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40449709 |
जैन युवा सेना? |
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2026-02-12 20:02:11 |
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40449709 |
जैन युवा सेना? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/PnX90Dcq0DE?si=SDF41mZeDBcLXUvr" target="_blank">https://www.youtube.com/live/PnX90Dcq0DE?si=SDF41mZeDBcLXUvr</a> |
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2026-02-12 20:02:10 |
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40449709 |
जैन युवा सेना? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/UjmoFztKjRc?si=RqSO48U6703Ac-Ep" target="_blank">https://www.youtube.com/live/UjmoFztKjRc?si=RqSO48U6703Ac-Ep</a> |
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2026-02-12 20:02:09 |
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40449709 |
जैन युवा सेना? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/V1F9OTC1xxE?si=Nr-nq7_q7fwg59_d" target="_blank">https://www.youtube.com/live/V1F9OTC1xxE?si=Nr-nq7_q7fwg59_d</a> |
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2026-02-12 20:02:07 |
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40449709 |
जैन युवा सेना? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/0E7x1j0fSXQ?si=2B2_GySTJcWc4NFr" target="_blank">https://www.youtube.com/live/0E7x1j0fSXQ?si=2B2_GySTJcWc4NFr</a> |
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2026-02-12 20:02:05 |
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40449709 |
जैन युवा सेना? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/Hj9ACo49nJA?si=cwtLr4AA5cOSUm5y" target="_blank">https://www.youtube.com/live/Hj9ACo49nJA?si=cwtLr4AA5cOSUm5y</a> |
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2026-02-12 20:02:03 |
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40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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*मार्मिक अपील*
जैन समाज के सभी सम्प्रदाय तीर्थंकर ऋषभदेव जन्मकल्याणक धूम धाम से अवश्य मनाएं ।
*तीर्थंकर ऋषभदेव ही बचाएंगे जैनधर्म की प्राचीनता*
आज भी सामान्य जनमानस में यह अज्ञानजनक धारणा प्रचलित है कि जैन धर्म की शुरुआत केवल तीर्थंकर भगवान् महावीर (छठी शती ईसा पूर्व) से हुई और यह वैदिक धर्म की एक शाखा मात्र है और इसका उद्देश्य वैदिक परंपरा की बुराइयों को दूर करना था आदि आदि ।
यह ऐतिहासिक दृष्टि से अधूरा और भ्रामक निष्कर्ष है।
सत्य यह है कि जैन परंपरा के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव Rishabhdeva (आदिनाथ) हैं, जिन्होंने इस धरा पर धर्म-सृष्टि का प्रवर्तन किया।
आचार्य जिनसेन स्पष्ट घोषणा करते हैं—
*तीर्थकृत्भिरियं सृष्टा धर्मसृष्टिः सनातनी।*
(आदिपुराण 40/190)
अर्थात् तीर्थंकरों द्वारा प्रवर्तित यह धर्म-सृष्टि ही सनातन है।
प्राचीन आगम सूत्रकृतांग (2/6/46) में ‘सणातण’ शब्द का प्रयोग मिलता है — यह प्रमाण है कि “सनातन” का भाव जैन आगम परंपरा में अत्यंत प्राचीन है।
आचार्य कुन्दकुन्द “अणाइणिहणो” (अनादिनिधन) कहकर आत्मा और धर्म की शाश्वतता स्थापित करते हैं ।
आदिपुराण में स्वयं ऋषभदेव को “सनातन” और “अनादिनिधन” कहा गया है ।
शोधग्रंथ “RUSHABHAYAN – The Pioneer of Indic Civilization” में भी आदिनाथ ऋषभदेव को भारतीय सभ्यता का अग्रदूत बताया गया है ।
प्रश्न तो कई हैं -
यदि जैन धर्म महावीर से शुरू हुआ, तो उनसे पहले 23 तीर्थंकरों की परंपरा कैसे?
यदि यह वैदिक धर्म की शाखा मात्र है, तो इसकी स्वतंत्र आगम-संरचना, स्वतंत्र तप-परंपरा, स्वतंत्र मोक्षमार्ग और स्वतंत्र दार्शनिक आधार कैसे विकसित हुआ?
स्पष्ट है जैन धर्म अनादि श्रमण परंपरा है।
तीर्थंकर उसका निर्माण नहीं करते, केवल प्रवर्तन करते हैं।
इसीलिए ऋषभदेव जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है -
यह जैन धर्म की प्राचीनता की सार्वजनिक घोषणा है।
यह इतिहास के पुनर्स्मरण का अवसर है।
यह भ्रम-भंजन का दिवस है।
हमने मात्र महावीर जयंती जोर शोर से मनाकर खुद ये भ्रम फैलाने में मदद की है । कायदे से हमें चैत्र कृष्ण नवमी से लेकर चैत्र शुक्ल त्रियोदशी तक अर्थात् ऋषभदेव जयंती से महावीर जयंती तक 19 दिन का वृहद आयोजन बड़े स्तर पर करना चाहिए । लेकिन यदि कहीं ऐसा कोई न भी कर सके तो दोनों दिन को बहुत बड़े रूप में मनाना चाहिए ।
*ऋषभदेव जन्मकल्याणक कैसे मनाएँ*?
यदि उद्देश्य केवल उत्सव नहीं, बल्कि सत्य का प्रसार है, तो आयोजन भी उसी स्तर के होने चाहिए-
? ऐतिहासिक प्रदर्शनी - ऋषभदेव से महावीर तक की कालरेखा, शास्त्रीय संदर्भों सहित।
? प्रमाण-आधारित व्याख्यानमाला या संगोष्ठी - जैन धर्म की स्वतंत्रता और प्राचीनता पर।
? लघु पुस्तिका / डिजिटल पोस्टर वितरण - सूत्रकृतांग, आदिपुराण ,वेद,भागवत,पुरातत्त्व,शिलालेख आदि के संदर्भों सहित।
? सोशल मीडिया अभियान - “जैन धर्म अनादि है” विषय पर तथ्यात्मक श्रृंखला।
? युवा निबंध / वाद-विवाद प्रतियोगिता - “क्या जैन धर्म महावीर से प्रारंभ हुआ?”
? शोभायात्रा में संदेश-पट्ट -केवल भक्ति नहीं, ऐतिहासिक तथ्य भी।
हमें केवल अभिषेक और आरती तक सीमित नहीं रहना है।
हमें प्रमाण और इतिहास के साथ समाज के सामने आना है।
आज आवश्यकता है कि जैन समाज स्वयं अपने इतिहास को जाने, प्रमाण सहित प्रस्तुत करे और नई पीढ़ी को बताए-
जैन धर्म किसी की शाखा नहीं,
जैन धर्म किसी काल विशेष की उत्पत्ति नहीं,
जैन धर्म अनादि है, सनातन है।
तीर्थंकर ऋषभदेव जयंती अवश्य मनाइए ताकि भ्रम टूटें, सत्य प्रकट हो और जैन धर्म की ऐतिहासिकता सिद्ध एवं प्रसिद्ध हो।
डॉ रुचि जैन,नई दिल्ली |
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2026-02-12 20:01:40 |
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40449990 |
Vinay Desarda |
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Thanks will share |
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2026-02-12 20:01:28 |
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40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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☀️ अहोभाग्य - धन्यभाग्य ?
*_? VBM के भाग्य की अनुमोदना ?_*
खबर मिलते ही पूरा राष्ट्र हर्ष उल्लास से भरा हुआ है! ? यह क्षण तारादेही-तेंदूखेड़ा-जबलपुर नगर और विद्यासागर भक्त मंडल (VBM) के लिए गर्व का महापर्व है! ?आचार्य भगवान विद्यासागर जी से दीक्षित क्षुल्लक श्री समन्वय सागर जी अब वर्तमान के वर्धमान आचार्य श्री समयसागर जी के पावन पुनीत कर कमलों से दीक्षा प्राप्त करने जा रहे हैं! ?✨चारों दिशाएँ उस पावन घड़ी की आरती ?उतारने को आतुर हैं। ? हम सब धन्य हैं कि हमारे प्रेरणा स्रोत, बाल ब्रह्मचारी विक्रम भैया / क्षुल्लक श्री समन्वय सागर जी सिद्ध शिला के रही हो रहे हैं!
आज पुनः वही दीक्षा का गौरव का क्षण हमारे बीच है जब आचार्य श्री समयसागर जी हमारे आराध्य को दीक्षा देंगे! ?आइए, सभी इस मंगल दीक्षा संस्कार के साक्षी बनें!
? दिनांक: 19 फरवरी 2026
? स्थान: सिद्ध क्षेत्र मुक्तागिरि जी
??? #VBM
<a href="https://linktr.ee/Vidhyasagar_bm" target="_blank">https://linktr.ee/Vidhyasagar_bm</a>
*_✍️vidhyasagar_bm_* |
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2026-02-12 20:01:09 |
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40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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??????? *खुश खबर*???????
*आज गुरुवार,१२ फरवरी का-*
*~~"पंचास्तिकायसंग्रह" श्री अमृतचंद्राचार्यदेवविरचित-'समयव्याख्या टीका' पर हिन्दी स्वाध्याय नये सिरे से वैज्ञानिक एवं रोचक शैली में *8:00 p.m. को Sharp* *चालु/शुरु हो रहा है, आप सभी साधर्मि बंधुओंका स्वाध्याय में स्वागत है।*
*जिनको zoom पर जुडना शक्य नही वे ही निम्न Link से youtube पर Live लाभ ले सकते है। Zoom पर जुडने से आप शंका समाधान कर सकेंगे। ॐ नम:।???*
<a href="https://www.youtube.com/@108Veersagarji/streams" target="_blank">https://www.youtube.com/@108Veersagarji/streams</a>
*"पंचास्तिकायसंग्रह" श्री अमृतचंद्राचार्यदेवविरचित टीका "समयव्याख्या" पर हिन्दी स्वाध्याय " --सोमवार से रविवार_हररोज*
*[समय:- 8:00 pm से 9:00 pm ]*
*रविवार दिनांक २ नवम्बर २०२५ से प्रारंभ*
*Click to join* ??
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*OR*
Use Meeting ID and passcode ??
*Meeting ID* : 222 105 1008
*Passcode* : 123456
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(१)वैज्ञानिक एवं रोचक शैली में "पंचास्तिकायसंग्रह-समयव्याख्या टीका" के ज्ञान से द्रव्यानुयोग के साथ साथ अन्य ३ अनुयोंगों में हमारा प्रवेश सहजता से होगा । (२) धर्म्य ध्यान शिविर के प्रवेश के लिए हमारी पात्रता होगी। (३) खुद के निज ध्रुव शुद्ध प्रभु को जाननें की विधि से सांचे अतिन्द्रिय आनंद का भोग हमे प्राप्त होगा। (४) हमारे दैनंदिन जीवन में निरर्थक रहने वाली सभी चिंताएं मिटेगी। Its a real stress releaving. ----ॐ नम:। |
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2026-02-12 19:59:59 |
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