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224032 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी ?गुरु का रहस्य? ?1) जब गुरु का आशीष के लिए हाथ उठता है तब साक्षात दिव्य शक्ति की अनुभूति होने लगती है। जैसे ही तन पर स्पर्श होता है दिव्य औषधि का काम कर जाता है। ?2) परम प्रभावक अहिंसक संत कुल- दीपक की तरह उनकी जीवनदायिनी किरणें हमें आरोग्य करती है।जो भक्त श्रद्धा रखते हैं वे सातिशय पुण्यवर्धन द्वारा निजात्म अनुभूति का अनुभव करते रहते हैं और मुक्ति की युक्ति का लेते हैं। ?3) गुरु की अंतर्मुखी दृष्टि ना तो भाव बिगड़ने देती है ना भव बढने देती है। शिष्यत्व सौभाग्यशाली होता है। विद्वत मन क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 09:29:31
224030 40449668 आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है ?गुरु का रहस्य? ?1) जब गुरु का आशीष के लिए हाथ उठता है तब साक्षात दिव्य शक्ति की अनुभूति होने लगती है। जैसे ही तन पर स्पर्श होता है दिव्य औषधि का काम कर जाता है। ?2) परम प्रभावक अहिंसक संत कुल- दीपक की तरह उनकी जीवनदायिनी किरणें हमें आरोग्य करती है।जो भक्त श्रद्धा रखते हैं वे सातिशय पुण्यवर्धन द्वारा निजात्म अनुभूति का अनुभव करते रहते हैं और मुक्ति की युक्ति का लेते हैं। ?3) गुरु की अंतर्मुखी दृष्टि ना तो भाव बिगड़ने देती है ना भव बढने देती है। शिष्यत्व सौभाग्यशाली होता है। विद्वत मन क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 09:29:28
224029 40449668 आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है ?गुरु का रहस्य? ?1) जब गुरु का आशीष के लिए हाथ उठता है तब साक्षात दिव्य शक्ति की अनुभूति होने लगती है। जैसे ही तन पर स्पर्श होता है दिव्य औषधि का काम कर जाता है। ?2) परम प्रभावक अहिंसक संत कुल- दीपक की तरह उनकी जीवनदायिनी किरणें हमें आरोग्य करती है।जो भक्त श्रद्धा रखते हैं वे सातिशय पुण्यवर्धन द्वारा निजात्म अनुभूति का अनुभव करते रहते हैं और मुक्ति की युक्ति का लेते हैं। ?3) गुरु की अंतर्मुखी दृष्टि ना तो भाव बिगड़ने देती है ना भव बढने देती है। शिष्यत्व सौभाग्यशाली होता है। विद्वत मन क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 09:29:27
224027 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त ?गुरु का रहस्य? ?1) जब गुरु का आशीष के लिए हाथ उठता है तब साक्षात दिव्य शक्ति की अनुभूति होने लगती है। जैसे ही तन पर स्पर्श होता है दिव्य औषधि का काम कर जाता है। ?2) परम प्रभावक अहिंसक संत कुल- दीपक की तरह उनकी जीवनदायिनी किरणें हमें आरोग्य करती है।जो भक्त श्रद्धा रखते हैं वे सातिशय पुण्यवर्धन द्वारा निजात्म अनुभूति का अनुभव करते रहते हैं और मुक्ति की युक्ति का लेते हैं। ?3) गुरु की अंतर्मुखी दृष्टि ना तो भाव बिगड़ने देती है ना भव बढने देती है। शिष्यत्व सौभाग्यशाली होता है। विद्वत मन क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 09:29:23
224028 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त ?गुरु का रहस्य? ?1) जब गुरु का आशीष के लिए हाथ उठता है तब साक्षात दिव्य शक्ति की अनुभूति होने लगती है। जैसे ही तन पर स्पर्श होता है दिव्य औषधि का काम कर जाता है। ?2) परम प्रभावक अहिंसक संत कुल- दीपक की तरह उनकी जीवनदायिनी किरणें हमें आरोग्य करती है।जो भक्त श्रद्धा रखते हैं वे सातिशय पुण्यवर्धन द्वारा निजात्म अनुभूति का अनुभव करते रहते हैं और मुक्ति की युक्ति का लेते हैं। ?3) गुरु की अंतर्मुखी दृष्टि ना तो भाव बिगड़ने देती है ना भव बढने देती है। शिष्यत्व सौभाग्यशाली होता है। विद्वत मन क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188615874?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-12 09:29:23
224026 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? •••••••••••••✍️✍️✍️ *कभी-कभी चुप रह जाना और मुस्कुरा देना ही सबसे खूबसूरत जवाब होता है, जो दिल को भी हल्का कर देता है। जिंदगी में पारिवारिक और व्यवहारिक इंसान कई बार जवाब होते हुए भी पलट कर जवाब नहीं देता, क्योंकि कई बार वह केवल रिश्तों को जिंदा रखने के लिए खामोशी से हार भी स्वीकार कर लेता है.........?* *ना किसी के पास ना किसी के खास और ना ही किसी से आस बस लगे रहो प्रभु की सेवा में बने रहे प्रभु के दास वह जो भी करेंगे अच्छा करेंगे... जीवन में कभी मौका मिले तो अपने कार्य से सबको चौंका देना... पर किसी को धोखा मत देना....*? *स्वतंत्र ,रहे विचारों से....?* *बंधे रहे संस्कारों से....?* *आपका दिन शुभ हो.... मंगलमय हो....?* *?सुप्रभात?* *?जय जिनेंद्र?* 2026-06-12 09:28:22
224025 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? •••••••••••••✍️✍️✍️ *कभी-कभी चुप रह जाना और मुस्कुरा देना ही सबसे खूबसूरत जवाब होता है, जो दिल को भी हल्का कर देता है। जिंदगी में पारिवारिक और व्यवहारिक इंसान कई बार जवाब होते हुए भी पलट कर जवाब नहीं देता, क्योंकि कई बार वह केवल रिश्तों को जिंदा रखने के लिए खामोशी से हार भी स्वीकार कर लेता है.........?* *ना किसी के पास ना किसी के खास और ना ही किसी से आस बस लगे रहो प्रभु की सेवा में बने रहे प्रभु के दास वह जो भी करेंगे अच्छा करेंगे... जीवन में कभी मौका मिले तो अपने कार्य से सबको चौंका देना... पर किसी को धोखा मत देना....*? *स्वतंत्र ,रहे विचारों से....?* *बंधे रहे संस्कारों से....?* *आपका दिन शुभ हो.... मंगलमय हो....?* *?सुप्रभात?* *?जय जिनेंद्र?* 2026-06-12 09:28:21
224023 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? 2026-06-12 09:28:19
224024 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? 2026-06-12 09:28:19
224021 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? दैनिक भास्कर के 12-06-2026 एडिशन की यह खबर जरूर पढ़ें। दैनिक भास्कर ई-पेपर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करके ऐप इंस्टॉल करें - <a href="https://dainik.bhaskar.com/QhjmQWTxT3b" target="_blank">https://dainik.bhaskar.com/QhjmQWTxT3b</a> 2026-06-12 09:28:17