुछ नहीं लेते, बस हमारा छीनने की कोशिश न करों...*
"भगवान महावीर ने कहा है....तेरा सो तेरा, मेरा सो मेरा" -- मुनि श्री 108 अनुसरण सागर जी महाराज
?? महाराष्ट्र के मंत्री जैन समाज के लोढ़ा जी...
*जैन धर्म भारत का स्वतंत्र धर्म है, अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए तथ्यहीन कुतर्को से जैन समाज को भ्रमित कर जैन धर्म को अन्य धर्म का हिस्सा बनाने की कोशिश न करों, राजनीति को धर्म में मत लाओ*....संजय जैन, विश्व जैन संगठन, व्हाट्सएप: 8800001532 |
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2026-04-11 11:26:16 |
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| 76980 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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*यदि मैने जैन धर्म को बचाने के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया...*
*तब तो मेरा जीवन, जीवन है अन्यथा ऐसे जीवन तो कितनी बार मिले, कितनी बार नष्ट हो जायेंगे...*
*हम किसी का कुछ नहीं लेते, बस हमारा छीनने की कोशिश न करों...*
"भगवान महावीर ने कहा है....तेरा सो तेरा, मेरा सो मेरा" -- मुनि श्री 108 अनुसरण सागर जी महाराज
?? महाराष्ट्र के मंत्री जैन समाज के लोढ़ा जी...
*जैन धर्म भारत का स्वतंत्र धर्म है, अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए तथ्यहीन कुतर्को से जैन समाज को भ्रमित कर जैन धर्म को अन्य धर्म का हिस्सा बनाने की कोशिश न करों, राजनीति को धर्म में मत लाओ*....संजय जैन, विश्व जैन संगठन, व्हाट्सएप: 8800001532 |
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2026-04-11 11:26:16 |
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| 76977 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*यदि मैने जैन धर्म को बचाने के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया...*
*तब तो मेरा जीवन, जीवन है अन्यथा ऐसे जीवन तो कितनी बार मिले, कितनी बार नष्ट हो जायेंगे...*
*हम किसी का कुछ नहीं लेते, बस हमारा छीनने की कोशिश न करों...*
"भगवान महावीर ने कहा है....तेरा सो तेरा, मेरा सो मेरा" -- मुनि श्री 108 अनुसरण सागर जी महाराज
?? महाराष्ट्र के मंत्री जैन समाज के लोढ़ा जी...
*जैन धर्म भारत का स्वतंत्र धर्म है, अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए तथ्यहीन कुतर्को से जैन समाज को भ्रमित कर जैन धर्म को अन्य धर्म का हिस्सा बनाने की कोशिश न करों, राजनीति को धर्म में मत लाओ*....संजय जैन, विश्व जैन संगठन, व्हाट्सएप: 8800001532 |
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2026-04-11 11:24:58 |
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| 76978 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*यदि मैने जैन धर्म को बचाने के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया...*
*तब तो मेरा जीवन, जीवन है अन्यथा ऐसे जीवन तो कितनी बार मिले, कितनी बार नष्ट हो जायेंगे...*
*हम किसी का कुछ नहीं लेते, बस हमारा छीनने की कोशिश न करों...*
"भगवान महावीर ने कहा है....तेरा सो तेरा, मेरा सो मेरा" -- मुनि श्री 108 अनुसरण सागर जी महाराज
?? महाराष्ट्र के मंत्री जैन समाज के लोढ़ा जी...
*जैन धर्म भारत का स्वतंत्र धर्म है, अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए तथ्यहीन कुतर्को से जैन समाज को भ्रमित कर जैन धर्म को अन्य धर्म का हिस्सा बनाने की कोशिश न करों, राजनीति को धर्म में मत लाओ*....संजय जैन, विश्व जैन संगठन, व्हाट्सएप: 8800001532 |
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2026-04-11 11:24:58 |
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| 76975 |
40449718 |
विनय गुरु ? |
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एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा ।
सेठ ने सोचा कि इतना पाप हो रहा है , तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए।
एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजनप्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की।
साधु बाबा ने बासमती चावल की खीर खायी।
दोपहर का समय था । सेठ ने कहाः "महाराज ! अभी आराम कीजिए । थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा।
साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली।
सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में चादर से ढँककर रख दी।
साधु बाबा आराम करने लगे।
खीर थोड़ी हजम हुई । साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ?
साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली।
शाम हुई तो सेठ को आशीर्वाद देकर चल पड़े।
सेठ दूसरे दिन रूपये गिनने बैठा तो 1 गड्डी (दस हजार रुपये) कम निकली।
सेठ ने सोचा कि महात्मा तो भगवतपुरुष थे, वे क्यों लेंगे.?
नौकरों की धुलाई-पिटाई चालू हो गयी। ऐसा करते-करते दोपहर हो गयी।
इतने में साधु बाबा आ पहुँचे तथा अपने झोले में से गड्डी निकाल कर सेठ को देते हुए बोलेः "नौकरों को मत पीटना, गड्डी मैं ले गया था।"
सेठ ने कहाः "महाराज ! आप क्यों लेंगे ? जब यहाँ नौकरों से पूछताछ शुरु हुई तब कोई भय के मारे आपको दे गया होगा । और आप नौकर को बचाने के उद्देश्य से ही वापस करने आये हैं क्योंकि साधु तो दयालु होते है।"
साधुः "यह दयालुता नहीं है । मैं सचमुच में तुम्हारी गड्डी चुराकर ले गया था।
साधु ने कहा सेठ ....तुम सच बताओ कि तुम कल खीर किसकी और किसलिए बनायी थी ?"
सेठ ने सारी बात बता दी कि स्टेशन मास्टर से चोरी के चावल खरीदता हूँ, उसी चावल की खीर थी।
साधु बाबाः "चोरी के चावल की खीर थी इसलिए उसने मेरे मन में भी चोरी का भाव उत्पन्न कर दिया। सुबह जब पेट खाली हुआ, तेरी खीर का सफाया हो गया तब मेरी बुद्धि शुद्ध हुई कि
'हे राम.... यह क्या हो गया ?
मेरे कारण बेचारे नौकरों पर न जाने क्या बीत रही होगी । इसलिए तेरे पैसे लौटाने आ गया ।
"इसीलिए कहते हैं कि....
जैसा खाओ अन्न ... वैसा होवे मन।
जैसा पीओ पानी .... वैसी होवे वाणी । जैसी शुद्धी.... वैसी बुद्धी.... ।
जैसे विचार ... वैसा संसार |
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2026-04-11 11:23:24 |
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| 76976 |
40449718 |
विनय गुरु ? |
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एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा ।
सेठ ने सोचा कि इतना पाप हो रहा है , तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए।
एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजनप्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की।
साधु बाबा ने बासमती चावल की खीर खायी।
दोपहर का समय था । सेठ ने कहाः "महाराज ! अभी आराम कीजिए । थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा।
साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली।
सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में चादर से ढँककर रख दी।
साधु बाबा आराम करने लगे।
खीर थोड़ी हजम हुई । साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ?
साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली।
शाम हुई तो सेठ को आशीर्वाद देकर चल पड़े।
सेठ दूसरे दिन रूपये गिनने बैठा तो 1 गड्डी (दस हजार रुपये) कम निकली।
सेठ ने सोचा कि महात्मा तो भगवतपुरुष थे, वे क्यों लेंगे.?
नौकरों की धुलाई-पिटाई चालू हो गयी। ऐसा करते-करते दोपहर हो गयी।
इतने में साधु बाबा आ पहुँचे तथा अपने झोले में से गड्डी निकाल कर सेठ को देते हुए बोलेः "नौकरों को मत पीटना, गड्डी मैं ले गया था।"
सेठ ने कहाः "महाराज ! आप क्यों लेंगे ? जब यहाँ नौकरों से पूछताछ शुरु हुई तब कोई भय के मारे आपको दे गया होगा । और आप नौकर को बचाने के उद्देश्य से ही वापस करने आये हैं क्योंकि साधु तो दयालु होते है।"
साधुः "यह दयालुता नहीं है । मैं सचमुच में तुम्हारी गड्डी चुराकर ले गया था।
साधु ने कहा सेठ ....तुम सच बताओ कि तुम कल खीर किसकी और किसलिए बनायी थी ?"
सेठ ने सारी बात बता दी कि स्टेशन मास्टर से चोरी के चावल खरीदता हूँ, उसी चावल की खीर थी।
साधु बाबाः "चोरी के चावल की खीर थी इसलिए उसने मेरे मन में भी चोरी का भाव उत्पन्न कर दिया। सुबह जब पेट खाली हुआ, तेरी खीर का सफाया हो गया तब मेरी बुद्धि शुद्ध हुई कि
'हे राम.... यह क्या हो गया ?
मेरे कारण बेचारे नौकरों पर न जाने क्या बीत रही होगी । इसलिए तेरे पैसे लौटाने आ गया ।
"इसीलिए कहते हैं कि....
जैसा खाओ अन्न ... वैसा होवे मन।
जैसा पीओ पानी .... वैसी होवे वाणी । जैसी शुद्धी.... वैसी बुद्धी.... ।
जैसे विचार ... वैसा संसार |
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2026-04-11 11:23:24 |
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