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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 233524 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-16 05:48:25 |
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| 233525 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-16 05:48:25 |
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| 233522 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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2026-06-16 05:45:44 |
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| 233523 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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2026-06-16 05:45:44 |
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| 233521 |
40649233 |
Mumukshu mandal?♂️ |
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*श्रोता के तीन प्रकार -*
?
*1️⃣-पत्थर की तरह श्रोता*
*2️⃣-कपड़ा की तरह श्रोता*
*3️⃣-शक्कर की तरह श्रोता*
*तीनों पानी में डूबते हैं।*
*पर तीनों के डूबने में अंतर बहुत है।*
?
1️⃣
*पत्थर जल में जब तक डूबा है तब तक गीला रहता, बाहर आते ही सूख जाता है। ऐसे ही जिनवाणी सुनते समय गीले परिणाम रहते हैं और स्वाध्याय सभा से बाहर आते ही तत्वज्ञान का कोई असर /प्रभाव जीवन में नहीं रहता।*
?
2️⃣
*कपड़ा जब तक जल में डूबा है तब तक गीला रहता है और बाहर निकलने पर थोड़ी देर तक गीला रहता है और (विषय-कषायों की) गर्मी लगते ही (तत्वज्ञान रूपी) कपड़ा सूख जाता है।*
*ऐसे ही जिनवाणी श्रवण के कुछ समय बाद तक जिनवाणी का प्रभाव जीवन में रहता है बाद में विषय -भोगों की संगति लगते ही परिणाम मलिन होने लगते हैं।*
?
3️⃣
*जैसे शक्कर पानी में जाते ही घुल-मिल जाती है, एकमेक हो जाती है।*
*हम सभी जिनवाणी के मर्म को शक्कर की तरह ज्ञान जल में डूबे रहते हुए चैतन्य की (अनुभूति के आनंद की) मिठास का स्वाद लेते रहें। तभी हम जिनवाणी के सच्चे और अच्छे श्रोता हैं। शास्त्र को पढ़ना -रटना लक्ष्य नहीं होना चाहिए शास्त्र को नयविवक्षा से भली-भांति पढ़कर स्वयं को पहचान कर स्वयं की अनुभूति करना लक्ष्य होना चाहिए। आगम -परमागम को श्रद्धा पूर्वक पढ़ें, सुनें और गुनें फिर आत्मसात कर ज्ञानामृत का रसपान मनोयोग से करें। स्वाध्याय का आनंद ही अलौकिक और अभूतपूर्व है।*
?
*डॉ अशोक जैन गोयल दिल्ली*
? |
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2026-06-16 05:45:01 |
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| 233520 |
40649233 |
Mumukshu mandal?♂️ |
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*श्रोता के तीन प्रकार -*
?
*1️⃣-पत्थर की तरह श्रोता*
*2️⃣-कपड़ा की तरह श्रोता*
*3️⃣-शक्कर की तरह श्रोता*
*तीनों पानी में डूबते हैं।*
*पर तीनों के डूबने में अंतर बहुत है।*
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1️⃣
*पत्थर जल में जब तक डूबा है तब तक गीला रहता, बाहर आते ही सूख जाता है। ऐसे ही जिनवाणी सुनते समय गीले परिणाम रहते हैं और स्वाध्याय सभा से बाहर आते ही तत्वज्ञान का कोई असर /प्रभाव जीवन में नहीं रहता।*
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2️⃣
*कपड़ा जब तक जल में डूबा है तब तक गीला रहता है और बाहर निकलने पर थोड़ी देर तक गीला रहता है और (विषय-कषायों की) गर्मी लगते ही (तत्वज्ञान रूपी) कपड़ा सूख जाता है।*
*ऐसे ही जिनवाणी श्रवण के कुछ समय बाद तक जिनवाणी का प्रभाव जीवन में रहता है बाद में विषय -भोगों की संगति लगते ही परिणाम मलिन होने लगते हैं।*
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3️⃣
*जैसे शक्कर पानी में जाते ही घुल-मिल जाती है, एकमेक हो जाती है।*
*हम सभी जिनवाणी के मर्म को शक्कर की तरह ज्ञान जल में डूबे रहते हुए चैतन्य की (अनुभूति के आनंद की) मिठास का स्वाद लेते रहें। तभी हम जिनवाणी के सच्चे और अच्छे श्रोता हैं। शास्त्र को पढ़ना -रटना लक्ष्य नहीं होना चाहिए शास्त्र को नयविवक्षा से भली-भांति पढ़कर स्वयं को पहचान कर स्वयं की अनुभूति करना लक्ष्य होना चाहिए। आगम -परमागम को श्रद्धा पूर्वक पढ़ें, सुनें और गुनें फिर आत्मसात कर ज्ञानामृत का रसपान मनोयोग से करें। स्वाध्याय का आनंद ही अलौकिक और अभूतपूर्व है।*
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*डॉ अशोक जैन गोयल दिल्ली*
? |
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2026-06-16 05:45:00 |
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| 233519 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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जय जिनेन्द्र जी!!
दिनाँक: १६/०६/२०२६
तिथि : ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया, २५५२
दिन : मंगलवार
कल्याणक:
आज *टॉफी, चॉकलेट खाने का त्याग और मेरी भावना पढ़ने का नियम* रखें।
कल का संभावित नियम - पाव-भाजी खाने का त्याग
अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का
स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी।
?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? |
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2026-06-16 05:44:55 |
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| 233518 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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जय जिनेन्द्र जी!!
दिनाँक: १६/०६/२०२६
तिथि : ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया, २५५२
दिन : मंगलवार
कल्याणक:
आज *टॉफी, चॉकलेट खाने का त्याग और मेरी भावना पढ़ने का नियम* रखें।
कल का संभावित नियम - पाव-भाजी खाने का त्याग
अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का
स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी।
?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? |
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2026-06-16 05:44:54 |
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| 233516 |
40449670 |
SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE |
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2026-06-16 05:44:49 |
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| 233517 |
40449670 |
SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE |
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2026-06-16 05:44:49 |
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