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Chat Name
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Message
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Status
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Date |
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| 82951 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान वैशाली (बासोकुंड) बिहार को संग्रहालय
निदेशालय,कला एवं संस्कृति विभाग में हस्तांतरित करने से सम्बन्धित मनमाने निर्णय को तत्काल रद्द करने हेतु मुख्य सचिव बिहार सरकार,कला एवं संस्कृति विभाग बिहार, जनरल डायरेक्टर बिहार संग्रहालय, बिहार के राज्यपाल, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) के सचिवों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सचिव, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को Representation स्पीड पोस्ट से भेजे गए हैं और प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान वैशाली को पूर्ववत स्थिति में रखने हेतु भी अनुरोध किया गया है। ज्ञातव्य है कि यह संस्थान जैन समाज के सहयोग से 70 वर्ष पहले स्थापित किया गया था और यह भी उल्लेखनीय है कि जैन समाज से सम्बन्धित संस्थान होने और जैन समाज के भारी वित्तीय सहयोग के बावजूद भी न तो जैन समाज से कोई चर्चा ही की गई और न ही जैन समाज को विश्वास में लिया गया। बिहार सरकार के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को E mail द्वारा भी अनुरोध पत्र भेजा है।
सलेक चन्द जैन 8800479307 |
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2026-04-13 16:25:54 |
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| 82952 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान वैशाली (बासोकुंड) बिहार को संग्रहालय
निदेशालय,कला एवं संस्कृति विभाग में हस्तांतरित करने से सम्बन्धित मनमाने निर्णय को तत्काल रद्द करने हेतु मुख्य सचिव बिहार सरकार,कला एवं संस्कृति विभाग बिहार, जनरल डायरेक्टर बिहार संग्रहालय, बिहार के राज्यपाल, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) के सचिवों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सचिव, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को Representation स्पीड पोस्ट से भेजे गए हैं और प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान वैशाली को पूर्ववत स्थिति में रखने हेतु भी अनुरोध किया गया है। ज्ञातव्य है कि यह संस्थान जैन समाज के सहयोग से 70 वर्ष पहले स्थापित किया गया था और यह भी उल्लेखनीय है कि जैन समाज से सम्बन्धित संस्थान होने और जैन समाज के भारी वित्तीय सहयोग के बावजूद भी न तो जैन समाज से कोई चर्चा ही की गई और न ही जैन समाज को विश्वास में लिया गया। बिहार सरकार के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को E mail द्वारा भी अनुरोध पत्र भेजा है।
सलेक चन्द जैन 8800479307 |
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2026-04-13 16:25:54 |
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| 82950 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*आचार्य श्री समयसागर जी* द्वारा मानवता एवं धर्म के स्वरूप का प्ररूपण एवं *मोहन भागवत जी* के प्रति मंगल कामना, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq" target="_blank">https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq</a>
_(देखें 6.43 से 8.01 तक)_
????
_*भारत देश की अमरता का रहस्य 'संतों के उपकार'* विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वर्तमान और छठे सरसंघचालक, मोहन भागवत जी का वक्तव्य, परम सान्निध्य *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* (ससंघ), आदीश्वरधाम पंचकल्याणक, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB" target="_blank">https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB</a> |
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2026-04-13 16:25:47 |
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| 82949 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*आचार्य श्री समयसागर जी* द्वारा मानवता एवं धर्म के स्वरूप का प्ररूपण एवं *मोहन भागवत जी* के प्रति मंगल कामना, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq" target="_blank">https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq</a>
_(देखें 6.43 से 8.01 तक)_
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_*भारत देश की अमरता का रहस्य 'संतों के उपकार'* विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वर्तमान और छठे सरसंघचालक, मोहन भागवत जी का वक्तव्य, परम सान्निध्य *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* (ससंघ), आदीश्वरधाम पंचकल्याणक, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB" target="_blank">https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB</a> |
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2026-04-13 16:25:46 |
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| 82948 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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_*आचार्य श्री समयसागर जी* द्वारा मानवता एवं धर्म के स्वरूप का प्ररूपण एवं *मोहन भागवत जी* के प्रति मंगल कामना, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq" target="_blank">https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq</a>
_(देखें 6.43 से 8.01 तक)_
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_*भारत देश की अमरता का रहस्य 'संतों के उपकार'* विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वर्तमान और छठे सरसंघचालक, मोहन भागवत जी का वक्तव्य, परम सान्निध्य *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* (ससंघ), आदीश्वरधाम पंचकल्याणक, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB" target="_blank">https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB</a> |
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2026-04-13 16:25:32 |
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| 82947 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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_*आचार्य श्री समयसागर जी* द्वारा मानवता एवं धर्म के स्वरूप का प्ररूपण एवं *मोहन भागवत जी* के प्रति मंगल कामना, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq" target="_blank">https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg?si=c-ZFwiMcGAzcMxyq</a>
_(देखें 6.43 से 8.01 तक)_
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_*भारत देश की अमरता का रहस्य 'संतों के उपकार'* विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वर्तमान और छठे सरसंघचालक, मोहन भागवत जी का वक्तव्य, परम सान्निध्य *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* (ससंघ), आदीश्वरधाम पंचकल्याणक, 13/4/26, नागपुर_
<a href="https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB" target="_blank">https://youtu.be/VlKPcyIAOy0?si=QrrlbYtAvduhceCB</a> |
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2026-04-13 16:25:31 |
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| 82946 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*मरने के बाद की दिखावटी संवेदनाएं, जीते जी की सच्ची उपेक्षा*
इंसान के मरने के बाद अक्सर एक अजीब सा दृश्य देखने को मिलता है। हर रिश्तेदार, हर परिचित बड़ी सहजता से कहता है—“रोटी हमारी तरफ से होगी”, “व्यवस्था हम करेंगे”, “कोई कमी नहीं रहने देंगे।” उस समय मानो संवेदनाओं की बाढ़ आ जाती है, पर यही लोग तब कहीं नजर नहीं आते जब वही इंसान ज़िंदा होता है, दर्द में होता है, बीमारी से जूझ रहा होता है।
जब वह अस्पताल के चक्कर काट रहा होता है, दवाइयों के लिए पैसे जोड़ रहा होता है, मन से टूटा हुआ होता है—तब कोई यह नहीं कहता कि “दवाई मेरी तरफ से होगी”, “इलाज की चिंता मत करो”, “मैं साथ खड़ा हूं।” उस समय रिश्तों की असली परीक्षा होती है, और दुर्भाग्य से अधिकांश रिश्ते वहीं फेल हो जाते हैं।
आज समाज में एक खतरनाक प्रवृत्ति विकसित हो गई है—जीते जी साथ देने से बचना और मरने के बाद दिखावा करना। क्योंकि जीते जी मदद करने में त्याग करना पड़ता है, समय देना पड़ता है, पैसा खर्च करना पड़ता है और सबसे बड़ी बात—दिल से जुड़ना पड़ता है। जबकि मृत्यु के बाद की व्यवस्थाओं में केवल समाज को दिखाने का अवसर होता है, जहां संवेदना कम और प्रदर्शन अधिक होता है।
यह कटु सत्य है कि आज रिश्ते भावनाओं से नहीं, अवसरों और दिखावे से संचालित हो रहे हैं। किसी के दुःख में उसके साथ खड़ा होना कठिन लगता है, पर उसके जाने के बाद अपनी उपस्थिति दर्ज कराना आसान लगता है। यही कारण है कि समाज में संवेदनशीलता धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।
हमें यह समझना होगा कि असली धर्म, असली मानवता और असली रिश्ते वही हैं जो किसी के बुरे समय में काम आएं। अंतिम संस्कार में रोटी देने से कहीं बड़ा पुण्य उस समय होता है जब आप किसी की बीमारी में उसका सहारा बनते हैं, उसकी दवाई का खर्च उठाते हैं, उसे मानसिक बल देते हैं।
जरूरत इस बात की है कि हम अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। दिखावे की इस परंपरा को तोड़ें और सच्चे अर्थों में रिश्तों को निभाएं। किसी के जाने के बाद नहीं, बल्कि उसके जीते जी उसके काम आएं। क्योंकि मरने के बाद की रोटी से ज्यादा मूल्यवान जीते जी की दवाई होती है, और दिखावे की भीड़ से ज्यादा कीमती एक सच्चा साथ होता है।
यदि हम सच में समाज को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी—दिखावे से हटकर संवेदनाओं की ओर, औपचारिकता से हटकर वास्तविकता की ओर।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-13 16:24:55 |
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| 82945 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*मरने के बाद की दिखावटी संवेदनाएं, जीते जी की सच्ची उपेक्षा*
इंसान के मरने के बाद अक्सर एक अजीब सा दृश्य देखने को मिलता है। हर रिश्तेदार, हर परिचित बड़ी सहजता से कहता है—“रोटी हमारी तरफ से होगी”, “व्यवस्था हम करेंगे”, “कोई कमी नहीं रहने देंगे।” उस समय मानो संवेदनाओं की बाढ़ आ जाती है, पर यही लोग तब कहीं नजर नहीं आते जब वही इंसान ज़िंदा होता है, दर्द में होता है, बीमारी से जूझ रहा होता है।
जब वह अस्पताल के चक्कर काट रहा होता है, दवाइयों के लिए पैसे जोड़ रहा होता है, मन से टूटा हुआ होता है—तब कोई यह नहीं कहता कि “दवाई मेरी तरफ से होगी”, “इलाज की चिंता मत करो”, “मैं साथ खड़ा हूं।” उस समय रिश्तों की असली परीक्षा होती है, और दुर्भाग्य से अधिकांश रिश्ते वहीं फेल हो जाते हैं।
आज समाज में एक खतरनाक प्रवृत्ति विकसित हो गई है—जीते जी साथ देने से बचना और मरने के बाद दिखावा करना। क्योंकि जीते जी मदद करने में त्याग करना पड़ता है, समय देना पड़ता है, पैसा खर्च करना पड़ता है और सबसे बड़ी बात—दिल से जुड़ना पड़ता है। जबकि मृत्यु के बाद की व्यवस्थाओं में केवल समाज को दिखाने का अवसर होता है, जहां संवेदना कम और प्रदर्शन अधिक होता है।
यह कटु सत्य है कि आज रिश्ते भावनाओं से नहीं, अवसरों और दिखावे से संचालित हो रहे हैं। किसी के दुःख में उसके साथ खड़ा होना कठिन लगता है, पर उसके जाने के बाद अपनी उपस्थिति दर्ज कराना आसान लगता है। यही कारण है कि समाज में संवेदनशीलता धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।
हमें यह समझना होगा कि असली धर्म, असली मानवता और असली रिश्ते वही हैं जो किसी के बुरे समय में काम आएं। अंतिम संस्कार में रोटी देने से कहीं बड़ा पुण्य उस समय होता है जब आप किसी की बीमारी में उसका सहारा बनते हैं, उसकी दवाई का खर्च उठाते हैं, उसे मानसिक बल देते हैं।
जरूरत इस बात की है कि हम अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। दिखावे की इस परंपरा को तोड़ें और सच्चे अर्थों में रिश्तों को निभाएं। किसी के जाने के बाद नहीं, बल्कि उसके जीते जी उसके काम आएं। क्योंकि मरने के बाद की रोटी से ज्यादा मूल्यवान जीते जी की दवाई होती है, और दिखावे की भीड़ से ज्यादा कीमती एक सच्चा साथ होता है।
यदि हम सच में समाज को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी—दिखावे से हटकर संवेदनाओं की ओर, औपचारिकता से हटकर वास्तविकता की ओर।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-13 16:24:54 |
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| 82944 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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<a href="https://www.instagram.com/reel/DXEVMi8EkoE/?igsh=cnV2d2xybHRpN3Z6" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DXEVMi8EkoE/?igsh=cnV2d2xybHRpN3Z6</a> |
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2026-04-13 16:24:07 |
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40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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<a href="https://www.instagram.com/reel/DXEVMi8EkoE/?igsh=cnV2d2xybHRpN3Z6" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DXEVMi8EkoE/?igsh=cnV2d2xybHRpN3Z6</a> |
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2026-04-13 16:24:06 |
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