| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 224335 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
|
|
|
|
2026-06-12 11:52:55 |
|
| 224333 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
|
2026-06-12 11:51:12 |
|
| 224334 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
|
2026-06-12 11:51:12 |
|
| 224331 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
विहार में साथ चलने के 6 मुख्य फल
1. तीर्थ-वंदना तुल्य पुण्य: दिगम्बर मान्यता है कि मुनि चलते-फिरते तीर्थ हैं। उनके चरण जहाँ पड़ते हैं वह भूमि पवित्र हो जाती है। उनके साथ 1 कदम चलना भी एक उपवास के बराबर फल देता है।
2. अशुभ कर्मों की निर्जरा: मुनि पंच महाव्रत धारी होते हैं। उनके साथ चलते समय आपके मन में अहिंसा, सत्य, अचौर्य के भाव रहते हैं, जिससे अशुभ आस्रव रुकता है और पुराने कर्मों की निर्जरा होती है।
3. सम्यग्दर्शन की दृढ़ता: रत्नकरण्ड श्रावकाचार में कहा है कि साधु के दर्शन, वंदना, चर्चा से सम्यक्त्व पुष्ट होता है। विहार में घंटों साथ रहने से उनकी चर्या, मौन, संयम देखकर श्रद्धा बढ़ती है।
4. साता-वेदनीय कर्म का बंध: श्रावक जब मुनि की वैयावृत्ति करता है — रास्ता साफ करना, आहार के लिए योग्य क्षेत्र देखना, सुरक्षा देना — तो साता वेदनीय और उच्च गोत्र कर्म बंधता है।
5. भव-भ्रमण में कमी: कहा जाता है मुनि संगति से जीव का संसार परिभ्रमण घटता है। क्योंकि विहार में धर्म-श्रवण होता है, वैराग्य बढ़ता है।
6. पुण्यानुबंधी पुण्य: सिर्फ इस भव में नहीं, अगले भवों में भी धर्म सामग्री, उत्तम कुल, आर्य क्षेत्र मिलना सुलभ होता है। |
|
2026-06-12 11:50:25 |
|
| 224332 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
विहार में साथ चलने के 6 मुख्य फल
1. तीर्थ-वंदना तुल्य पुण्य: दिगम्बर मान्यता है कि मुनि चलते-फिरते तीर्थ हैं। उनके चरण जहाँ पड़ते हैं वह भूमि पवित्र हो जाती है। उनके साथ 1 कदम चलना भी एक उपवास के बराबर फल देता है।
2. अशुभ कर्मों की निर्जरा: मुनि पंच महाव्रत धारी होते हैं। उनके साथ चलते समय आपके मन में अहिंसा, सत्य, अचौर्य के भाव रहते हैं, जिससे अशुभ आस्रव रुकता है और पुराने कर्मों की निर्जरा होती है।
3. सम्यग्दर्शन की दृढ़ता: रत्नकरण्ड श्रावकाचार में कहा है कि साधु के दर्शन, वंदना, चर्चा से सम्यक्त्व पुष्ट होता है। विहार में घंटों साथ रहने से उनकी चर्या, मौन, संयम देखकर श्रद्धा बढ़ती है।
4. साता-वेदनीय कर्म का बंध: श्रावक जब मुनि की वैयावृत्ति करता है — रास्ता साफ करना, आहार के लिए योग्य क्षेत्र देखना, सुरक्षा देना — तो साता वेदनीय और उच्च गोत्र कर्म बंधता है।
5. भव-भ्रमण में कमी: कहा जाता है मुनि संगति से जीव का संसार परिभ्रमण घटता है। क्योंकि विहार में धर्म-श्रवण होता है, वैराग्य बढ़ता है।
6. पुण्यानुबंधी पुण्य: सिर्फ इस भव में नहीं, अगले भवों में भी धर्म सामग्री, उत्तम कुल, आर्य क्षेत्र मिलना सुलभ होता है। |
|
2026-06-12 11:50:25 |
|
| 224329 |
48340398 |
???गुरु भगवान??? |
|
|
12 जून सुविचार |
|
2026-06-12 11:49:31 |
|
| 224330 |
48340398 |
???गुरु भगवान??? |
|
|
12 जून सुविचार |
|
2026-06-12 11:49:31 |
|
| 224328 |
48340398 |
???गुरु भगवान??? |
|
|
|
|
2026-06-12 11:48:41 |
|
| 224327 |
48340398 |
???गुरु भगवान??? |
|
|
|
|
2026-06-12 11:48:40 |
|
| 224326 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
|
|
<a href="https://youtu.be/lfSJJQ07AM0" target="_blank">https://youtu.be/lfSJJQ07AM0</a> घर बैठे ?महा अतिशयकारी चतुर्थकालीन श्री 1008 आदिनाथ भगवान "सांगानेर वाले बाबा"? के दर्शन कर जीवन को धन्य करें दिनांक 12-06-2026
?शांतिधारा नित प्रतिदिन प्राप्त करने हेतु अभी अपना व्हाट्सएप्प
हमारे साथ रजिस्टर्ड कराएं? mobile no 8949317080
Update के लिए
वीडियो को like, subscribe, share our comment जरूर करे
?Thanks For Watching?*
-------------------------------------------- अधिक जानकारी हेतु मंदिर जी के निम्न पदाधिकारियों से भी संपर्क कर सकते है।
Shree Digamber Jain Atishya kshetra Mandir Sanghi ji Bank ICICI SANGANER A/C NO. 678005602098 IFSC CODE ICIC0006780 … सम्पर्क सूत्र
- 9414339842
- 9829017875
(मंदिर कार्यालय)-9351155553 |
|
2026-06-12 11:48:33 |
|