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Message
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*सावधान❗खतरा❗होशियार❗*
*?अथ सत्पात्र ,अपात्र,कुपात्र विवेचनम्*
*?सत्पात्र दान ही मान्य ,श्रेष्ठ है।?✅?*
*पं श्रीमान् रतनलाल जैन बैनाडा आगरा से किसी ने पूछा:- जिज्ञासा :-किसी जैन को दान देने में या किसी अन्य मतवाले को दान देने में समान फल मिलेगा या अंतर है*❓
*समाधान:-इस संबंध में शास्त्रों के निम्न प्रमाणों पर विचार करना योग्य है :-*
*एको$प्युपकृतो जैनो वरं,*
*नाSन्ये ह्यनेकशः।*
*हस्ते चिंतामणौ प्राप्ते,*
*को गृह्णाति शिलोच्चयान् ।।१७६।।*
*अर्थ:- जैन धर्म के धारक एक भी भव्य पुरूष का उपकार करना अच्छा है ,परन्तु हजारों मिथ्यादृष्टियों का उपकार करना अच्छा नहीं है । जैसे जब हाथ में चिंतामणि रत्न आ जाए तो फिर ऐसा कौन दुर्बुध्दि होगा जो उसे छोड़कर पत्थरों को स्वीकार करेगा❓कोई नहीं करेगा ।*
*स्फूरत्येको$पि जैनत्व ,*
*गुणो यत्र सतां मतः ।*
*तत्राप्यजनैः सत्पात्रैर्द्योत्यं,*
*खद्योतवद्रवौ ।।५२।।*
*वरमेको$प्युपकृतौ जैनो,*
*नाSन्ये सहस्रशः।*
*दलादिसिध्दान् कोSन्वेति,*
*रस सिध्दे प्रसेदुषि।।५३।।*
*५२वा श्लोकार्थ:- जिस जैन में सज्जनों के प्रिय ऐसा एक भी जैनत्व गुण प्रकट है उस जैन के सामने ज्ञान और तप से अधिक अजैन पुरूष सूर्य के सामने जुगनू की तरह प्रकाशित होते हैं ।*
*५३वाश्लोकार्थ:-उपकार किया हुआ एक भी जैन उत्कृष्ट है जब कि अन्यमतवाले मिथ्यादृष्टि हजार भी नहीं है ।क्योंकि रस की सिध्दि करनेवाले पुरूष के प्राप्त हो जानेपर सार रहित कृत्रिम सुवर्ण बनानेवाले पुरुषों की कौन खोज करता है ❓*
*आचार्य श्री इन्द्रनन्दी सूरी विरचित नीतिसार समुच्चय ग्रन्थ में इस प्रकार कहा है कि,*
*तस्मै दानं प्रदातव्यं ,*
*यः सन्मार्गे प्रवर्तते ।*
*पाखण्डिभ्यो ददद्दान*
*दाता मिथ्यात्व वर्धकः।।४८।।*
*श्लोकार्थ:-उसी को दान देना चाहिए जो सन्मार्ग ( सम्यग्दर्शन ,सम्यग्ज्ञान,सम्यक् चारित्र रूप मोक्षमार्ग ) में प्रवृत्ति करता हो । पाखण्डि को ,जैन धर्म के विनाशक को दान नहीं देना चाहिए। क्योंकि दाता मिथ्यामार्ग का पोषक अथवा वर्धक होता है ।*
*उपर्युक्त सभी प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि जब भी कोई दान देना हो तब वीतरागी जैन धर्म के प्रचार -प्रसार या वीतरागता को माननेवाले जैनी को ही दे ।जैनी को "भी" नहीं ।जैनी को "ही" ।अन्यमत के लोगों को भोजन कराना ,औषधालय ,नेत्र शिविर,वस्त्र ,कम्बल ,भण्डारा देना ,उनके स्कूल,मन्दिर,साधु आदि के लिए दान देना कदापि भी उचित नहीं है ।*
*साभार जिनभाषित मासिक पत्रिका भोपाल जनवरी २००१*
*राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पं साहित्याचार्य श्री पन्नालालजी जैन द्वारा संपादित रत्नकरण्डक श्रावकाचार के २६ वे श्लोक के विशेषार्थ में २०७ वें पन्नेपर लिखा है कि मिथ्यादर्शन के साथ जो मिथ्याचार का पालन करता है वह अपात्र कहलाता है ।उत्तम पात्र मुनिराज,मध्यम श्रावक श्राविका, जघन्य अविरत सम्यक्त्वी जैनी गृहस्थ को दान देने से स्वर्ग में उत्पन्न होता है ।जो जैनी या सदाचारी के संगति से मांसाहार ,नशा तो करता नहीं पर जैन धर्म को मानता नहीं वह कुपात्र है । जैनी है व्यसनी है और जैनेतर है निर्व्यसनी है तो भी दोनों पात्र नहीं हैं। अपात्र कुपात्रों को दान देने का फल नरक ,निगोदादिक है ।ऐसा कौन नासमझ होगा जो पैसा भी खर्चे और दुर्गति में भी जाए। इसलिए समझदार धर्मात्मा ऐसा घाटे सौदा ,संसार भ्रमण का काम कदापि नहीं करता ।क्योंकि पूजा में भी कहा है कि चार प्रकार का दान चार संघ को दीजिए ।आहार, औषध, उपकरण,अभय दान चार संघ मतलब मुनिराज , आर्यिका, श्रावक श्राविका को ही देना चाहिए ।अपात्र,कुपात्र का नाम नहीं आया ।जैन औषधालय खोलकर प्रायः मिथ्यात्वी , व्यसनियों को ही दान दिया जाता है ।अनोप मण्डल जैसे ।सत्पात्र वह जो जैन धर्म को ही मानता है और निर्व्यसनी भी है।*
*कलेक्टर बनने के लिए स्नातक और २१वर्ष की उम्र अनिवार्य है ।स्नातक है पर २०वर्ष की उम्र है और २१वर्ष की उम्र तो है पर स्नातक नहीं तो दोनों अपात्र हैं। यह लौकिक कानून है । वैसे ही पारलौकिक कानून है नशा रहित जैनेतर है और नशा सहित जैनी है तो भी दोनों पात्र नहीं है ।दानार्थ जैनी और निर्व्यसनी हो जैसे वर्णीजी ।जैनेतर थे पर नशा रहित जैनी ही नहीं बनें बल्कि क्षुल्लकजी हुए तो वे सत्पात्र हुए । वर्णीजी तो इतने कट्टर जैनी थे कि माॅं और ध. पत्नी जबतक जैनी नहीं बनेगी उनके हाथ से आहार नहीं लूंगा ऐसा नियम था घर में रहते हुए भी ।। आखिरतक नियम निभाया । ऐसे अनेक जैनेतर जैन संत बने है ।उनको जैन समाज ने स्वीकारा भी है और दान भी दिया है ।*
*साॅंप को मीठा डालकर भी दूध पिलाए तो जहर ही उगलेगा ।पर गाय को सूखा घास भी खिलाए तो मीठा दूध ही देगी । यह योग्यायोग्य की विशेषता है । पत्थरपर बीजारोपण से बीज भी नष्ट हो जाएगा।काली मिट्टी में हजारों गुना फलता है ।तीर्थकर मुनिराजजी को प्रथम आहार दाता उसी भव में या तृतीय भव में नियम से मोक्ष जाता है ।यदि जैनी भोग भूमि जैसे सभी सुखी होते तो अब जैनेतरों को दान देने की कोई सोचे तो यही कहना होगा जो भी दान निकलता है वह केवल जैनी को भी दें तो भी अधूरा ही पडे़गा ।कर्नाटक , उडिसा के सराक जैनी,जैन कलाल नागपुर आदि की ओर ,जैन बुनकर महाराष्ट्र में ,जैन कासार चूडी बेचनेवाले अक्षम है धर्म परिवर्तन भी हुआ ,हो रहा और आगे भी होगा यदि अपात्रदान बंद नहीं किया तो ।जैनी अजैन हो रहे है पर जैनेतर दान लेकर जैनी नहीं बन पा रहे है ।केवल ख्याति,लाभ, पूजा मान बढाई के लिए जैनागम विपरीत अपात्र दान होता है ।*
*सारांश :-सम्यक्त्व कौमुदी ग्रंथ में ३३६ और ३३७ वे श्लोक में भी कहा है कि हजारों मिथ्यात्वी जैनेतर को दान देने की अपेक्षा एक जैनी सम्यक्त्वी अच्छा , हजारों जैनी की अपेक्षा एक श्रावक-श्राविका अच्छे ,उन हजारों की अपेक्षा एक अणुव्रति अच्छा ,हजारों अणुव्रति की अपेक्षा एक महाव्रति ,हजारों मुनिराजों की अपेक्षा एक तीर्थंकर महामुनिराजजी श्रेष्ठ है ।तभी तो तृतीय भव तक प्रथम आहार दाता नियम से मोक्ष पाता है ।*
*फिर भी अतिसमझदार कोई कहे सलाह की आवश्यकता नहीं है तो उसके लिए भी जैनागम में आया है कि चुप मत रहना ।*
*अपृष्टैरपि वक्तव्यं ,*
*सुसिध्दांतार्थ विप्लवे।*
*आज्ञा सिध्दं तु तद् ग्राह्यं ,*
*नान्यथा वादिनो जिना:।*
*जिनेन्द्र भगवान की आज्ञा उनका आदेश ही ग्रहण करने योग्य है क्यों कि अन्यथा वादी कथन करनेवाले नहीं है वे ।जो बातों बातों में पलट जाय। जैनेतरों को तो शासन,प्रशासन आरक्षण आदि के बहाने साथ देता है ।पर जैनी को बडी़ मुश्किल से अल्पसंख्यांक का दर्जा मिला वह भी कानूनी नहीं राजनीति की तहत मिला।उसका भी पूरा लाभ अभीतक नहीं मिल रहा ।जैसे हिंदू को विश्व में भारत देश ही एक सहारा है।वैसे जैनी को भी अमीर जैनी और जैन साधु, साध्वी एक सहारा है ।गर वे भी अन्यों के पीछे लग जाय या जैनी की ओर कम लक्ष्य हो तो अक्षम जैनी किधर जाए।मर नहीं सकते चाहे सूखा खाने मिले ,भूखा रहना पड़े पर हर कोई जीना चाहता है। पर मर नहीं सकते और जी भी नहीं सकते।माॅंगे तो जैनी होकर माॅंगते हो ❓ना माॅंगे तो बिन माॅंगे ,बिन रोए तो सगी माॅं भी सगी संतान को दूध नहीं पिलाती ।एक ओर खाई एक ओर कुआ । धर्मांतरण कर नहीं सकता बड़ी दुर्लभता से जैन कुल मिला है ।इसलिए भले कम हो देर से हो पर जैनी को ही देवे ।अंधी दयावाले मानवता की ,अहिंसा परमो धर्म की ,जिओ और जीने दो की जो दुहाई देकर जैनेतरों अपात्र , कुपात्रों को दान का समर्थन करते है ।वे सबसे पहले औरों की बात छोडे़ । जब घर का बटवारा हो तब सगे चार बच्चों के साथ सगे भाई के दो बालकों को मिलाकर छह में बटवारा करे । या वे अपात्रदान समर्थक संत अपना पद अपने शिष्य को न देकर गुरू भाई के शिष्य को ही अपना पद देवे । पर ऐसा संभव नहीं है ।अपात्र दान लेकर उल्टा और कहत है कि जैनी पाप कमाते है और हमें दान देकर पाप धोते पुण्य कमाते है । वैसे ही जैन समाज का पैसा जैन समाज में ही जाना चाहिए ।यही न्याय , लोक व्यवहार संगत भी लोकमान्य है ।पराए को अपनाने के मोहजाल में अपनों को खोते जा रहे है।सीधी सी बात है बीडी़ पीनेवाले को कोई बीडी़ देवे तो वह प्रशंसा ही करेगा ना ❗गाली थोडी़ देगा।यह मुझे स्वीकार है कि जैनी मदद मिलने के बाद जय जिनेन्द्र ?धन्यवाद कह सकता है पर पैर छूकर चापलूसी नहीं कर पाता जो आगम सम्मत भी है ।पर अन्य सबकुछ जो करवाना चाहो कर सकता है ।चूॅंकि पुराण और संतों का उपदेश उन के पास कम है।जैसे जिओ और जीने दो का उपदेश देने के बाद भी मांसाहारी,कुत्ता बिल्ली पालने का जैनागम में सख्त निषेध है ।चाहे रोज हलुआ खिलाओ पर वे मांस दिखनेपर उधर ही जाएंगे ।इसका मतलब यही है कि मारो मत पालो मत।अपात्रों को दान नहीं पर कर्मचारी हो तो समय पर वेतन , सही वेतन ,बिना परेशानी के देना यह भी एक प्रकार की मदद ही है । जैसे सिध्दों की आत्मा से हमें अनन्त कालतक कोई परेशानी नहीं होना ही उनका हम सभीपर अनन्त अभय दान, उपकार है न कि वे कुछ देने आते है । वैसे सुखी रहे सब जीव जगत के ....ऐसी भावना भी अभयदान ही है । पैसे देना ही अभयदान नहीं है । बिना पूछे भी बोलना चाहिए यदि सुसिध्दांत में बिगाड हो रहा हो तो । यह जैनाचार्यों ने ही अधिकार दिया है बोलने का ।इसलिए हट छोड़कर जैनी के लिए काम करे तो जैनी ही काम आएंगे ।सत्पात्रदान की जय हो।???✅*
*यद्यपि जैनागम के परिप्रेक्ष्य में यह सबूत दिया है फिर भी प्रस्तुति में यदि भूल चूक हुयी हो तो उसके लिए क्षमा ,तस्स मिच्छामि दुक्कडम्* |
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2026-02-18 19:43:33 |
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| 9265 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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????????
*??सादर जय जिनेन्द्र??*
*?जैन होकर जैन का,*
*आप सभी सम्मान करो!*
*सभी जैन एक हमारे,*
*मत उसका नुकसान करो!*
*चाहे जैन कोई भी हो,*
*मत उसका अपमान करो!*
*जो ग़रीब हो, अपना जैन,*
*धन देकर धनवान करो!*
*हो गरीब जैन की बेटी,*
*मिलकर कन्या दान करो!*
*अगर जैन लड़े चुनाव,*
*शत प्रतिशत मतदान करो!*
*हो बीमार कोई भी जैन,*
*उसे रक्त का दान करो!*
*बिन घर के कोई मिले जैन,*
*उसका खड़ा मकान करो!*
*मामला अदालत में गर उसका,*
*बिना फीस के काम करो!*
*अगर जैन दिखता भूखा,*
*भोजन का इंतजाम करो!*
*अगर जैन की हो फाईल,*
*शीघ्र काम श्रीमान करो!*
*जैन की लटकी हो राशि,*
*शीघ्र आप भुगतान करो!*
*जैन को अगर कोई सताये,*
*उसकी आप पहचान करो!*
*अगर जरूरत हो जैन को,*
*घर जाकर श्रमदान करो!*
*अगर मुसीबत में हो जैन,*
*फौरन मदद का काम करो!*
*अगर जैन दिखे वस्त्र बिना,*
*उसे अंग वस्त्र का दान करो!*
*अगर जैन दिखे उदास,*
*खुश करने का काम करो!*
*अगर जैन घर पर आये,*
*जय जिनेन्द्र बोल सम्मान करो!*
*अगर फोन पर बात करते,*
*पहले जय जिनेन्द्र करो!*
*अपने से हो बड़ा जैन,*
*उसको आप प्रणाम करो!*
*हो गरीब जैन का बबूआ,*
*उसकी मदद तमाम करो!*
*बेटा हो गरीब जैनी का पढ़ता,*
*कापी पुस्तक दान करो!*
*ईश्वर ने अगर तुम्हें दिया,*
*आप खुद पर गर्व करो।*
*:: ?जैनम् जयति शासनम् ::*
*जन जागरूकता के लिये, यदि आप जैनत्व एवं जैन समाज का विकास करना चाहते है तो यह कविता प्रत्येक जैन तक पहुॅंचनी चाहिये। इसे सभी रिलेटिव एव जैन व्हाट्स एप ग्रुप में शेयर करे* ???
*पोस्ट कर्ता :-बडौत जैन समाज के एडमिनजी ०९४११९०५१७५ धन्यवाद बधाई*
?✅?
*मन खुश हो गया ।वाह वाह ❗जैनम् जयतु शासनम्*
*सभी जैन भाई और बहनों से आग्रह है कि अपने परिवार में एक मीटिंग करके माता पिता बच्चों को समझाइए कि ये ज़रूर करे*:-
1) नेता *जैन* चुनिए
2) वकील *जैन* चुनिए
3) इंजीनियर *जैन* चुनिए
4) सी.ए. *जैन* चुनिए
5) सब्जी वाला *जैन* चुनिए
6) मोबाइल रिचार्ज * *जैन* चुनिए
7) मेडिकल स्टोर *जैन* चुनिए
8) दूध डेरी *जैन* चुनिए
9) प्रिटिंग प्रेस *जैन* चुनिए
10) दूधवाला *जैन* चुनिए
11) स्टेशनरी स्टोर्स *जैन* चुनिए
12) कपडे का शोरूम व दुकान *जैन* चुनिए
13) इलेक्ट्रॉनिक व इलेक्ट्रीकल स्टोर *जैन* चुनिए
14) कृषि सेवा केंद्र *जैन* चुनिए
15) ट्रेवल बुकिंग *जैन* चुनिए
16) फ्लोर मिल *जैन* चुनिए
17) किराना स्टोअर्स *जैन* चुनिए
18) हार्डवेअर दुकान *जैन* चुनिए
19) Xerox सेंटर *जैन* चुनिए
20) होटल *जैन* कि चुनिए
21) सब्जी और फ्रूट वाला *जैन* चुनिए
22) राज मिस्त्री *जैन* चुनिए
23) मिठाई की दुकान *जैन* चुनिए
24) और सभी चीजों के लिए *जैन* *व्यापारी चुनिए चाहे कुछ महंगी ही क्यो न दे*
*इन सभी में जैनी ना मिले तो अहिंसक ही हिंदू की खोज करिएगाजी।*
*आप देश व अपनी आने वाली पीढी के लिए इतना तो कर सकते हो यही आपका हथियार है सब काम समाज पर मत छोड़ो कुछ तो करलो भाई*
*एक ही महीने में आपका समाज उन्नति कर जाएगा*
*जैन को एक ऐसी सोच रखनी चाहिए क्योंकि एक छोटी सोच आगे चल के बड़ी सोच बन सकती है*
*एक बार कड़ी से कड़ी मिला कर तो देखिये सब सर ना झुकाएं तो कहियेगा*
*जय जिनेन्द्र*
*नोट: हर जैन समूहों में या फिर अनेकों जैनियों तक यह मेसेज शेयर कीजिए।*
यह मेसेजे *केवल जैन को* भेजें
ओर भेजें, अवश्य । |
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2026-02-18 19:43:31 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtu.be/0GnJTlkEH8U?si=Scdqv2DBnj6mzwfz" target="_blank">https://youtu.be/0GnJTlkEH8U?si=Scdqv2DBnj6mzwfz</a>
*गुरू शिष्य दर्पण के पत्रकार आपने कहा कि जैनाचार्य पत्रकाण्ड गन्दा और कितना कबसे लिखा गया सभी जानते हैं।इधर ही आप झूठे सिध्द हो गये क्योंकि इतना हमें पता नहीं था जितना आप कह रहे हो।*
*रही बात तब पत्र सीमित दायरे में शायद कुछ शिष्य शिष्याओं को भेजा होगा गुप्त रूप से तो उस मास्टरमाइंड का नाम उजागर हो या दण्ड मिले का आप आप जैसे कुछ आह्वान कर रहे हैं पर बस इतने से जवाब में पटाक्षेप हो सकता है कि सीमित शिष्य शिष्याओंतक पत्रकाण्ड करनेवाला अधिक दोषी है या यूट्यूबपर जैनाजैनतक यह खबर का गुरूजी रावण आदि कहा यह फैलाना वाला अधिक दोषी है।सजा का अब कौन दावेदारी कर रहा है।जिसने शुरूआत की क्यों कब कैसी की वह जाने पर आप तो अब पूरी दुनिया में उजागर करके उन पत्रों को पाकर पढ़ने की और लालसा जैनाजैन में बढ़ा रहे हो अशोभनीय अधिक कौनसी बात है ।इसमें किसकी बात अधिक चिंतनीय और अशोभनीय है ❓ऐसा ही पटाक्षेप बिना चलता रहा तो इतिहास लिखा जाएगा।जो असहनीय होगा या नहीं❓*
*मास्टरमाइंड से इतना खौफ क्यों❓आपके सवाल का जवाब आपसे ही मिला है जब कुत्ता कुतिया कहा था जय क्यों नहीं बोलते उस प्रसंगपर तो आपने खौफ में आकर चैनलों से तौबा करके कहा था कि अब मैं कुछ भी नहीं बोलूंगा क्षमा चाहता हूं।*
*पद लोलुपता ठीक नहीं।गुरू ही योग्य शिष्य को पद देते हैं ।तो कोई कहेगा कि जैसे समाज द्वारा दिया पद मान्य नहीं है तो आचार्य ज्ञानसागरजी का पद ही अमान्य हो रहा है। और गुरूजी विद्यासागर जी की महिमा दुनिया गाये समाज तो वह भी अमान्य होगी क्या❓जैसे गुरू द्वारा दिया पद प्रशंसा प्रशंसनीय मान्य है तो वैसे ही शिष्य अंतरंग की बात जानता है बाहरवाली समाज नहीं।आपके अनुसार मास्टरमाइंड ने गर गुरू को गंदे शब्द रावण जैसे कहे तो क्यों कहे❓ परिवार वाद वाली बात उठती है तो कितनी सत्य है❓खुद गुरूजी कहते लिखते हैं स्त्री दीक्षा देनेवाला संत पापाचार्य महापापी पाखण्डी है।फिर भी दीक्षा गर संत देवे तो कथनी करनी भिन्नता होने से रावणपना सिध्द करें तो क्या जवाब दिया जाए❓*
*गर सच्चे शिष्य को पद की लालसा नहीं होती तो पूज्य समयसागरजी ने छिंदवाड़ा में जब आचार्य श्री अस्वस्थ थे तभी ये चर्चा क्यों करके चिंता व्यक्त की कि आचार्य पद किसे मिलेगा❓पूछते वक्त मुनि पुंगव सुधा सागरजी का नाम खुद समयसागरजी ने लिया बल्कि मुनि योगसागरजी का नाम नहीं लिया ।पूछने का भाव साथ यही था कि समक्ष उपस्थित आचार्य पद की होड़ में उनका नाम लेवे।*
*रही बात पदारोहण की छल कपट द्वारा तो नहीं किया गया ब्लैकमेल करके❓*
*जब गुरूजी विद्यासागर जीने साफ कह दिया था कि एक के द्वारा संघ चल नहीं पाएगा मतलब एक भी आचार्य नहीं होगा इसलिए नौ निर्यातक बनाए।यदि कहे कि प्रायश्चित ग्रंथ पढ़ने दिया था इसका तात्पर्य ही है कि उनको पट्टाचार्य पद दिया जाए तो निर्यापक भी दीक्षा शिक्षा प्रायश्चित देते हैं तो यह कहना ग़लत था क्या❓यदि सही था तो वह प्रति नौ निर्यातकों को क्यों नहीं दी।यदि कहे कि वे प्रायश्चित दे नहीं सकते तो गुरूजी ने उल्लेख तो किया था।*
*मुनि योग सागरजी को पद किसे देना कह गये थे। वे सत्य महाव्रती कह रहे है तो मानना ही चाहिए ना❗*
*आइए उसको भी सिध्द करते हैं।मुक्तागिरिजी में गुरूजी ने संघ की आचार-संहिता में एक नियम सभी को दिया समझो मुनि योग सागरजी सहित सभी ने तब तो समक्ष मान्य किया।पर बाद में मुनि योग सागरजी ने संस्था संतों को बुलाकर कहा कि मैं इस*
*नियम का पालन नहीं करूंगा यदि मेरा नाम बताया शिकायत कि तो मैं संघ से चला जाऊंगा आप भी स्वतंत्र है मैं भी स्वतंत्र आपकी शिकायत मैं नहीं करूंगा मेरी शिकायत आप भी ना करें ।एक प्रकार से संघ को बपौती समझकर नियम भंग करवा दिया ।चाहते तो वे बिना कहे नियम तोड़ सकते थे तो भी उनका सतरा अपराध माफ थे भाई है ना❗*इतना कहने पर भी आचार्य कुछ कह नहीं पाये अब गुरू शिष्य दर्पणवाले इधर पूछे कि आचार्य श्री को भाई से इतना खौफ क्यों रहता था।ऐसी हरकत और कोई करता तो साफ हो जाता।*
*फिर बाद में गुरू अध्यादेश फर्मान मुनि योग सागरजी ने खारीज करके उल्लंघन चालू कर दिया।सभी के समक्ष उल्लंघनादेश जारी का कारण मैं अकेला नियम ना तोडू सभी तोड़े तो अपराधी सभी माने जावे।इसके पीछे कारण मुम्बई वाली ब्रह्मचारिणी जो ब्राह्मी आश्रम की संचालिका के छत्रछाया में न थी उससे बोले बिना मुनि योग सागरजी शायद बेचैन रहते थे।उसको बाद में लड़का भी हुआ और किसी से विवाह भी कर लिया पर वह लड़का किसका है या उस लड़के का बाप कौन है डीएनए टेस्ट के बाद पता चलेगा।*
*कहने का भाव यह है कि गुरू की आचार संहिता का खुले आम मुनि योग सागरजी ने कत्ल किया हो तब भी महाव्रती झूठ नहीं बोलते का ठप्पा लगाओगे क्या ❓*
*वैसे भी उनके अनुसार गुरूजी ने छह फरवरी को मुझसे कहा फिर कहते नौ फरवरी को कहा किसको आचार्य पद देना है वह भी शौच निहार के आते-जाते प्रसंग में सोचिएगा क्या गुरूजी केवल अपने भाई को ही भाई को आचार्यपद देने की बात कह सकते है❓जब कि वे खुद एक बार बोले थे कि नहीं परिवार वाद ना आए।*
*जब संघ के नियम की बात सभी को पता थी उसको तोड़ मरोड़कर बिगाड़ा गया तो जो बात अकेले में कही गयी उसे* *कौन जानता है कहीं या न कही❓ कहीं तो क्या कही❓ कौन जाने❓*
*दूसरी बात यह भी है कि ईसरी में मुनि समयसागरजी ने गुरूजी आज्ञा का उल्लंघन किया कि हम क्लास नहीं लेंगे तब गुरूजी को इतना आघात संताप हुआ कि आज्ञा का उल्लंघन हो रहा है तो वो मैं आचार्यपद का त्याग करता हूं कहकर पीजी दूर फेंक दी और बोले अब मैं २८ मूलगुण का पालन करूंगा।ऐसा भयानक मानसिक उपसर्ग गुरूजी को जिस शिष्य ने किया हो और आचार्य पद छोड़ दिया हो तो वे उनको आचार्य पद कैसे दे सकते है❓वैसे आचार्यत्व पीजी फेंकने से बचा ही नहीं था तो क्या देते❓जो ज्ञानसागर गुरूजी की इतनी विनय करते थे आखिर एक प्रथम मुनि शिष्य के आज्ञा उल्लंघन से उन ज्ञानसागरजी के लिए पद को भी छोड़ा नहीं फेंकना पडा।यदि ऐसी आज्ञा का उल्लंघन कोई शिष्य करता तो उसकी खैर ना होती।*
*इसलिए अब मुनि योग सागरजी की सत्यता की अग्निपरीक्षा है कि अकेले में गुरूजी ने कुछ कहा था या प्रतिष्ठाचार्य ब्र और मुनि योग सागरजी की मिलीजुली भगत की साज़िश थी आचार्यपद भाई को सदलगा की ही बपौती बनी रहे।पर भविष्य बताएगा उड़ान से कि आकाश किसका है❓पद की लोलुपता किसको थी और किसको नहीं थी❓आखिर ज्ञानसागरजी को गुरू बिना आज्ञा के समाजद्वारा आचार्य पद जीवन के अंतिम दौर में लेने की आवश्यकता क्यों थी❓क्या बिना इच्छा के दूल्हा दुल्हन से वरमाला डलवाता है❓* |
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2026-02-18 19:43:29 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*भारत से सांई ढा़बा कसाई भगाओ*
*विश्व में शाकाहार ज्योति जलाओ*
*०२/०६/२०२५*
*सांई तो था एक बस कसाई*
*बाबा नहीं वह तो ढा़बा था भाई*
*शिर्डी न है काबा,जा ना बा राही*
*वहाॅं तो अपवित्र कब्र है बनाईं*
*ना रखो ,ना मानो यही है अच्छाई*
*कलावा से दूर की अहिंसकों की कलाई*
*न मानते थे कभी लामा दलाई*
*क्या खिलाया नाम दे प्रसाद दवाई*
*तब सदाचरण की बात को अटकाई*
*यूं कहो भारतीय संस्कृति को मरवाई*
*गांजा चीलम की लत लगवाई*
*भारत में चलेगी, दुकान लगाई*
*कौन सुधारें जब थी नहीं लुगाई*
*सांई था गलत होती थी बुराई*
*भोलों की भक्ति थी उसने चुराई*
*भारत में ही घुसा करके चतुराई*
*पर थी है रहेगी यही सच्चाई*
*कब्र उखाड़ो नशामुक्त पवित्र*
*नगरी बनाने करो धुलाई*
*फिर असंयमी असदाचारी को कैसे बधाई*
*सबका मालिक एक आशा थी बंधाई*
*चेतन मन की नहीं, तन की थी अंगड़ाई*
*शिलालेख बनाओ सोने की बना स्याई*
*अहिंसकों समझो बना ली जगह अस्थाई*
*पूरा तीन नहीं ,न था अढाई*
*भारतीयता उसमें समझ न आई*
*विकृति तो है नरक जाने की खाई*
*विकृति की राह भी जबरन दिखाई*
*बल्कि अहिंसक को राह भुलाई*
*समझने क्यों हो रही जनता को कठिनाई*
*खतरनाक अहिंसा को काटे जैसे नाई*
*त्यागो जैसे नारी हो समझ पराई*
*छोड़ों भगाओ इसमें न है बुराई*
*इसकी कुपरंपरा किसने थी बुलाई*
*बहती भक्ति गंगा को रूकवाई*
*अहिंसकों भारत से भगाओ न हो ढिलाई*
*मुम्बई बैंगलोर या हो फिर भिलाई*
*ये करता था सद्कर्म की पिटाई*
*मांस मिलाकर प्रसाद देवे मिठाई*
*परोपकार मित्रता की ज्योति न जलाई*
*जनवरी अप्रैल जून या हो जुलाई*
*भारत से हो बस इस कि जुदाई*
*न था है निकलेगा ये कर लो खुदाई*
*इसकी हुयी है अच्छे से जेल में कुटाई*
*भगवंत संत तो दूर सज्जन न मानो है भलाई*
*सांई के पहले ओम् की बात चलाई*
*संत समागम और न पुराण की करी पढा़ई*
*भारतीयता पर की इसने चढ़ाई*
*खानी चाही भोलों की हराम कमाई*
*भारत का न था है रहेगा जमाई*
*ईश्वर का नाम न ले आवे जब जंभाई*
*संस्कृति उन्नति को न की इसने तराई*
*मछली आदि अभक्ष की की तलाई*
*मांस खाने की शपथें भी खिलवाई*
*संस्कृति में विकृति थी मिलवाई*
*आनंद की कैसे बजेगी शहनाई*
*भारत की मूल नींव को हि हिलाई*
*भोली जनता की मानसिकता डराई*
*मांसभक्षी स्वाद क्या जाने कैसी है राई*
*संत सज्जन होता तो लेता चटाई*
*सज्जनों में फूट डाल की खटाई*
*सज्जन संतों की की बहुत कटाई*
*मानते जब कुपरंपरा होती हटाई*
*ब्लू न पहना कभी सुशिक्षित लगने टाई*
*भारतीयता में आने कभी न की ट्राई*
*विकृति की घुट्टी बस जनता को पिलाई*
*परोपकार के नाम पर न सिखे सिलाई*
*ज्ञान ही न था कैसे करें कढ़ाई*
*भगाने लागू है एक कानून कड़ाई*
*जेहादि की उन्नति तो है कराई*
*काले बाल सफेद करने की हो डाई*
*वेश्या से जन्मा क्या संस्कार देती बाई*
*बहुत मुश्किलों से यह ओरिजनल फोटो मिला है।*
`नाम :` चाँद मियां
`जन्म :` 1838
`मृत्यु :` 15 अक्टुबर 1918
`उपासक :` अल्लाह ताला के।
`निवास स्थान :` द्वारका माई मस्जिद शिर्डी।
`भोजन :` शाकाहार + मांसाहार
`नशा :` चिलम पीना।
`काम :` झाड़ फूंक लगाना।
`भक्तों का इलाज :` चिलम की पी हूई राख की पुड़िया बनाकर देते थे।
`आजादी की लड़ाई में योगदान :` 0 (शून्य)
`चढ़ाए हुए चंदे का उपयोग :` चिलम व बीड़ी खरीदने में रहने सहने के लिए।
`फेवरेट डायलोग :` अल्लाह सबका भला करें।
`मरने के बाद क्या हुआ :` मुस्लिम रीति-रिवाजों से कब्र बनाई गई।*
*फिर भी हिंदूओं की आँखे नहीं खुलती, चाँद मियाँ को श्रीराम , हनुमान जी आदि से भी ऊपर दर्जा दे रखा है। पिछले ४० सालों में ही योजनाबद्ध तरीके से साई उर्फ चाँद मियां की मार्केटिंग हुई है।*
*? शवपूजा सनातन हिन्दूओ के लिए वर्जित है गीता के अनुसार,शव पूजा करनेवाले प्रेत योनी मे जाते है, कब्र पूजा से बचे,ईहलोक परलोक सुधारे॥ ⛳?*
▬▬▬▬▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬▬ |
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2026-02-18 19:43:28 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtube.com/shorts/NSTOoqQC-lE?si=INTKXVlG7M5iiSaM" target="_blank">https://youtube.com/shorts/NSTOoqQC-lE?si=INTKXVlG7M5iiSaM</a>
*सावधान❗ होशियार ❗खबरदार❗खतरा❗*
*गांधी को राष्ट्रपिता, महात्मा,बापू कहना धार्मिक अपराध होगा।*
*विडिओ में बार बार बोले जा रहे हैं महात्मा आखिर क्यों❓?️जो हिंदू विरोधी था।बेटे का हिंदूत्व से धर्मांतरण और खुद की बालिका के साथ बीवी का व्यवहार करना गांधी को पसंद था ऐसी अनेक बातें हैं ।इसलिए अब ये उपाधि बंद हो धार्मिक स्थानों पर गुणगान भी जन्म ,मरणतिथि मनाने का मतलब भारतीय संस्कृति के खिलाफी को आगे बढ़ाना इतिहास माफ नहीं करेगा। अहिंसा के पुजारी कहलवाया गया वास्तविकता और कुछ है।जागो अहिंसकों मत भागो* |
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2026-02-18 19:43:26 |
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| 9261 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtu.be/UnzkD1XbRmE?si=8kP3NBELyuxrzaGY" target="_blank">https://youtu.be/UnzkD1XbRmE?si=8kP3NBELyuxrzaGY</a>
*३०/०५/२०२५*
*मोहन गांधी की हरकतें करतूतें*
*कौन क्यों करे ऐसे में नमस्ते*
*नाम कमा लिया जमाने थे सस्ते*
*किसी को चाचा उसने बापू कहा हस्ते*
*इसीलिए भारत बचा फसते फसते*
*इतिहास के निकालकर देखो बस्ते*
*भोले मानव देहात में थे बसते*
*नेता बनकर कर रहा था यह मसते*
*भारत को भारत किया न आप समझते*
*ज्ञान होता तब जब इतिहास पढ़ते*
*गांधी से दूर होना है भले आसते*
*विश्व कदाचरण नाम पर भारत को कसते*
*नाम कमाने में चप्पल जाते घिसते*
*ये ऐशो आराम करके खा गये पिस्ते*
*दयालू होते तो जातिवाद में ना पिसते*
*किसान काम करें बिन पहने दस्तें*
*पाक को दे रहा था भारत के रस्ते*
*इसकी मूर्खता पर गोडसे थे हसते*
*गलती ना होती तो क्यों गांधी मरते*
*बचते पाप का घड़ा ही ना भरते*
*भारत में हिंदू अच्छे से पलते*
*गर गांधी न्याय को न कभी पलटते*
*अहिंसक सुखी होते कभी न भटकते*
*अंग्रेज आदि भारतीय जनता को न डंसते*
*अहिंसकों से तो अच्छे अच्छे हैं डरते*
*हर घर से जा मानवता से निकलते*
*बस राम हनु वीर नाम ही जपते*
*गर संविधान को सिर माथे पर धरते*
*भारत से डरकर वे खुद ही भगते*
*धार्मिक जन जन बस बोलते भगवते*
*न खाते झूठे वायदों की शपथे*
*अब गांधी को कौन क्यों करे नमस्ते* |
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2026-02-18 19:43:24 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*??️??कृपया स्कूल में राष्ट्रगान के बाद प्रतिदिन २-२ नारे ८-८ दिन में बदल बदल कर लगवाने का कष्ट करिएगा।*
*शासन ,प्रशासन को जगाने किए गये जंतर मंतर देहली आदि अनेक जगहपर गौ,पशु रक्षादि मुंडन, अनशन आंदोलन , अहिंसक महायज्ञ की यादगार में सर्व मान्य अहिंसक नैतिक शिक्षार्थ नारे-??????*
*खूब करो पर........जैन संत समाधिसागर? "विद्यासागरदास '*
*०१) .:- काटना ?है तो खूब काटो-*
*केक नहीं ,कर्म ?काटो*
*०२):- प्राणी ?फाटे वे क्रूर है-*
*पाप काटे ये शूर हैं*?
*०३):- बेचना है तो खूब बेचो-*
*माँस नहीं, घास ?बेचो*
*०४) :- पशु धन ?रक्षा जाप है-*
*हिंसा ?करना पाप है*
*०५):-.१-२-३-४- प्राणी ?रक्षा की*
*जय जयकार*
*०६):- .५-६-७-८ अहिंसा ?धर्म का देखो ठाठ*
*०७):-९- १०-११ -१२ अहिंसा धर्म का बजे नगाड़ा*
*०८):- -१३-१४-१५-१६? जैन ??♀️हिन्दू, मुस्लिम का ??बच्चा बोला❓*
*क्या बोला ❓ जय अहिंसा ❗ जय अहिंसा ❗*
*०९):- १७-१८-१९-२०, अहिंसा धर्म को नमाओ? शीश.*
*१०):-२१-२२-२३-२४ अहिंसा धर्म की होगी ✌️जीत*
.
*११):-मृत्यु भोज श्राद्ध बन्द करो-*
*पशुधन ?की रक्षा करो*
*१२):-. हम सभी की यह अभिलाषा-*
*राम नवमी को ?बंद हो हिंसा*
*१३):- जलाना है तो खूब जलाओ -*???
*रावण नहीं पाप जलाओ*
*१४):- खोलना ?है तो खूब खोलो-*
*गोदाम के साथ, गौधाम? खोलो?️*
*१५):-प्रभुराम का क्या संदेश?❓-*
*जियो ?और जीने? दो का यह देश*
*१६):-छोड़़ना है तो खूब छोड़ो-*
*गुरू नहीं, दारू ?छोड़ो*
*१७):-सत् युग की कृष्ण की गैया-?*
*कलियुग में क्यों ?मारते हो भैया ❓*
*१८):-अहिंसक तेरे देश में गांधी-*
*हिसा ?️की आ गयी कहाँ से आँधी ❓*
*१९):-मारना है तो खूब मारो-*
*जान से नहीं, अहसान से मारो*
*२०):- फोड़़ना है तो खूब फोड़ो-*
*पटाखे नहीं, कर्मरूपी पहाड़़ फोड़ो़*
*२१) :-गुटखा छोड़ और मटका*?
*नहीं तो समझ, संसार में भटका*
*२२):- जो नहीं पीता ?️वाइन-*
*उसकी जिन्दगी है फाइन?*
*२३) :- जो भी पीते हैं ?शराब-*
*उनकी जिन्दगी होती हैं खराब?*
*२४):-भारत की थू-थू होगी निंदा-?*
*जब तक ?कत्लखाने हैं जिन्दा*
*२५):-आओ करे अनशन आंदोलन -*
*पशुओं ,भारत का मिटेगा आक्रंदन*
*२६):-रावण दहन का करो तिरस्कार-*
*जय श्रीराम जी को करो नमस्कार*
*२७):- एक बूंद शहद में है जीवों का कोष*
*खाने से सात गाँव जलाने का है दोष*
*२८):- काटना है तो खूब काटो*
*प्राणी नहीं ,पाप काटो*
*कत्लखाने में जाने वाली एक गाय, मूक पशु की रक्षा से साठ हजार करोड़ कि.मी.ऊँचे पर्वत से अधिक सोना दान का या समस्त पृथ्वी दान जैसा पुण्यार्जन का पुराणों में उल्लेख मिलता है अतः गौशाला या पशु रक्षा दान देने के लिए बैंक विवरण*
*?खाताधारक का नाम:- विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच , बैंक- एस.बी.आई. खाता नं.- ३ ३ ७ ६ ८ ० ६ २ ९ ७ ०*
*(3 3 7 6 8 0 6 2 9 7 0 ) ,आय एफ एस सी नंबर एस बी आई एन३४२३ IFSC NO. :- SBIN0003423 जब तक रसीद ना मिले तब तक संपर्क अवश्य करें।*
*विशेष नारे- संकलक:-*
*" विद्यासागर दास "*
*२९):-. देश की शान -*?
*पशुओं की जान*?
*३०):-. दया धर्म से नाता है-*
*अहिंसा हमारी माता है*
*३१):- कटते प्राणी करे पुकार*
*बंद करो ये अत्याचार*
.*३२:-पशु कटेंगे, देश कटेगा-*
*पशु बचेंगे, देश बचेगा*?
*३३ ):-चाहिए है यदि सत्ता*
*तो बंद करो पशु हत्या*
*३४):-पीना है तो खूब पिओ,*
*दारू नही दूध पिओ*
*३५):-दूध दही बटने देंगे-*
*पशु नहीं कटने देंगे*
*३६):-बंद करो, बंद करो*
*माँस आयात-निर्यात बन्द करो*
*३७):-हिंसा का जो दे उपहार-*
*नहीं चाहिए वह सरकार*
*३८):-जिसके जीवन में गुरु नहीं -*
*उसका जीवन शुरू नहीं*
*३९):-जो करे पशुओं पर उपकार-*
*वही है सच्ची सरकार*
*४०):-बंद करो, बंद करो-*
*पशु हत्या बंद करो*
*४१):-शाकाहार आयेगा-*
*रामराज्य लायेगा*
*४२):- सारे त्यौहार बार-बार*
*प्राणी रक्षा एक बार*
*४३):- पशुओं की हत्या -*
*संविधान देश की हत्या*
*४४):-मानवता का होगा नाश-*
*पी कर मदिरा खाकर माँस*
*४५):-साधु संत आये समझाने*
*बंद करो सब बूचडखाने*
*४६):-जैन हिन्दू तेरी क्या पहचान-*
*सत्य अहिंसा जीवनदान*
*४७):-हर प्राणी की एक पुकार-*
*शाकाहार-शाकाहार*
*४७):-मद्यपान को ठुकराये-*
*अपने घर को स्वर्ग बनाये*
*४९):-देश धर्म का मान बढ़ाओ-*
*पशुओं के प्राण बचाओ*
*५०):-वेद, पुराण, कुराण बताते-*
*जुआ शराब नरक ले जाते*
*५१):-धर्म गुरु कीजिये जानकर-*
*पानी पीजिये छानकर*
*५२):-पशुओं को मिलेगी शांति-*
*अहिंसा की जब आवेगी क्रांति*
*५३):-बंद करो भाई बंद करो-*
*दारू आयात निर्यात बंद करो*
*५४):-हर मजहब की एक ही पुकार-*
*छोडो हिंसा सीखो प्यार*
*५५):-तन-मन-धन करते कौन खराब-*
*माँस, अण्डा और शराब*
*५६):-जिसने पशुओंं को काटा-*
*समझो उसने भारत को बाँटा*
*५७):-जन्म माता दूध पिलाये साल भर-*
*पशु दूध पिलाये जीवन भर*
*५८):-सण्डे हो या मण्डे-*
*कभी ना खाओ अण्डे*
*५९):- जो भी खाएंगे अण्डे-*
*उनके सिरपर पड़ेंगे डण्डें*
*पाठशाला, स्कूलों में सिखाने, सार्वजनिक कार्यक्रमों, मन्दिर, रैली, गांधी जयन्ती, संतों के आगमन, विहार के वक्त बोलने हेतु धार्मिक नारे। मंदिरों में चढ़ा हुआ निर्माल्य पुजारी, माली (नौकर) को वेतन में देना जीर्णोद्धार में नवनिर्माण में लगाना गलत होने से पाप लगता है। अतः निर्माल्य बेचकर आया हुआ पैसा गौशाला, पशुशाला, पक्षी, चिकित्सालय को देना ठीक है।*
*प्रचारक ,समर्थक:- विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच,विघ्नहर नेमिनाथ गौशाला, विघ्नहर विश्व सत्पात्र सहायता ट्रस्ट, विघ्नहर जैन बैंक की ओर ऋषि,कृषि प्रधान देश में मूक पशुओं ,जीवों की रक्षा और सुरक्षा भी है।????????* |
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2026-02-18 19:43:23 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*शराब क्यों खराब ❓*
*-मुनि समाधिसागर*
*" विद्यासागरदास "*
रचना १०/१०/२००२
"मौन आंदोलन"
नवागढ़ जैन तीर्थ
जिला परभणी महाराष्ट्र
कहते हैं कि नदी ,
तालाब, समुद्र में
उतने नहीं मरे डूबकर
जितने कि शराब की एक
बोतल में डूब कर
तड़प तड़प कर मरे
मर रहे ,आगे भी मरेंगे
क्योंकि वह तो है तेजाब
जो भी पीते हैैं शराब
उनकी जिंदगी होती है खराब
इसीलिए तो कहता हूॅं कि
शराब है जी खराब !
कवियों ने चेतावनी दी है कि
दूध मिला श्रीराम के युग को
कृष्ण के युग को घी
कलियुग को शराब मिली
सोच समझ कर पी
अंडे मांस और शराब
तन-मन-धन को ही नहीं
वतन और वचन को
वेतन और चेतन को
करते हैं जी खराब
जैसा हुआ पंजाब
इसीलिए तो कहता हूॅं कि
शराब है जी खराब !
जो नहीं पीते वाइन
उनकी जिंदगी है फाइन
दूध घी पहले सस्ता होने से
छाछ, घी के पीपा भरकर
खा -पीकर रहते थे मस्त
आजकल शराब पी -पाकर
रहते हैं जी सभी त्रस्त
और हो जाते हैं अस्वस्थ
फलतःसंसार होता है ध्वस्त
अतः उससे कुछ भी नहीं लाभ
इसीलिए तो कहता हूॅं कि
शराब है जी खराब !
गर राजा चाहता प्रजा का भला
तो दारू बंदी की आती कला
दारू बंदी करो ,दारू बंदी करो
कहते कहते भर गया गला
सरकार की खजाना भरो नीति से
मानव जा रहा है छला
दारू पीकर रिश्वत
खाओ अभियान से
किसका ह्रदय नहीं जला
क्योंकि नेता रिश्वत से ही पला
तो बताओ मित्रों कैसे होगा
जनता व देश का भला ?
क्यों नहीं देते इसका जवाब
इसीलिए तो कहता हूॅं कि
शराब है जी खराब !
छोड़ना है तो खूब छोड़ो
गुरू नहीं ; दारू छोड़ो
थोड़ी बहुत मिलती है पेंशन
शराब पीने से निकलता है टेंशन
सबका गलत है यह इंटेंशन
शराबी को ठीक करने पुलिस को
रहना पड़ता है अॅटेंशन
शराब पीकर चुनाव में गड़बड़ी
ना हो अतः आचार संहिता
लगाते थे टी एन शेषन
पीकर पछताते हैं
लड़का हो या बाप
इसीलिए तो कहता हूॅं कि
शराब है जी खराब !
दारू खूब पीने से आता है जोश
बुद्धि भ्रष्ट होने से होता है बेहोश
उदार बन कर दानपति हो
देता है वह कोष
मानो नष्ट हो जाता है सारा होश
मतलब शराबी को खुद और
खुदा का भी रहता नहीं है भान
गाड़ी चलाते हैं फिर भी बेभान
जैसे आ गया हो तूफान
इसीमें तो अपघात होता है तू मान
फिर समाज में मिलता नहीं सम्मान
गुस्सा, गटर ,गुण्डे पास आने से
खतरे में रहती है जान
फलतःपरिवार , समाज, देश की
गिरती जाती है शान
अगर विश्वास ना हो तो
पढ़ लो मित्रों ! अखबार
क्यों दुखी हुए थे भाई सलमान
इससे ज्यादा क्या देऊॅं प्रमाण
जेल जाने पर कौन करेगा प्रणाम
क्योंकि पीते हैं जो शराब
बनते हैं उनके मित्र अपने आप
बच्चे ,मच्छर ,कुत्ते और साॅंप
वेद पुराण कुराण बताते हैं साफ
मत पिओ भाई शराब
क्योंकि दुखी होते हैं माॅं बाप
उससे लगता है पाप
बच्चे ,परिवार और समाज
इन पर पड़ती है बुरी छाप
भगवान का छूटता है जाप
सत्य का होता है अपलाप
पीड़ित देते हैैं अभिशाप
इसीलिए तो कहता हूॅं कि
शराब है जी खराब !
जहाॅं नशा है वहाॅं शान नहीं
जहाॅं शान है वहाॅं नशा नहीं
शराब के ठेके से सरकार को
खूब मिलता है टैक्स
तो क्या शराब पीने सरकार
देवोंको भी करेगी फैक्स
जैसे पाप करके
धर्म करने की अपेक्षा
लात मारकर क्षमा
माॅंगने की अपेक्षा
पाप से दूर रहना
लात न मारना ही है श्रेष्ठ
वैसे शराबी बनाकर टैक्स पाना
उसी टैक्स से बीमार शराबी को
ठीक करने की अपेक्षा
शराबी ना बनाना ही है श्रेष्ठ
ऐसा लोग कहते हैं ज्येष्ठ
गर सरकार चाहती है टैक्स
गर भरना चाहती है पेट और पेटी
तो जनता को शराबी नहीं
बनाएॅं सराफी
अन्यथा शराबी की वजह से
सरकारी, निजी काम में
आती है खराबी
फलतःमिले टैक्स से भी सरकार का
होता है कई गुना नुकसान
फिर भी कहोगे कि भले
सरकार का हो नुकसान
पर हमें तो सुख मिलता है
पीने से शराब
किंतु बंधुओं यह है मात्र सराब भ्रम
इसीलिए तो कहता हूॅं कि
शराब है जी खराब !
पीना है तो खूब पिओ
दारू नहीं ; दूध पिओ
शराब बंदी बिना पूरा
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
अभियान है जी अधूरा
सरकार को मद्य बिक्री से
तात्कालिक धन लाभ भले ही हो
पर जनहानि, संस्कृति हानि
और कर्तव्य हानि को
नहीं किया जा सकता है गौण
जन,संस्कृति ,कर्तव्य हानि में
सरकार क्यों है मौन ?
पूॅंछने वालेको दादागिरीसे पूछते हैं
कि पूछने वाले होते तुम कौन ?
जवाब न होने से बंद करते हैं फोन
जनता परेशान होने पर विश्व बैंक
या विदेश से लेते हैं लोन
चल रहा है भारत में यह ढोंग
अतः गर भारत को महाभारत,
गारत नहीं है बनाना
साधु संत और बुजुर्गों का
नहीं लेना हो सराफ शाप
तो समझो शराब को खराब
और आत्मोन्नति ,धर्मोन्नति से
देशोन्नति करो साहब !
फिर हर भारतीय विश्व से कहे
शराब है जी खराब !
समझ गये ना !
फिर अब मत पूछना
शराब क्यों है खराब! |
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2026-02-18 19:43:18 |
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| 9258 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*माझी भावना- (मेरी भावना)*
*( माणुसकी ?मानवधर्म )*
*रचयिता:-अज्ञात*
*सरळ मार्ग सोडूनी माणसा,*
*काटया कुटयाने जाऊ नको*
*ज्या संगतीने दुर्गुण वाढे,*
*संगत त्याची धरू नको,*
*संसारामध्ये गुंग होऊनी,*
*भोग विलासी बनू नको*
*नर देहामध्ये येऊनी प्राण्या,*
*प्रभु स्मरणाला विसरू नको*
*कर्ज कुणाचे बडवू नको रे,*
*कधी रिकामा बसू नको*
*च्या च्या म्या म्या करुनी माणसा*
*घरामध्ये तू घुसू नको*
*कमावण्याची आली वेळ तरी,*
*चुलीपासी तू धसू नको*
*व्यापारामध्ये लोभ करुनी*
*भेळ भेसळी करू नको*
*माप तोलता आणि नापता,*
*कमी कुणाला देऊ नको*
*न्याय नितीने मिळवी पैका,*
*अनितीने तू कमवू नको*
*श्रीमंतीची आली वेळ तरी*
*भलते सलते बोलू नको*
*राजकारणी मिळवून सत्ता*
*अन्याय कुणावर करू नको*
*दहा दिवसात ना जाईल सत्ता*
*घमंडीत तू राहू नको*
*सहकारामध्ये प्रवेश करुनी,*
*स्वाहा:कार तू करू नको*
*लाच खाऊनी भल्या माणसा,*
*भ्रष्टाचार तू करू नको*
*जन सेवेच्या गप्पा मारुनी,*
*लोकांना तू भुलवू नको*
*देशहिताच्या नावाखाली*
*स्वार्थ आपुला साधू नको*
*आई-बापांना तुच्छ समजुनी*
*अपमानास्पद बोलू नको*
*बोल तयाचे तुझ्या हिताचे,*
*झिडकारून तू लाऊ नको*
*बालपणी जे कष्ट सोसिले,*
*जाणीव त्याची विसरू नको*
*निंदा नालस्ती करु नको रे,*
*मने तयांची दुखवू नको*
*आई-बापाशी कपट ठेवूनी,*
*भलती कामे करु नको*
*खोटे बोलून जरी केले तरी,*
*धोका खाशील विसरू नको*
*आई-बाप हे दैवत समजून*
*वंदन करण्या लाजू नको*
*आशीर्वाद घेण्यासाठी,*
*शरम कुणाची धरू नको*
*पर नारी या माता भगिनी,*
*पाप वासना धरू नको*
*वेश्येला तू जवळ बसवूनी,*
*पतीव्रतेला छळू नको*
*धर्मादायाचे पैसे खाऊनी*
*कडक इस्तरी मिरवू नको*
*पैसे खाईल भले न होईल*
*शाप कुणाचे घेऊ नको नको*
*विद्यार्थ्या❗ गुरुजनांना*
*कमी प्रतीने लेखू नको*
*विद्या शिकवून मनुष्य बनविली*
*शाप कुणाचे घेऊ नको*
*आपण ज्ञानी झालो म्हणूनी*
*दुस-याला तू हिणवू नको*
*एकाहुनी चढ एक जगामध्ये,*
*गर्व मनामध्ये करू नको*
*अंगी नम्रता सदा असावी,*
*कोणा संगे भांडू नको*
*चोरी कुणाची करू नको,*
*अबला दुःखी करू नको*
*बुवाबाजीचे नादी लागुनी*
*उधळपट्टी तू करु नको*
*पैसे गमवून मूर्खपणाचा*
*शिक्का मारुन घेऊ नको*
*दुर्जनाला तू जवळ बसवुनी*
*भल्यांना धक्के मारू नको*
*सत्पुरुषाची संगत धरण्या*
*मनामध्ये तू शरमू नको*
*चहाडी चुगली करुनी माणसा,*
*फूट कुणामध्ये पाडू नको*
*एकमेंकामध्ये तंटे लावूनी*
*गंमत त्यांची करू नको*
*शत्रु बरा परंतु,*
*कपटी मित्र करू नको*
*विश्वासाला अपात्र जो नर*
*कधी भरवसा ठेऊ नको*
*न्यायासनावर बसुनी माणसा,*
*खोटा न्याय तू देऊ नको*
*नौकरी कुणाची असो*
*परंतू सत्य बोलणे सोडू नको*
*अपराध कुणाचा नसतांना ही,*
*खोटा आरोप लाऊ नको*
*द्वेष बुध्दीने एखाद्याची*
*बदनामी तू करू नको*
*सट्टा बेटींग, जुगार, पत्ते,*
*मटक्याचा खेळ खेळू नको*
*मद्यपान व मांसाहार तू*
*कधीही सेवन करू नको*
*दादागिरी करूनी तू माणसा*
*धमक्या कुणाला देऊ नको*
*विश्वासाचा घात करुनी*
*गळा कुणाचा कापू नको*
*असली हि-यास नकली म्हणसी,*
*नकलीला तू भुलू नको*
*ख-या साधुची निंदा करुनी*
*भोंंदुला तू वंदू नको*
*हे मी केले , ते मी केले.*
*गर्वाने तू बोलू नको*
*क्षणार्धामध्ये उलथून पाडेल*
*कर्मलीला तू विसरू नको*
*कलीयुगामध्ये अवतरले हे*
*मानव त्यांना कमी लेखू नको*
*मोक्ष पहायला जाण्यासाठी,*
*दर्शन घेण्या लाजू नको*
*प्रचारक,समर्थक :-*
,*?विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच,?*
*?विघ्नहर नेमिनाथ गौशाला,?*
*?️विघ्नहर विश्व सत्पात्र सहायता ट्रस्ट,?*
*?️?विघ्नहर जैन बैंक?* |
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2026-02-18 19:43:17 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*न था टोडरमल का सुदान*
*अनुकरण मत करो आदान*
*किया वह तो था ना+दान*
*उससे बिगड़ सकता है खानदान*
*अतः जैनी हो जाओ सावधान*
*जैनत्व में कुदान करो मत प्रावधान*
*टोडरमल ने देश रक्षार्थ नहीं दान दिया बल्कि किसी समाज विशेष के शहीदों की कौड़ी के दाम की जमीन लेने लगभग१८०७ में* *४०० करोड़ अब के हिसाब से कैलक्यूलेटर फेल हो जाएगा।उतना दिया काश शिखरजी गिरनार जी जैसे पूरे भारत के जैन तीर्थ खरीदने पर भी पैसे बचते पर क्या मजबूरी या स्वार्थ था कुदान के पीछे वे जाने पर वह प्रशंसनीय अनुकरणीय भी नहीं है। क्यों कि इतना पैसा* *मुस्लिम को मिला तो बकरीद पर कितने सालों तक कितने जीव मारे होंगे। कितनों को पैसों के बलबूते पर मरो या मुसलमान बनो धर्मांतरण करवाया होंगा और कितने जैन मन्दिरों पर कब्जा किया होगा या गिराये होंगे उसका सारा पाप टोडरमल के खाते में गया होगा जो किस दुर्गति में ले गया होगा भगवान जाने।ये* *मोक्षमार्गप्रकाशक के ज्ञानी लेखक नहीं थे वे ऐसा गलत कुदान कर ही नहीं सकते।* *उसका ताजा गलती का उदाहरण नुकसानकारी गलत परंपरा का कि ग्वालियर की पंचायत उनेके द्वारा गयी*
*बाकायदा प्रेम सौहार्द के नाम पर सिक्खों को जैन मन्दिर आकर उपकार मानना चाहिए था उल्टा उधर जाकर जय जिनेंद्र या णमोकार न बोलकर वाहे.... बोले जैनाध्यक्ष तथा भगवान महावीर स्वामीजी की और वे जिन को मानते उनकी फोटो समकक्ष बैठी छापी तो क्या तू जिनेंद्र के बराबर के है❓और जैनी क्यों गये उधर सवाल यह है गलत कमजोर अज्ञानता का झूठा समझौता इससे क्या है होता ❓?️जैनी जगता हुआ सोता जैन धर्म के कम हो रहे हैं स्रोता राम नाम तो बोल लेता है तोता जैन धर्म नहीं सरोता पर मिला है उसे भी न खोता मत मानो बैल खेत में जोता जैनत्व वही रहे जो था और को मत देओ न्यौता जिससे भवसागर में खाना पड़े गोता जो कर्मों का न धोता संस्कार क्या लेंगे नाती पोता दादा नाना मामा ही गलत बीज बोता तो कर्म भार ही है ढो़ता फिर धर्म के नाम पर है रोता जब कि जैन धर्म श्रेष्ठ है इकलौता* |
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2026-02-18 19:43:15 |
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