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3847 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-14 18:10:57
3846 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-14 18:10:56
3845 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-14 18:10:54
3844 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-14 18:10:52
3843 40449749 जिनोदय?JINODAYA *वेश ऊँचा हो सकता है, लेकिन चरित्र ही असली ऊँचाई तय करता है* समाज में एक अजीब प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। कुछ लोग साधु वेश धारण करते ही स्वयं को ऊँचा समझने लगते हैं। वस्त्र बदलते ही मानो व्यक्तित्व भी बदल गया हो, ऐसा भ्रम पाल लिया जाता है। परंतु सच्चाई यह है कि केवल भगवा, सफेद या दिगंबर वेश धारण कर लेने से आत्मा ऊँची नहीं हो जाती। ऊँचाई वेश से नहीं, विचार और आचरण से आती है। यदि भीतर वही पुरानी प्रवृत्तियाँ, वही अहंकार, वही स्वार्थ और वही लोभ जीवित हैं, तो वेश केवल आवरण है, वास्तविकता नहीं। समाज की सबसे बड़ी भूल यही है कि वह वेश देखकर नतमस्तक हो जाता है और चरित्र को परखने का साहस नहीं करता। परिणाम यह होता है कि कुछ लोग इस अंधभक्ति का लाभ उठाकर स्वयं को भगवान जैसा स्थापित करने लगते हैं। परमात्मा ने संतों को मार्गदर्शक बनाया था, स्वामी नहीं। साधु का काम है संयम, त्याग, तप और सत्य का पालन; यदि वही व्यक्ति सम्मान, भीड़, प्रभाव और नियंत्रण का मोह पाल ले, तो वह साधु नहीं, केवल वेशधारी रह जाता है। यह भी सत्य है कि हर साधु ऐसा नहीं होता। आज भी अनेक मुनिराज और संत ऐसे हैं जिनका जीवन त्याग और तपस्या की सच्ची मिसाल है। परंतु कुछ लोगों की गलतियों से पूरे समाज की श्रद्धा डगमगा जाती है। इसलिए आवश्यक है कि हम वेश के साथ-साथ व्यवहार भी देखें। जो व्यक्ति साधु बनने से पहले जैसा था, यदि साधु बनने के बाद भी वैसा ही है—स्वभाव में कठोर, व्यवहार में छलपूर्ण, निर्णय में पक्षपाती—तो समझ लेना चाहिए कि परिवर्तन केवल कपड़ों का हुआ है, चेतना का नहीं। धर्म का आधार सत्य है, और सत्य यह कहता है कि ऊँचाई भीतर से आती है। औक़ात शब्द भले कठोर लगे, पर उसका अर्थ है वास्तविक स्थिति। यदि भीतर विनम्रता नहीं, तो बाहर का सम्मान भी टिकाऊ नहीं होता। इतिहास गवाह है कि महावीर स्वामी ने अपने जीवन में असंख्य उपसर्ग, अपमान और आलोचनाएँ सहन कीं, किंतु उन्होंने कभी प्रतिशोध का मार्ग नहीं चुना। सत्य पर अडिग रहना और आलोचना को सहना ही उनके तप का भाग था। आज स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। यदि कोई सज्जन व्यक्ति किसी साधु को आईना दिखा दे, तो उसे धमकियाँ मिलने लगती हैं, कानूनी नोटिस भेजे जाने लगते हैं, और समाज में उसे बदनाम करने का प्रयास किया जाता है। प्रश्न यह है कि यदि आचरण निर्मल है तो आलोचना से भय क्यों? यदि जीवन पारदर्शी है तो सत्य से असहजता क्यों? आलोचना से घबराना उस आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है जो एक सच्चे साधु में होना चाहिए। धर्म की रक्षा चुप कराने से नहीं, बल्कि आत्ममंथन से होती है। यदि साधु समाज से सम्मान चाहता है तो उसे आलोचना सहने का साहस भी रखना होगा, क्योंकि बिना सहिष्णुता के साधुत्व अधूरा है। समाज को चाहिए कि वह अंधभक्ति छोड़कर विवेकपूर्ण श्रद्धा अपनाए। प्रश्न करना अपराध नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा का माध्यम है। जब तक हम केवल वेश देखकर प्रभावित होते रहेंगे, तब तक कुछ लोग इस कमजोरी का लाभ उठाते रहेंगे। सच्चा संत वही है जो स्वयं को सबसे छोटा मानता है और दूसरों को ऊपर उठाता है। जो स्वयं को ऊँचा सिद्ध करने में लगा है, वह साधु नहीं, पद का उपभोक्ता है। समय आ गया है कि हम चरित्र को वेश से ऊपर स्थान दें। तभी धर्म बचेगा, समाज बचेगा और श्रद्धा भी पवित्र बनी रहेगी। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-02-14 18:07:59
3842 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी *अंतिम दर्शन* वर्तमान के वर्धमान का <a href="https://www.instagram.com/reel/DUvNpVnjbEm/?igsh=amI4dmJjamYxZHdl" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DUvNpVnjbEm/?igsh=amI4dmJjamYxZHdl</a> 2026-02-14 18:06:05
3841 40449682 तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप *?जिज्ञासा समाधान LIVE?* *?पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज?* _?हर प्रश्न का समाधान — अब मिलेगा मुनि श्री की दिव्य वाणी से!_ ? Watch *?LIVE* Now? ? <a href="https://www.youtube.com/live/PXPm1Zb0IRw?si=k-s3puaxNkCSfF4s" target="_blank">https://www.youtube.com/live/PXPm1Zb0IRw?si=k-s3puaxNkCSfF4s</a> *?कार्यक्रम के प्रसारण के पुण्यार्जक?* ?स्व. श्रीमति बिमला कु. जैन की स्मृति में, श्री महेश चंद जैन, पुत्र व पुत्रवधू: श्री पीयूष कुमार जैन - श्रीमती कल्पना जैन, श्री अम्बरीश कुमार जैन - श्रीमती विजय लक्ष्मी जैन, पौत्र व पौत्रवधु प्रत्यूष जैन - प्रियंका जैन पौत्र: प्रेयांश जैन, ईशान जैन, पौत्री: नील्यांशा जैन, ऐरा जैन, केहा जैन कन्नौज कानपुर? ? *आपके मन में है जिज्ञासा ? तो भेजिए आपके प्रश्न जिज्ञासा समाधान हेतु* ? *+91 7415707986* पर *Whatsapp* करें या हमारे *वेबसाइट पर विजिट करें* - <a href="https://sudhakalash.in/askjigyasa/" target="_blank">https://sudhakalash.in/askjigyasa/</a> *?Subscribe &amp; Follow?* ? *Sudhakalash Channel* ? 2026-02-14 18:05:54
3840 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *?जिज्ञासा समाधान LIVE?* *?पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज?* _?हर प्रश्न का समाधान — अब मिलेगा मुनि श्री की दिव्य वाणी से!_ ? Watch *?LIVE* Now? ? <a href="https://www.youtube.com/live/PXPm1Zb0IRw?si=k-s3puaxNkCSfF4s" target="_blank">https://www.youtube.com/live/PXPm1Zb0IRw?si=k-s3puaxNkCSfF4s</a> *?कार्यक्रम के प्रसारण के पुण्यार्जक?* ?स्व. श्रीमति बिमला कु. जैन की स्मृति में, श्री महेश चंद जैन, पुत्र व पुत्रवधू: श्री पीयूष कुमार जैन - श्रीमती कल्पना जैन, श्री अम्बरीश कुमार जैन - श्रीमती विजय लक्ष्मी जैन, पौत्र व पौत्रवधु प्रत्यूष जैन - प्रियंका जैन पौत्र: प्रेयांश जैन, ईशान जैन, पौत्री: नील्यांशा जैन, ऐरा जैन, केहा जैन कन्नौज कानपुर? ? *आपके मन में है जिज्ञासा ? तो भेजिए आपके प्रश्न जिज्ञासा समाधान हेतु* ? *+91 7415707986* पर *Whatsapp* करें या हमारे *वेबसाइट पर विजिट करें* - <a href="https://sudhakalash.in/askjigyasa/" target="_blank">https://sudhakalash.in/askjigyasa/</a> *?Subscribe &amp; Follow?* ? *Sudhakalash Channel* ? 2026-02-14 18:03:01
3839 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-14 18:02:24
3838 40449695 www yug marble stone work.Com 2026-02-14 18:01:41