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40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-02-17 10:26:00 |
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40449750 |
107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप |
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"*देवी-देवताओं की क्यों? आत्मा की अनुभूति करो "*
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१ अप्रैल, २००५, कुण्डलपुर में प्रातःकाल षटखण्डागम-धवला पुस्तक एक की वाचना के समय, पृष्ठ १२३ पर 'भूति कर्म क्रिया' का प्रसंग आया। किन्हीं महाराजश्रीजी ने आचार्यश्रीजी से पूछा- 'इस भूति कर्म में मंत्र-तंत्र या साधना से भूत-पिशाचों को वश में किया जाता है या भगाया जाता है? वह बोले- 'उससे अनेक कार्य कराए जाते हैं। भूति कर्म को आज का विज्ञान स्वीकार नहीं करता। जबकि करना चाहिए। एक बार एक ब्रह्मचारीजी की दीक्षा का प्रसंग आया, तो वह आहार करने गया। प्रायः चींटी, चींटा आदि आहार में आ जाता। कई लोग आहार शोध कर देते, पर उनके हाथ में आते-आते २-३ एक साथ मरे चींटे आ जाते। वे कहाँ से आ जाते हैं ? मैंने (आचार्यश्रीजी) भी जाकर देखा, देखकर बड़ाआश्चर्य लगा।यही तो कर्मों की विचित्रता है।
भूत-पिशाच होते हैं। उनके पास शापानुग्रह शक्ति होती है। उन्हें मंत्र-तंत्र से वशीकृत करके काम में लिया जा सकता है, पर साधु को नहीं करना चाहिए। वे देव असंयमी होते हैं, राग-द्वेष रखते हैं।' फिर महाराजश्रीजी ने पूछा- 'आपको कभी उनसे कार्य कराने की भावना या कभी देवों को आसपास होने की अनुभूति हुई ?' तब आचार्यश्रीजी ने कहा- 'देवों के होने की अनुभूति क्या करना? अरे! आत्मा की अनुभूति करो, जिसकी अनंत काल से नहीं की। 'मूलाचार' में अभी कुछ दिन पूर्व स्वाध्याय करते समय आया था कि जो मुनि होकर असंयमी को आओ- आओ', 'जाओ-जाओ' ऐसा आदेश देता है, वह महा पाप कर रहा है। देव असंयमी होते हैं और उनसे काम लेना, वश में करना, तंत्र-मंत्र या साधना से सिद्ध करना, परिग्रह है। अतः साधु को उनसे कभी संबंध नहीं रखना चाहिए। वे देव सहज ही, बिना आज्ञा के भक्त बन कर साधु की सेवा, सहयोग करें तो कर सकते हैं।
हे निराडम्बर, निरपेक्ष और निरीहवृत्तिधारी आचार्य भगवन्! धन्य हैं ! जिन्हें यंत्र, मंत्र या तंत्र का प्रयोग करते कभी नहीं देखा, और न ही निमित्त, लक्षण अथवा ज्योतिष आदि की चर्चा संघ में करते देखा है।
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2026-02-17 10:25:48 |
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40449715 |
?श्रमणरत्न सुप्रभसागरजी? |
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<a href="https://youtu.be/XHWZccG1kyg?si=nwiuJDy5RttHNtC-" target="_blank">https://youtu.be/XHWZccG1kyg?si=nwiuJDy5RttHNtC-</a> |
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2026-02-17 10:24:57 |
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3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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12-02-26
muktagiri
padgaan, ahar baad darshan, shaam ki bhakti |
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2026-02-17 10:24:43 |
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40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-02-17 10:24:41 |
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40449689 |
? विद्या शरणम ०१ ? |
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*जय जिनेंद्र! ???*
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2026-02-17 10:23:14 |
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40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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<a href="https://www.instagram.com/reel/DU1QP6iE6fu/?igsh=MXBlbWNxcWp0MTd1Yg==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DU1QP6iE6fu/?igsh=MXBlbWNxcWp0MTd1Yg==</a>
*धर्म नगरी टूंडला में मनाया जायेगा आचार्य समाधि*
*महोत्सव जानिए क्या क्या होगे आयोजन*
?????
*अगर आपके पास भी है कोई जैन समाचार तो आज ही संपर्क कीजिए*??????? |
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2026-02-17 10:23:12 |
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40449674 |
JAIN MAHILAMANDAL |
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2026-02-17 10:23:02 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*?सभी को सादर जय जिनेंद्र जी*
*?सूर्योदय 6:59दिल्ली*
*?सूर्यास्त 6:13दिल्ली*
*? तिथि (30)अमावस*
*? माह........ फाल्गुन कृष्ण पक्ष*
*?वीर निर्वाण संवत्....2552*
*?विक्रम संवत्...........2082*
*?मंगलवार(17)फरवरी*
*? ईसवी सन..2026*
*?रसी मीठा*
*??देवादिदेव श्री १००८ वासुपूज्य भगवान की जय, दिन मंगल वार मंत्रजाप:?*
*??ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं मंगल ग्रह अरिंष्ट निवारक श्री वासुपूज्य जिनेन्द्राय नमः?*
*श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, *अम्बाला शहर* HARYANA |
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2026-02-17 10:21:38 |
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40449674 |
JAIN MAHILAMANDAL |
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2026-02-17 10:14:58 |
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