| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 231409 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
|
|
2026-06-15 07:58:31 |
|
| 231407 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
Vandami mataji ?????? |
|
2026-06-15 07:57:49 |
|
| 231408 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
Vandami mataji ?????? |
|
2026-06-15 07:57:49 |
|
| 231406 |
40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
|
|
|
|
2026-06-15 07:57:18 |
|
| 231405 |
40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
|
|
|
|
2026-06-15 07:57:17 |
|
| 231403 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
|
|
♨️ *?आज का प्रेरक प्रसंग?* ♨️
*?!! तीन मूर्तियाँ !!?*
एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह देश-विदेश से सुंदर मूर्तियाँ लाकर अपने महल में सजाता था। उन सभी में से तीन मूर्तियाँ उसे सबसे अधिक प्रिय थीं।
एक दिन सफाई करते समय एक सेवक के हाथ से एक मूर्ति टूट गई। यह देखकर राजा अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने सेवक को तुरंत मृत्युदंड सुना दिया।
सजा सुनते ही सेवक ने बाकी दोनों मूर्तियाँ भी तोड़ दीं। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
राजा ने क्रोध में पूछा — *“तुमने ऐसा क्यों किया?”*
सेवक ने शांत भाव से उत्तर दिया —
*"महाराज! ये मूर्तियाँ नश्वर हैं, आज नहीं तो कल टूट ही जातीं। यदि भविष्य में किसी और से यह गलती होती, तो वह भी अकारण मृत्युदंड का भागी बनता। मैंने दो निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह किया है।"*
यह सुनकर राजा स्तब्ध रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सेवक को क्षमा कर दिया।
राजा ने फिर पूछा —
*"मृत्यु सामने होने पर भी तुम इतने शांत और निडर कैसे रहे?"*
सेवक बोला —
*"महाराज, मैं पहले एक सेठ के यहाँ काम करता था। एक दिन सेठ ने मुझे कड़वी ककड़ी दी, और मैंने उसे प्रसाद समझकर खा लिया। जब रोज़ मीठा मिलता है, तो एक दिन कड़वा भी स्वीकार करना चाहिए। उसी प्रकार, ईश्वर जीवन में सुख और दुःख दोनों देता है — हमें दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।"*
*शिक्षा:-*
? न्याय करते समय भावनाओं नहीं, विवेक से निर्णय लेना चाहिए।
? हर वस्तु नश्वर है, लेकिन मानव जीवन अनमोल है।
? सच्चा मनुष्य वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी परहित का सोचता है।
? सुख-दुःख को ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार करना ही सच्ची समझदारी है।
*?सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*?जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
*? आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो ?*
*? आपका जीवन मंगलमय हो ?* ♨️ *विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का ऐप है* ♨️ <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&referral_code=N29CX&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=BROADCASTER" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&referral_code=N29CX&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=BROADCASTER</a> |
|
2026-06-15 07:57:13 |
|
| 231404 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
|
|
♨️ *?आज का प्रेरक प्रसंग?* ♨️
*?!! तीन मूर्तियाँ !!?*
एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह देश-विदेश से सुंदर मूर्तियाँ लाकर अपने महल में सजाता था। उन सभी में से तीन मूर्तियाँ उसे सबसे अधिक प्रिय थीं।
एक दिन सफाई करते समय एक सेवक के हाथ से एक मूर्ति टूट गई। यह देखकर राजा अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने सेवक को तुरंत मृत्युदंड सुना दिया।
सजा सुनते ही सेवक ने बाकी दोनों मूर्तियाँ भी तोड़ दीं। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
राजा ने क्रोध में पूछा — *“तुमने ऐसा क्यों किया?”*
सेवक ने शांत भाव से उत्तर दिया —
*"महाराज! ये मूर्तियाँ नश्वर हैं, आज नहीं तो कल टूट ही जातीं। यदि भविष्य में किसी और से यह गलती होती, तो वह भी अकारण मृत्युदंड का भागी बनता। मैंने दो निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह किया है।"*
यह सुनकर राजा स्तब्ध रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सेवक को क्षमा कर दिया।
राजा ने फिर पूछा —
*"मृत्यु सामने होने पर भी तुम इतने शांत और निडर कैसे रहे?"*
सेवक बोला —
*"महाराज, मैं पहले एक सेठ के यहाँ काम करता था। एक दिन सेठ ने मुझे कड़वी ककड़ी दी, और मैंने उसे प्रसाद समझकर खा लिया। जब रोज़ मीठा मिलता है, तो एक दिन कड़वा भी स्वीकार करना चाहिए। उसी प्रकार, ईश्वर जीवन में सुख और दुःख दोनों देता है — हमें दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।"*
*शिक्षा:-*
? न्याय करते समय भावनाओं नहीं, विवेक से निर्णय लेना चाहिए।
? हर वस्तु नश्वर है, लेकिन मानव जीवन अनमोल है।
? सच्चा मनुष्य वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी परहित का सोचता है।
? सुख-दुःख को ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार करना ही सच्ची समझदारी है।
*?सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*?जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
*? आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो ?*
*? आपका जीवन मंगलमय हो ?* ♨️ *विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का ऐप है* ♨️ <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&referral_code=N29CX&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=BROADCASTER" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&referral_code=N29CX&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=BROADCASTER</a> |
|
2026-06-15 07:57:13 |
|
| 231401 |
40449695 |
www yug marble stone work.Com |
|
|
|
|
2026-06-15 07:54:48 |
|
| 231402 |
40449695 |
www yug marble stone work.Com |
|
|
|
|
2026-06-15 07:54:48 |
|
| 231400 |
40449695 |
www yug marble stone work.Com |
|
|
|
|
2026-06-15 07:54:46 |
|