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Message
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtu.be/n5RlvJSqgbs?si=BetdG252w7cx92m2" target="_blank">https://youtu.be/n5RlvJSqgbs?si=BetdG252w7cx92m2</a>
*चीनी जैसे जहर को अपने दैनिक जीवन से हटाओ और शुद्ध देसी खांड और गुड़ को अपनाओ।*
शिवाली जैन - 9643517474
अमित जैन - 9136679988
*शाकाहारी सावधान❗ खतरा ❗होशियार❗*
*कहीं शक्कर की मिठास के चक्कर में अहिंसक धर्म तो नहीं खो रहे हो ❓ अण्डे ,हड्डी का उपयोग से शक्कर मतलब मांसाहार❗❗❗*
*शक्कर छोड़े और शुध्द गुड़ का ही सेवन करना अब एवन रहेगा।*
*विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच।* |
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2026-02-18 20:02:09 |
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| 9296 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*बस अनावश्यक से बाहर निकले*
*गजरथ चले तो वे ही मुस्लिम पले*
*जैन संत समाधि सागर*
*" विद्यासागर दास"*
*गणेशपुर हस्तिनापुर*
*२४/१०/२०२५*
*बस अनावश्यक से बाहर निकले*
*गजरथ चले तो वे ही मुस्लिम पले*
*सर तन से जुदा के तो नारे खले*
*खाकर अपना, मारे उतरे न गले*
*नानी याद आए सर तन जुदा घले*
*अहिंसक मूर्ति पूजक से क्यों जले*
*अनर्थदण्ड न हो ख्याति कम भले*
*स्वार्थ ख्याति नुकसान कम फले*
*भतीजा नतीजा न दे चाचा हाथ मले*
*कल्याण सभी करें जैनशासन तले*
*तेरा मेरा छोड़े कूट,राजनीति दलें*
*किसानवत् धर्मात्मा खुश देख फसलें*
*पर समर्पण निःस्वार्थ हो पहले*
*मोमिनों काफिर मार के पसारे जाले*
*१५ मिनट पुलिस अलग करें साले*
*सोचते वे कि मंदिर में लगे ताले*
*ऊपर कहे मारो अहिंसक टकले*
*जैसे बेकार हो अहिंसक चुटकले*
*मंदिर तीर्थ बने और मुस्लिम बने*
*रोजगार मिला शराब पी मुर्गे कटे*
*वर्षीतप में तो लगा कि कर्म कटे*
*मुस्लिम बग्गी करने से बकरे कटे*
*संत भगवंत सदुपदेश के लिए डटे*
*पर भक्त कुपरंपरा से कदा न हटे*
*उनको लगता सदुपदेश भी झूठे*
*तभी तो आज्ञानुसार नहीं जुटे*
*संत सज्जन मनाए तो वे रूठे*
*ना टोके तो सामाजिकता छूटे*
*कुप्रथावाले सुप्रथा को कहें कलुटे*
*सुप्रथावाले सज्जन तो हमें ना कुटे*
*चाहे तो हमारे साथ न बैठे उठे*
*अच्छाई पास रखें हमें क्यों सुटे*
*गर दुर्जन हम तो सज्जन न घुटे*
*हमारी है एकता ध्यान है न टूटे*
*पता है वर्चस्व गया आपस में फुटे*
*एकता समूह में अच्छे दिखे भुट्टे*
*मुस्लिम पले और जैनी गये छले*
*गोरे हुए काले जैनी तो रहे निराले*
*काले थे वे बढे़ ,काले जैनी निकाले*
*अच्छे अच्छे का तो फल पाले*
*पाप हुआ पाले, उसको क्यों टाले*
*वीर की तस्वीर को हिये में जडा़ले*
*नशा,अंधश्रध्दा कुदान तो छुड़ा ले*
*अंतरात्मा परमात्मा बनाने जगा ले*
*सत्पात्र के घरों में तो लगे ताले*
*पुण्य तो मेरा और पाप होगा तेरा*
*हिसाब में तो दिख रहा अंधेरा*
*कृत ना हो पर अनुमोदन भतेरा*
*सबका हिसाब बिन न होगा सबेरा*
*पाप-पुण्य खतम बिन मोक्ष न बसेरा*
*जिनवाणी की जो न माने वह बहेरा*
*समाज बर्बाद तो क्या जाए मेरा*
*न गुरू डरे अनर्थ दण्ड से न चेरा*
*पर पापारंभ के कर्म ने जब घेरा*
*पलायन करता है तब डरकर लुटेरा*
*मुम्बई देहली या रहो फिर फुटेरा*
*सगा हो या रिश्ते में भाई फुफेरा*
*संसार का चलता रहेगा सदा फेरा*
*मोक्ष न हो तबतक पड़ा रहेगा डेरा*
*जिंदगी मे बनों एक बार सच्चा चेरा*
*निःस्वार्थ भक्ति से उजागर हो चेहरा*
*वे तो पनपेंगे करेंगे अवश्य खतना*
*पर जनेऊ पहनो कहीं रहो या सतना*
*अंतरात्मा से बात को लिखो खत ना*
*शाकाहारी बने रहो मांस से हटना*
*जीवहिंसा से सुख मिले हैं सपना*
*अहिंसा परोपकार ही है धर्म अपना*
*णमोकार ही प्राण इसी को है जपना*
*जिनवाणी का प्रचार चाहिए छपना*
*मोक्षपाना सरल नहीं पड़ता है तपना*
*सभी को अंत में पडता है दफना*
*बस अनावश्यक से बाहर निकले*
*गजरथ चले तो वे ही मुस्लिम पले* |
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2026-02-18 20:02:08 |
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| 9295 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*०३/०९/२०२५*
*प्रति,*
*विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच*
*विघ्नहर विश्व सत्पात्र सहायता ट्रस्ट*
*विघ्नहर जैन बैंक*
*सादर जय जिनेन्द्र*
*विषय:- आर्थिक रूपेण सहायता अहमिच्छामि*
*सर्वासु भाषासु संस्कृत भाषा ( देव वाणी) प्राचीनतमा प्रचलनं अस्ति ।अहम् आंग्ल भाषा वदितुं लिखितुम् अक्षम: ।तस्मात् मम गौरव संस्कृत भाषायाम् आवेदनं,निवेदनं करोम्यहं।*
*श्रीमान महोदय जम्बूद्वीपे, भरत क्षेत्रे भारत देशे मध्य प्रदेश राज्ये विभिन्न स्थाने दिगंबर जैन सिध्द अतिशय क्षेत्र सुशोभित: । अस्य मध्ये मम अक्षम परिवारस्य लघु निवास: अस्ति।अस्मिन् शरीरे पाप कर्मोदयेन कैंसर व्याधि विकार आगतः।अस्य प्रतिकारे अर्बुद उपचार: (कीमो , केमोथेरेपि )सूच्य औषध: ग्रहितुम् इच्छामि।परंतु विगत काले ,वर्तमान काले अपि भयंकर: विशाल आर्थिक रूप्यकस्य संकटम् प्रकटयति।तस्मात् कारणे रूजायां प्रतिकार रसायन चिकित्सा ( दवा उपचार ) कर्तुं न शक्नोमि । मम द्वे सुकन्ये अस्ति। मम समीपे वार्धक्य काले मातृ-अस्वस्थ पितृ छाया विद्यमान अस्ति। भारतीय संस्कृति अनुसारेण सेवा सुश्रुषा पुण्य कार्य मम कर्तव्य: अस्ति। किंतु अहम् कुपुत्र सम अक्षम: । मम विक्रम शाला लघु व्यापार अस्ति।द्वादश माहेन सक्रिय नास्ति।दारिद्र्य कारणे मम समीपे धन निवेश स्वर्ण रजत भण्डार: नास्ति। अनेक लक्ष रूप्यकम् व्याजेन कर्ज भारमपि अस्ति।अहं किंकर्तव्य मूढ़: किम् करोमि ❓मम आयु षट्त्रिंशति , सुकन्या अष्ट वर्ष तथा अष्ट माह अस्ति।शैक्षणिक काले आर्थिक संकट आगच्छति।तस्मात् कारणे अहम् सादर विनयेन निवेदनं कर्तुं इच्छामि।*
*किंम् परोपकारी सज्जन: त्वया द्वारे मम जैन श्रावकस्य संकट मुक्त शक्य: संभव: अस्ति❓अहमपि भविष्यकाले कुदानम् न करोमि।सत्पात्रदानाय सक्षम: भवितुम् इच्छामि। त्वया उपकार प्रपरश्व जीवने विस्मृतं कर्तुं साहसं न करोमि।संत भगवंत कृपा प्रसादेन पूर्व पुण्योदयेन अहम् मम परिवार: अभक्ष भक्षण मुक्त ,नशा मुक्त,अंधश्रध्दा मुक्त अस्ति।धन क्षेत्रे अक्षम: किन्तु धर्मध्यान क्षेत्रे अहम् संतुष्ट सक्षमः ।बैंक अधिकोषे मम धनं निवेश: नास्ति किंतु भावी पर्याय भव कारणे मम सुरक्षित निवेशः ( फिक्स डिपॉजिट ) धर्म अधिकोषे ( वित्तकोषे धर्म: बैंके ) अस्ति।*
*दर्शनं देवदेवस्य दर्शनम् पाप नाशनम्,*
*दर्शनम् स्वर्ग सोपानम् दर्शनम् मोक्ष साधनम्।*
*सूक्ति आवश्यक मम जीवने चरितार्थ अस्ति। मम आपणः (दुकानस्य )चतुः सहस्र रूप्यकम् व्यय: अस्ति।आवकः अल्प अस्ति व्यय अधिक रूपेण अस्ति।संकट प्रभावक: प्रकटयति।तस्मात् कारणे चिंतित दशा दिशा चित्त भ्रमित करोति। षट् सदस्य परिवारस्य दशा अत्र तथ्य सर्वत्र अस्त-व्यस्त अस्ति।जिनेंद्र भगवंत कृपा प्रसादेन त्वं मम लभसि। मम उपकार कर्तुं त्वं सक्षम: अस्ति। चतुःअशीति: योनि मध्ये दुर्लभेन प्राप्त दिगंबर जैन धर्मांतर तथा भारत: पवित्र भूमि स्थानांतर: कर्तुं न इच्छामि। धर्मध्यान कर्तुं इच्छामि।संत भगवंत आहारदान,सेवा नमोस्तु कर्तुं सक्षम: तव प्रसादेन शक्य अस्ति।किं बहुना❗इदं विस्तृत सविस्तर: समाचार: । विघ्नहर विश्व सत्पात्र सहायता ट्रस्ट न्यासेन त्वं परोपकार क्षेत्रे सक्षम: अस्ति। संकट काले मम ज्ञानावरण कर्मोदयेन अल्प श्रुतम् अस्ति त्रुटि संभावित: अस्ति अस्य कारणे क्षमा दानम् तव महानता अस्ति।*
*भवदीय:- मम अल्प परिचय प्रकट कर्तुं इच्छामि:-?️??वीतराग बलभद्र दिगंबर श्रीराम, मानवाकार कामदेव: दिगंबर श्री हनुमान , श्री महावीर दिगंबर जिनेन्द्र भक्त: अहम्। संकट काले स्वेच्छेन निःस्वार्थ भावेन परमोपकारी मम सर्वेषाम् ???✌️जय जिनेंद्र अभिवादन:?⛱️??* |
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2026-02-18 20:02:06 |
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| 9294 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*करते तो हैं मंगलाचरण का उच्चारण*
*दुर्लभ मंगल आचरण, उच्च आचरण*
*संत भगवंत के रहते हैं जो करीब*
*वे भी कैसे हो सकते हैं जी गरीब*
*चिंतक :- जैन संत समाधिसागर*
*" विद्यासागर दास "*
*गणेशपुर हस्तिनापुर*
*३०/०९/२०२५*
*गरीब की मदद अवश्य करिएगा।पर सुपात्रता हो तभी ना अन्यथा जैसे सांप को मीठा डला दूध पिलाओ तो भी जहर ही उगलेगा। पत्थर अपात्र है फसल के लिए बीज भी नष्ट होगा।काली मिट्टी बीज के लिए सुपात्र है ।जो हजार गुना फल फसल देगी। बंदर को सब्जी बनाने छुरी देने पर सब्जी नहीं स्वपर का ही घात कर लेगा।वैसे अपात्र के पास शराब आदि व्यसन के लिए नगद पैसे होते हैं पर राशन , पढाई,दवाई के लिए उधार या मोदी भरोसे क्या होगा इसमें उदार होकर सुधार ❓जैसे लाभार्थी ही नहीं पूरा परिवार बीड़ी गुटखा, तंबाखू, अण्डे,मांस,शराब,शहद जुआ लाॅटरी ,चमड़े से बनी वस्तु जूते चप्पल,पर्स बेल्ट आदि का त्याग करें।ओम् नमः कहकर।अन्यथा कुछ कहते हमने शराब पी नहीं तो त्याग की शपथ क्यों लेवे❓जैसे बैंक में पैसे रखने पर ही व्याज मिलता है जेब में रखकर खर्च ना करें तो भी व्याज नहीं मिलता ।जेब में रखने से नोट रूपये जल सकते हैं।कट सकते हैं गीले हो सकते हैं उड़ सकते हैं ,चोरी हो सकते हैं खर्च हो सकते हैं नोट बंदी से खत्म हो सकते हैं ।इसलिए न रहे बांस न बजे बांसुरी बैंक में जमा करने से आम के आम गुठली के दाम।पैसा सुरक्षित व्याज का मुनाफा।वैसे धर्म रूपी बैंक में बुराई नशा व्यसन आदि त्याग की शपथ लेने से ही पुण्य रूपी व्याज मिलता है।*
*पैसे का व्याज खुद को परिवार को इसी जन्म में मिलेगा पर धर्म बैंक का पुण्य रूपी व्याज खुद को ही इस भव पर भवों में भी साथ जाएगा।लौकिक बैंक फेल हो सकती है ।पर धार्मिक बैंक की गैरन्टी है कि कभी भी त्रिकाल में न फेल हुयी,न हो रही है ,न होगी।पुण्य रूपी व्याज या मूल मोक्ष जानेतक कोई छीन भी नहीं सकता है ।आइएगा जो अभक्ष वस्तु लेते हो या न लेते हो तो भी त्याग करें बल्कि जो खाने में दोषास्पद नहीं है फिर भी अधिक संख्या में हो तो उसकी मर्यादा सीमा बनाने से उस दोष से बच जाते हैं ।केवल खाने संबंधी ही नहीं आने जाने संबंधी दोषों से भी बचने जैसे अमेरिका आदि विदेश गये नहीं और जाने का अवसर भी आएगा नहीं तो उसका विदेश या दूसरे राज्य आदि जाने का भी त्याग करने से उधर से संबंधित पापों से बचा जा सकता है।*
*जी हाॅं जिधर जाने की संभावना है उधर का कुछ साल माह दिन का भी त्याग संभव है।*
*पुण्य कहीं कपड़े,किराना, कबाडी आदि की दुकान , मेडिकल ,दूध डेअरी , स्कूल , अस्पताल,शासन के कार्यालय , प्रशासन के पुलिस थाने में ,साईबर कैफ,साहूकार के पास नहीं मिलता बल्कि घर में दिल में ही त्याग,दान व्रत,दीक्षा,संयम की भावना से मिलता है जी। आए धर्म की ओर और ग़रीबी , विकलांगता,अक्षमता,अल्पायु, दरिद्रता नपुंसकता , अस्वस्थता , नरकायु,तिर्यंच पशु आयु से बचने का एक ही उपाय अहिंसा धर्म की शरण।होगा निश्चित ही सुमरण , नहीं होगा अपहरण बस शुद्ध हो अंतः करण,साथ हो सदाचरण ,फिर पुजते हैं चरण वे औरों को बनते हैं तारण तरण औरों की मदद करके करवाते हैं उदरभरण बनिए ऐसा उदाहरण समझो सुधर गया मरण ,चाहे घरपर रहो या रण । स्वस्थ होने से न खाना पडेगा चूरण बल्कि मिले मिठाई पूरण।जीरण शीरण घरपर लगते द्वारपर तोरण।धोरण हो बस धर्म धारण।मंगलाचरण का उच्चारण सभी करते पर हो मंगल आचरण और उच्च आचरण स्वपर कल्याण से बन जाता है महापुरूष का संस्मरण। धर्म से छूटता है संसार का संचरण ,संसरण*
*गरीब परिवार आर्थिक सहायता ग्रुप की जानकारी मिलने के उपलक्ष्य में लिखा गया लघु आलेख। गणेशपुर हस्तिनापुर जैन मंदिर ३०/०९/२०२५ ।भूल चूक और विषय छूटा हो तो क्षमा करिएगा।*
*प्रचारक:- ?⛱️*
*?️विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच?*
*?विघ्नहर विश्व सत्पात्र सहायता ट्रस्ट?*
*?विघ्नहर जैन बैंक⛱️* |
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2026-02-18 20:02:04 |
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| 9293 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*पर दुर्भाग्य है जैन समाज का कि प्रतिभास्थली वाले कारोपानी छत्तीसगढ़ में आदिवासी जो बाबरी मस्जिद जैसे शिखरजी को उडाना चाहते हैं , बलि प्रथा रोकनेवाले जैनी कौन होते हैं तथा नंगे संतों को भी देख लेंगे कथक,कुपात्रों की आदिवासी बालिकाओं को निःशुल्क पढ़ाया जाना खेद के साथ विरोध,निषेध करते है।*
*क्योंकि जैन कुल में जन्म लेकर जन्मसे शाकाहारी जैन बालिकाओं से फीस ली जाती है या बीस कम देने पर निकाला जाता है यह अशोभनीय अप्रशंसनीय काम प्रतिभास्थली का चर्चा का विषय बना है आखिर इसका समाधान कौन कब देखा या केवल ख्याति आदि के लिए जिनवाणी छोड़ मनमानी चलेगी❓?️❌✖️?* |
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2026-02-18 20:02:02 |
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| 9292 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*धक्का दिया, नहीं दिया धोका*
*पक्का किया, छुड़ाते कोला कोका*
*जैन संत समाधि सागर*
*" विद्यासागर दास "*
*गणेशपुर हस्तिनापुर*
*२९/०८/२०२५*
*उत्तम मार्दव धर्म*
*गुरूजी विद्यासागर जी ने तो*
*धक्का दिया, नहीं दिया धोका*
*पक्का किया, छुड़ाते कोलाकोका*
*असंयमी होते ,गर न देते वे धक्का*
*बर्गर खाते होते,न खाते मक्का*
*हड़ताल करते जाम चक्का*
*बोला पालो आवश्यक छक्का*
*अभक्ष न खाओ नूडल्स हक्का*
*शाकाहार है चावल का भक्का*
*घर का खाना देख क्यों भभका*
*मात-पिता के समक्ष गर भड़का*
*तो आज्ञाकारी विनयी न लड़का*
*संयमी सेना देख दुनिया हुयी हक्का*
*संयमी बने जो पी सकते थे हुक्का*
*महाराज हुए जो हो सकते थे कक्का*
*वतन रक्षार्थ लढी़ रानी अबक्का*
*चेतन रक्षार्थ मुनि बनाए न कक्का*
*अणु से महाव्रती बना बढ़ाई कक्षा*
*खुद ली औरों को दिलाई दीक्षा*
*जो आजीविका को चलाते रिक्षा*
*पाई पाई को भाई भाई मारते बुक्का*
*तेरा क्या बिगाड़ा क्यों इधर ढुक्का*
*खाने को न होता ढंग का सुक्खा*
*अपशब्द औ कहते कहीं का लुख्खा*
*पर गुरूजी ने संयमी बना लक्खा*
*मातपिता समाज का मान रक्खा*
*तब दिया धक्का,पर न दिया धोखा*
*महाव्रत से कलश नहीं, मिला खोका*
*बुरा न मानो गुरू मातपिता ने टोका*
*बचपन में क्यों मुझे था ठोका*
*अगर न होता ठोका और रोका*
*असंयमी पने में होता भौंका*
*संयमी बनाया तो हुआ चौका*
*परिवार अडो़सी पडो़सी देख चौंका*
*संयमी बनाना मजाक नहीं हल्का*
*रूपये एक दो का नहीं है सौका*
*तभी तो गुरूजी ने दे दिया मौका*
*मुम्बई देहली या हो गांव मौ का*
*हेल्दी बने हल्दी डली खाओ जौ का*
*मोक्ष जाना हो तो काम करो चोखा*
*बिन धुला नहीं पर कहा धो खा*
*ऐसा कहा तो नहीं हुआ धोखा*
*चावल को गुजराती में कहते चोखा*
*स्वादिष्ट बनता जब हो छोंका*
*शाकाहार ही है संसार पार का नौका*
*महत्त्व है जब लगे धर्म लौ का*
*कायोत्सर्ग करे महत्त्व है मंत्र नौ का*
*सामायिक हो प्रात: जब उदय पौ का*
*कुत्ता बिल्ली नहीं महत्त्व है गौ का*
*सभ्यता है बड़ों को जवाब हौ का*
*तबीयत की पूछे तब महत्त्व हौ का*
*पिता गुरू के अभाव में दाऊ का*
*गुरूजी विद्यासागर जी ने तो*
*धक्का दिया, नहीं दिया धोका*
*पक्का किया, छुड़ाते कोलाकोका*
*ब्रह्मचारियों को दिया धक्का*
*अनेक मुनि बना कर किया पक्का*
*साथ में अनेकों को साधनार्थ रक्खा*
*बचे रहे एलक क्षुल्लक इक्का दुक्का*
*कविता पूरी करने लग गया तुक्का*
*वक्ता बना दिए जो रहते थे मुक्का*
*बुरा छुडाया भले खाओ मुनक्का*
*बालिकाऍं भी बनाई दीदी अक्का*
*बस भावना थी भला हो सबका*
*चाहे धीरे या जोर से देना पड़े धक्का*
*पर पतन का कर न सके टोना टूटका*
*दुनिया लाभ उठाती आपसी फूटका*
*दिखाना है अब दम एकजुट का*
*ताकि असर न हो किसी के मूट का*
*संयमित होंगे प्रभाव होगा म्यूट का*
*धर्म चर्चार्थ उपयोग करो छूट का*
*पाप है भीड़ में लाभ उठाना लूट का*
*सफल होना पाप, सहारा ले झूठ का*
*भूखे रहो उपयोग ना हो बिस्कुट का*
*मौज न करो नाम लेकर चित्रकूट का*
*जैसे चौके में क्या काम है सूट का*
*कहीं उपयोग न हो चमड़े के बूट का*
*तभी गुरूजी विद्यासागर जी ने*
*धक्का दिया, नहीं दिया धोका*
*पक्का किया, छुड़ाते कोलाकोका* |
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2026-02-18 20:02:00 |
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| 9291 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*?सुदान का संविधान?*
*जैन संत समाधि सागर*
*" विद्या सागर दास "*
*गणेशपुर हस्तिनापुर*
*०१/०९/२०२५*
*त्याग में पूरा देते करते आत्म संधान*
*दान में थोड़ा देते शेष बचे सन्निधान*
*त्याग दानधर्म ही हो अपना परिधान*
*सभी को अच्छा तो लगता है वरदान*
*कौन कब बनना चाहते हैं वर्धमान*
*जीवन में बस हो ईश्वर का प्रणिधान*
*सभी सक्षम करे सत्पात्र प्रति दान*
*?सुनिएगा खोलकर दुकान?*
*?किसे देने से हो सुदान✅*
*?किसे देने से हो कुदान❌*
*?जिनवाणी से ही सुजान?*
*?️अज्ञानता ही है एक तूफान?*
*यह भारत है न कि विदेश भूटान*
*सुदान दे रहे हैं न कि भूदान*
*संभल कर देना, न है खदान*
*भूलकर भी मत बनना नादान*
*अपात्र को दिया समझो ना+दान*
*अहिंसक को ही हो प्रदान*
*शाकाहारी लेना अच्छा आदान*
*सोच समझ करते कन्यादान*
*जैसे समझदारी से देते फलदान*
*कहिए भव्यात्मन क्या है रूझान*
*बनाना हो गर भारत धर्मप्रधान*
*तो जीवन में बनिए सावधान*
*इसे ही कहेंगे फिर सभी धर्मध्यान*
*अन्यथा होगा आर्त,रौद्र ध्यान*
*क्षेत्र का ध्यान और खेत का धान*
*तन चेतन बनेंगे पहलवान*
*सुदान का यही समझो संविधान*
*अन्यथा कितने भी करो विधान*
*या फिर कर लो भतेरे निदान*
*न हुआ और न होगा कल्याण*
*देहली या रहो मुम्बई के कल्याण*
*भूलो मत नरक निगोद ठिकाण*
*न होती उधर कोई जान पहचान*
*समझदार बनाइएगा अपनी संतान*
*तभी समझो घर में पधारे संत+ आन*
*अन्यथा घर कै समझो एक कूडा़दान*
*भारतीय सिध्दक्षेत्र विशाल मैदान*
*कषाय मान का करो जी मैं + दान*
*यह भारत है न कि विदेश सूडान*
*स्वर्ग मोक्ष हेतु होती है ६०८ उड़ान*
*अकेले का नहीं होता स्वपर कल्याण*
*इसलिए भारत ही है हिंदूस्थान*
*विश्व में सहिष्णु उदार है महान*
*पुरस्कारित होते नमो मंत्रीप्रधान*
*देश विश्व में मिलता है सम्मान*
*हर भारतीय के लिए है स्वाभिमान*
*लौकिक, पारलौकिक से भरा विज्ञान*
*इसलिए भारत में ही होता केवलज्ञान*
*अब स्वर्ग, सतयुग में मोक्ष उड़े विमान*
*मांसाहारी पशु जैसे कुत्ता बिल्ली आदि को पालना जैन धर्मानुसार निषेध है इसका मतलब उसे मारे ऐसा भी नहीं।*
*गाय की सेवा नहीं रक्षा करनी चाहिए।रक्षा भी जीवपशु समझकर , पूजनीय या ३३ करोड़ देवता समझकर के नहीं।आरती उतारना ,नमन करना,जय बोलना ,उसके स्पर्श से मुक्ति मिलती है मानना अंधश्रध्दा यहां मिथ्यात्व है।जी हाॅं जैन धर्म जैन साधु-साध्वी की रक्षा साधर्मी सत्पात्र जैन की रक्षा से ही संभव है ।कुछ लोग इसको बन्द या कम गौण कर रहे हैं और केवल पशु रक्षा की ही बात कर रहे हैं।जो कि ठीक नहीं है।जैन जन संख्या कम हो गयी,सुरक्षित न रही या बढ़ी नहीं तो जैनी का अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा।आ रहा है इसलिए जैनी साधर्मी की रक्षा हरदम हर प्रकार से चारों प्रकार के दान से करनी चाहिए।*
*पर उसमें भी चार प्रकार का दान चार संघ को मतलब मुनि आर्यिका, श्रावक, श्राविका को आहार, औषध, अभय,उपकरण दान देकर पुण्यार्जन के साथ, पापक्षय, पाप का संवर करना चाहिए।*
*कहने का तात्पर्य अस्पताल, औषधालय, स्कूल,नेत्र ,जाॅंच शिविर लगाकर अपात्र कुपात्रों को औषध आदि देने का मतलब जैन सत्पात्र की णमोकार महामंत्र की उपेक्षा और हिंसक ,अंधश्रध्दा मिथ्यात्व को बढ़ावा देना है जो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष जैनत्व में बांधा डालते हैं जैसे अनोप मण्डल या शिखरजी में आदिवासी आदि शिखरजी, जैनसंत को उठाने खतम करने की धमकी के साथ बलि की कुप्रथा जीवित रखना चाहते हैं शिखरजी आदि में।फिर भी उनकी मदद करना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।*
*पर्यूषण में जैनी दान देते हैं इसलिए अपात्र कुपात्र दिल्ली आदि के जैन मंदिरों तीर्थों पर कहीं बीमारी के नाम पर तो कहीं पढ़ाई विवाह आदि के नाम पर मदद लेने आते हैं ।जोकि मदद करना ग़लत है।*
*न्यौछावर देना भी ग़लत:- आसाम, मुम्बई देहली आदि के अमीर आदि जैनियों ने ग़लत अंधी दया से मंदिर तीर्थों के माली आदि कर्मचारी को तय जिनेंद्र करके मांगने पर या बिन मांगे बुला बुलाकर न्यौछावर में रूपये कंबल, कपड़े,बर्तन आदि मदद करना पाप वर्धक होने से मंदिर तीर्थ की व्यवस्था बिगाडने जैसा असुरक्षित करने का पापार्जन करने जैसा है।इसलिए न देना ही उचित है। भंडार पेटी,रसीद से ही दान करें न कि आरती के थाली में न ही वेदीपर रखना वेदी के पीछे चिपकाना और न ही चरणों पर या उसके सामने माली पहले से रूपये पैसे रख देता है ताकि भेंड़चाल से सभी डाल सके डालते भी है वह ग़लत है।शिखरजी आदि में भी चरणों पर चावल बादाम किसमिस आदि चढ़ाने से पशुपक्षी की गंदगी बढ़ती है ।अविनय होती है।इसलिए बंद हो।अविवेकी पूर्वक दिया दान सांप को दूध पिलाकर जहर बनाने जैसा या पत्थर पर बीजारोपण करके फसल आना तो दूर बीज भी नष्ट करने जैसा है।*
*रक्तदान के लिए सत्पात्र रक्तदान बैंक बने तो ठीक ।मंदिर के ऊपर आसपास परिसर में कबूतर आदि पक्षी को दाना डालने का मतलब पवित्र स्थान की अपवित्रता बढाने का पाप और एक साथ कबूतरादि पक्षी आने से बिल्ली कुत्ते को हमला करके हत्या करना सहज-सरल हो जाता है इसलिए उस अव्यवस्था से भी हिंसा का ही पाप लगता है जब कि समझते हैं कि हमने पक्षी को खिलाया पाला है। बंदर को भी खिलाने से वहीं पर मंडराते हैं उससे यात्री परेशान हताहत होते देखे गये है।बंदर शाकाहारी पशु है उसे प्रकृति ने ही फल आदि की व्यवस्था बनाई है।*
*पर एक सत्पात्र को दान देना हजार अपात्र कुपात्र को देने से श्रेष्ठ है।कम से इस दशलक्षण से ऐसे सत्पात्र दान की शुरुआत करिएगा भले न देना हो तो न देवे पर अपात्र कुपात्र को तो देना बंद करने रूप ही धर्म करिएगा।*
*जिस दिन से जैनी जैनी को मदद करना चालू करेंगे उस दिन से जैनी बादशाह हो जाएगा कहलाएगा।*
*मांसाहारी पशु जैसे कुत्ता बिल्ली आदि को पालना जैन धर्मानुसार निषेध है इसका मतलब उसे मारे ऐसा भी नहीं।*
*गाय की सेवा नहीं रक्षा करनी चाहिए।रक्षा भी जीवपशु समझकर , पूजनीय या ३३ करोड़ देवता समझकर के नहीं।आरती उतारना ,नमन करना,जय बोलना ,उसके स्पर्श से मुक्ति मिलती है मानना अंधश्रध्दा यहां मिथ्यात्व है।जी हाॅं जैन धर्म जैन साधु-साध्वी की रक्षा साधर्मी सत्पात्र जैन की रक्षा से ही संभव है ।कुछ लोग इसको बन्द या कम गौण कर रहे हैं और केवल पशु रक्षा की ही बात कर रहे हैं।जो कि ठीक नहीं है।जैन जन संख्या कम हो गयी,सुरक्षित न रही या बढ़ी नहीं तो जैनी का अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा।आ रहा है इसलिए जैनी साधर्मी की रक्षा हरदम हर प्रकार से चारों प्रकार के दान से करनी चाहिए।*
*पर उसमें भी चार प्रकार का दान चार संघ को मतलब मुनि आर्यिका, श्रावक, श्राविका को आहार, औषध, अभय,उपकरण दान देकर पुण्यार्जन के साथ, पापक्षय, पाप का संवर करना चाहिए।*
*कहने का तात्पर्य अस्पताल, औषधालय, स्कूल,नेत्र ,जाॅंच शिविर लगाकर अपात्र कुपात्रों को औषध आदि देने का मतलब जैन सत्पात्र की णमोकार महामंत्र की उपेक्षा और हिंसक ,अंधश्रध्दा मिथ्यात्व को बढ़ावा देना है जो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष जैनत्व में बांधा डालते हैं जैसे अनोप मण्डल या शिखरजी में आदिवासी आदि शिखरजी, जैनसंत को उठाने खतम करने की धमकी के साथ बलि की कुप्रथा जीवित रखना चाहते हैं शिखरजी आदि में।फिर भी उनकी मदद करना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।*
*पर्यूषण में जैनी दान देते हैं इसलिए अपात्र कुपात्र दिल्ली आदि के जैन मंदिरों तीर्थों पर कहीं बीमारी के नाम पर तो कहीं पढ़ाई विवाह आदि के नाम पर मदद लेने आते हैं ।जोकि मदद करना ग़लत है।*
*न्यौछावर देना भी ग़लत:- आसाम, मुम्बई देहली आदि के अमीर आदि जैनियों ने ग़लत अंधी दया से मंदिर तीर्थों के माली आदि कर्मचारी को तय जिनेंद्र करके मांगने पर या बिन मांगे बुला बुलाकर न्यौछावर में रूपये कंबल, कपड़े,बर्तन आदि मदद करना पाप वर्धक होने से मंदिर तीर्थ की व्यवस्था बिगाडने जैसा असुरक्षित करने का पापार्जन करने जैसा है।इसलिए न देना ही उचित है। भंडार पेटी,रसीद से ही दान करें न कि आरती के थाली में न ही वेदीपर रखना वेदी के पीछे चिपकाना और न ही चरणों पर या उसके सामने माली पहले से रूपये पैसे रख देता है ताकि भेंड़चाल से सभी डाल सके डालते भी है वह ग़लत है।शिखरजी आदि में भी चरणों पर चावल बादाम किसमिस आदि चढ़ाने से पशुपक्षी की गंदगी बढ़ती है ।अविनय होती है।इसलिए बंद हो।अविवेकी पूर्वक दिया दान सांप को दूध पिलाकर जहर बनाने जैसा या पत्थर पर बीजारोपण करके फसल आना तो दूर बीज भी नष्ट करने जैसा है।*
*रक्तदान के लिए सत्पात्र रक्तदान बैंक बने तो ठीक ।मंदिर के ऊपर आसपास परिसर में कबूतर आदि पक्षी को दाना डालने का मतलब पवित्र स्थान की अपवित्रता बढाने का पाप और एक साथ कबूतरादि पक्षी आने से बिल्ली कुत्ते को हमला करके हत्या करना सहज-सरल हो जाता है इसलिए उस अव्यवस्था से भी हिंसा का ही पाप लगता है जब कि समझते हैं कि हमने पक्षी को खिलाया पाला है। बंदर को भी खिलाने से वहीं पर मंडराते हैं उससे यात्री परेशान हताहत होते देखे गये है।बंदर शाकाहारी पशु है उसे प्रकृति ने ही फल आदि की व्यवस्था बनाई है।*
*पर एक सत्पात्र को दान देना हजार अपात्र कुपात्र को देने से श्रेष्ठ है।कम से इस दशलक्षण से ऐसे सत्पात्र दान की शुरुआत करिएगा भले न देना हो तो न देवे पर अपात्र कुपात्र को तो देना बंद करने रूप ही धर्म करिएगा।*
*जिस दिन से जैनी जैनी को मदद करना चालू करेंगे उस दिन से जैनी बादशाह हो जाएगा कहलाएगा।* |
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2026-02-18 20:01:58 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*उत्तम संयम धर्म की जय हो❗*
*निर्दोषी संत कौन ❓ उत्तम संयमी निर्विवादित विश्वसनीय संत कौन❓*
*आरोप-प्रत्यारोप की मूल कहानी*
*मानो तो है जी जिनवाणी*
*ना मानो तो वह फिर मनमानी।*
*पगडंडी निकाले बुध्दि स्यानी*
*विदेशी विकृति को नहीं चुरानी*
*भारतीय ही रहो न विदेशी ईरानी*
*आत्मा को संसार सागर से है तैरानी*
*बालिकाओं को समझाने में है हैरानी*
*अब्दुल तो अलग है कहे कानी*
*गर हो भेंगी उसे भी कहते चकानी*
*लव जेहाद की कीमत पड़े चुकानी*
*भारत को यह ग़लत लत है छुटानी*
*पानीपत मेरठ या फिर हो हल्दानी*
*कठोर कानून बने बिन न हल दानी*
*तभी भाईचारा शांति की अगवानी*
*मोदी ही करे न कर पाए अडवाणी*
*आशिक को अगर है धूल चटानी*
*लव जेहाद की बीमारी है घटानी*
*अहिंसक को मत बनने दो सैलानी*
*ऐसा चाहो तो कविता होगी फैलानी*
*सदाचरण की फिल्में पड़ेगी चलानी*
*लवजेहाद पतन आक्षेप की निशानी*
*इसे भी ना स्वीकारती जनवाणी*
*उनसे दूर रहती मुक्ति राजधानी*
*पतिव्रता थी जैसे सुंदरी मैनारानी*
*भक्तव्रता संयमी माने जिनवाणी*
*भक्तव्यथा होती जब चले मनमानी*
*सत्यव्रत कथा यही है प्रमाणी*
*सुधी सुधार गर पढ़ो प्राणी*
*दौड़े आएगी वह तो मुक्तिरानी*
*जिसको आजतक नहीं पहचानी*
*जिनवाणी तो है जी कल्याणी*
*मोक्ष पधारे जिस जिसने पिछानी*
*देश विदेश या रहो फिर छानी*
*रे प्राणी ❗पानी,वाणी न छानी*
*८४ लक्ष की आती बात पुरानी*
*उनसे खरबों मील दूर मुक्ति रानी*
*इलाज लाख करो लगा तैल नूरानी*
*जिनवाणी की हटी गर निगरानी*
*घुमती चुभती चुमती है ये कहानी*
*निंदा,निद्रा में आती फिर जवानी*
*स्तुति, प्रशस्ति न आए जुबानी*
*कब बात दबानी ,छपानी, छुपानी*
*देशभर आंदोलन जब चले तूफ़ानी*
*कैसे रोके सागर ,गुना, सिलवानी*
*पुकार न सकते शाकाहार बिरयानी*
*क्या कर सकेंगे वकालत जेठमलानी*
*स्त्रीदीक्षा की भूल पड़ती है चुकानी*
*कुंदकुंदार्य को पड़ी लेखनी चलानी*
*जिनवाणी पर्याप्त है और न चुरानी*
*पूर्वाचार्यों की मेहनत है चुकानी*
*और कहीं अन्यत्र बुध्दि न झुकानी*
*बस जिनवाणी में न हो आना कानी*
*खानेवाले का नाम होता दाना-पानी*
*चेतन शक्ति ऊर्ध्वगामी है उडा़नी*
*खुद, न काम आए खुदा या अडा़नी*
*मोक्ष मार्ग में क्या करेगा अंबानी*
*थोडीसी जिम्मेदारी बस है उठानी*
*भले घर में हो जेठ और जिठानी*
*या फिर अनेक देवर और दिरानी*
*संतान की दमखम होती है दिखानी*
*संकट आते खुद की माॅं ही चिल्लानी*
*संत हैं संतान, माॅं है जी जिनवाणी*
*तभी तो उसकी अब बढ़ी है परेशानी*
*प्रथमादेश यादार्थ दर्शन हो बड़वानी*
*स्वपर कल्याणार्थ कहो पढ़ वाणी*
*जैन धर्म की गंगा है अगर बढ़ानी*
*युवा युवती में जागृति है जगानी*
*विश्व में न एक राज्य राजस्थानी*
*जन जन की भावना को है जुडानी*
*जैनागम समझे तो है जी बुद्धिमानी*
*नहीं तो मित्रो होगी हानी ही हानी*
*भले कहते रहो वे तो है ज्ञानी*
*पर समर्थन न करती गुरूवाणी*
*जैसे अग्राह्य होती है जीवाणी*
*असंयमी की खतरे में जवानी*
*अभक्ष्य होता है अनछना पानी*
*वैसे मोक्षमार्ग में त्याज्य मनमानी*
*आज्ञाकारी की दुनिया है दिवानी*
*फिर उन संत को है मुक्ति दिलानी*
*जिस जिस ने मानी है जिनवाणी*
*उत्तम संयम धर्म की जय हो❗*
*उत्तम संयम धर्म:- जो संत स्त्री को शिक्षा और आर्यिका , क्षुल्लिका दीक्षा नहीं देते और साथ में भी नहीं रखते वे आरोप , प्रत्यारोप से मुक्त निर्विवादित, विश्वसनीय संत होने से उनको निंदनीय, महापापी,पार्श्वस्थ,शिथिलाचारी कुपापी नहीं कहा ऐसे वे ही संत भगवन्, स्वामी, भट्टारक, ज्ञानी,महामुनिराजजी के नाम से पुकारे जाने चाहिएं। जैनागम अष्टपाहुब के लिंग पाहुड की २० वी गाथा में यह कटु पर सत्य लिखा है।*
*स्त्री को शिक्षा ,आर्यिका क्षुल्लिका दीक्षा दाता संत को महापापी शिथिलाचारी की उपाधि किसी श्रावक श्राविका ने दी होती तो मुनि निंदा के आरोप में हंगामा हो जाता पर ज्येष्ठ,श्रेष्ठ निर्दोषी पूर्वाचार्य ने यह भयानक व्यंगात्मक उपाधि देकर संबोधित करके बचने को कहा है अन्यथा खुला या छुपा विवाद विवाद विवाद।भक्त चाहे कोई अपेक्षा लगाकर छूट देना देना चाहे तो तात्कालिक बाहरी बचाव संभव है।पर आंतरिक उत्तम संयम का बचाव करना कठिन है।यदि बाहर से विवाद उठा तो टीवी,यूट्यूब, व्हाट्स एप से दर्शन गायब दूरदर्शन चालू होता है।इसलिए इस संत आचार संहिता अध्यादेश को जो नहीं मानकर फिर भी समर्थन करते हैं तो स्वपर अकल्याण के अलावा कुछ भी सुधार करना कठिन है।इसलिए उत्तम संयम धर्म पालने का यही सही सरल सहज रास्ता है।इस आदेश में किसी को भी कोई छूट नहीं है कि दीक्षा तो दे सकते हैं पर साथ में नहीं रखेंगे तो निर्दोषी कहलाएंगे। स्त्री शिक्षा दीक्षा न देनेवाले ही निर्दोषी है शेष सब दोषी है।स्पष्ट जिनवाणी का सबूत पाठकों के समक्ष है ।मानो तो जिनवाणी ना मानो तो मनमानी।*
*उत्तम संयम धर्म की जय हो।* |
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2026-02-18 20:01:56 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtu.be/XnYGN8JFGsk?si=DRMRB3oq7WlkjoVs" target="_blank">https://youtu.be/XnYGN8JFGsk?si=DRMRB3oq7WlkjoVs</a>
*नग्न दिगंबर संतों पर उंगली उठाने वाले पागलो निकम्मों तुम जन्में तब कैसे थे बागेश्वरधाम के वीरेंद्र जी दहाड़े कि जैनी हमारे थे है रहेंगे ये बात*
*तथा कथित विवादित कथावाचक अनिरूद्ध और रामदास तक कोई पहुंचा देवे कि देवकीनंदनजी भी करते हैं जैन संत की महिमा और गरिमा का बखान तो तुम किस खेत की गाजर मूली हो व्यासपीठ को बदनाम क्यों करके भगवा को लजाते हो आते जाते खाते हो फिर बुराई करके पछताते हो क्षमा मांगने रूप नहाते हो । फिर अहिंसक कहलाते हो ❓फिर भगवा आतंकवाद कोई कहता है तब बौखलाते क्यों फिर❓* |
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2026-02-18 20:01:54 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtu.be/Gp6BV8HJbGA" target="_blank">https://youtu.be/Gp6BV8HJbGA</a>
*जागो जैनियों जागो विधर्म,विधर्मी अपात्रों से दूर रहे। अंधी दया से दूसरे धर्म के लोग हावी हो जाएंगे। जैन साधुसाध्वी शिरडी दरबार में जाते है तो क्या सांई मान्य हो जाएंगे ❓इसलिए अंधानुकरण नहीं स्वविवेक से काम करें । तब यह ना कहे कि हमारे महाराज गये तो हमारे जाने में टोकाटाकी क्यों❓जैन धर्म ,जैनी के बारे में ही सोचे सार यही है बाकी संसार कुतर्कों से भरा है ।* |
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2026-02-18 20:01:50 |
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