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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 78109 |
40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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*आज बीसवीं इक्कीसवीं शताब्दी में विद्यालय में रटना ही होता है , पहले...............*
युगश्रेष्ठ संतशिरोमणी
आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज
???✨✨???
????????
सार सार का ग्रहण हो,
असार को फटकार।
नहीं चालनी तुम बनो,
करो सूप-सत्कार ||४६।।
? *पूर्णोदय शतक* ?
आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज |
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2026-04-11 20:41:32 |
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| 78110 |
40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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*आज बीसवीं इक्कीसवीं शताब्दी में विद्यालय में रटना ही होता है , पहले...............*
युगश्रेष्ठ संतशिरोमणी
आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज
???✨✨???
????????
सार सार का ग्रहण हो,
असार को फटकार।
नहीं चालनी तुम बनो,
करो सूप-सत्कार ||४६।।
? *पूर्णोदय शतक* ?
आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज |
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2026-04-11 20:41:32 |
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| 78108 |
40449734 |
3 अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर |
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<a href="https://youtube.com/shorts/eOMEJ00LRJo?si=C69kLhf7TYqP_P7N" target="_blank">https://youtube.com/shorts/eOMEJ00LRJo?si=C69kLhf7TYqP_P7N</a>
*धर्मसभा ने नींद क्यों आती है?* |
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2026-04-11 20:37:07 |
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| 78107 |
40449734 |
3 अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर |
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<a href="https://youtube.com/shorts/eOMEJ00LRJo?si=C69kLhf7TYqP_P7N" target="_blank">https://youtube.com/shorts/eOMEJ00LRJo?si=C69kLhf7TYqP_P7N</a>
*धर्मसभा ने नींद क्यों आती है?* |
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2026-04-11 20:37:06 |
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| 78105 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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*जैन धर्म एक स्वतंत्र धर्म है*
जैन धर्म एक अत्यंत प्राचीन (अनादी अनंत ) और स्वतंत्र भारतीय धर्म है। यह अहिंसा, अनेकांतवाद (विचारों की बहुलता), और अपरिग्रह (संपत्ति का संचय न करना) के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। हिंदू या अन्य धर्मों से भिन्न है l जैन धर्म का मानना है कि ब्रह्मांड शाश्वत है, इसका कोई निर्माता या संहारक नहीं है।
*जैन धर्म की स्वतंत्रता को दर्शाने वाले मुख्य बिंदु:*
*मूल सिद्धांत:* यह आत्मा की पवित्रता और मोक्ष (कर्मफल से मुक्ति) पर केंद्रित है।
*अहिंसा पर जोर:* जैन धर्म में सभी प्राणियों के प्रति "अहिंसा परमो धर्मः" का पालन सर्वोच्च माना जाता है।
*ईश्वर की अवधारणा:* जैन धर्म में ईश्वर को विश्व का रचयिता नहीं, बल्कि एक पूर्ण मुक्त आत्मा (सिद्ध) माना जाता है, जो हर जीव के भीतर विद्यमान है।
*अनेकांतवाद* : यह दर्शन यह सिखाता है कि हर बात के कई पहलू हो सकते हैं, जो सहिष्णुता और दृष्टिकोण में उदारता लाता है।
*इतिहास* : यह श्रमण परंपरा से संबंधित है और इसके 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें प्रथम भगवान ऋषभदेव और अंतिम भगवान महावीर थे।
संक्षेप में, जैन धर्म अपनी अनूठी विचारधारा, अहिंसावादी जीवनशैली और स्वतंत्र आध्यात्मिक दर्शन के कारण एक *विशिष्ट और स्वतंत्र धर्म* है तथा जनसंख्या के आधार पर *अल्पसंख्यांक* दर्जा प्राप्त धर्म है I जय जिनेंद्र l
संकलन : संजय देशमाने, छ. संभाजीनगर |
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2026-04-11 20:36:54 |
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| 78106 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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*जैन धर्म एक स्वतंत्र धर्म है*
जैन धर्म एक अत्यंत प्राचीन (अनादी अनंत ) और स्वतंत्र भारतीय धर्म है। यह अहिंसा, अनेकांतवाद (विचारों की बहुलता), और अपरिग्रह (संपत्ति का संचय न करना) के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। हिंदू या अन्य धर्मों से भिन्न है l जैन धर्म का मानना है कि ब्रह्मांड शाश्वत है, इसका कोई निर्माता या संहारक नहीं है।
*जैन धर्म की स्वतंत्रता को दर्शाने वाले मुख्य बिंदु:*
*मूल सिद्धांत:* यह आत्मा की पवित्रता और मोक्ष (कर्मफल से मुक्ति) पर केंद्रित है।
*अहिंसा पर जोर:* जैन धर्म में सभी प्राणियों के प्रति "अहिंसा परमो धर्मः" का पालन सर्वोच्च माना जाता है।
*ईश्वर की अवधारणा:* जैन धर्म में ईश्वर को विश्व का रचयिता नहीं, बल्कि एक पूर्ण मुक्त आत्मा (सिद्ध) माना जाता है, जो हर जीव के भीतर विद्यमान है।
*अनेकांतवाद* : यह दर्शन यह सिखाता है कि हर बात के कई पहलू हो सकते हैं, जो सहिष्णुता और दृष्टिकोण में उदारता लाता है।
*इतिहास* : यह श्रमण परंपरा से संबंधित है और इसके 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें प्रथम भगवान ऋषभदेव और अंतिम भगवान महावीर थे।
संक्षेप में, जैन धर्म अपनी अनूठी विचारधारा, अहिंसावादी जीवनशैली और स्वतंत्र आध्यात्मिक दर्शन के कारण एक *विशिष्ट और स्वतंत्र धर्म* है तथा जनसंख्या के आधार पर *अल्पसंख्यांक* दर्जा प्राप्त धर्म है I जय जिनेंद्र l
संकलन : संजय देशमाने, छ. संभाजीनगर |
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2026-04-11 20:36:54 |
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| 78103 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-11 20:32:41 |
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| 78104 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-11 20:32:41 |
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| 78102 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/u94YDnWkzqQ?si=Nkx3FroA0KuGFNRo" target="_blank">https://www.youtube.com/live/u94YDnWkzqQ?si=Nkx3FroA0KuGFNRo</a> |
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2026-04-11 20:30:55 |
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| 78101 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/u94YDnWkzqQ?si=Nkx3FroA0KuGFNRo" target="_blank">https://www.youtube.com/live/u94YDnWkzqQ?si=Nkx3FroA0KuGFNRo</a> |
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2026-04-11 20:30:54 |
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