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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Message
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Status
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Date |
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40449673 |
वीरसागरजी के भक्त 37 |
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*इंटरनेशनल णमोकार दिवस पर विशेष उद्बोधन | 09 अप्रैल 2026 | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
?
*<a href="https://www.youtube.com/live/Xxbz36tD3mk*" target="_blank">https://www.youtube.com/live/Xxbz36tD3mk*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
*<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> |
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2026-04-09 06:54:13 |
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| 70776 |
40449673 |
वीरसागरजी के भक्त 37 |
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*इंटरनेशनल णमोकार दिवस पर विशेष उद्बोधन | 09 अप्रैल 2026 | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
?
*<a href="https://www.youtube.com/live/Xxbz36tD3mk*" target="_blank">https://www.youtube.com/live/Xxbz36tD3mk*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
*<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> |
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2026-04-09 06:54:13 |
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| 70773 |
40449696 |
?? श्री सम्मेद शिखर जी ?? |
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*---पाँचवी ढाल----*
मुनि सकलव्रती बड़भागी, भवभोगन तैं वैरागी।
वैराग्य उपावन माई, चिन्तैं अनुप्रेक्षा भाई॥(1)
इन चिन्तत समसुख जागै, जिमि ज्वलन पवन के लागै।
जब ही जिय आतम जानै, तब ही जिय शिवसुख ठानै॥(2)
जोवन गृह गोधन नारी, हय गय जन आज्ञाकारी।
इन्द्रिय भोग छिन थाई, सुरधनु चपला चपलाई ॥(3)
सुर असुर खगाधिप जेते, मृग ज्यों हरि काल दले ते।
मणि मन्त्र तन्त्र बहु होई, मरते न बचावै कोई ॥(4)
चहुँगति दु:ख जीव भरै हैं, परिवर्तन पंच करै हैं।
सब विधि संसार असारा, यामें सुख नाहिं लगारा ॥(5)
शुभ-अशुभ करम फल जेते, भोगैं जिय एकहिं तेते।
सुत दारा होय न सीरी, सब स्वारथ के हैं भीरी ॥(6)
जल-पय ज्यौं जिय-तन मेला, पै भिन्न-भिन्न नहिं भेला।
तो प्रगट जुदे धन-धामा, क्यों ह्वै इक मिलि सुत रामा॥(7)
पल-रुधिर राध-मल-थैली, कीकस वसादि तैं मैली।
नवद्वार बहैं घिनकारी, अस देह करै किम यारी ॥(8)
जो जोगन की चपलाई, तातैं ह्वै आस्रव भाई।
आस्रव दुखकार घनेरे, बुधिवन्त तिन्हैं निरवेरे ॥(9)
जिन पुण्य-पाप नहिं कीना, आतम अनुभव चित दीना।
तिन ही विधि आवत रोके, संवर लहि सुख अवलोके॥(10)
निज काल पाय विधि झरना, तासौं निज-काज न सरना।
तप करि जो कर्म खिपावै, सोई शिवसुख दरसावै ॥(11)
किन हू न कर्यो न धरै को, षट्द्रव्यमयी न हरै को।
सो लोकमाँहिं बिन समता, दु:ख सहै जीव नित भ्रमता॥(12)
अन्तिम ग्रीवक लौं की हद, पायो अनन्त बिरियाँ पद।
पर सम्यग्ज्ञान न लाधौ, दुर्लभ निज में मुनि साधौ ॥(13)
जे भाव मोह तैं न्यारे, दृग ज्ञान व्रतादिक सारे।
सो धर्म जबै जिय धारै, तब ही सुख अचल निहारै ॥(14)
सो धर्म मुनिन करि धरिये, तिनकी करतूति उचरिये।
ताको सुनिये भवि प्रानी, अपनी अनुभूति पिछानी॥(15) |
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2026-04-09 06:53:59 |
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| 70774 |
40449696 |
?? श्री सम्मेद शिखर जी ?? |
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*---पाँचवी ढाल----*
मुनि सकलव्रती बड़भागी, भवभोगन तैं वैरागी।
वैराग्य उपावन माई, चिन्तैं अनुप्रेक्षा भाई॥(1)
इन चिन्तत समसुख जागै, जिमि ज्वलन पवन के लागै।
जब ही जिय आतम जानै, तब ही जिय शिवसुख ठानै॥(2)
जोवन गृह गोधन नारी, हय गय जन आज्ञाकारी।
इन्द्रिय भोग छिन थाई, सुरधनु चपला चपलाई ॥(3)
सुर असुर खगाधिप जेते, मृग ज्यों हरि काल दले ते।
मणि मन्त्र तन्त्र बहु होई, मरते न बचावै कोई ॥(4)
चहुँगति दु:ख जीव भरै हैं, परिवर्तन पंच करै हैं।
सब विधि संसार असारा, यामें सुख नाहिं लगारा ॥(5)
शुभ-अशुभ करम फल जेते, भोगैं जिय एकहिं तेते।
सुत दारा होय न सीरी, सब स्वारथ के हैं भीरी ॥(6)
जल-पय ज्यौं जिय-तन मेला, पै भिन्न-भिन्न नहिं भेला।
तो प्रगट जुदे धन-धामा, क्यों ह्वै इक मिलि सुत रामा॥(7)
पल-रुधिर राध-मल-थैली, कीकस वसादि तैं मैली।
नवद्वार बहैं घिनकारी, अस देह करै किम यारी ॥(8)
जो जोगन की चपलाई, तातैं ह्वै आस्रव भाई।
आस्रव दुखकार घनेरे, बुधिवन्त तिन्हैं निरवेरे ॥(9)
जिन पुण्य-पाप नहिं कीना, आतम अनुभव चित दीना।
तिन ही विधि आवत रोके, संवर लहि सुख अवलोके॥(10)
निज काल पाय विधि झरना, तासौं निज-काज न सरना।
तप करि जो कर्म खिपावै, सोई शिवसुख दरसावै ॥(11)
किन हू न कर्यो न धरै को, षट्द्रव्यमयी न हरै को।
सो लोकमाँहिं बिन समता, दु:ख सहै जीव नित भ्रमता॥(12)
अन्तिम ग्रीवक लौं की हद, पायो अनन्त बिरियाँ पद।
पर सम्यग्ज्ञान न लाधौ, दुर्लभ निज में मुनि साधौ ॥(13)
जे भाव मोह तैं न्यारे, दृग ज्ञान व्रतादिक सारे।
सो धर्म जबै जिय धारै, तब ही सुख अचल निहारै ॥(14)
सो धर्म मुनिन करि धरिये, तिनकी करतूति उचरिये।
ताको सुनिये भवि प्रानी, अपनी अनुभूति पिछानी॥(15) |
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2026-04-09 06:53:59 |
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| 70772 |
40449696 |
?? श्री सम्मेद शिखर जी ?? |
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जय जिनेन्द्र जी!!
दिनाँक: ०९/०४/२०२६
तिथि : वैशाख कृष्ण सप्तमी, २५५२
दिन : गुरुवार
कल्याणक:
आज *रबड़ी खाने का त्याग और छहढाला की पाँचवी ढाल पढ़ने का नियम* रखें।
कल का संभावित नियम- दाल-मखनी, नान खाने का त्याग
अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का
स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी।
?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? |
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2026-04-09 06:53:58 |
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| 70771 |
40449696 |
?? श्री सम्मेद शिखर जी ?? |
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जय जिनेन्द्र जी!!
दिनाँक: ०९/०४/२०२६
तिथि : वैशाख कृष्ण सप्तमी, २५५२
दिन : गुरुवार
कल्याणक:
आज *रबड़ी खाने का त्याग और छहढाला की पाँचवी ढाल पढ़ने का नियम* रखें।
कल का संभावित नियम- दाल-मखनी, नान खाने का त्याग
अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का
स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी।
?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? |
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2026-04-09 06:53:57 |
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| 70769 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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? आप सभी को सादर जय जिनेंद्र? ? आज का दिन शुभ एवं मंगलमय हो? ☎️?"व्हाट्सएप नंबर"-9977608466? सकल जैन तीर्थंकर धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 06:53:37 |
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| 70770 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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? आप सभी को सादर जय जिनेंद्र? ? आज का दिन शुभ एवं मंगलमय हो? ☎️?"व्हाट्सएप नंबर"-9977608466? सकल जैन तीर्थंकर धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 06:53:37 |
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| 70767 |
40449801 |
सकल जैन संघ पुणे (1) |
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*जय जिनेन्द्र जैनों का अतुल्य इतिहास १२७४ प्राचीन जैन, आज विश्व नवकार महामंत्र दिवस है,`कृपया हमारी प्राचीन समृद्ध विरासत की रक्षा करें ,पुराने मंदिरों का जीनोंद्वार करे इतिहास हमारी धरोवर है उसके बिना हमारा अस्तित्त्व नही है : इतिहास कभी खत्म नहीं होता है यह अंतहीन है ,सभी जैन समूह के साथ साझा करने के लिए विनम्र अनुरोध` ,*हिन्दी या कोई और भाषा में पढ़ने के लिए गूगल लेंस ट्रांसलेटर* <a href="https://g.co/lenstranslate" target="_blank">https://g.co/lenstranslate</a> ? |
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2026-04-09 06:53:20 |
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| 70768 |
40449801 |
सकल जैन संघ पुणे (1) |
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*जय जिनेन्द्र जैनों का अतुल्य इतिहास १२७४ प्राचीन जैन, आज विश्व नवकार महामंत्र दिवस है,`कृपया हमारी प्राचीन समृद्ध विरासत की रक्षा करें ,पुराने मंदिरों का जीनोंद्वार करे इतिहास हमारी धरोवर है उसके बिना हमारा अस्तित्त्व नही है : इतिहास कभी खत्म नहीं होता है यह अंतहीन है ,सभी जैन समूह के साथ साझा करने के लिए विनम्र अनुरोध` ,*हिन्दी या कोई और भाषा में पढ़ने के लिए गूगल लेंस ट्रांसलेटर* <a href="https://g.co/lenstranslate" target="_blank">https://g.co/lenstranslate</a> ? |
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2026-04-09 06:53:20 |
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