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ID Chat ID Chat Name Sender Phone Message Status Date View
245810 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-20 06:00:53
245811 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-20 06:00:53
245809 40449696 ?? श्री सम्मेद शिखर जी ?? जय जिनेन्द्र जी!! दिनाँक: १९/०६/२०२६ तिथि : ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी, २५५२ दिन : शनिवार कल्याणक: आज *चिप्स, कुरकुरे खाने का त्याग और वैराग्य भावना पढ़ने का नियम* रखें। कल का संभावित नियम - ऊपर से नमक डालकर खाने का त्याग अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी। ?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? 2026-06-20 06:00:45
245808 40449696 ?? श्री सम्मेद शिखर जी ?? जय जिनेन्द्र जी!! दिनाँक: १९/०६/२०२६ तिथि : ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी, २५५२ दिन : शनिवार कल्याणक: आज *चिप्स, कुरकुरे खाने का त्याग और वैराग्य भावना पढ़ने का नियम* रखें। कल का संभावित नियम - ऊपर से नमक डालकर खाने का त्याग अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी। ?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? 2026-06-20 06:00:44
245807 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ?✨ *सहज प्रेरणा* ✨? ?️ *आत्मस्वरूप की ओर एक प्रेरक चिंतन* ?️ जब किसी व्यक्ति का मन ? रोग, पीड़ा, परीक्षा या जीवन के अन्य उपसर्गों से व्याकुल हो जाए, *तब उसे धैर्यपूर्वक ?‍♂️ अपने आत्मस्वरूप का स्मरण करना चाहिए।* ज्ञान की ज्योति ? से वह समझे कि ये कष्ट केवल शरीर के हैं, आत्मा के नहीं। ❌ *अज्ञानी की सोच* *अज्ञानी व्यक्ति शरीर को ही अपना वास्तविक स्वरूप मान लेता है और सोचता है—* > ? "मैं दुःखी हूँ, मुझे कष्ट हो रहा है।" *आत्मा और शरीर का भेद न जानने के कारण वह हर परिस्थिति में स्वयं को दुखी अनुभव करता रहता है।* ✅ *भेदविज्ञानी की दृष्टि* भेदविज्ञानी जीव ? आत्मा और शरीर को अलग-अलग पहचानता है। वह जानता है कि— ? सुख-दुःख शरीर के हैं। ? रोग शरीर को होता है। ? वृद्धावस्था शरीर की अवस्था है। ? आत्मा सदैव शुद्ध, चेतन और अविनाशी है। ✨ इसलिए वह परिस्थितियों से विचलित नहीं होता और समभाव में स्थित रहता है। ? ? *उसके प्रेरणादायक विचार* ⚡ "मेरा कभी मरण नहीं होता, क्योंकि आत्मा अविनाशी है; फिर भय किस बात का?" ⚡ "रोग शरीर को है, मुझे नहीं; फिर वेदना मेरी कैसे हुई?" ⚡ *"मैं न बालक हूँ, न युवा, न वृद्ध; ये अवस्थाएँ शरीर की हैं, आत्मा की नहीं। फिर चिंता कैसी?"* --- ? *भावार्थ* ✨ आत्मा शुद्ध है। ✨ आत्मा चेतन है। ✨ आत्मा नित्य है। ✨ आत्मा अविनाशी है। जबकि— ? शरीर नश्वर है। ? शरीर परिवर्तनशील है। ? शरीर जन्म, रोग और मृत्यु के अधीन है। जो व्यक्ति आत्मा और शरीर का भेद समझ लेता है, वह रोग ?, शोक ?, भय ? और मृत्यु ⚰️ जैसी परिस्थितियों से ऊपर उठकर *समभाव ?️ में स्थित रहता है।* --- ? "निष्कर्ष* ? *भेदविज्ञान का सार :* ? *"मैं आत्मा हूँ, शरीर नहीं।"* जब यह भावना हृदय में दृढ़ हो जाती है ❤️, तब मनुष्य दुःख, भय, रोग और मृत्यु के बंधनों से ऊपर उठकर ?️ *आत्मिक शांति, स्थिरता और आनंद ✨ प्राप्त करता है।* ? *"स्वयं को जानो, आत्मा को पहचानो और जीवन को समभाव से जीओ।"* ? ? — *राजेश जैन, मैनपुरी*? 2026-06-20 05:59:41
245806 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ?✨ *सहज प्रेरणा* ✨? ?️ *आत्मस्वरूप की ओर एक प्रेरक चिंतन* ?️ जब किसी व्यक्ति का मन ? रोग, पीड़ा, परीक्षा या जीवन के अन्य उपसर्गों से व्याकुल हो जाए, *तब उसे धैर्यपूर्वक ?‍♂️ अपने आत्मस्वरूप का स्मरण करना चाहिए।* ज्ञान की ज्योति ? से वह समझे कि ये कष्ट केवल शरीर के हैं, आत्मा के नहीं। ❌ *अज्ञानी की सोच* *अज्ञानी व्यक्ति शरीर को ही अपना वास्तविक स्वरूप मान लेता है और सोचता है—* > ? "मैं दुःखी हूँ, मुझे कष्ट हो रहा है।" *आत्मा और शरीर का भेद न जानने के कारण वह हर परिस्थिति में स्वयं को दुखी अनुभव करता रहता है।* ✅ *भेदविज्ञानी की दृष्टि* भेदविज्ञानी जीव ? आत्मा और शरीर को अलग-अलग पहचानता है। वह जानता है कि— ? सुख-दुःख शरीर के हैं। ? रोग शरीर को होता है। ? वृद्धावस्था शरीर की अवस्था है। ? आत्मा सदैव शुद्ध, चेतन और अविनाशी है। ✨ इसलिए वह परिस्थितियों से विचलित नहीं होता और समभाव में स्थित रहता है। ? ? *उसके प्रेरणादायक विचार* ⚡ "मेरा कभी मरण नहीं होता, क्योंकि आत्मा अविनाशी है; फिर भय किस बात का?" ⚡ "रोग शरीर को है, मुझे नहीं; फिर वेदना मेरी कैसे हुई?" ⚡ *"मैं न बालक हूँ, न युवा, न वृद्ध; ये अवस्थाएँ शरीर की हैं, आत्मा की नहीं। फिर चिंता कैसी?"* --- ? *भावार्थ* ✨ आत्मा शुद्ध है। ✨ आत्मा चेतन है। ✨ आत्मा नित्य है। ✨ आत्मा अविनाशी है। जबकि— ? शरीर नश्वर है। ? शरीर परिवर्तनशील है। ? शरीर जन्म, रोग और मृत्यु के अधीन है। जो व्यक्ति आत्मा और शरीर का भेद समझ लेता है, वह रोग ?, शोक ?, भय ? और मृत्यु ⚰️ जैसी परिस्थितियों से ऊपर उठकर *समभाव ?️ में स्थित रहता है।* --- ? "निष्कर्ष* ? *भेदविज्ञान का सार :* ? *"मैं आत्मा हूँ, शरीर नहीं।"* जब यह भावना हृदय में दृढ़ हो जाती है ❤️, तब मनुष्य दुःख, भय, रोग और मृत्यु के बंधनों से ऊपर उठकर ?️ *आत्मिक शांति, स्थिरता और आनंद ✨ प्राप्त करता है।* ? *"स्वयं को जानो, आत्मा को पहचानो और जीवन को समभाव से जीओ।"* ? ? — *राजेश जैन, मैनपुरी*? 2026-06-20 05:59:40
245805 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा *श्री मुनिसुव्रत स्वामी दादा की धुन* शनि ग्रह के स्वामी श्री मुनिसुव्रत स्वामी दादा की अति मंगलकारी धुन हर रोज सुनने से बिगड़े कार्य सफल हो जाते हे। *शनिवार को ये धुन अवश्य सुने।* <a href="https://youtu.be/RtPC7IyQ8oM?si=84642zPaNDFgB" target="_blank">https://youtu.be/RtPC7IyQ8oM?si=84642zPaNDFgB</a> ➖➖➖➖➖➖➖➖ *Jain Library Whatsapp Group* +91 8128994987 2026-06-20 05:59:02
245804 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा *श्री मुनिसुव्रत स्वामी दादा की धुन* शनि ग्रह के स्वामी श्री मुनिसुव्रत स्वामी दादा की अति मंगलकारी धुन हर रोज सुनने से बिगड़े कार्य सफल हो जाते हे। *शनिवार को ये धुन अवश्य सुने।* <a href="https://youtu.be/RtPC7IyQ8oM?si=84642zPaNDFgB" target="_blank">https://youtu.be/RtPC7IyQ8oM?si=84642zPaNDFgB</a> ➖➖➖➖➖➖➖➖ *Jain Library Whatsapp Group* +91 8128994987 2026-06-20 05:59:01
245803 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? *? खराडी से हडपसर ,पुणे,महाराष्ट्र ?* *विहार अपडेट* ता-20/06/2026 *संत शिरोमणी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज के परम शिष्य* *विद्या शिरोमणिआचार्य श्री समय सागर जी महाराजजी* परम शिष्य *मुनिश्री अक्षय सागर जी महाराज जी* *मुनि श्री निराकुल सागर महाराज जी* ससंघ *हडपसर- मंगल प्रवेश- सुबह की बेला में एवं आहार चर्या* ------‐---------‐----------------------- *भ.श्री १०८ पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर हडपसर पुणे* ??????लोकेशन <a href="https://maps.app.goo.gl/ju6Yc9asmZjgvh9JA?g_st=aw" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/ju6Yc9asmZjgvh9JA?g_st=aw</a> ---------------------------------------- संकलन *शांति विद्या धर्म प्रभावनासंघ* 2026-06-20 05:58:55
245802 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? *? खराडी से हडपसर ,पुणे,महाराष्ट्र ?* *विहार अपडेट* ता-20/06/2026 *संत शिरोमणी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज के परम शिष्य* *विद्या शिरोमणिआचार्य श्री समय सागर जी महाराजजी* परम शिष्य *मुनिश्री अक्षय सागर जी महाराज जी* *मुनि श्री निराकुल सागर महाराज जी* ससंघ *हडपसर- मंगल प्रवेश- सुबह की बेला में एवं आहार चर्या* ------‐---------‐----------------------- *भ.श्री १०८ पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर हडपसर पुणे* ??????लोकेशन <a href="https://maps.app.goo.gl/ju6Yc9asmZjgvh9JA?g_st=aw" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/ju6Yc9asmZjgvh9JA?g_st=aw</a> ---------------------------------------- संकलन *शांति विद्या धर्म प्रभावनासंघ* 2026-06-20 05:58:54
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