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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 76659 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*1️⃣1️⃣ अप्रैल 2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣*
??????? ?
*सफलता से ज्यादा संतोष अच्छा है*
*कारण आपकी सफलता दूसरे पर निर्भर करती है*
*जबकि संतोष आपकी आत्मा तय करती है*
?❤️❤️❤️❤️❤️❤️?
*मौन, एकांत, स्थिरता और सादगी जिसके पास है*
*उसके पास सबकुछ है*
????????
*❤️? जय जिनेन्द्र* ?❤️ |
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2026-04-11 09:15:22 |
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| 76660 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*1️⃣1️⃣ अप्रैल 2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣*
??????? ?
*सफलता से ज्यादा संतोष अच्छा है*
*कारण आपकी सफलता दूसरे पर निर्भर करती है*
*जबकि संतोष आपकी आत्मा तय करती है*
?❤️❤️❤️❤️❤️❤️?
*मौन, एकांत, स्थिरता और सादगी जिसके पास है*
*उसके पास सबकुछ है*
????????
*❤️? जय जिनेन्द्र* ?❤️ |
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2026-04-11 09:15:22 |
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| 76657 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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जय जिनेन्द्र |
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2026-04-11 09:14:41 |
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| 76658 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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|
जय जिनेन्द्र |
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2026-04-11 09:14:41 |
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| 76655 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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Jai jinendra?? |
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2026-04-11 09:13:58 |
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| 76656 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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Jai jinendra?? |
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2026-04-11 09:13:58 |
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| 76653 |
40449694 |
तन्मय आराधना ग्रुप |
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एक ऐसे महामना, भव्य पुण्यात्मा—जिनका जन्म भी तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर संयोगवश हुआ।
1008 श्री धर्मनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक दिवस के पावन अवसर से यह अद्भुत संयोग जुड़ा रहा कि दीक्षा के पश्चात उनका नाम भी श्री धर्मसागर जी हुआ।
अंतर्विलय समाधि
*वैशाख कृष्ण नवमी, विक्रम* *संवत 2044 (सन 1987)*
स्थान: *सीकर, राजस्थान*
श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक के पावन दिन—ऐसे दिव्य पुण्यात्मा, जिनका जन्म तथा समाधि दोनों ही तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर हुए।
*तृतीय पट्टाचार्य, आचार्य श्री 108 धर्मसागर जी महाराज के 39वें समाधि अंतर्विलय वर्ष पर*—
*कोटिशः नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु…*
?????? |
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2026-04-11 09:13:28 |
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| 76654 |
40449694 |
तन्मय आराधना ग्रुप |
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एक ऐसे महामना, भव्य पुण्यात्मा—जिनका जन्म भी तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर संयोगवश हुआ।
1008 श्री धर्मनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक दिवस के पावन अवसर से यह अद्भुत संयोग जुड़ा रहा कि दीक्षा के पश्चात उनका नाम भी श्री धर्मसागर जी हुआ।
अंतर्विलय समाधि
*वैशाख कृष्ण नवमी, विक्रम* *संवत 2044 (सन 1987)*
स्थान: *सीकर, राजस्थान*
श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक के पावन दिन—ऐसे दिव्य पुण्यात्मा, जिनका जन्म तथा समाधि दोनों ही तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर हुए।
*तृतीय पट्टाचार्य, आचार्य श्री 108 धर्मसागर जी महाराज के 39वें समाधि अंतर्विलय वर्ष पर*—
*कोटिशः नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु…*
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2026-04-11 09:13:28 |
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| 76651 |
40449712 |
72. वात्सल्य वारिधि |
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2026-04-11 09:12:37 |
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| 76652 |
40449712 |
72. वात्सल्य वारिधि |
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2026-04-11 09:12:37 |
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