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40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*सही अहिंसा को समझें*_
????
*कृषक से बढ़कर और कौन अहिंसक होगा।*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 10/4/26, नागपुर
???
*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a>
_(देखें 26.26 से 29.35 तक)_
????
अघ्नन् अपि भवेत् पापी,
निघ्नन् अपि न पापभाक्।
अविध्यान विशेषेण,
यथा धीवरकर्षकौ॥
_*संकल्पी हिंसा के परिणाम (अशुभ भाव)* होने के कारण *मछुआरा* बिना मारे भी पापी होता है, और *आरम्भी हिंसा के परिणाम (शुभ भाव)* होने के कारण *किसान* मारते हुए भी पापी नहीं होता॥_
???
पापार्जन तन मन वच से हो
पाप तनक ही तन से हो।
विदित रहे यह सब को, तनसे
पाप अधिक वाचन से हो॥
*कहूँ कहां तक मन की स्थिति में*
*पाप मेरु सम मन से हो।*
*करें नियंत्रण मन को हम सब*
*धर्म कार्य बस मन से हो॥४८॥*
- _सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-04-11 14:24:31 |
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1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*सही अहिंसा को समझें*_
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*कृषक से बढ़कर और कौन अहिंसक होगा।*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 10/4/26, नागपुर
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*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a>
_(देखें 26.26 से 29.35 तक)_
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अघ्नन् अपि भवेत् पापी,
निघ्नन् अपि न पापभाक्।
अविध्यान विशेषेण,
यथा धीवरकर्षकौ॥
_*संकल्पी हिंसा के परिणाम (अशुभ भाव)* होने के कारण *मछुआरा* बिना मारे भी पापी होता है, और *आरम्भी हिंसा के परिणाम (शुभ भाव)* होने के कारण *किसान* मारते हुए भी पापी नहीं होता॥_
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पापार्जन तन मन वच से हो
पाप तनक ही तन से हो।
विदित रहे यह सब को, तनसे
पाप अधिक वाचन से हो॥
*कहूँ कहां तक मन की स्थिति में*
*पाप मेरु सम मन से हो।*
*करें नियंत्रण मन को हम सब*
*धर्म कार्य बस मन से हो॥४८॥*
- _सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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