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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 232611 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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2026-06-15 17:22:30 |
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| 232610 |
40449666 |
नव आचार्य समय सागर जी भक्त |
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♨️ *?आज का प्रेरक प्रसंग?* ♨️
*?!! तीन मूर्तियाँ !!?*
एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह देश-विदेश से सुंदर मूर्तियाँ लाकर अपने महल में सजाता था। उन सभी में से तीन मूर्तियाँ उसे सबसे अधिक प्रिय थीं।
एक दिन सफाई करते समय एक सेवक के हाथ से एक मूर्ति टूट गई। यह देखकर राजा अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने सेवक को तुरंत मृत्युदंड सुना दिया।
सजा सुनते ही सेवक ने बाकी दोनों मूर्तियाँ भी तोड़ दीं। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
राजा ने क्रोध में पूछा — *“तुमने ऐसा क्यों किया?”*
सेवक ने शांत भाव से उत्तर दिया —
*"महाराज! ये मूर्तियाँ नश्वर हैं, आज नहीं तो कल टूट ही जातीं। यदि भविष्य में किसी और से यह गलती होती, तो वह भी अकारण मृत्युदंड का भागी बनता। मैंने दो निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह किया है।"*
यह सुनकर राजा स्तब्ध रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सेवक को क्षमा कर दिया।
राजा ने फिर पूछा —
*"मृत्यु सामने होने पर भी तुम इतने शांत और निडर कैसे रहे?"*
सेवक बोला —
*"महाराज, मैं पहले एक सेठ के यहाँ काम करता था। एक दिन सेठ ने मुझे कड़वी ककड़ी दी, और मैंने उसे प्रसाद समझकर खा लिया। जब रोज़ मीठा मिलता है, तो एक दिन कड़वा भी स्वीकार करना चाहिए। उसी प्रकार, ईश्वर जीवन में सुख और दुःख दोनों देता है — हमें दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।"*
*शिक्षा:-*
? न्याय करते समय भावनाओं नहीं, विवेक से निर्णय लेना चाहिए।
? हर वस्तु नश्वर है, लेकिन मानव जीवन अनमोल है।
? सच्चा मनुष्य वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी परहित का सोचता है।
? सुख-दुःख को ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार करना ही सच्ची समझदारी है।
*?सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*?जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
*? आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो ?*
*? आपका जीवन मंगलमय हो ?* ♨️ *विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का ऐप है* ♨️ <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&referral_code=N29CX&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=BROADCASTER" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&referral_code=N29CX&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=BROADCASTER</a> |
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2026-06-15 17:19:57 |
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| 232609 |
40449666 |
नव आचार्य समय सागर जी भक्त |
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♨️ *?आज का प्रेरक प्रसंग?* ♨️
*?!! तीन मूर्तियाँ !!?*
एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह देश-विदेश से सुंदर मूर्तियाँ लाकर अपने महल में सजाता था। उन सभी में से तीन मूर्तियाँ उसे सबसे अधिक प्रिय थीं।
एक दिन सफाई करते समय एक सेवक के हाथ से एक मूर्ति टूट गई। यह देखकर राजा अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने सेवक को तुरंत मृत्युदंड सुना दिया।
सजा सुनते ही सेवक ने बाकी दोनों मूर्तियाँ भी तोड़ दीं। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
राजा ने क्रोध में पूछा — *“तुमने ऐसा क्यों किया?”*
सेवक ने शांत भाव से उत्तर दिया —
*"महाराज! ये मूर्तियाँ नश्वर हैं, आज नहीं तो कल टूट ही जातीं। यदि भविष्य में किसी और से यह गलती होती, तो वह भी अकारण मृत्युदंड का भागी बनता। मैंने दो निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह किया है।"*
यह सुनकर राजा स्तब्ध रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सेवक को क्षमा कर दिया।
राजा ने फिर पूछा —
*"मृत्यु सामने होने पर भी तुम इतने शांत और निडर कैसे रहे?"*
सेवक बोला —
*"महाराज, मैं पहले एक सेठ के यहाँ काम करता था। एक दिन सेठ ने मुझे कड़वी ककड़ी दी, और मैंने उसे प्रसाद समझकर खा लिया। जब रोज़ मीठा मिलता है, तो एक दिन कड़वा भी स्वीकार करना चाहिए। उसी प्रकार, ईश्वर जीवन में सुख और दुःख दोनों देता है — हमें दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।"*
*शिक्षा:-*
? न्याय करते समय भावनाओं नहीं, विवेक से निर्णय लेना चाहिए।
? हर वस्तु नश्वर है, लेकिन मानव जीवन अनमोल है।
? सच्चा मनुष्य वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी परहित का सोचता है।
? सुख-दुःख को ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार करना ही सच्ची समझदारी है।
*?सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*?जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
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2026-06-15 17:19:56 |
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| 232607 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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♨️ *?आज का प्रेरक प्रसंग?* ♨️
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एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह देश-विदेश से सुंदर मूर्तियाँ लाकर अपने महल में सजाता था। उन सभी में से तीन मूर्तियाँ उसे सबसे अधिक प्रिय थीं।
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सजा सुनते ही सेवक ने बाकी दोनों मूर्तियाँ भी तोड़ दीं। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
राजा ने क्रोध में पूछा — *“तुमने ऐसा क्यों किया?”*
सेवक ने शांत भाव से उत्तर दिया —
*"महाराज! ये मूर्तियाँ नश्वर हैं, आज नहीं तो कल टूट ही जातीं। यदि भविष्य में किसी और से यह गलती होती, तो वह भी अकारण मृत्युदंड का भागी बनता। मैंने दो निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह किया है।"*
यह सुनकर राजा स्तब्ध रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सेवक को क्षमा कर दिया।
राजा ने फिर पूछा —
*"मृत्यु सामने होने पर भी तुम इतने शांत और निडर कैसे रहे?"*
सेवक बोला —
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*शिक्षा:-*
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2026-06-15 17:19:38 |
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| 232608 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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2026-06-15 17:19:38 |
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| 232606 |
40449695 |
www yug marble stone work.Com |
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<a href="https://www.youtube.com/live/ydTzS0uSBck?si=MAOdwNlqqch95Y6e" target="_blank">https://www.youtube.com/live/ydTzS0uSBck?si=MAOdwNlqqch95Y6e</a>
⭕⭕*LIVE LIVE उपाध्याय श्री वृषभानंद जी मुनिराज के 7️⃣0️⃣ वें अवतरण दिवस श्री चंद्रप्रभु जिनालय तेरह पंथी कोठी सम्मेद शिखरजी में श्री जिन सहस्त्रनाम विधान का सीधा प्रसारण श्रीवाणी चैनल पर देखना न भूलें* |
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2026-06-15 17:18:10 |
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| 232605 |
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2026-06-15 17:18:09 |
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| 232603 |
40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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?? |
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2026-06-15 17:14:11 |
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| 232604 |
40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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?? |
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2026-06-15 17:14:11 |
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| 232602 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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*हर्ष सूचना हर्ष सूचना*
दाहोद गुजरात में रचने वाला है इतिहास
जहाँ पर अंकलीकर परम्परा के दो महान संतों के संघो का होने वाला है महामिल्न
तो आइए और इस महामिलन के ऐतिहासिक पल के साक्षी बनिये।
*जय हो गुरु भगवंतो की*
दिनांक 17 जून 2026 प्रातः 7/30 बजे |
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2026-06-15 17:14:05 |
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