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232752 40449688 3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी 2026-06-15 18:36:45
232747 40449749 जिनोदय?JINODAYA 2026-06-15 18:36:44
232746 40449749 जिनोदय?JINODAYA *?राजनीति से जिनका मुंह काला हो चुका है, वह मुंह काला करने की बात कर रहे हैं।।* *?राजनीति में जब विचार समाप्त होने लगते हैं, तब भाषा की मर्यादा भी टूटने लगती है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, किंतु विरोध की अभिव्यक्ति यदि धमकी, अपमान और सामाजिक वैमनस्य में बदल जाए, तो वह केवल राजनीतिक दिवालियापन का परिचायक बन जाता है।दूसरों का मुंह काला करने की बात करने वालों महाराष्ट्र की राजनीति में आपका मुंह पहले ही काला हो चुका है.......* *मुंबई के घाटकोपर-विद्याविहार क्षेत्र में जैन साधु-साध्वियों के लिए सड़क पर सफेद पट्टी बनाए जाने का मामला इन दिनों राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं ने जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया, उसने केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को मानने वाले हर नागरिक को चिंतित किया है।* *जैन साधु-साध्वियों की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। वे नंगे पैर चलकर संयम, तप और अहिंसा का संदेश देते हैं। तपती सड़क पर उनके चरण झुलस न जाएं, इसके लिए यदि स्थानीय श्रद्धालुओं ने सफेद पट्टी बनवा दी, तो यह किसी प्रकार का अपराध नहीं कहा जा सकता। यह न तो सरकारी धन का दुरुपयोग था और न ही किसी समुदाय पर थोपी गई व्यवस्था। यह केवल श्रद्धा और संवेदना का एक छोटा-सा प्रतीक था।* *परंतु दुर्भाग्य यह है कि आज की राजनीति में संवेदनाएं नहीं, केवल अवसरवाद बचा है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इसे “सांस्कृतिक आतंकवाद” बताते हुए संबंधित लोगों का “मुंह काला” करने की चेतावनी दी। यह बयान न केवल अमर्यादित है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए भी घातक है। जिन नेताओं का राजनीतिक अस्तित्व जनता ने लगातार नकार दिया हो, जिनका राजनीतिक चेहरा स्वयं जनता के बीच काला पड़* *चुका हो, वे यदि दूसरों का मुंह* *काला करने की बात करें, तो यह हास्यास्पद भी है और दुखद भी।* *यह वही राजनीति है जो वास्तविक जनसमस्याओं पर मौन रहती है। मुंबई की टूटी सड़कें, जलभराव, बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और मराठी युवाओं के भविष्य पर कभी इतनी आक्रामकता दिखाई नहीं देती। लेकिन जब किसी शांतिप्रिय समाज की धार्मिक परंपरा सामने आती है, तब अचानक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जाग उठता है। यह विरोध नहीं, बल्कि सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास अधिक प्रतीत होता है।* *♦️जैन समाज देश का सबसे शांतिप्रिय और अनुशासित समाज माना जाता है। उसने कभी हिंसा, उग्र आंदोलन या सामाजिक विद्वेष का रास्ता नहीं चुना। भगवान महावीर की अहिंसा और अपरिग्रह की शिक्षा आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है। ऐसे समाज की साधु-साध्वियों के प्रति* *अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना केवल एक समुदाय का नहीं, भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा का अपमान है।* *भारत विविधताओं का देश है। यहां हर धर्म, हर परंपरा और हर जीवन-पद्धति को सम्मान देने की परंपरा रही है। यदि सिखों के लिए लंगर की व्यवस्था सम्माननीय है, यदि कांवड़ यात्रियों के लिए मार्गों पर सुविधाएं उपलब्ध कराना स्वीकार्य है, यदि अमरनाथ यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं, तो जैन साधुओं के लिए श्रद्धावश बनाई गई सफेद पट्टी पर इतना आक्रोश क्यों? क्या सहिष्णुता केवल राजनीति की सुविधा तक सीमित रह गई है?* *असल समस्या यह नहीं कि सड़क पर सफेद पट्टी बनाई गई। समस्या यह है कि कुछ राजनीतिक दल समाज को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर अपनी प्रासंगिकता बचाना चाहते हैं। जिनके पास विकास का एजेंडा नहीं बचता, वे विवादों की राजनीति करते हैं। जिनका राजनीतिक चेहरा जनता बार-बार नकार चुकी हो, वे समाज में तनाव पैदा कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।* *लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, किंतु धमकी का नहीं। यदि किसी व्यवस्था पर आपत्ति थी, तो प्रशासन से संवाद किया जा सकता था। न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी। लेकिन “मुंह काला करने” जैसी भाषा यह दर्शाती है कि राजनीतिक संस्कार किस स्तर तक गिर चुके हैं।* *आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीति समाज को जोड़ने का माध्यम बने, तोड़ने का नहीं। धर्म और परंपराओं के सम्मान को राजनीतिक नफरत का विषय न बनाया जाए। जैन साधुओं के चरणों की रक्षा के लिए बनाई गई सफेद पट्टी को यदि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने का माध्यम बना रहे हैं, तो यह उनके राजनीतिक और वैचारिक दिवालियेपन का प्रमाण है।* *वास्तव में जिनका राजनीति में चेहरा जनता के बीच पहले ही काला हो चुका है, वही आज दूसरों का मुंह काला करने की बातें कर रहे हैं। जनता सब देख रही है, और समय आने पर लोकतंत्र में जवाब* *भी वही देती है।...?* 2026-06-15 18:36:43
232743 40449688 3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी <a href="https://drive.google.com/file/d/1JwdIxZjlvoRf3w3C_rwJHWj02KcA_IoE/view?usp=drive_link" target="_blank">https://drive.google.com/file/d/1JwdIxZjlvoRf3w3C_rwJHWj02KcA_IoE/view?usp=drive_link</a> कित बिध मिलै..... 2026-06-15 18:36:42
232744 40449749 जिनोदय?JINODAYA *?राजनीति से जिनका मुंह काला हो चुका है, वह मुंह काला करने की बात कर रहे हैं।।* *?राजनीति में जब विचार समाप्त होने लगते हैं, तब भाषा की मर्यादा भी टूटने लगती है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, किंतु विरोध की अभिव्यक्ति यदि धमकी, अपमान और सामाजिक वैमनस्य में बदल जाए, तो वह केवल राजनीतिक दिवालियापन का परिचायक बन जाता है।दूसरों का मुंह काला करने की बात करने वालों महाराष्ट्र की राजनीति में आपका मुंह पहले ही काला हो चुका है.......* *मुंबई के घाटकोपर-विद्याविहार क्षेत्र में जैन साधु-साध्वियों के लिए सड़क पर सफेद पट्टी बनाए जाने का मामला इन दिनों राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं ने जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया, उसने केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को मानने वाले हर नागरिक को चिंतित किया है।* *जैन साधु-साध्वियों की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। वे नंगे पैर चलकर संयम, तप और अहिंसा का संदेश देते हैं। तपती सड़क पर उनके चरण झुलस न जाएं, इसके लिए यदि स्थानीय श्रद्धालुओं ने सफेद पट्टी बनवा दी, तो यह किसी प्रकार का अपराध नहीं कहा जा सकता। यह न तो सरकारी धन का दुरुपयोग था और न ही किसी समुदाय पर थोपी गई व्यवस्था। यह केवल श्रद्धा और संवेदना का एक छोटा-सा प्रतीक था।* *परंतु दुर्भाग्य यह है कि आज की राजनीति में संवेदनाएं नहीं, केवल अवसरवाद बचा है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इसे “सांस्कृतिक आतंकवाद” बताते हुए संबंधित लोगों का “मुंह काला” करने की चेतावनी दी। यह बयान न केवल अमर्यादित है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए भी घातक है। जिन नेताओं का राजनीतिक अस्तित्व जनता ने लगातार नकार दिया हो, जिनका राजनीतिक चेहरा स्वयं जनता के बीच काला पड़* *चुका हो, वे यदि दूसरों का मुंह* *काला करने की बात करें, तो यह हास्यास्पद भी है और दुखद भी।* *यह वही राजनीति है जो वास्तविक जनसमस्याओं पर मौन रहती है। मुंबई की टूटी सड़कें, जलभराव, बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और मराठी युवाओं के भविष्य पर कभी इतनी आक्रामकता दिखाई नहीं देती। लेकिन जब किसी शांतिप्रिय समाज की धार्मिक परंपरा सामने आती है, तब अचानक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जाग उठता है। यह विरोध नहीं, बल्कि सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास अधिक प्रतीत होता है।* *♦️जैन समाज देश का सबसे शांतिप्रिय और अनुशासित समाज माना जाता है। उसने कभी हिंसा, उग्र आंदोलन या सामाजिक विद्वेष का रास्ता नहीं चुना। भगवान महावीर की अहिंसा और अपरिग्रह की शिक्षा आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है। ऐसे समाज की साधु-साध्वियों के प्रति* *अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना केवल एक समुदाय का नहीं, भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा का अपमान है।* *भारत विविधताओं का देश है। यहां हर धर्म, हर परंपरा और हर जीवन-पद्धति को सम्मान देने की परंपरा रही है। यदि सिखों के लिए लंगर की व्यवस्था सम्माननीय है, यदि कांवड़ यात्रियों के लिए मार्गों पर सुविधाएं उपलब्ध कराना स्वीकार्य है, यदि अमरनाथ यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं, तो जैन साधुओं के लिए श्रद्धावश बनाई गई सफेद पट्टी पर इतना आक्रोश क्यों? क्या सहिष्णुता केवल राजनीति की सुविधा तक सीमित रह गई है?* *असल समस्या यह नहीं कि सड़क पर सफेद पट्टी बनाई गई। समस्या यह है कि कुछ राजनीतिक दल समाज को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर अपनी प्रासंगिकता बचाना चाहते हैं। जिनके पास विकास का एजेंडा नहीं बचता, वे विवादों की राजनीति करते हैं। जिनका राजनीतिक चेहरा जनता बार-बार नकार चुकी हो, वे समाज में तनाव पैदा कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।* *लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, किंतु धमकी का नहीं। यदि किसी व्यवस्था पर आपत्ति थी, तो प्रशासन से संवाद किया जा सकता था। न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी। लेकिन “मुंह काला करने” जैसी भाषा यह दर्शाती है कि राजनीतिक संस्कार किस स्तर तक गिर चुके हैं।* *आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीति समाज को जोड़ने का माध्यम बने, तोड़ने का नहीं। धर्म और परंपराओं के सम्मान को राजनीतिक नफरत का विषय न बनाया जाए। जैन साधुओं के चरणों की रक्षा के लिए बनाई गई सफेद पट्टी को यदि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने का माध्यम बना रहे हैं, तो यह उनके राजनीतिक और वैचारिक दिवालियेपन का प्रमाण है।* *वास्तव में जिनका राजनीति में चेहरा जनता के बीच पहले ही काला हो चुका है, वही आज दूसरों का मुंह काला करने की बातें कर रहे हैं। जनता सब देख रही है, और समय आने पर लोकतंत्र में जवाब* *भी वही देती है।...?* 2026-06-15 18:36:42
232745 40449688 3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी <a href="https://drive.google.com/file/d/1JwdIxZjlvoRf3w3C_rwJHWj02KcA_IoE/view?usp=drive_link" target="_blank">https://drive.google.com/file/d/1JwdIxZjlvoRf3w3C_rwJHWj02KcA_IoE/view?usp=drive_link</a> कित बिध मिलै..... 2026-06-15 18:36:42
232739 40449749 जिनोदय?JINODAYA अब वाइट पट्टा लगाने से भी दिक्कत होने लगी है जब की वाइट पट्टे से पेर नही जलते है ठंडा रहता है गुरु महाराज नंगे पाओ चलते है तो उनके लिए लगाया जाता है इस पट्टे से ना कोई रास्ता रुकता है ना किसी को ठेस पहुंचती है ना किसी धर्म का अपमान होता है तो फिर इस पट्टे से एक आदमी को इतनी दिक्कत क्यों ये कहता है हर जैन ???? 2026-06-15 18:36:40
232740 40449688 3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी *कित बिध मिलै मेरा सतगुरु प्यारा* *हउ खिन खिन करी नमस्कार मेरा गुरु पूरा किउ मिलै* _मेरा प्रिय सतगुरु मुझे किस उपाय से मिले? मैं हर क्षण नमस्कार करता हूँ, मुझे मेरा पूर्ण गुरु कैसे मिले?_ *जिस मिलिऐ मन होए आनंद सो सतगुरु कहीऐ ॥* *मन की दुबिधा बिनस जाए हरि परम पद लहीऐ ॥१॥* _जिसके मिलने से मन में आनंद हो जाए, उसी को सच्चा गुरु कहा जाता है। मन की दुविधा समाप्त हो जाए और परम अवस्था की प्राप्ति हो जाए।_ *हउ खिन खिन करी नमस्कार मेरा गुरु पूरा किउ मिलै* *कित बिध मिलै मेरा सतगुरु प्यारा* _मैं हर क्षण नमस्कार करता हूँ, मुझे मेरा पूर्ण गुरु कैसे मिले? मेरा प्रिय सतगुरु मुझे किस उपाय से मिले?_ *करि किरपा हरि मेलआ मेरा सतिगुरु पूरा ॥* *इछ पुनी जन केरीआ ले सतगुरु धूरा ॥२॥* _परमात्मा ने कृपा करके मुझे पूर्ण सतगुरु से मिला दिया। शिष्य की इच्छा पूर्ण हो गई, सतगुरु के चरणों की धूल पाकर।_ *हउ खिन खिन करी नमस्कार मेरा गुरु पूरा किउ मिलै* *कित बिध मिलै मेरा सतगुरु प्यारा* _मैं हर क्षण नमस्कार करता हूँ, मुझे मेरा पूर्ण गुरु कैसे मिले? मेरा प्रिय सतगुरु मुझे किस उपाय से मिले?_ 2026-06-15 18:36:40
232741 40449749 जिनोदय?JINODAYA अब वाइट पट्टा लगाने से भी दिक्कत होने लगी है जब की वाइट पट्टे से पेर नही जलते है ठंडा रहता है गुरु महाराज नंगे पाओ चलते है तो उनके लिए लगाया जाता है इस पट्टे से ना कोई रास्ता रुकता है ना किसी को ठेस पहुंचती है ना किसी धर्म का अपमान होता है तो फिर इस पट्टे से एक आदमी को इतनी दिक्कत क्यों ये कहता है हर जैन ???? 2026-06-15 18:36:40
232742 40449688 3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी *कित बिध मिलै मेरा सतगुरु प्यारा* *हउ खिन खिन करी नमस्कार मेरा गुरु पूरा किउ मिलै* _मेरा प्रिय सतगुरु मुझे किस उपाय से मिले? मैं हर क्षण नमस्कार करता हूँ, मुझे मेरा पूर्ण गुरु कैसे मिले?_ *जिस मिलिऐ मन होए आनंद सो सतगुरु कहीऐ ॥* *मन की दुबिधा बिनस जाए हरि परम पद लहीऐ ॥१॥* _जिसके मिलने से मन में आनंद हो जाए, उसी को सच्चा गुरु कहा जाता है। मन की दुविधा समाप्त हो जाए और परम अवस्था की प्राप्ति हो जाए।_ *हउ खिन खिन करी नमस्कार मेरा गुरु पूरा किउ मिलै* *कित बिध मिलै मेरा सतगुरु प्यारा* _मैं हर क्षण नमस्कार करता हूँ, मुझे मेरा पूर्ण गुरु कैसे मिले? मेरा प्रिय सतगुरु मुझे किस उपाय से मिले?_ *करि किरपा हरि मेलआ मेरा सतिगुरु पूरा ॥* *इछ पुनी जन केरीआ ले सतगुरु धूरा ॥२॥* _परमात्मा ने कृपा करके मुझे पूर्ण सतगुरु से मिला दिया। शिष्य की इच्छा पूर्ण हो गई, सतगुरु के चरणों की धूल पाकर।_ *हउ खिन खिन करी नमस्कार मेरा गुरु पूरा किउ मिलै* *कित बिध मिलै मेरा सतगुरु प्यारा* _मैं हर क्षण नमस्कार करता हूँ, मुझे मेरा पूर्ण गुरु कैसे मिले? मेरा प्रिय सतगुरु मुझे किस उपाय से मिले?_ 2026-06-15 18:36:40