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6268 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://youtu.be/odsZXiQouTg?si=l3ug2YYZpKxh6w9K" target="_blank">https://youtu.be/odsZXiQouTg?si=l3ug2YYZpKxh6w9K</a> 2026-02-16 17:41:51
6267 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? जय जिनेन्द्र 2026-02-16 17:41:03
6266 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ? *सहज प्रेरणा* ? ✨ *1. धर्म का वास्तविक अर्थ* संस्कृत में “धर्म” शब्द की उत्पत्ति “धृ” धातु से हुई है, जिसका अर्थ है — धारण करना या संभालकर रखना। अर्थात् धर्म वह है जो *व्यक्ति, समाज और सृष्टि को संतुलित* बनाए रखे। ? धर्म का सार: ✅ *सत्य को स्वीकार करना* ✅ *कर्तव्य का पालन करना* ✅ *आत्मसंयम रखना* ✅ *नैतिकता और करुणा के साथ जीवन जीना* ? इस दृष्टि से *धर्म एक आंतरिक गुण* है, बाहरी प्रदर्शन नहीं। --- ✨ *2. धर्म और जीवन जीने की कला* धर्म व्यक्ति को यह सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा अनुकूल नहीं रहेंगी। कभी सफलता, कभी असफलता; कभी सम्मान, कभी अपमान — यह सब जीवन का हिस्सा है। ? धर्म की समझ व्यक्ति को सिखाती है: ? *परिस्थितियों को स्वीकार करना* ? *भावनाओं पर नियंत्रण रखना* ? *प्रतिक्रिया के बजाय विवेकपूर्ण निर्णय लेना* ? *संतुलन बनाए रखना* इसी को समत्व कहा गया है — *सुख-दुःख में समान* रहना। ⚖️ --- ✨ *3. मानसिक शांति और धर्म का संबंध* जब व्यक्ति धर्म को केवल कर्मकांड नहीं बल्कि आचरण के रूप में अपनाता है, तब उसके अंदर कई नकारात्मक भाव स्वतः कम होने लगते हैं: ❌*तनाव → क्योंकि अपेक्षाएँ नियंत्रित हो जाती हैं* ❌ *अवसाद → क्योंकि जीवन का उद्देश्य स्पष्ट हो जाता है* ❌ *हीन भावना → क्योंकि आत्मस्वीकृति बढ़ती है* ❌ *क्रोध → क्योंकि प्रतिक्रिया पर नियंत्रण आता है* ❌ *ईर्ष्या → क्योंकि तुलना की प्रवृत्ति घटती है* ❌ *लोभ → क्योंकि संतोष का भाव बढ़ता है* ❌ *घमंड → क्योंकि अहंकार कम होता है* ? धर्म व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है। ? --- ✨ *4. धार्मिक व्यक्ति में नकारात्मकता क्यों कम होती है* सच्चा धार्मिक व्यक्ति: ? *आत्मचिंतन करता है* ? *अपने दोष पहचानता है* ? *सुधार की कोशिश करता है* ? *दूसरों के प्रति सहानुभूति रखता है* इसलिए उसके भीतर द्वेष और संघर्ष कम होते हैं। ? --- ✨ *5. सुख, शांति और निरपेक्षता का आधार* सुख और शांति बाहरी वस्तुओं से स्थायी रूप से प्राप्त नहीं होते। धर्म व्यक्ति को सिखाता है: ? “सुख मन की अवस्था है, परिस्थिति की नहीं।” निरपेक्षता (detachment) का अर्थ त्याग नहीं, बल्कि आसक्ति पर नियंत्रण है। *जब व्यक्ति मोह परिणाम के से मुक्त होकर कर्म करता है, तब उसे आंतरिक शांति मिलती है।* ?️ --- ✨ *6. निष्कर्ष* धर्म का सही अर्थ है — ? *सही सोच* ? *सही आचरण* ? *संतुलित मन* ? *करुणा और विवेक* यदि धर्म को केवल पूजा तक सीमित कर दिया जाए तो उसका वास्तविक उद्देश्य खो जाता है। ? *धर्म का सार है — मनुष्य को बेहतर मनुष्य बनाना*। ? ✍️ — *राजेश जैन मैनपुरी* 2026-02-16 17:35:17
6265 40449710 11. वात्सल्य वारिधि 2026-02-16 17:33:33
6264 40449710 11. वात्सल्य वारिधि आप आ रहे हैं ना..... धर्मशिरोमणि की धर्मगाथा सुनने.... धर्मशिरोमणि गुणानुवाद अमृत महोत्सव तिथि - फाल्गुन शुक्ल अष्टमी दिनांक - 24 फरवरी 2026 स्थान - बाड़ा पदमपुरा (जयपुर) पावन सान्निध्य - पंचम पट्टाचार्य वात्सल्य वारिधि 108 श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ आप आये... अपनों को साथ लाये....जीवन को धर्म से जोड़ते हुए धन्य बनाएं...... 2026-02-16 17:33:30
6263 40449695 www yug marble stone work.Com 2026-02-16 17:32:48
6262 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-02-16 17:32:16
6261 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी *विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है* श्री गौतम गणधर चालीसा —दोहा— वंदूँ वीर जिनेन्द्र को, मन वच तन कर शुद्ध। उनके गणधर शिष्य को, नमूँ हृदय कर शुद्ध।।१।। श्री गौतम गणधर हुए, गणनायक मुनिराज। जिनकी वाणी सुन बने, अन्य बहुत मुनिराज।।२।। उन गणधर भगवान का, चालीसा सुखकार। है सम्यक् श्रुतज्ञान का, यह भी इक आधार।।३।। —चौपाई— जय हो वीतराग प्रभु वाणी, वीर दिव्यध्वनि जगकल्याणी।१।। बने नाथ जब केवलज्ञानी, समवसरण रचना के स्वामी।।२।| दिव्यध्वनी जब खिरी नहीं थी, इन्द्र के मन तब युक्ति हुई थी।।३।। सोचा ... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179555692?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179555692?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-02-16 17:30:05
6260 40449659 सकल जैन महिला मंडळ फलटण <a href="https://youtube.com/shorts/LM1XhFwVjUg?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/shorts/LM1XhFwVjUg?feature=share</a> 2026-02-16 17:29:56
6259 40449666 निर्यापक समय सागर जी भक्त "मुनि-मुद्रा" सदा पूज्य है ??????? भव्यात्माओं! जो मुनि दर्शन, ज्ञान,चारित्र और तपोविनय में सदा लीन रहते हैं वे ही वंदनीय हैं। दर्शन,ज्ञान,चारित्र और तप के भेद से आराधना के चार भेद होते हैं जो मुनि इन चारों प्रकार की आराधनाओं में निरंतर लगे रहते हैं और अन्य गुणी मनुष्यों के प्रति किसी प्रकार का मात्सर्यभाव न रखते हुये उनके गुणों का वर्णन करते हैं वे मुनि नमस्कार के योग्य हैं। ऐसे दिगम्बर मुनियों के स्वाभाविक नग्न रूप को देखकर जो मनुष्य उन्हें नहीं मानते हैं उल्टा उनके प्रति द्वेष ... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179555714?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179555714?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-02-16 17:29:40