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40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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2026-02-17 06:21:54 |
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40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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2026-02-17 06:21:40 |
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| 6746 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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???????????
*समाधिस्थ गणाचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज* के सुयोग्य शिष्य एवं *चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महामुनिराज* के आज्ञाकारी शिष्य श्रमण रत्न वात्सल्य मूर्ति, मनोज्ञ, निर्यापक, *श्रमणोपाध्याय श्री विभंजनसागर जी मुनिराज ससंघ*एवं श्रमणोपाध्याय श्री विरंजनसागर जी मुनिराज ससंघ* आज जैन श्वेताम्बर मन्दिर दादावाड़ी में विराजमान है और आज अभी प्रातः 06.45 बजे श्री सिद्धक्षेत्र गजपंथा के लिए मंगल विहार हो रहा है आज प्रातः 8.00 बजे मंगल प्रवेश होगा.......
जय जिनेन्द्र...
उपाध्याय श्री ने धार चातुर्मास के पश्चात जिन मन्दिर अतिशय क्षेत्र, सिद्धक्षेत्र की वन्दना की जो की क्रमशः इस प्रकार हैं-
धार, मानतुंगगिरि, अतिशय क्षेत्र आहू पार्श्वनाथ, अनारद, माण्डव, अतिशय क्षेत्र कागदीपुरा, धामनोद, महेश्वर, मंडलेश्वर, श्री नगर, धरगाँव, बड़वाह, सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट, मोरटक्का, सनावद, बैड़ियाँ, खरगोन, सिद्धक्षेत्र ऊन, लोनारा, अंजड़, बड़वानी, सिद्धक्षेत्र बावनगजा, अतिशय क्षेत्र तीर्थकर लेणी, नंदुरबार, अतिशय क्षेत्र भामेर, सिद्धक्षेत्र मांगीतुंगी जी, सटाणा, अतिशय क्षेत्र चाँदवड होते हुए णमोकार तीर्थ तक की वंदना पूर्ण हुई..
अब आगे की
*विहार दिशा- सिद्धक्षेत्र गजपंथा, अंजनगिरि, एलोरा, जटबाड़ा, पैठण, कचनेर एवं जालना की ओर मंगल विहार चलेगा...*
जय जिनेन्द्र
आप भी समय पर दर्शन करके...पुण्यार्जन करें।
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???????????
*उपाध्याय श्री की आज की दिनचर्या*
प्रातः 06.30 बजे भक्ति, स्त्रोत पाठ स्तुति एवं आचार्य वंदना
प्रातः 06.45 बजे श्री सिद्धक्षेत्र गजपंथा के लिए मंगल विहार
प्रातः 08.30 बजे स्वाध्याय
प्रातः 10.00 बजे आहार चर्या
दोपहर: 12.00 बजे से सामायिक, निजी स्वाध्याय एवं मोन साधना
दोपहर: 03.00 बजे प्रवचन सार ग्रंथ का स्वाध्याय
शाम: 06.30 बजे से गुरु भक्ति, संस्कार यात्रा, जिज्ञासा समाधान, प्रश्न मंच एवं आरती
रात्रि: 08.00 बजे से 08.30 बजे तक वैयावृत्ती
*********************************
। l ॐ ।।
सुप्रभातम्।
आज का पंचांग।
♦️तिथि....*अमावस्या*(15)
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?आज पूर्णा तिथि है जो की पंचमी, दसमी और पूर्णमासी व अमावस्या को होती हैं। इसका जो फल है वह इक्छित सिद्धि है। और इन तीनो तिथि में यदि गुरुवार का दिन आ जाये तो इस तिथि में प्रारम्भ किया गया कार्य सिद्ध होता है।और या शनिवार का दिन आ जाये तो मृत्यु योग बनता है मतलब कार्य प्रारम्भ अभी मत करें।
?आज दोपहर 3.00 बजे से दोपहर 4.30 बजे तक राहु काल रहेगा। कोई शुभ कार्य ना करें।
?आज के दिन की शुभ चौघड़िया इन समयो में आप शुभ कार्य कर सकते हैं।
चर: सुबह 09 बजकर 59 मिनिट से सुबह 11 बजकर 29 मिनिट तक
लाभ: सुबह 11 बजकर 29 मिनिट से दोपहर 12 बजकर 59 मिनिट
अमृत: सुबह 12 बजकर 59 मिनिट से दोपहर 02 बजकर 29 मिनिट तक
शुभ: दोपहर 03 बजकर 59 मिनिट से दोपहर 05 बजकर 29 मिनिट तक
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♦️ पक्ष..............कृष्ण
♦️ नक्षत्र..........धनिष्ठा
♦️ योग.............परिघ
♦️ऋतु..............शिशिर
♦️मास..............फाल्गुन
♦️ सूर्य की गति...... उत्तरायण
♦️सूर्योदय.......06.59 a m दिल्ली
♦️सूर्यास्त......06.11 p m दिल्ली
♦️ मंगलवार......17 फरवरी
♦️ ईसवी सन.......2026
♦️ वीर निर्वाण संवत...2552
♦️ विक्रम संवत......2082
???????
???जय जिनेन्द्र ???
गुरूदेव से जुड़ी जानकारियां अब आप यूट्यूब से भी प्राप्त कर सकते हैं इस वर्ष के चातुर्मास की सभी जानकारी अभिषेक, शान्तिधारा, प्रवचन, स्वाध्याय, गुरु भक्ति, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विधान आदि सभी वीडिओ इस लिंक पर देख सकते है....vibhanjansagar ji muniraj channel
<a href="https://youtube.com/playlist?list=PLRjqAhYYD5HTX9ccSOCtDc0kBowokRVvT&si=cG1BRwI52r336yuk" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLRjqAhYYD5HTX9ccSOCtDc0kBowokRVvT&si=cG1BRwI52r336yuk</a>
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*आप भी मुनिराज के मुखारबिन्द से प्रतिदिन की शान्तिधारा को देख सकते है और अन्य भी आहार विहार के सभी कार्यक्रम और कुछ विशेष भी देख सकते है*....
मुनिश्री की सभी जानकारी और जैन धर्म के बारे में नयी-नयी जानकारी प्राप्त करने के लिए आप भी हमारे
whatsapp से जुड़ सकते हैं ।
जुड़ने के लिए अपना नाम और आप कहाँ से हैं ये अपने नम्बर से हमारे इस नंबर पर send करें-09654793524
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2026-02-17 06:21:39 |
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40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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? *सभी को जय जिनेन्द्* ?
एवम् परम पूज्य गुरूदेव विभंजन सागर जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद * आपके परिवार में*
*सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार और स्वास्थ्य की वृद्धि हो*. .......
आज का दिन मंगलमय हो ।।
* शास्त्रों में लिखा है हमे रोज़ एक नियम/त्याग लेना ही चाहिये।
* सभी धर्मो में त्याग /नियम को बहुत महत्व दिया गया है ।
* त्याग / नियम कितना भी छोटा क्यों न हो (सिर्फ 10 मिनिट का भी) बहुत अशुभ कर्म नष्ट होते हैं।
* रोज़ कुछ त्याग करने से बुरे कर्मो की निर्ज़रा (क्षय होना) होती है
* नरक आयु का बंध अगर हमारा हो चुका है तो हम किसी भी तरह के नियम जीवन में नहीं ले पाते है।
17 फरवरी 2026
दिन: मंगलवार
"" आप चाहे तो सिर्फ के लिये त्याग/नियम भी ले सकते हैं या और कोई भी नियम अपने अनुसार ले सकते है। नियम- आज *चीकू* खाने का त्याग है और **श्री कुंथुनाथ चालीसा* पढ़ने का नियम है.....
?? शहर में विराजित साधू संतो के दर्शन की और निरंतराय आहार की भावना रखे और हो सके तो दर्शन करके आहार भी दें।
अगर आप आज 17-02-2026 एक दिन का संकल्प करना चाहते है तो आप "नियम है।!
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*श्री कुन्थुनाथ चालीसा*
दया सिन्धु कुन्थु जिनराज, भव सिंधु तिरने को जहाज।
कामदेव चाकरी महाराज, दया करो हम पर भी आज।।
जय श्री कुन्थु नाथ गुणखान, परम यशस्वी महिमावान ।
हस्तिनापुर नगरी के भूपति, शूरसेन कुरुवंशी अधिपति ।।
महारानी थी श्रीमती उनकी, वर्षा होती थी रतनन की ।
प्रतिपदा वैशाख उजियारी, जन्मे तीर्थंकर बलधारी ।।
गहन भक्ति अपने उर धारे, हस्तिनापुर आये सुर सारे ।
इन्द्र प्रभु को गोद में लेकर, गए सुमेरु हर्षित हो कर ।।
न्हवन करे निर्मल जल लेकर, ताण्डव नृत्य करे भक्ति भर ।
कुंथुनाथ नाम शुभ देकर, इन्द्र करें स्तवन मनोहर ।।
दिव्या वस्त्राभूषण पहनाये, वापिस हस्तिनापुर को आए ।
क्रम क्रम से बढे बालेन्दु सम, यौवन शोभा धारें हितकर ।।
धनु पैतालीस उननत प्रभु तन, उत्तम शोभा धारें अनुपम ।
आयु पिचानवे वर्ष हजार, लक्षण अज धारे हितकार ।।
राज्याभिषेक हुआ विधिपूर्वक, शासन करे सुनीति पूर्वक ।
चक्ररतन शुभ प्राप्त हुआ जब, चक्रवर्ती प्रभु कहलाये तब ।।
एक दिन प्रभु गए उपवन में, शांत मुनि एक देखे मग में ।
इंगित किया तभी अंगुली से, देखो मुनि को कहा मंत्री से ।।
मंत्री ने पूछा जब कारण, किया मोक्षहित मुनिपद धारण ।
कारण करे और स्पष्ट, मुनि पद से ही कर्म हो नष्ट ।।
मंत्री का तो हुआ बहाना, किया वस्तुतः निज कल्याणा ।
चित्त विरक्त हुए विषयों से, तत्व चिंतन करते भावों से ।।
निज सूत को सौपा सब राज, गए सहेतुक वन जिनराज ।
पंचमुष्टि केशलोंच कर, धार लिया पद नगन दिगंबर ।।
तीन दिन बाद गए गजपुर को, धर्ममित्र पड्गाए प्रभु को ।
मौन रहे सौलह वर्षो तक, सहे शीत वर्षा और आतप ।।
स्थिर हुए तिलक तरु जल में, मगन हुए निज ध्यान अटल में ।
आतम में बढ़ गई विशुद्धि, केवल ज्ञान की हो गयी सिद्धि ।।
सूर्यप्रभा सम सोहे आप्त, दिग्मंडल शोभा हुई व्याप्त ।
समोशरण रचना सुखकार, ज्ञान तृप्ति बैठे नर नार ।।
विषय भोग महा विषमय हैं, मन को कर देते तन्मय हैं ।
विष से मरते एक जनम में, भोग विषाक्त मरे भव भव में ।।
क्षण भंगुर मानव का जीवन, विद्युतवत विनसे अगले क्षण ।
सांध्य लालिमा के सद्रश्य ही, यौवन हो जाता हैं अद्रश्य ही ।।
जब तक आतम बुद्धि नहीं हो, तब तक दरश विशुद्धि नहीं हो ।
पहले विजित करो पंचेन्द्रिय, आतमबल से बनो जितेन्द्रिय ।।
भव्य भारती प्रभु की सुनकर, श्रावक जन आनन्दित होकर ।
श्रद्धा से व्रत धारण करते, शुभ भावों का अर्जन करते ।।
शुभायु एक मास की रही जब, शैल सम्मेद पे वास किया तब ।
धारा प्रतिमा योग वहां पर, कटा कर्म बंध सब प्रभुवर ।।
मोक्षकल्याणक करते सुरगण, कूट ज्ञानधार करते पूजन ।
चक्री कामदेव तीर्थंकर, कुंथुनाथ थे परम हितकर ।।
चालीसा जो पढ़े भाव से, स्वयं सिद्ध हो निज स्वाभाव से ।
धर्म चक्र के लिए प्रभु ने, चक्र सुदर्शन तज डाला ।।
इसी भावना ने अरुणा को, किया ज्ञान में मतवाला ।।
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2026-02-17 06:21:37 |
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?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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*कहानी बड़ी सुहानी*
(1) *कहानी*
*प्यास*
एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ।
लड़का दौड़कर आया।
उसने पानी का गिलास भरकर सेठ
की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में?
लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।
सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या?
यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान
दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया।
उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,
जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्करा कर मौन रहा।
जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा।
महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के
पीछे- पीछे गए।
बोले : ऐ लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों?
वह लड़का बोला,
महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी।
वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।
महात्मा ने पूछा -
लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी।
लड़के ने जवाब दिया -
महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता।
वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है।
फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं?
पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है।
वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में
कुछ पाने की तमन्ना होती है,
वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते।
पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती,
वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं।
वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते.
अगर भगवान नहीं है तो उसका ज़िक्र क्यो??
और अगर भगवान है तो फिर फिक्र क्यों ???
:
" मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।
हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता..
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ...
तो बेशक कहना...
जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी
और जो भी पाया वो रब/गुरु की मेहरबानी थी!
खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच मैं
ज्यादा मैं मांगता नहीं और वो कम देता नही....
जन्म अपने हाथ में नहीं ;
मरना अपने हाथ में नहीं ;
पर जीवन को अपने तरीके से जीना अपने हाथ में होता है ;
मस्ती करो मुस्कुराते रहो ;
सबके दिलों में जगह बनाते रहो ।I
जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं
और
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है..
निस्वार्थ भाव से कर्म करें जी
.
****************************************
(2) *कहानी*
*भगवान की मरजी*
एक बादशाह था, वह जब पूजा के लिए मंदिर जाता, तो 2 भिखारी उसके दाएं और बाएं बैठा करते!
दाईं तरफ़ वाला कहता: “ए भगवान! तूने बादशाह को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे!”
बाईं तरफ़ वाला कहता: “ऐ बादशाह! भगवान ने तुझे बहुत कुछ दिया है, मुझे भी कुछ दे दे!”
दाईं तरफ़ वाला भिखारी बाईं तरफ़ वाले से कहता: “भगवान से माँग! निसंदेह वही सबसे अच्छा सुनने वाला है!”
बाईं तरफ़ वाला जवाब देता: “चुप कर बेवक़ूफ़”।
एक बार बादशाह ने अपने वज़ीर को बुलाया और कहा कि मंदिर में दाईं तरफ जो भिखारी बैठता है, वह हमेशा भगवान से मांगता है। तो निसंदेह भगवान उसकी ज़रूर सुनेगा। लेकिन जो बाईं तरफ बैठता है, वह हमेशा मुझसे विनती करता रहता है। तो तुम ऐसा करो कि एक बड़े से बर्तन में खीर भर के उस में अशर्फियाँ डाल दो और वह उसको दे आओ! वज़ीर ने ऐसा ही किया।
अब वह भिखारी मज़े से खीर खाते-खाते दूसरे भिखारी को चिड़ाता हुआ बोला: “हुह… बड़ा आया ‘भगवान देगा। यह देख बादशाह से माँगा, तो मिल गया ना?”
खाने के बाद जब उस का पेट भर गया, तो उस ने खीर से भरा बर्तन उस दूसरे भिखारी को दे दिया।
और
कहा: “ले पकड़… तू भी खाले,बेवक़ूफ़!
अगले दिन जब बादशाह पूजा के लिए मंदिर आया तो देखा कि बाईं तरफ वाला भिखारी तो आज भी वैसे ही बैठा है। लेकिन दाईं तरफ वाला ग़ायब है!
बादशाह ने चौंक कर उससे पूछा: “क्या तुझे खीर से भरा बर्तन नहीं मिला?”
भिखारी: “जी मिला था हुजूर, क्या शानदार खीर थी। मैंने ख़ूब पेट भर कर खायी!”
बादशाह: फिर?
भिखारी: “फ़िर वह जो दूसरा भिखारी यहाँ बैठता है, मैंने उसको दे दी।
बेवक़ूफ़ हमेशा कहता रहता था: ‘भगवान देगा, भगवान देगा!’
बादशाह मुस्कुरा कर बोला: “बेशक, भगवान ने उसे दे ही दिया!”
इसी तरह हमें भी उस भगवान से ही विनती करनी चाहिए। वही हमें देने वाला है, दुनिया के जीव तो एक जरिया है। बाकी उसकी मर्जी से ही मिलता है। इसलिए उस कुल मालिक को हमेशा याद रखो। हर रोज भजन बंदगी सिमरन करो, तब जाकर हमारा परमार्थ और स्वार्थ दोनों बन पाएंगे। उस मालिक को याद करते रहो, वह सब जानता है। उस से कुछ नही छिपा है।
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(3) *कहानी*
*आस्था का चमत्कार*
✍️मासूम गुड़िया बिस्तर से उठी और अपना गुल्लक ढूँढने लगी…
अपनी तोतली आवाज़ में उसने माँ से पूछा, “माँ, मेला गुल्लक कहाँ गया?”
माँ ने आलमारी से गुल्लक उतार कर दे दिया और अपने काम में व्यस्त हो गयी.
मौका देखकर गुड़िया चुपके से बाहर निकली और पड़ोस के मंदिर जा पहुंची.
सुबह-सुबह मंदिर में भीड़ अधिक थी…. हाथ में गुल्लक थामे वह किसी तरह से बाल-गोपाल के सामने पहुंची और पंडित जी से कहा, “बाबा, जला कान्हा को बाहल बुलाना!”
“अरे बेटा कान्हा अभी सो रहे हैं… बाद में आना..”,पंडित जी ने मजाक में कहा.
“कान्हा उठो.. जल्दी कलो … बाहल आओ…”, गुड़िया चिल्ला कर बोली.
हर कोई गुड़िया को देखने लगा.
“पंडित जी, प्लीज… प्लीज कान्हा को उठा दीजिये…”
“क्या चाहिए तुमको कान्हा से?”
“मुझे चमत्काल चाहिए… और इसके बदले में मैं कान्हा को अपना ये गुल्लक भी दूँगी… इसमें 100 लूपये हैं …कान्हा इससे अपने लिए माखन खरीद सकता है. प्लीज उठाइए न उसे…इतने देल तक कोई छोता है क्या???”
“ चमत्कार!, किसने कहा कि कान्हा तुम्हे चमत्कार दे सकता है?”
“मम्मा-पापा बात कल लहे थे कि भैया के ऑपरेछन के लिए 10 लाख लूपये चाहिए… पल हम पहले ही अपना गहना… जमीन सब बेच चुके हैं…और नाते-रिश्तेदारों ने भी फ़ोन उठाना छोड़ दिया है…अब कान्हा का कोई चमत्काल ही भैया को बचा सकता है…”
पास ही खड़ा एक व्यक्ति गुड़िया की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था, उसने पूछा, “बेटा क्या हुआ है तुम्हारे भैया को?”
“ भैया को ब्लेन ट्यूमल है…”
“ब्रेन ट्यूमर???”
“जी अंकल, बहुत खतल्नाक बिमाली होती है…”
व्यक्ति मुस्कुराते हुए बाल-गोपाल की मूर्ती निहारने लगा…उसकी आँखों में श्रद्धा के आंसूं बह निकले…रुंधे गले से वह बोला, “अच्छा-अच्छा तो तुम वही लड़की हो… कान्हा ने बताया था कि तुम आज सुबह यहाँ मिलोगी… मेरा नाम ही चमत्कार है… लाओ ये गुल्लक मुझे दे दो और मुझे अपने घर ले चलो…”
वह व्यक्ति लन्दन का एक प्रसिद्द न्यूरो सर्जन था और अपने माँ-बाप से मिलने भारत आया हुआ था. उसने गुल्लक में पड़े मात्र सौ रुपयों में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कर दिया और गुड़िया के भैया को ठीक कर दिया.??
✍️सचमुच, अगर आपमें अटूट श्रद्धा हो और आप कोई नेक काम करना चाहते हैं तो कृष्णा किसी न किसी रूप में आपकी मदद ज़रूर करते हैं!
यही है आस्था का चमत्कार!??
✍️मित्रों, *भले ये एक काल्पनिक कहानी हो लेकिन कई बार सत्य कल्पना से भी परे होता है और दुनिया में ऐसी हजारों-लाखों घटनाएं हैं जहाँ असंभव सी लगने वाले चीजें भी विश्वास के दम पर संभव बन जाती हैं. इसलिए, ईश्वर में यकीन रखते हुए अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत करिए… क्या पता एक दिन आपके लिए कोई चमत्कार हो जाए या आप किसी और के लिए चमत्कार कर दें*।
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(4) *कहानी*
*एक मर्मस्पर्शी कहानी*
*बुढापा या अकेलापन*
एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, "ज़ल्दी करो, मरे पास टाईम नहीं है।" कह कर कमरे से बाह निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी *माँ* पर उसकी नज़र पड़ी।
कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, "शालू, तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्य चाहिए?
शालिनी बोली, "नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े....... इसमें पूछने वाली क्या बात है?
यह बात नहीं है शालू...... माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो... औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।
अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी शालू ...और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।
सूरज माँ के पास जाकर बोला, "माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो..
माँ बीच में ही बोल पड़ी, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।"
सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए.....
सूरज के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, "ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।" कहकर सूरज की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सूरज को थमा दी।......
सूरज ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, "देखा शालू, माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।"
अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर शालिनी कार से बाहर निकल गयी।
पूरी ख़रीदारी करने के बाद शालिनी बोली, "अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।"
अरे शालू, तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।
देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है।
बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ..... पता नहीं क्या - क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो *श्रवण कुमार*, कहते हुए शालिनी गुस्से से सूरज की ओर देखने लगी।
पर ये क्या? सूरज की आँखों में आँसू........ और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था..... पूरा शरीर काँप रहा था।
शालिनी बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सूरज के हाथ से पर्ची झपट ली....
हैरान थी शालिनी भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे.....
*पर्ची में लिखा था....*
"बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो...... तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो *फ़ुरसत के कुछ पल* मेरे लिए लेते आना.... ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सूरज, मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल - पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर.... जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्य है..... पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सूरज।...... तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।.... बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ.... कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर....और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ.....
पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते - पढ़ते शालिनी फफक-फफक कर रो पड़ी.....
*ऐसी ही होती हैं माँ.....*
दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।...उसकी तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।।
*कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए*
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2026-02-17 06:21:35 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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? *सभी को जय जिनेन्द्* ?
एवम् परम पूज्य गुरूदेव विभंजन सागर जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद * आपके परिवार में*
*सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार और स्वास्थ्य की वृद्धि हो*. .......
आज का दिन मंगलमय हो ।।
* शास्त्रों में लिखा है हमे रोज़ एक नियम/त्याग लेना ही चाहिये।
* सभी धर्मो में त्याग /नियम को बहुत महत्व दिया गया है ।
* त्याग / नियम कितना भी छोटा क्यों न हो (सिर्फ 10 मिनिट का भी) बहुत अशुभ कर्म नष्ट होते हैं।
* रोज़ कुछ त्याग करने से बुरे कर्मो की निर्ज़रा (क्षय होना) होती है
* नरक आयु का बंध अगर हमारा हो चुका है तो हम किसी भी तरह के नियम जीवन में नहीं ले पाते है।
17 फरवरी 2026
दिन: मंगलवार
"" आप चाहे तो सिर्फ के लिये त्याग/नियम भी ले सकते हैं या और कोई भी नियम अपने अनुसार ले सकते है। नियम- आज *चीकू* खाने का त्याग है और **श्री कुंथुनाथ चालीसा* पढ़ने का नियम है.....
?? शहर में विराजित साधू संतो के दर्शन की और निरंतराय आहार की भावना रखे और हो सके तो दर्शन करके आहार भी दें।
अगर आप आज 17-02-2026 एक दिन का संकल्प करना चाहते है तो आप "नियम है।!
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*श्री कुन्थुनाथ चालीसा*
दया सिन्धु कुन्थु जिनराज, भव सिंधु तिरने को जहाज।
कामदेव चाकरी महाराज, दया करो हम पर भी आज।।
जय श्री कुन्थु नाथ गुणखान, परम यशस्वी महिमावान ।
हस्तिनापुर नगरी के भूपति, शूरसेन कुरुवंशी अधिपति ।।
महारानी थी श्रीमती उनकी, वर्षा होती थी रतनन की ।
प्रतिपदा वैशाख उजियारी, जन्मे तीर्थंकर बलधारी ।।
गहन भक्ति अपने उर धारे, हस्तिनापुर आये सुर सारे ।
इन्द्र प्रभु को गोद में लेकर, गए सुमेरु हर्षित हो कर ।।
न्हवन करे निर्मल जल लेकर, ताण्डव नृत्य करे भक्ति भर ।
कुंथुनाथ नाम शुभ देकर, इन्द्र करें स्तवन मनोहर ।।
दिव्या वस्त्राभूषण पहनाये, वापिस हस्तिनापुर को आए ।
क्रम क्रम से बढे बालेन्दु सम, यौवन शोभा धारें हितकर ।।
धनु पैतालीस उननत प्रभु तन, उत्तम शोभा धारें अनुपम ।
आयु पिचानवे वर्ष हजार, लक्षण अज धारे हितकार ।।
राज्याभिषेक हुआ विधिपूर्वक, शासन करे सुनीति पूर्वक ।
चक्ररतन शुभ प्राप्त हुआ जब, चक्रवर्ती प्रभु कहलाये तब ।।
एक दिन प्रभु गए उपवन में, शांत मुनि एक देखे मग में ।
इंगित किया तभी अंगुली से, देखो मुनि को कहा मंत्री से ।।
मंत्री ने पूछा जब कारण, किया मोक्षहित मुनिपद धारण ।
कारण करे और स्पष्ट, मुनि पद से ही कर्म हो नष्ट ।।
मंत्री का तो हुआ बहाना, किया वस्तुतः निज कल्याणा ।
चित्त विरक्त हुए विषयों से, तत्व चिंतन करते भावों से ।।
निज सूत को सौपा सब राज, गए सहेतुक वन जिनराज ।
पंचमुष्टि केशलोंच कर, धार लिया पद नगन दिगंबर ।।
तीन दिन बाद गए गजपुर को, धर्ममित्र पड्गाए प्रभु को ।
मौन रहे सौलह वर्षो तक, सहे शीत वर्षा और आतप ।।
स्थिर हुए तिलक तरु जल में, मगन हुए निज ध्यान अटल में ।
आतम में बढ़ गई विशुद्धि, केवल ज्ञान की हो गयी सिद्धि ।।
सूर्यप्रभा सम सोहे आप्त, दिग्मंडल शोभा हुई व्याप्त ।
समोशरण रचना सुखकार, ज्ञान तृप्ति बैठे नर नार ।।
विषय भोग महा विषमय हैं, मन को कर देते तन्मय हैं ।
विष से मरते एक जनम में, भोग विषाक्त मरे भव भव में ।।
क्षण भंगुर मानव का जीवन, विद्युतवत विनसे अगले क्षण ।
सांध्य लालिमा के सद्रश्य ही, यौवन हो जाता हैं अद्रश्य ही ।।
जब तक आतम बुद्धि नहीं हो, तब तक दरश विशुद्धि नहीं हो ।
पहले विजित करो पंचेन्द्रिय, आतमबल से बनो जितेन्द्रिय ।।
भव्य भारती प्रभु की सुनकर, श्रावक जन आनन्दित होकर ।
श्रद्धा से व्रत धारण करते, शुभ भावों का अर्जन करते ।।
शुभायु एक मास की रही जब, शैल सम्मेद पे वास किया तब ।
धारा प्रतिमा योग वहां पर, कटा कर्म बंध सब प्रभुवर ।।
मोक्षकल्याणक करते सुरगण, कूट ज्ञानधार करते पूजन ।
चक्री कामदेव तीर्थंकर, कुंथुनाथ थे परम हितकर ।।
चालीसा जो पढ़े भाव से, स्वयं सिद्ध हो निज स्वाभाव से ।
धर्म चक्र के लिए प्रभु ने, चक्र सुदर्शन तज डाला ।।
इसी भावना ने अरुणा को, किया ज्ञान में मतवाला ।।
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2026-02-17 06:20:34 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*कहानी बड़ी सुहानी*
(1) *कहानी*
*प्यास*
एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ।
लड़का दौड़कर आया।
उसने पानी का गिलास भरकर सेठ
की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में?
लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।
सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या?
यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान
दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया।
उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,
जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्करा कर मौन रहा।
जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा।
महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के
पीछे- पीछे गए।
बोले : ऐ लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों?
वह लड़का बोला,
महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी।
वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।
महात्मा ने पूछा -
लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी।
लड़के ने जवाब दिया -
महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता।
वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है।
फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं?
पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है।
वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में
कुछ पाने की तमन्ना होती है,
वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते।
पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती,
वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं।
वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते.
अगर भगवान नहीं है तो उसका ज़िक्र क्यो??
और अगर भगवान है तो फिर फिक्र क्यों ???
:
" मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।
हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता..
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ...
तो बेशक कहना...
जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी
और जो भी पाया वो रब/गुरु की मेहरबानी थी!
खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच मैं
ज्यादा मैं मांगता नहीं और वो कम देता नही....
जन्म अपने हाथ में नहीं ;
मरना अपने हाथ में नहीं ;
पर जीवन को अपने तरीके से जीना अपने हाथ में होता है ;
मस्ती करो मुस्कुराते रहो ;
सबके दिलों में जगह बनाते रहो ।I
जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं
और
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है..
निस्वार्थ भाव से कर्म करें जी
.
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(2) *कहानी*
*भगवान की मरजी*
एक बादशाह था, वह जब पूजा के लिए मंदिर जाता, तो 2 भिखारी उसके दाएं और बाएं बैठा करते!
दाईं तरफ़ वाला कहता: “ए भगवान! तूने बादशाह को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे!”
बाईं तरफ़ वाला कहता: “ऐ बादशाह! भगवान ने तुझे बहुत कुछ दिया है, मुझे भी कुछ दे दे!”
दाईं तरफ़ वाला भिखारी बाईं तरफ़ वाले से कहता: “भगवान से माँग! निसंदेह वही सबसे अच्छा सुनने वाला है!”
बाईं तरफ़ वाला जवाब देता: “चुप कर बेवक़ूफ़”।
एक बार बादशाह ने अपने वज़ीर को बुलाया और कहा कि मंदिर में दाईं तरफ जो भिखारी बैठता है, वह हमेशा भगवान से मांगता है। तो निसंदेह भगवान उसकी ज़रूर सुनेगा। लेकिन जो बाईं तरफ बैठता है, वह हमेशा मुझसे विनती करता रहता है। तो तुम ऐसा करो कि एक बड़े से बर्तन में खीर भर के उस में अशर्फियाँ डाल दो और वह उसको दे आओ! वज़ीर ने ऐसा ही किया।
अब वह भिखारी मज़े से खीर खाते-खाते दूसरे भिखारी को चिड़ाता हुआ बोला: “हुह… बड़ा आया ‘भगवान देगा। यह देख बादशाह से माँगा, तो मिल गया ना?”
खाने के बाद जब उस का पेट भर गया, तो उस ने खीर से भरा बर्तन उस दूसरे भिखारी को दे दिया।
और
कहा: “ले पकड़… तू भी खाले,बेवक़ूफ़!
अगले दिन जब बादशाह पूजा के लिए मंदिर आया तो देखा कि बाईं तरफ वाला भिखारी तो आज भी वैसे ही बैठा है। लेकिन दाईं तरफ वाला ग़ायब है!
बादशाह ने चौंक कर उससे पूछा: “क्या तुझे खीर से भरा बर्तन नहीं मिला?”
भिखारी: “जी मिला था हुजूर, क्या शानदार खीर थी। मैंने ख़ूब पेट भर कर खायी!”
बादशाह: फिर?
भिखारी: “फ़िर वह जो दूसरा भिखारी यहाँ बैठता है, मैंने उसको दे दी।
बेवक़ूफ़ हमेशा कहता रहता था: ‘भगवान देगा, भगवान देगा!’
बादशाह मुस्कुरा कर बोला: “बेशक, भगवान ने उसे दे ही दिया!”
इसी तरह हमें भी उस भगवान से ही विनती करनी चाहिए। वही हमें देने वाला है, दुनिया के जीव तो एक जरिया है। बाकी उसकी मर्जी से ही मिलता है। इसलिए उस कुल मालिक को हमेशा याद रखो। हर रोज भजन बंदगी सिमरन करो, तब जाकर हमारा परमार्थ और स्वार्थ दोनों बन पाएंगे। उस मालिक को याद करते रहो, वह सब जानता है। उस से कुछ नही छिपा है।
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(3) *कहानी*
*आस्था का चमत्कार*
✍️मासूम गुड़िया बिस्तर से उठी और अपना गुल्लक ढूँढने लगी…
अपनी तोतली आवाज़ में उसने माँ से पूछा, “माँ, मेला गुल्लक कहाँ गया?”
माँ ने आलमारी से गुल्लक उतार कर दे दिया और अपने काम में व्यस्त हो गयी.
मौका देखकर गुड़िया चुपके से बाहर निकली और पड़ोस के मंदिर जा पहुंची.
सुबह-सुबह मंदिर में भीड़ अधिक थी…. हाथ में गुल्लक थामे वह किसी तरह से बाल-गोपाल के सामने पहुंची और पंडित जी से कहा, “बाबा, जला कान्हा को बाहल बुलाना!”
“अरे बेटा कान्हा अभी सो रहे हैं… बाद में आना..”,पंडित जी ने मजाक में कहा.
“कान्हा उठो.. जल्दी कलो … बाहल आओ…”, गुड़िया चिल्ला कर बोली.
हर कोई गुड़िया को देखने लगा.
“पंडित जी, प्लीज… प्लीज कान्हा को उठा दीजिये…”
“क्या चाहिए तुमको कान्हा से?”
“मुझे चमत्काल चाहिए… और इसके बदले में मैं कान्हा को अपना ये गुल्लक भी दूँगी… इसमें 100 लूपये हैं …कान्हा इससे अपने लिए माखन खरीद सकता है. प्लीज उठाइए न उसे…इतने देल तक कोई छोता है क्या???”
“ चमत्कार!, किसने कहा कि कान्हा तुम्हे चमत्कार दे सकता है?”
“मम्मा-पापा बात कल लहे थे कि भैया के ऑपरेछन के लिए 10 लाख लूपये चाहिए… पल हम पहले ही अपना गहना… जमीन सब बेच चुके हैं…और नाते-रिश्तेदारों ने भी फ़ोन उठाना छोड़ दिया है…अब कान्हा का कोई चमत्काल ही भैया को बचा सकता है…”
पास ही खड़ा एक व्यक्ति गुड़िया की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था, उसने पूछा, “बेटा क्या हुआ है तुम्हारे भैया को?”
“ भैया को ब्लेन ट्यूमल है…”
“ब्रेन ट्यूमर???”
“जी अंकल, बहुत खतल्नाक बिमाली होती है…”
व्यक्ति मुस्कुराते हुए बाल-गोपाल की मूर्ती निहारने लगा…उसकी आँखों में श्रद्धा के आंसूं बह निकले…रुंधे गले से वह बोला, “अच्छा-अच्छा तो तुम वही लड़की हो… कान्हा ने बताया था कि तुम आज सुबह यहाँ मिलोगी… मेरा नाम ही चमत्कार है… लाओ ये गुल्लक मुझे दे दो और मुझे अपने घर ले चलो…”
वह व्यक्ति लन्दन का एक प्रसिद्द न्यूरो सर्जन था और अपने माँ-बाप से मिलने भारत आया हुआ था. उसने गुल्लक में पड़े मात्र सौ रुपयों में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कर दिया और गुड़िया के भैया को ठीक कर दिया.??
✍️सचमुच, अगर आपमें अटूट श्रद्धा हो और आप कोई नेक काम करना चाहते हैं तो कृष्णा किसी न किसी रूप में आपकी मदद ज़रूर करते हैं!
यही है आस्था का चमत्कार!??
✍️मित्रों, *भले ये एक काल्पनिक कहानी हो लेकिन कई बार सत्य कल्पना से भी परे होता है और दुनिया में ऐसी हजारों-लाखों घटनाएं हैं जहाँ असंभव सी लगने वाले चीजें भी विश्वास के दम पर संभव बन जाती हैं. इसलिए, ईश्वर में यकीन रखते हुए अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत करिए… क्या पता एक दिन आपके लिए कोई चमत्कार हो जाए या आप किसी और के लिए चमत्कार कर दें*।
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(4) *कहानी*
*एक मर्मस्पर्शी कहानी*
*बुढापा या अकेलापन*
एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, "ज़ल्दी करो, मरे पास टाईम नहीं है।" कह कर कमरे से बाह निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी *माँ* पर उसकी नज़र पड़ी।
कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, "शालू, तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्य चाहिए?
शालिनी बोली, "नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े....... इसमें पूछने वाली क्या बात है?
यह बात नहीं है शालू...... माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो... औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।
अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी शालू ...और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।
सूरज माँ के पास जाकर बोला, "माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो..
माँ बीच में ही बोल पड़ी, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।"
सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए.....
सूरज के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, "ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।" कहकर सूरज की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सूरज को थमा दी।......
सूरज ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, "देखा शालू, माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।"
अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर शालिनी कार से बाहर निकल गयी।
पूरी ख़रीदारी करने के बाद शालिनी बोली, "अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।"
अरे शालू, तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।
देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है।
बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ..... पता नहीं क्या - क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो *श्रवण कुमार*, कहते हुए शालिनी गुस्से से सूरज की ओर देखने लगी।
पर ये क्या? सूरज की आँखों में आँसू........ और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था..... पूरा शरीर काँप रहा था।
शालिनी बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सूरज के हाथ से पर्ची झपट ली....
हैरान थी शालिनी भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे.....
*पर्ची में लिखा था....*
"बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो...... तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो *फ़ुरसत के कुछ पल* मेरे लिए लेते आना.... ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सूरज, मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल - पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर.... जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्य है..... पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सूरज।...... तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।.... बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ.... कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर....और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ.....
पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते - पढ़ते शालिनी फफक-फफक कर रो पड़ी.....
*ऐसी ही होती हैं माँ.....*
दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।...उसकी तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।।
*कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए*
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2026-02-17 06:20:28 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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>>>>>>>>>>> जयपुर < |
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2026-02-17 06:12:39 |
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40449690 |
गुरु आर्जव वाणी New 1️⃣ |
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*आज का सुविचार*
? *आर्जव वचनामृत* ?
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